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भीषण आग के बीच पुलिस का साहसिक रेस्क्यू, आठ लोगों को सुरक्षित निकाला

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बांसी के सर्राफा बाजार में मची अफरा-तफरी, संकरी गली बनी चुनौती

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दो गैस सिलेंडरों में हुआ विस्फोट, लकड़ी की छत भी क्षतिग्रस्त—फायर सर्विस और पुलिस ने संभाला मोर्चा


सिद्धार्थनगर के बांसी कोतवाली क्षेत्र के सीएस मोहल्ला/सर्राफा बाजार में स्वतंत्रता दिवस के दिन एक भवन के निचले तल पर भीषण आग लगने से हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही बांसी पुलिस और फायर सर्विस टीम मौके पर पहुंची। आग की विकराल स्थिति और संकरे रास्ते के बीच पुलिसकर्मियों ने जोखिम उठाकर भवन में फंसे आठ लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। इनमें एक व्यक्ति पक्षाघात से पीड़ित बताया गया, जिसे विशेष प्रयास कर बाहर निकालने के बाद उपचार के लिए बांसी अस्पताल भेजा गया।

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पूरी खबर

बांसी, सिद्धार्थनगर। स्वतंत्रता दिवस के दिन बांसी नगर में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब थाना कोतवाली बांसी क्षेत्र के सर्राफा बाजार स्थित एक भवन के निचले तल में अचानक भीषण आग लग गई। आग की सूचना मिलते ही बांसी पुलिस ने बिना समय गंवाए मोर्चा संभाला और फायर सर्विस टीम को भी सूचना दी।

सूचना मिलते ही प्रभारी निरीक्षक बांसी मृत्युंजय पाठक पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। वहीं राहत एवं बचाव कार्य के लिए अपर पुलिस अधीक्षक प्रशान्त कुमार प्रसाद, क्षेत्राधिकारी सदर विश्वजीत सौरयान (IPS) और क्षेत्राधिकारी बांसी शुबेन्दु सिंह भी मौके पर पहुंचे और बचाव अभियान की निगरानी की।

संकरी गली बनी चुनौती, फिर भी नहीं रुका रेस्क्यू

घटनास्थल का रास्ता संकरा होने के कारण बड़ी फायर सर्विस गाड़ी को माधव मेला ग्राउंड में खड़ा करना पड़ा, जबकि छोटी फायर सर्विस गाड़ी को घटनास्थल के नजदीक ले जाकर आग बुझाने की कार्रवाई शुरू की गई।

इसी दौरान आग की तीव्रता के बीच भवन में रखे दो गैस सिलेंडरों में विस्फोट हुआ और लकड़ी की छत भी क्षतिग्रस्त हो गई। स्थिति बेहद जोखिमपूर्ण होने के बावजूद पुलिसकर्मियों ने बचाव अभियान जारी रखा।

पुलिस के अनुसार, भवन के अंदर फंसे कुल आठ लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। इनमें एक व्यक्ति पक्षाघात/फालिज से पीड़ित बताया गया, जिसे विशेष प्रयास कर सुरक्षित बाहर निकालने के बाद तत्काल उपचार के लिए बांसी अस्पताल भेजा गया।

आग पर पाया गया काबू, टली संभावित बड़ी जनहानि

पुलिस और फायर सर्विस की संयुक्त कार्रवाई के बाद आग को नियंत्रित किया गया और उसे आसपास के क्षेत्र में फैलने से रोकने का प्रयास सफल रहा। संकरी जगह, आग की तीव्रता और सिलेंडर विस्फोट जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बीच लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना राहत एवं बचाव अभियान का सबसे महत्वपूर्ण पहलू रहा।

पुलिस की ओर से जारी प्रेस नोट के अनुसार, त्वरित कार्रवाई, साहस और मानवीय संवेदनशीलता के साथ किए गए रेस्क्यू से संभावित बड़ी जनहानि को समय रहते टाला जा सका।

सारांश

आग लगने की सूचना से लेकर लोगों के सुरक्षित रेस्क्यू और आग पर नियंत्रण तक बांसी पुलिस तथा फायर सर्विस की टीम ने तत्काल कार्रवाई की। आठ लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जाना इस पूरे घटनाक्रम का सबसे अहम पक्ष रहा।

संपादकीय टिप्पणी

आग जैसी आपदा में शुरुआती कुछ मिनट बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसे समय पर सूचना मिलने के बाद त्वरित पुलिस और अग्निशमन कार्रवाई लोगों की सुरक्षा में निर्णायक भूमिका निभा सकती है। बांसी की घटना में भी संकरी गली, आग की तीव्रता और सिलेंडर विस्फोट जैसी मुश्किल परिस्थितियां सामने आईं।

प्रेस नोट में पुलिस की ओर से बताए गए घटनाक्रम के अनुसार, पुलिसकर्मियों ने जोखिमपूर्ण परिस्थितियों में भवन के भीतर प्रवेश कर फंसे लोगों को बाहर निकाला, जिसमें एक बीमार व्यक्ति को सुरक्षित निकालना विशेष चुनौती थी। इस कार्रवाई में पुलिस और फायर सर्विस के बीच समन्वय भी महत्वपूर्ण रहा।

ऐसी घटनाएं यह संदेश देती हैं कि आपदा के समय घबराहट के बजाय त्वरित सूचना, समन्वित बचाव और प्रशिक्षित प्रतिक्रिया बेहद जरूरी है। साथ ही आम लोगों से भी अपील है कि आग लगने की स्थिति में भीड़ लगाने के बजाय बचाव दल को रास्ता दें और तत्काल संबंधित आपात सेवा को सूचना दें।

बांसी की इस घटना में सबसे बड़ी राहत यही रही कि आग की भयावह स्थिति के बावजूद आठ लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया और संभावित जनहानि को टालने में सफलता मिली।

 

मदरसा अबू उबैदा में देशभक्ति का रंग, तिरंगा लेकर बच्चों ने निकाली प्रभात फेरी

Screenshot 20260815 093355मधुबनी में स्वतंत्रता दिवस पर दिखा राष्ट्रप्रेम का सुंदर दृश्य

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हाथों में तिरंगा, जुबां पर भारत माता की जय—बच्चों के जयघोष से गूंज उठा वातावरण


सिद्धार्थनगर के मधुबनी स्थित मदरसा अबू उबैदा में स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्रभक्ति और उत्साह से सराबोर कार्यक्रम आयोजित किया गया। विद्यालय के बच्चों और शिक्षकों ने हाथों में तिरंगा लेकर प्रभात फेरी निकाली। भारत माता की जय और देशभक्ति के नारों से वातावरण गूंज उठा। प्रभात फेरी के बाद विद्यालय परिसर में ध्वजारोहण कर तिरंगे को सलामी दी गई तथा अमर शहीदों को श्रद्धापूर्वक याद किया गया।

