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संत कबीर नगर में महिला की संदिग्ध मौत से सनसनी, पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार

संत कबीर नगर में संदिग्ध हालात में महिला की मौत, जांच में जुटी पुलिस


अर्जुन सिंह की एक रिपोर्ट


संत कबीर नगर।
जनपद संत कबीर नगर के एक गांव में एक महिला की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो जाने से पूरे इलाके में चर्चा का माहौल बन गया है। घटना के बाद गांव में शोक और तनाव की स्थिति देखने को मिली।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार महिला की अचानक तबीयत बिगड़ने पर परिजन उसे उपचार के लिए अस्पताल ले जाने की तैयारी कर रहे थे। इसी दौरान उसकी हालत गंभीर हो गई और बाद में उसकी मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया।
पुलिस ने आवश्यक कानूनी प्रक्रिया के तहत शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि हो सकेगी।
घटना के बाद मृतका के परिजनों और स्थानीय लोगों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। पुलिस का कहना है कि सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच की जा रही है और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
इस घटना के बाद पूरे गांव में शोक का माहौल बना हुआ है और लोग घटना की सच्चाई सामने आने का इंतजार कर रहे हैं।

फेस हाजिरी के पहले ही दिन मनरेगा की रफ्तार थमी, आंकड़ों ने उठाए कई सवाल

ब्यूरो रिपोर्ट अर्जुन सिंह

 संत कबीर नगर

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डिजिटल निगरानी की नई व्यवस्था लागू होते ही जिले में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना यानी महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की जमीनी हकीकत सामने आ गई। सोमवार से फेस अटेंडेंस लागू होते ही काम की रफ्तार में अचानक आई गिरावट ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
जिले भर में जहां रविवार तक सैकड़ों परियोजनाओं पर हजारों मजदूरों की मौजूदगी दर्ज की जा रही थी, वहीं सोमवार को फेस हाजिरी शुरू होते ही आंकड़े सिमटकर बेहद कम रह गए। प्रथम पाली में केवल 11 ग्राम पंचायतों की 12 परियोजनाएं ही शुरू हो सकीं और ऑन रिकॉर्ड मात्र 76 मजदूरों की उपस्थिति दर्ज हुई।
रविवार और सोमवार के आंकड़ों में बड़ा अंतर
बताया जाता है कि रविवार तक 230 ग्राम पंचायतों में 243 परियोजनाएं संचालित थीं। 802 मस्टररोल पर 6,757 मजदूरों की हाजिरी दर्ज की गई थी। लेकिन फेस स्कैनिंग आधारित उपस्थिति व्यवस्था लागू होने के बाद कई ब्लॉकों में कार्य नगण्य या शून्य स्तर पर पहुंच गया।
कुछ प्रमुख बिंदु इस प्रकार रहे—
सांथा ब्लॉक: पूर्व में 1,000 से अधिक मजदूर, फेस हाजिरी के पहले दिन कार्य शून्य।
नाथनगर ब्लॉक: पहले 1,100 से अधिक मजदूर, अब 47 मजदूर।
बघौली: 600+ से घटकर 2 मजदूर।
सेमरियावां: 700+ से घटकर 1 मजदूर।
खलीलाबाद और पौली ब्लॉक में भी उपस्थिति बेहद सीमित रही।
इन आंकड़ों ने जमीनी क्रियान्वयन और निगरानी व्यवस्था को लेकर बहस छेड़ दी है। हालांकि आधिकारिक स्तर पर इसे तकनीकी संक्रमण काल की चुनौती भी बताया जा रहा है।
क्या है फेस हाजिरी व्यवस्था?
फेस हाजिरी, केंद्र सरकार द्वारा लागू डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम का हिस्सा है। इसमें NMMS App (एनएमएमएस ऐप) के माध्यम से मजदूरों की उपस्थिति दर्ज की जाती है।
कार्यस्थल पर मजदूर का लाइव फोटो लिया जाता है
चेहरे की स्कैनिंग आधार डाटा से मिलान करती है
जॉब कार्ड की ई-केवाईसी अनिवार्य होती है
निर्धारित समय सीमा में उपस्थिति दर्ज करनी होती है
इस व्यवस्था का उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना और वास्तविक मजदूरों की उपस्थिति सुनिश्चित करना बताया गया है।
सवाल और संभावनाएं
डिजिटल तकनीक का उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना है, लेकिन पहले ही दिन आए आंकड़े प्रशासनिक तैयारी, तकनीकी समझ और जमीनी समन्वय पर भी प्रश्न खड़े कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि शुरुआती दिनों में नेटवर्क, प्रशिक्षण और तकनीकी दिक्कतों के कारण उपस्थिति प्रभावित हो सकती है। आने वाले दिनों में स्थिति सामान्य होती है या नहीं, इस पर सभी की नजर रहेगी।
(यह रिपोर्ट उपलब्ध आंकड़ों और स्थानीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी के आधार पर तैयार की गई है। संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)

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