राष्ट्रीय मधुकर समारोह में रायबरेली के वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. रसिक किशोर सिंह नीरज सम्मानित साहित्य, कला और संस्कृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए मिला ‘कवि मधुप सम्मान’
रायबरेली। मध्य प्रदेश के दतिया में आयोजित 16वें राष्ट्रीय मधुकर समारोह में रायबरेली के वरिष्ठ साहित्यकार एवं कवि डॉ. रसिक किशोर सिंह नीरज को साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रतिष्ठित ‘कवि मधुप सम्मान’ से सम्मानित किया गया। इस सम्मान से रायबरेली के साहित्यिक जगत में हर्ष का माहौल है।
दतिया के प्रसिद्ध साहित्यकार एवं पुरातत्वविद् पं. महेश कुमार मिश्र ‘मधुकर’ की 16वीं पुण्य स्मृति के अवसर पर श्रीवृंदावन धाम सभागार, सीतासागर में राष्ट्रीय स्तर का भव्य साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समारोह आयोजित किया गया। समारोह में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए साहित्यकारों, कलाकारों, विद्वानों एवं संस्कृति-पुरातत्व से जुड़े व्यक्तित्वों को सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भारतीय सांस्कृतिक निधि (INTACH) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं चेयरमैन अशोक सिंह ठाकुर रहे। उन्होंने दीप प्रज्ज्वलित कर समारोह का शुभारंभ किया तथा पं. महेश कुमार मिश्र ‘मधुकर’ के चित्र पर माल्यार्पण किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता समाजसेवी श्रीमती रामलली शर्मा ने की।
समारोह के विभिन्न सत्रों में साहित्य, लोक संस्कृति, संगीत और काव्य पर विमर्श हुआ। ‘लोक साहित्य में श्रीराम’ विषय पर आयोजित सत्र में विद्वानों ने लोक साहित्य में भगवान श्रीराम की उपस्थिति और उनके सांस्कृतिक प्रभाव पर विचार व्यक्त किए।
डॉ. रसिक किशोर सिंह नीरज को ‘कवि मधुप सम्मान’
समारोह में साहित्य के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान के लिए रायबरेली निवासी वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. रसिक किशोर सिंह नीरज को ‘कवि मधुप सम्मान’ प्रदान किया गया। साहित्य सृजन, कविता और साहित्यिक गतिविधियों में उनके निरंतर योगदान को देखते हुए उन्हें यह सम्मान मिलना रायबरेली के लिए गौरव का विषय माना जा रहा है।
समारोह में राष्ट्रीय मधुकर सम्मान डॉ. राजेश श्रीवास्तव को, दतिया रत्न सम्मान नमः शिवाय अरजरिया को तथा अन्य विशिष्ट सम्मानों के साथ डॉ. अजय कुमार गुप्ता, मैथिली शरण श्रीवास्तव, डॉ. यशोधरा भटनागर, डॉ. वीना अब्राहम, डॉ. रमा शर्मा, डॉ. आरती कुमारी, डॉ. बृजेश कुमार श्रीवास्तव सहित अनेक साहित्यकारों एवं विद्वानों को सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के दौरान कई महत्वपूर्ण पुस्तकों का विमोचन भी किया गया। ‘मधुकर वाणी सत्यम शिवम सुंदरम’ सहित विभिन्न साहित्यिक कृतियों का लोकार्पण हुआ। साथ ही दतिया की युवा प्रतिभाओं को ‘मधुकर पदक’ प्रदान कर प्रोत्साहित किया गया।
आयोजकों के अनुसार राष्ट्रीय मधुकर समारोह पिछले 15 वर्षों से साहित्य, कला, संस्कृति और पुरातत्व के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले व्यक्तित्वों को सम्मानित करता आ रहा है। इस वर्ष भी चार सत्रों में आयोजित समारोह में साहित्यिक विमर्श, संगीत प्रस्तुतियां, सम्मान समारोह और अखिल भारतीय कवि सम्मेलन आकर्षण का केंद्र रहे।
डॉ. रसिक किशोर सिंह नीरज को मिले इस सम्मान पर रायबरेली के साहित्यकारों, पत्रकारों एवं साहित्यप्रेमियों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्हें बधाई दी है।
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