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पूरी खबर

मधुबनी, सिद्धार्थनगर। आजादी के पर्व 15 अगस्त पर मदरसा अबू उबैदा, मधुबनी में सुबह से ही देशभक्ति का उत्साह देखने को मिला। विद्यालय के बच्चों, शिक्षकों और प्रबंधन ने स्वतंत्रता दिवस को पूरे उत्साह और गरिमा के साथ मनाया।

कार्यक्रम की शुरुआत बच्चों द्वारा निकाली गई तिरंगा प्रभात फेरी से हुई। बच्चे हाथों में राष्ट्रीय ध्वज लेकर विद्यालय से निकले और अपने गांव-कस्बे के रास्तों से होते हुए देशभक्ति के नारों के साथ आगे बढ़े। भारत माता की जय के जयघोष से पूरा वातावरण राष्ट्रभक्ति के रंग में रंगा नजर आया। बच्चों के साथ शिक्षक भी कदम से कदम मिलाकर चलते दिखाई दिए।

प्रभात फेरी के दौरान बच्चों में गजब का उत्साह और उमंग दिखाई दी। हाथों में लहराता तिरंगा और देशभक्ति के बुलंद नारों ने लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। यह दृश्य बच्चों में राष्ट्रप्रेम और राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान की भावना को दर्शाता नजर आया।

प्रभात फेरी विद्यालय परिसर में पहुंचने के बाद ध्वजारोहण कार्यक्रम आयोजित किया गया। विद्यालय प्रबंधन और पूरे विद्यालय परिवार की मौजूदगी में तिरंगा फहराया गया तथा राष्ट्रीय ध्वज को सलामी दी गई। इसके बाद देशभक्ति गीत प्रस्तुत किए गए और देश की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले अमर शहीदों को श्रद्धापूर्वक याद किया गया।

कार्यक्रम के बाद बच्चों के बीच मिठाइयां वितरित की गईं। मिठाई पाकर बच्चों के चेहरे खुशी से खिल उठे। पूरे आयोजन में बच्चों के उत्साह के साथ-साथ शिक्षकों और विद्यालय प्रबंधन की सक्रिय सहभागिता देखने को मिली।

कार्यक्रम में विद्यालय प्रबंधक अमजद अली, ग्राम प्रधान मधुबनी एवं प्रधान संघ महासचिव, प्रधानाचार्य फिरोज आलम, अध्यापक मोहम्मद खुर्शीद, विजय कुमार, अम्रुल्लाह, इरशाद, मोनी रावत और कुमारी पूजा सहित विद्यालय परिवार के लोग मौजूद रहे।

इसके अलावा वाजुद्दीन, अल्ताफ, मोहिउद्दीन, बरकत अली, रामसेवक, अलाउद्दीन, मुन्ना, गयासुद्दीन, मुस्ताक, राजेंद्र प्रसाद, सर्कुलर और मोहम्मद अयूब सहित अन्य लोग भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।

सारांश

मदरसा अबू उबैदा का स्वतंत्रता दिवस समारोह केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि बच्चों में राष्ट्रप्रेम, राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान और देश के प्रति जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करने का सुंदर प्रयास नजर आया।

संपादकीय टिप्पणी

तिरंगा केवल एक ध्वज नहीं, बल्कि देश की एकता, स्वतंत्रता और गौरव का प्रतीक है। जब बच्चों के हाथों में तिरंगा होता है और उनकी आवाज में भारत माता के जयघोष की गूंज सुनाई देती है, तो यह आने वाली पीढ़ी में देश के प्रति सम्मान और जिम्मेदारी की उम्मीद जगाता है।

मदरसा अबू उबैदा में आयोजित यह कार्यक्रम इस दृष्टि से सराहनीय रहा कि बच्चों को स्वतंत्रता दिवस के महत्व से जोड़ते हुए उन्हें राष्ट्रध्वज के सम्मान, स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान और राष्ट्रीय एकता का संदेश दिया गया। ऐसे आयोजन बच्चों के भीतर देश के प्रति प्रेम और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

तिरंगा ऊंचा रहे, देश का मान बढ़ता रहे—यही इस आयोजन का सबसे सुंदर संदेश रहा।

तिरंगे के साथ गूंजा भारत माता का जयघोष

 

कृमि मुक्ति अभियान में जल्द एक्सपायर होने वाली दवा की सप्लाई पर सवाल

अगस्त में वितरण, सितंबर में एक्सपायरी—अभिभावकों ने उठाई व्यवस्था की पारदर्शिता और दूरदर्शिता पर चिंताIMG 20260814 WA10681

उसका बाजार, सिद्धार्थनगर। राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के तहत बच्चों को एल्बेंडाजोल की दवा खिलाए जाने के बीच दवा की एक्सपायरी डेट को लेकर अभिभावकों में चिंता सामने आई है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र उसका बाजार की ओर से बीआरसी के माध्यम से विद्यालयों को उपलब्ध कराई गई कुछ एल्बेंडाजोल 400 एमजी टैबलेट के पैकेट पर सितंबर 2026 की एक्सपायरी अंकित है। ऐसे में अगस्त में अभियान के दौरान दवा की उपलब्धता और उसके बाद बची दवाओं के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठ रहे हैं।


| क्या है मामला?

बच्चों को राष्ट्रीय कृमि मुक्ति अभियान के तहत एल्बेंडाजोल 400 एमजी की टैबलेट दी गई।

उपलब्ध कराई गई दवा के पैकेट पर EXPIRY DATE: SEP 26 अंकित है।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जल्द एक्सपायर होने वाले स्टॉक की पहले आपूर्ति करना विभागीय प्रक्रिया के अनुरूप है।

बीईओ उसका के मुताबिक दवा की कम वैधता अवधि के संबंध में सीएचसी अधीक्षक को समय से जानकारी दी गई थी।

अभिभावकों की मांग है कि भविष्य में बच्चों के लिए दवाओं की आपूर्ति में पर्याप्त वैधता अवधि सुनिश्चित की जाए।


अभिभावकों की चिंता क्यों?

 

अभिभावकों का कहना है कि बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़े अभियान में ऐसी दवा उपलब्ध कराई जानी चाहिए जिसकी वैधता अवधि पर्याप्त हो। यदि किसी कारण से कोई बच्चा निर्धारित तिथि पर दवा नहीं ले पाता या अभियान में प्रशासनिक कारणों से देरी होती है, तो कम अवधि वाली दवा के इस्तेमाल की गुंजाइश काफी सीमित हो जाती है।

हालांकि, सिर्फ सितंबर 2026 की एक्सपायरी होने के आधार पर यह कहना उचित नहीं होगा कि अगस्त में दवा असुरक्षित थी। दवा की वैधता निर्माता द्वारा निर्धारित एक्सपायरी तिथि तक रहती है, बशर्ते उसका भंडारण निर्धारित शर्तों के अनुसार हुआ हो और पैकेट सही स्थिति में हो।

विभाग का पक्ष

बीईओ उसका अशोक कुमार सिंह के अनुसार, सीएचसी उसका द्वारा बीआरसी पर दवा उपलब्ध कराई गई थी और दवा की एक्सपायरी डेट करीब होने के संबंध में सीएचसी अधीक्षक को समय से जानकारी दे दी गई थी।

वहीं, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एसके पटेल का कहना है कि विभागीय नियम के अनुसार स्टॉक में उपलब्ध जल्द एक्सपायर होने वाली दवाओं की आपूर्ति पहले की गई। उनके मुताबिक सितंबर में एक्सपायर होने वाली दवा का वर्तमान समय में निर्धारित उपयोग के अनुसार सेवन सुरक्षित है।

LIST | व्यवस्था से जुड़े बड़े सवाल

पहला सवाल यह है कि बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़े अभियान के लिए दवाओं की आपूर्ति करते समय पर्याप्त वैधता अवधि वाले स्टॉक को प्राथमिकता देने की व्यवस्था कितनी प्रभावी है?

पहला सवाल यह है कि बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़े अभियान के लिए दवाओं की आपूर्ति करते समय पर्याप्त वैधता अवधि वाले स्टॉक को प्राथमिकता देने की व्यवस्था कितनी प्रभावी है?

दूसरा सवाल यह कि यदि अभियान किसी प्राकृतिक आपदा, अवकाश या प्रशासनिक कारण से आगे खिसक जाता, तो कम अवधि वाली दवाओं का क्या होता?

तीसरा सवाल यह कि भविष्य में ऐसी स्थिति न बने, इसके लिए स्वास्थ्य विभाग और शिक्षा विभाग के स्तर पर क्या अतिरिक्त व्यवस्था की जाएगी?

इन सवालों का जवाब किसी व्यक्ति विशेष पर आरोप लगाने से नहीं, बल्कि स्टॉक प्रबंधन और आपूर्ति व्यवस्था की समीक्षा से सामने आ सकता है।

सारांश

मामला दवा के तत्काल असुरक्षित होने का नहीं, बल्कि दवा की आपूर्ति, स्टॉक प्रबंधन और पर्याप्त वैधता अवधि सुनिश्चित करने की व्यवस्था का है। स्वास्थ्य विभाग ने दवा को निर्धारित वैधता के भीतर सुरक्षित बताया है, जबकि अभिभावक चाहते हैं कि भविष्य में बच्चों को दी जाने वाली दवाओं की आपूर्ति पर्याप्त मार्जिन के साथ की जाए।

सामाजिक टिप्पणी | बच्चों की दवा में सावधानी सबसे जरूरी

बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़ी किसी भी सरकारी योजना का उद्देश्य केवल लक्ष्य पूरा करना नहीं, बल्कि सुरक्षित और भरोसेमंद स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराना होना चाहिए। यहां किसी अधिकारी या कर्मचारी को दोषी ठहराने से पहले विभागीय प्रक्रिया और उपलब्ध रिकॉर्ड की निष्पक्ष समीक्षा जरूरी है।

साथ ही, अभिभावकों की चिंता को भी नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। स्वास्थ्य विभाग यदि भविष्य की आपूर्ति में पर्याप्त वैधता अवधि वाले स्टॉक को प्राथमिकता देता है और स्कूलों को दवा की एक्सपायरी, भंडारण तथा सेवन संबंधी स्पष्ट दिशा-निर्देश देता है, तो ऐसी आशंकाओं को काफी हद तक दूर किया जा सकता है।


बच्चों की सेहत से जुड़ी दवा में छोटी-सी सावधानी भी बड़ी जिम्मेदारी है।

 

FT NEWS DIGITAL | जागरूकता के साथ जिम्मेदार पत्रकारिता

विभाजन की विभीषिका का दर्द याद, सिद्धार्थनगर से गूंजा एकता का संदेश

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इतिहास का वह दर्द, जिसे भुलाया नहीं जा सकता

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विभाजन सिर्फ सरहदों का बंटवारा नहीं था, वह लाखों परिवारों के घर, रिश्ते और यादों के बिखरने की त्रासदी भी था। इसी पीड़ादायक इतिहास को स्मरण करते हुए सिद्धार्थनगर के डॉ. भीमराव आंबेडकर सभागार में ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विभाजन के दौरान जान गंवाने वाले नागरिकों और विस्थापन की पीड़ा झेलने वाले परिवारों को श्रद्धापूर्वक याद किया गया। साथ ही इतिहास की त्रासदी से सीख लेते हुए राष्ट्रीय एकता, अखंडता और सामाजिक समरसता को मजबूत बनाने का संदेश दिया गया।

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स्मृति दिवस का संदेश

अतीत की पीड़ा को याद करना केवल श्रद्धांजलि नहीं, आने वाली पीढ़ियों के लिए चेतावनी और सीख भी है।

कार्यक्रम में इस बात पर जोर रहा कि समाज को इतिहास के कठिन दौर से सीख लेकर आपसी विश्वास, भाईचारे और राष्ट्रीय एकता को और मजबूत करना चाहिए।

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सभागार में दिखी गंभीरता और सहभागिता

कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों, सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों और बड़ी संख्या में उपस्थित नागरिकों ने भाग लिया। सभागार में विभाजन से जुड़े ऐतिहासिक प्रसंगों और पीड़ितों की स्मृतियों को प्रदर्शित करने वाली सामग्री भी लोगों का ध्यान आकर्षित करती रही।

सिद्धार्थनगर में इतिहास के दर्दनाक अध्याय को किया गया स्मरण

सिद्धार्थनगर। संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश शासन के तत्वावधान में 14 अगस्त को डॉ. भीमराव आंबेडकर सभागार में ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ कार्यक्रम आयोजित हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सांसद जगदम्बिका पाल सहित जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और गणमान्य नागरिकों ने सहभागिता की।

कार्यक्रम के दौरान विभाजन के दौर की उन पीड़ादायक घटनाओं को स्मरण किया गया, जिनका असर केवल उस समय तक सीमित नहीं रहा, बल्कि विस्थापित परिवारों की स्मृतियों और आने वाली पीढ़ियों तक भी पहुंचा। अपने घर-परिवार और अपनी जड़ों से बिछड़ने वाले लोगों के संघर्ष और पीड़ा को श्रद्धा के साथ याद किया गया।

कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने विभाजन के दौरान अपने प्राण गंवाने वाले असंख्य नागरिकों के प्रति श्रद्धांजलि व्यक्त की। सभागार में लगाए गए ऐतिहासिक चित्रों और सामग्री के माध्यम से भी उस दौर की परिस्थितियों को समझने का प्रयास किया गया।

जब इतिहास बोलता है, तो वर्तमान को रास्ता दिखाता है

विभाजन की त्रासदी को याद करने का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष यही है कि इतिहास को केवल स्मृति बनाकर न छोड़ा जाए। उससे ऐसी सीख ली जाए, जो समाज को विभाजनकारी परिस्थितियों से दूर रखते हुए एकता और भाईचारे की ओर ले जाए।

कार्यक्रम में इसी भावना के साथ राष्ट्रीय एकता, अखंडता, सामाजिक समरसता और आपसी सौहार्द को मजबूत करने का संदेश दिया गया।


टिप्पणी | दर्द को राजनीति नहीं, सीख में बदलना होगा

इतिहास के पन्नों में दर्ज विभाजन का अध्याय आज भी मानवीय पीड़ा की गहरी कहानी कहता है। लाखों लोगों के विस्थापन और असंख्य परिवारों के बिछड़ने की स्मृतियां यह सवाल छोड़ती हैं कि आखिर समाज को ऐसी परिस्थितियों से क्या सीख लेनी चाहिए?

जवाब स्पष्ट है—नफरत से नहीं, एकता से भविष्य बनता है।

विभाजन की पीड़ा को याद करने की सार्थकता तभी है, जब समाज अतीत से सीख लेकर वर्तमान में आपसी विश्वास मजबूत करे और आने वाली पीढ़ियों के लिए ऐसा वातावरण तैयार करे, जहां विविधता के बीच एकता देश की सबसे बड़ी ताकत बनी रहे।

अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी

कार्यक्रम में भाजपा जिलाध्यक्ष दीपक मौर्य, जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जी.एन., मुख्य विकास अधिकारी बलराम सिंह, पुलिस अधीक्षक डॉ. अभिषेक महाजन, अपर जिलाधिकारी गौरव श्रीवास्तव सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारी, जनप्रतिनिधि एवं गणमान्यजन उपस्थित रहे।

कार्यक्रम ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि इतिहास की पीड़ा को याद रखना जरूरी है, लेकिन उससे भी जरूरी है कि देश की एकता और सामाजिक सद्भाव को किसी भी परिस्थिति में कमजोर न होने दिया जाए।

विभाजन की विभीषिका में अपने प्राण गंवाने वाले सभी नागरिकों को विनम्र श्रद्धांजलि।

 

 

 

 

आकस्मिक निरीक्षण में गैरपंजीकृत अल्ट्रासाउंड सेंटर सील, स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई से मचा हड़कंप

बढ़या PHC के सामने संचालित सेंटर पर पहुंची टीम, अंदर मिली अल्ट्रासाउंड मशीनें; विभागीय जांच आगे बढ़ने के संकेत

सिद्धार्थनगर। स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी को लेकर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने जिले में आकस्मिक निरीक्षण के दौरान एक अल्ट्रासाउंड सेंटर के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उसे सील कर दिया। विभागीय जानकारी के अनुसार, संबंधित सेंटर बढ़या प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के सामने संचालित दीक्षा पैथोलॉजी पॉली क्लीनिक में चल रहा था।

कार्रवाई नोडल अधिकारी मानमेद्र पाल के नेतृत्व में की गई। स्वास्थ्य विभाग की टीम जब मौके पर पहुंची तो सेंटर बंद मिला। विभागीय टीम के अनुसार, सामने के शटर पर ताला लगा था और पीछे के रास्ते से संचालक के निकल जाने की जानकारी सामने आई। निरीक्षण के दौरान परिसर के अंदर अल्ट्रासाउंड मशीनें मौजूद मिलीं।

टीम ने मौके की स्थिति का निरीक्षण करने के बाद संबंधित अल्ट्रासाउंड सेंटर को सील कर दिया। कार्रवाई के दौरान सीएचसी अधीक्षक सहित स्वास्थ्य विभाग के अन्य कर्मचारी भी मौजूद रहे।


जांच के घेरे में पंजीकरण

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, आकस्मिक निरीक्षण में संबंधित अल्ट्रासाउंड सेंटर के पंजीकरण से जुड़ी स्थिति सामने आई, जिसके बाद विभाग ने सीलिंग की कार्रवाई की। हालांकि, मामले में किसी व्यक्ति या संस्था की अंतिम जिम्मेदारी अथवा दोष का निर्धारण सक्षम विभागीय जांच और नियमानुसार कार्रवाई के बाद ही किया जाना उचित होगा।


सवाल सिर्फ एक सेंटर का नहीं

स्वास्थ्य विभाग की यह कार्रवाई एक महत्वपूर्ण सवाल भी सामने लाती है—क्या जिले में संचालित सभी अल्ट्रासाउंड केंद्र निर्धारित नियमों और पंजीकरण व्यवस्था के अनुरूप चल रहे हैं?

एक सेंटर पर कार्रवाई के बाद अब जरूरत है कि स्वास्थ्य विभाग जिले के अन्य अल्ट्रासाउंड केंद्रों की भी पंजीकरण स्थिति, संचालन व्यवस्था और आवश्यक दस्तावेजों का नियमानुसार सत्यापन करे, ताकि नियमों से बाहर किसी भी गतिविधि की संभावना को समय रहते रोका जा सके।

जन-जागरूकता | मरीज भी रहें सतर्क

अल्ट्रासाउंड जैसी चिकित्सकीय जांच के लिए मरीजों और उनके परिजनों को भी जागरूक रहने की जरूरत है। किसी भी जांच केंद्र पर जाने से पहले यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि केंद्र मान्य पंजीकरण और निर्धारित नियमों के तहत संचालित हो रहा है या नहीं।

मरीजों को संदेह की स्थिति में संबंधित स्वास्थ्य विभाग से जानकारी लेनी चाहिए और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना सक्षम अधिकारियों तक पहुंचानी चाहिए। जागरूक नागरिक ही स्वास्थ्य व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

अधिकारियों के लिए अहम संदेश

बढ़या क्षेत्र में हुई कार्रवाई के बाद यह मामला केवल सीलिंग तक सीमित न रहे, बल्कि विभागीय स्तर पर नियमों के अनुसार आगे की जांच भी होनी चाहिए। यदि जांच में कोई अनियमितता प्रमाणित होती है तो संबंधित नियमों के तहत आगे की कार्रवाई की जानी चाहिए और यदि सब कुछ नियमानुसार पाया जाता है तो स्थिति भी स्पष्ट की जानी चाहिए।

साथ ही जिले में संचालित सभी संबंधित केंद्रों की समय-समय पर जांच और रिकॉर्ड का सत्यापन किया जाए, ताकि किसी भी स्तर पर मरीजों के स्वास्थ्य और कानूनन निर्धारित व्यवस्था के साथ समझौते की गुंजाइश न रहे।

सारांश

सिद्धार्थनगर में स्वास्थ्य विभाग की आकस्मिक कार्रवाई के दौरान बढ़या प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के सामने संचालित एक अल्ट्रासाउंड सेंटर को सील किया गया। विभागीय टीम के अनुसार, मौके पर अल्ट्रासाउंड मशीनें मिलीं और सेंटर के पंजीकरण से संबंधित स्थिति को लेकर कार्रवाई की गई। अब मामले में आगे की विभागीय प्रक्रिया और जांच महत्वपूर्ण होगी।

FT News Digital की टिप्पणी | कार्रवाई के साथ व्यवस्था भी मजबूत हो

स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ा कोई भी मामला सीधे आम आदमी की जिंदगी और भरोसे से जुड़ा होता है। इसलिए केवल एक केंद्र पर कार्रवाई कर देना पर्याप्त नहीं माना जाना चाहिए। जरूरत इस बात की है कि नियमों का पालन कराने के लिए नियमित निगरानी व्यवस्था और प्रभावी सत्यापन भी सुनिश्चित हो।

FT News Digital किसी व्यक्ति, संचालक अथवा संस्था को दोषी घोषित नहीं करता। दोष या जिम्मेदारी का निर्धारण सक्षम प्राधिकारी की जांच और विधिक प्रक्रिया से ही होगा। हमारा उद्देश्य स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई और उससे जुड़े जनहित के सवाल को सामने रखना है।

हम संबंधित अधिकारियों से अपेक्षा करते हैं कि मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करें और यदि कोई अनियमितता प्रमाणित होती है तो नियमानुसार आगे की कार्रवाई करें। साथ ही आम जनता को भी सुरक्षित और वैध स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति जागरूक किया जाए।

क्योंकि स्वास्थ्य के मामले में लापरवाही की गुंजाइश नहीं होनी चाहिए—न मरीज के स्तर पर, न व्यवस्था के स्तर पर।

FT News Digital — जनहित की खबर, जिम्मेदारी के साथ।

खलीलाबाद-बहराइच नई रेल लाइन के लिए भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया तेज

सिद्धार्थ नगर

बांसी तहसील के 10 गांवों के प्रभावित भू-स्वामियों को 21 दिन में दावा-आपत्ति का मौका
सिद्धार्थनगर, 14 अगस्त 2026।
खलीलाबाद-बहराइच नई रेलवे लाइन परियोजना को लेकर सिद्धार्थनगर जिले में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ गई है। पूर्वोत्तर रेलवे गोरखपुर के उपमुख्य इंजीनियर निर्माण/सामान्य की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार, परियोजना के अंतर्गत जिले की बांसी तहसील के 10 गांवों की भूमि प्रभावित हो रही है।
भारत के राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना के अनुसार प्रभावित गांवों में अन्तरखुसवा, परसिया, बहेरवा, अकसरामाफी, मिठवल बुजुर्ग, सिसईकला, गिधौरा, सिसवा, पेडार और बाम्हनपुरवा शामिल हैं।
परियोजना के भू-अधिग्रहण प्रस्ताव के संबंध में रेलवे (संशोधन) अधिनियम, 2008 की धारा 20E के तहत अधिसूचना भारत के राजपत्र में 14 जुलाई 2026 को प्रकाशित की गई। इसके बाद स्थानीय स्तर पर अमर उजाला और द टाइम्स ऑफ इंडिया में भी 31 जुलाई 2026 को इसका प्रकाशन कराया गया।


प्रभावित भूस्वामियों के लिए जरूरी सूचना
जिन कृषकों/भूस्वामियों की भूमि प्रस्तावित रेलवे परियोजना से प्रभावित हो रही है, वे सार्वजनिक सूचना के प्रकाशन की तिथि से 21 दिनों के भीतर अपना दावा/आपत्ति प्रस्तुत कर सकते हैं।
दावा या आपत्ति कार्यालय सक्षम प्राधिकारी (भूमि अध्याप्ति), अपर जिलाधिकारी (वि./रा.), कलेक्ट्रेट सिद्धार्थनगर में व्यक्तिगत रूप से अथवा अधिकृत प्रतिनिधि/अधिवक्ता के माध्यम से प्रस्तुत की जा सकती है।
10 गांवों की भूमि प्रभावित
अन्तरखुसवा
परसिया
बहेरवा
अकसरामाफी
मिठवल बुजुर्ग
सिसईकला
गिधौरा
सिसवा
पेडार
बाम्हनपुरवा
सारांश
खलीलाबाद-बहराइच नई रेलवे लाइन परियोजना के लिए सिद्धार्थनगर की बांसी तहसील में प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण को लेकर अधिसूचना जारी हो चुकी है। परियोजना से जुड़े 10 गांवों के प्रभावित कृषकों एवं भूस्वामियों को दावा या आपत्ति दर्ज कराने का अवसर दिया गया है। संबंधित हितबद्ध व्यक्ति निर्धारित अवधि के भीतर सक्षम प्राधिकारी के समक्ष अपना पक्ष प्रस्तुत कर सकते हैं।
महत्वपूर्ण बात
यह सूचना प्रभावित भू-स्वामियों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। यदि किसी व्यक्ति की भूमि प्रस्तावित अधिग्रहण से प्रभावित हो रही है और उसे अपने अधिकार, मुआवजे अथवा भूमि से संबंधित कोई दावा या आपत्ति प्रस्तुत करनी है, तो उसे निर्धारित 21 दिनों की अवधि के भीतर सक्षम प्राधिकारी के समक्ष अपना पक्ष रखना चाहिए।
विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से यह जानकारी दी गई है।

पंचायत भवन पर ताला, ग्रामीणों की सुविधाओं पर सवाल

महुली में पंचायत भवन की स्थिति को लेकर FT News Digital ने उठाई जनहित की आवाज, जिम्मेदारों से जांच की मांग

शोहरतगढ़/सिद्धार्थनगर।

गांवों में पंचायत व्यवस्था को मजबूत करने और ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पंचायत भवनों की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है। लेकिन विकासखंड शोहरतगढ़ की ग्राम पंचायत महुली से सामने आई तस्वीर ने पंचायत भवन के संचालन और आम लोगों की पहुंच को लेकर सवाल खड़े किए हैं।

तस्वीर में पंचायत भवन के मुख्य द्वार पर ताला लगा हुआ दिखाई दे रहा है। हालांकि, केवल एक तस्वीर के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि पंचायत भवन नियमित रूप से बंद रहता है या ग्रामीणों को किसी सुविधा से वंचित किया जा रहा है। वास्तविक स्थिति क्या है, यह संबंधित विभाग की जांच और मौके के सत्यापन से ही स्पष्ट हो सकती है।

इसीलिए FT News Digital इस मामले को किसी व्यक्ति विशेष पर आरोप लगाने के बजाय जनहित के एक सवाल के रूप में जिम्मेदार अधिकारियों के संज्ञान में ला रहा है।


जिम्मेदारों से सीधा सवाल

क्या ग्राम पंचायत महुली का पंचायत भवन निर्धारित समय और व्यवस्था के अनुसार संचालित हो रहा है?

यदि भवन का संचालन नियमित है तो ग्रामीणों को पंचायत भवन में उपलब्ध सेवाओं, कार्यालयीन समय और संबंधित कर्मचारियों की उपस्थिति की स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए। यदि किसी कारण से भवन बंद है तो उसके कारण और वैकल्पिक व्यवस्था के बारे में भी ग्रामीणों को अवगत कराया जाना चाहिए।

मामला जांच का है, आरोप का नहीं

पंचायत भवन ग्रामीणों और पंचायत से जुड़े कार्यों के लिए महत्वपूर्ण स्थान होता है। ऐसे में यदि ग्रामीणों को पंचायत संबंधी कार्यों के लिए अनावश्यक रूप से इधर-उधर जाना पड़ रहा हो, तो यह निश्चित रूप से विचारणीय विषय है।

लेकिन FT News Digital यह स्पष्ट करता है कि बिना आधिकारिक जांच किसी व्यक्ति, ग्राम प्रधान, सचिव अथवा किसी अन्य जिम्मेदार पर लापरवाही का आरोप लगाना उचित नहीं है।

इसलिए संबंधित अधिकारी मौके का निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति की जानकारी लें और यह स्पष्ट करें कि पंचायत भवन का संचालन किस व्यवस्था के तहत हो रहा है।

सारांश

ग्राम पंचायत महुली के पंचायत भवन की तस्वीर सामने आने के बाद भवन के संचालन और ग्रामीणों की पहुंच को लेकर सवाल उठे हैं। तस्वीर में मुख्य द्वार पर ताला दिखाई दे रहा है। अब जरूरत है कि संबंधित विभाग मामले का स्थलीय सत्यापन कर वस्तुस्थिति स्पष्ट करे।

यदि भवन निर्धारित व्यवस्था के अनुसार संचालित पाया जाता है तो स्थिति स्पष्ट की जाए और यदि कोई व्यावहारिक समस्या सामने आती है तो उसका समाधान कराया जाए, ताकि ग्रामीणों को पंचायत से जुड़े कार्यों के लिए परेशानी न उठानी पड़े।

FT News Digital की टिप्पणी

पंचायत भवन सिर्फ एक इमारत नहीं, ग्रामीणों की स्थानीय व्यवस्था का महत्वपूर्ण केंद्र है।

जनता के लिए बनाई गई व्यवस्था जनता तक आसानी से पहुंचे—यही किसी भी सरकारी व्यवस्था की सार्थकता है। इसलिए किसी पर आरोप लगाना हमारा उद्देश्य नहीं है। हमारा उद्देश्य केवल इतना है कि जिस व्यवस्था पर ग्रामीणों का अधिकार और भरोसा है, उसकी वास्तविक स्थिति जिम्मेदार अधिकारी स्वयं जांचें।

FT News Digital संबंधित प्रशासन एवं पंचायत विभाग से आग्रह करता है कि ग्राम पंचायत महुली के पंचायत भवन का मौके पर निरीक्षण कर संचालन की स्थिति स्पष्ट की जाए और यदि किसी प्रकार की कमी या समस्या सामने आती है तो नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई एवं सुधार सुनिश्चित कराया जाए।

जनता सवाल पूछे, जिम्मेदार जवाब दें और व्यवस्था बेहतर हो—यही जनहित की पत्रकारिता का उद्देश्य है।

FT News Digital — सच और… कुछ नहीं।

कोर्ट के आदेश के बाद खुला मामला, नाबालिग से दुष्कर्म के आरोप में दो पर FIR

मिश्रौलिया, सिद्धार्थनगर। मिश्रौलिया थाना क्षेत्र के एक गांव से सामने आया नाबालिग से दुष्कर्म के आरोप का मामला अब पुलिस की जांच के घेरे में है। मामले में न्यायालय के सख्त रुख के बाद बुधवार रात पुलिस ने दो नामजद आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी।

परिजनों की ओर से लगाए गए आरोपों के मुताबिक, घटना को लेकर पुलिस से कार्रवाई की मांग की गई थी। जब मामला आगे नहीं बढ़ा तो पीड़ित पक्ष ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। न्यायालय के आदेश के बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज करते हुए मामले की जांच शुरू की है।

मामला गंभीर इसलिए भी है क्योंकि आरोप नाबालिग से जुड़ा है। पुलिस अब शिकायत में लगाए गए आरोपों, घटनाक्रम और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच कर रही है। विवेचना के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

कोर्ट के आदेश के बाद पुलिस हरकत में

न्यायालय के आदेश के बाद FIR दर्ज होने से मामले में पुलिस जांच का रास्ता साफ हुआ है। अब जांच में यह स्पष्ट होना है कि शिकायत में लगाए गए आरोपों के पीछे वास्तविक घटनाक्रम क्या रहा और उपलब्ध साक्ष्य क्या कहते हैं।

पुलिस की जांच पूरी होने से पहले किसी आरोपी को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। आरोपों की पुष्टि अथवा खंडन जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा।

नाबालिग की पहचान पूरी तरह गोपनीय

नाबालिग पीड़िता की पहचान की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उसके नाम, गांव की ऐसी जानकारी जिससे पहचान उजागर हो, फोटो अथवा अन्य व्यक्तिगत विवरण प्रकाशित नहीं किए जा रहे हैं।

FT News Digital की जिम्मेदार पत्रकारिता का उद्देश्य आरोपों को सनसनी बनाना नहीं, बल्कि न्यायालय के आदेश के बाद हुई पुलिस कार्रवाई और मामले की वास्तविक स्थिति को तथ्यपरक तरीके से सामने रखना है।

बारिश की बूंदों के बीच गूंजा भारत माता का जयघोष, तिरंगे के रंग में रंगा सिद्धार्थनगर

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सिद्धार्थनगर। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राष्ट्रप्रेम, एकता और अखंडता का संदेश लेकर सिद्धार्थनगर जिला मुख्यालय पर निकली भव्य तिरंगा यात्रा ने माहौल को देशभक्ति से सराबोर कर दिया। खास बात यह रही कि बारिश भी राष्ट्रभक्ति के जज्बे को नहीं रोक सकी। बरसात के बीच लोग भीगते हुए हाथों में तिरंगा लेकर यात्रा में शामिल रहे और गगनभेदी देशभक्ति के नारों से पूरा मार्ग गूंजता रहा।

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नगर पालिका परिषद सिद्धार्थनगर क्षेत्र में हाइडिल तिराहा से शुरू हुई तिरंगा यात्रा भारत माता चौक तक पहुंची। यात्रा के दौरान भारत माता के जयकारों, राष्ट्रभक्ति के नारों और हाथों में लहराते तिरंगों ने पूरे जिला मुख्यालय को देशभक्ति के रंग में रंग दिया।

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यात्रा का आयोजन भाजपा जिलाध्यक्ष दीपक मौर्या की अध्यक्षता में हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष चारु चौधरी मौजूद रहीं। वहीं सदर विधायक श्यामधनी राही, नगरपालिका अध्यक्ष गोविंद माधव सहित भाजपा पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं, युवाओं, मातृशक्ति और बड़ी संख्या में आम नागरिकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।

बारिश आई, लेकिन कदम नहीं रुके

तिरंगा यात्रा के दौरान मौसम ने भी परीक्षा ली। बारिश के बीच भी लोगों का उत्साह कम नहीं हुआ। हाथों में तिरंगा थामे लोग लगातार आगे बढ़ते रहे और भारत माता की जय तथा वंदे मातरम् के गगनभेदी जयकारों से वातावरण को राष्ट्रभक्ति से भर दिया।

बारिश में भीगते हुए यात्रा में शामिल लोगों का उत्साह यह संदेश देता नजर आया कि राष्ट्रप्रेम किसी मौसम का मोहताज नहीं होता।

भारत माता चौक पर हुआ समापन

हाइडिल तिराहा से शुरू हुई यात्रा निर्धारित मार्ग से होते हुए भारत माता चौक पहुंची। यहां भारत माता की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया। इसके बाद उपस्थित लोगों ने एक स्वर में जयकारे लगाते हुए देश की एकता, अखंडता और गौरव को मजबूत करने का संकल्प दोहराया।

‘हर घर तिरंगा, हर दिल तिरंगा’ का संदेश

कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि तिरंगा केवल एक ध्वज नहीं, बल्कि देश की आन, बान और शान का प्रतीक है। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर निकाली गई यह यात्रा लोगों में राष्ट्रप्रेम और राष्ट्रीय एकता की भावना को और मजबूत करने का माध्यम बनी।

वक्ताओं ने नागरिकों से ‘हर घर तिरंगा, हर दिल तिरंगा’ के संकल्प को मजबूत करने और देश की एकता, अखंडता तथा गौरव के लिए अपनी जिम्मेदारी निभाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में रामकुमार कुंवर, राजेंद्र पांडे, विजयकांत चतुर्वेदी, आशीष शुक्ला, फतेह बहादुर सिंह, डॉ. सीमा मिश्रा, पवन मिश्रा, फूलचंद जायसवाल, अभिषेक पाल, सत्यप्रकाश राही, सिद्धार्थ चौधरी सहित जिले के अन्य पदाधिकारी, कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी मौजूद रहे।

विशेष टिप्पणी

बारिश की बूंदों के बीच तिरंगे को थामे आगे बढ़ते कदम इस यात्रा की सबसे खास तस्वीर रहे। मौसम ने लोगों को रोकने की कोशिश जरूर की, लेकिन देशभक्ति के जज्बे के सामने बारिश भी फीकी नजर आई। भारत माता चौक पर माल्यार्पण और गगनभेदी जयकारों के साथ यात्रा का समापन हुआ।


| यात्रा की खास बातें

हाइडिल तिराहा से शुरुआत → बारिश के बीच तिरंगा यात्रा → भारत माता के जयकारों से गूंजा जिला मुख्यालय → भारत माता चौक पर माल्यार्पण → गगनभेदी नारों के साथ यात्रा का समापन

 

एक सेंटर मिला तो पूरे जिले की जांच क्यों नहीं?

सिद्धार्थनगर में अल्ट्रासाउंड सेंटरों की निगरानी पर बड़ा सवाल, कार्रवाई के बावजूद दोबारा संचालन की शिकायत ने बढ़ाई चिंता

सिद्धार्थनगर। जनपद में अल्ट्रासाउंड सेंटरों के संचालन और उनकी निगरानी व्यवस्था को लेकर एक बार फिर बड़ा सवाल सामने आया है। खुनियांव ब्लॉक के बढ़या चौराहे पर नोडल अधिकारी के आकस्मिक निरीक्षण में एक अल्ट्रासाउंड सेंटर के बिना पंजीकरण संचालित पाए जाने की जानकारी सामने आने के बाद अब सवाल केवल एक सेंटर तक सीमित नहीं रह गया है।

जानकारी के अनुसार सिद्धार्थ पैथालॉजी एंड दीक्षा पाली क्लिनिक में निरीक्षण के दौरान अल्ट्रासाउंड संबंधी गतिविधियां संचालित मिलीं। उपलब्ध जानकारी में यह भी बताया गया है कि संबंधित संस्थान के विरुद्ध पूर्व में सीलिंग और मुकदमे जैसी कार्रवाई की जा चुकी है। इसके बावजूद दोबारा संचालन की स्थिति सामने आने की बात कही जा रही है।

यदि पूर्व में कार्रवाई हुई थी, तो फिर संचालन कैसे शुरू हुआ?

यही इस पूरे मामले का सबसे बड़ा सवाल है।

अब पूरे सिद्धार्थनगर की हो आकस्मिक जांच

एक स्थान पर निरीक्षण के दौरान यदि नियमों से जुड़ी कमी सामने आती है, तो क्या जिले के बाकी अल्ट्रासाउंड सेंटरों का भी अचानक और निष्पक्ष भौतिक सत्यापन नहीं होना चाहिए?

कितने सेंटर पंजीकृत हैं?

कितनों का पंजीकरण वैध है?

कितने सेंटरों पर पूर्व में कार्रवाई हो चुकी है?

कार्रवाई के बाद उनकी वर्तमान स्थिति क्या है?

और क्या पंजीकरण से संबंधित रिकॉर्ड तथा मौके की वास्तविक स्थिति एक-दूसरे से मेल खाते हैं?

इन सवालों का जवाब कागजों से नहीं, बल्कि जिलेभर में आकस्मिक निरीक्षण से ज्यादा स्पष्ट हो सकता है।

PCPNDT अधिनियम के तहत अल्ट्रासाउंड/इमेजिंग सुविधा वाले संबंधित केंद्रों का पंजीकरण आवश्यक है और Appropriate Authority को निरीक्षण तथा नियमों के उल्लंघन की स्थिति में कार्रवाई के अधिकार दिए गए हैं।

दो बार कार्रवाई के बाद तीसरी बार संचालन? जांच में सामने आएगा सच

यदि किसी केंद्र के विरुद्ध पहले सीलिंग अथवा मुकदमे की कार्रवाई हुई थी और बाद में उसी स्थान पर किसी दूसरे नाम से संचालन की बात सामने आ रही है, तो यह रिकॉर्ड के आधार पर जांच का विषय है।

क्या नया पंजीकरण हुआ था?

क्या मशीन और संस्था का विवरण विभागीय रिकॉर्ड में दर्ज था?

क्या पूर्व कार्रवाई के बाद दोबारा निरीक्षण हुआ?

यदि हुआ तो उसकी रिपोर्ट क्या थी?

इन सवालों के जवाब संबंधित विभाग के रिकॉर्ड से ही सामने आने चाहिए।

‘बाबू संभाल रहे हैं’—तो अंतिम जवाबदेही किसकी?

स्वास्थ्य विभाग से जुड़े कामकाज को लेकर अक्सर यह बात सुनने को मिलती है कि “रिकॉर्ड और काम तो बाबू संभाल रहे हैं।”

लेकिन जनहित का सवाल यह है कि यदि पंजीकरण, नवीनीकरण, निरीक्षण और कार्रवाई से जुड़े रिकॉर्ड किसी कर्मचारी के स्तर पर रखे जाते हैं, तो अंतिम निगरानी और जवाबदेही किस अधिकारी की है?

यह किसी कर्मचारी पर आरोप लगाने का सवाल नहीं है।

सवाल सिर्फ इतना है कि व्यवस्था में जिम्मेदारी की स्पष्ट रेखा क्या है और यदि कोई अनधिकृत संचालन सामने आता है तो इसकी जवाबदेही तय कैसे होती है?

क्या सिर्फ एक जगह जांच से पूरी तस्वीर सामने आएगी?

सिद्धार्थनगर में केवल अल्ट्रासाउंड सेंटर ही नहीं, बल्कि निजी अस्पताल, क्लीनिक, पैथालॉजी और अन्य स्वास्थ्य प्रतिष्ठानों की भी नियमानुसार जांच की आवश्यकता पर सवाल उठ रहे हैं।

यदि प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ब्लॉकवार व्यापक आकस्मिक निरीक्षण कराए और उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक करे, तो जिले की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।

कहां पंजीकरण वैध है, कहां नवीनीकरण लंबित है, कहां पूर्व में कार्रवाई हुई और कार्रवाई के बाद क्या स्थिति है—इन सभी सवालों का रिकॉर्ड आधारित जवाब जनता के सामने आना चाहिए।

सीएमओ कार्यालय से जुड़े सवाल—आरोप नहीं, जवाब की मांग

इस पूरे मामले में निगरानी, पंजीकरण और कार्रवाई से जुड़े काम स्वास्थ्य विभाग के अधिकार क्षेत्र से संबंधित हैं। इसलिए यह स्वाभाविक है कि जवाबदेही को लेकर सवाल विभागीय स्तर पर भी उठेंगे।

लेकिन FT News Digital किसी अधिकारी या कर्मचारी पर मिलीभगत, संरक्षण अथवा भ्रष्टाचार का आरोप नहीं लगा रहा है।

हमारा सवाल सीधा है—

अगर पूर्व कार्रवाई के बावजूद किसी केंद्र के दोबारा संचालित होने की बात सामने आती है, तो विभागीय रिकॉर्ड में इसकी निगरानी कैसे हुई?

अगर जिले में कहीं और भी ऐसी शिकायतें हैं, तो क्या उनका सत्यापन कराया जाएगा?

और अगर जांच में अनियमितता मिलती है, तो क्या जिम्मेदारी तय होगी?

यही वह सवाल है जिसका जवाब सीएमओ कार्यालय और संबंधित Appropriate Authority के आधिकारिक पक्ष से जनता को मिलना चाहिए।

FT NEWS DIGITAL की पड़ताल का सवाल

एक जगह कमी सामने आई है—अब पूरे सिद्धार्थनगर की आकस्मिक जांच कब होगी?

क्योंकि मामला किसी एक क्लिनिक का नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी व्यवस्था और जनता के भरोसे का है।

यदि व्यवस्था सही है तो व्यापक जांच से यह साबित हो जाएगा।

यदि कहीं कमी है तो कार्रवाई से वह सामने आ जाएगी।

जनता को आरोप नहीं, रिकॉर्ड चाहिए।

सवाल नहीं, जवाब चाहिए।

और कार्रवाई हुई है तो उसका असर जमीन पर भी दिखाई देना चाहिए।

नोट: यह रिपोर्ट उपलब्ध जानकारी और निरीक्षण से संबंधित दावों के आधार पर तैयार की गई है। किसी व्यक्ति, अधिकारी, कर्मचारी या संस्था पर मिलीभगत, भ्रष्टाचार या संरक्षण का निष्कर्ष नहीं लगाया जा रहा है। संबंधित विभाग/संस्था का आधिकारिक पक्ष प्राप्त होने पर उसे खबर में शामिल किया जाएगा। अंतिम तथ्य संबंधित जांच और सक्षम प्राधिकारी की रिपोर्ट से ही निर्धारित होंगे।

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