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कोर्ट के आदेश के बाद खुला मामला, नाबालिग से दुष्कर्म के आरोप में दो पर FIR

मिश्रौलिया, सिद्धार्थनगर। मिश्रौलिया थाना क्षेत्र के एक गांव से सामने आया नाबालिग से दुष्कर्म के आरोप का मामला अब पुलिस की जांच के घेरे में है। मामले में न्यायालय के सख्त रुख के बाद बुधवार रात पुलिस ने दो नामजद आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी।

परिजनों की ओर से लगाए गए आरोपों के मुताबिक, घटना को लेकर पुलिस से कार्रवाई की मांग की गई थी। जब मामला आगे नहीं बढ़ा तो पीड़ित पक्ष ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। न्यायालय के आदेश के बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज करते हुए मामले की जांच शुरू की है।

मामला गंभीर इसलिए भी है क्योंकि आरोप नाबालिग से जुड़ा है। पुलिस अब शिकायत में लगाए गए आरोपों, घटनाक्रम और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच कर रही है। विवेचना के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

कोर्ट के आदेश के बाद पुलिस हरकत में

न्यायालय के आदेश के बाद FIR दर्ज होने से मामले में पुलिस जांच का रास्ता साफ हुआ है। अब जांच में यह स्पष्ट होना है कि शिकायत में लगाए गए आरोपों के पीछे वास्तविक घटनाक्रम क्या रहा और उपलब्ध साक्ष्य क्या कहते हैं।

पुलिस की जांच पूरी होने से पहले किसी आरोपी को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। आरोपों की पुष्टि अथवा खंडन जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा।

नाबालिग की पहचान पूरी तरह गोपनीय

नाबालिग पीड़िता की पहचान की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उसके नाम, गांव की ऐसी जानकारी जिससे पहचान उजागर हो, फोटो अथवा अन्य व्यक्तिगत विवरण प्रकाशित नहीं किए जा रहे हैं।

FT News Digital की जिम्मेदार पत्रकारिता का उद्देश्य आरोपों को सनसनी बनाना नहीं, बल्कि न्यायालय के आदेश के बाद हुई पुलिस कार्रवाई और मामले की वास्तविक स्थिति को तथ्यपरक तरीके से सामने रखना है।

बारिश की बूंदों के बीच गूंजा भारत माता का जयघोष, तिरंगे के रंग में रंगा सिद्धार्थनगर

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सिद्धार्थनगर। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राष्ट्रप्रेम, एकता और अखंडता का संदेश लेकर सिद्धार्थनगर जिला मुख्यालय पर निकली भव्य तिरंगा यात्रा ने माहौल को देशभक्ति से सराबोर कर दिया। खास बात यह रही कि बारिश भी राष्ट्रभक्ति के जज्बे को नहीं रोक सकी। बरसात के बीच लोग भीगते हुए हाथों में तिरंगा लेकर यात्रा में शामिल रहे और गगनभेदी देशभक्ति के नारों से पूरा मार्ग गूंजता रहा।

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नगर पालिका परिषद सिद्धार्थनगर क्षेत्र में हाइडिल तिराहा से शुरू हुई तिरंगा यात्रा भारत माता चौक तक पहुंची। यात्रा के दौरान भारत माता के जयकारों, राष्ट्रभक्ति के नारों और हाथों में लहराते तिरंगों ने पूरे जिला मुख्यालय को देशभक्ति के रंग में रंग दिया।

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यात्रा का आयोजन भाजपा जिलाध्यक्ष दीपक मौर्या की अध्यक्षता में हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष चारु चौधरी मौजूद रहीं। वहीं सदर विधायक श्यामधनी राही, नगरपालिका अध्यक्ष गोविंद माधव सहित भाजपा पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं, युवाओं, मातृशक्ति और बड़ी संख्या में आम नागरिकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।

बारिश आई, लेकिन कदम नहीं रुके

तिरंगा यात्रा के दौरान मौसम ने भी परीक्षा ली। बारिश के बीच भी लोगों का उत्साह कम नहीं हुआ। हाथों में तिरंगा थामे लोग लगातार आगे बढ़ते रहे और भारत माता की जय तथा वंदे मातरम् के गगनभेदी जयकारों से वातावरण को राष्ट्रभक्ति से भर दिया।

बारिश में भीगते हुए यात्रा में शामिल लोगों का उत्साह यह संदेश देता नजर आया कि राष्ट्रप्रेम किसी मौसम का मोहताज नहीं होता।

भारत माता चौक पर हुआ समापन

हाइडिल तिराहा से शुरू हुई यात्रा निर्धारित मार्ग से होते हुए भारत माता चौक पहुंची। यहां भारत माता की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया। इसके बाद उपस्थित लोगों ने एक स्वर में जयकारे लगाते हुए देश की एकता, अखंडता और गौरव को मजबूत करने का संकल्प दोहराया।

‘हर घर तिरंगा, हर दिल तिरंगा’ का संदेश

कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि तिरंगा केवल एक ध्वज नहीं, बल्कि देश की आन, बान और शान का प्रतीक है। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर निकाली गई यह यात्रा लोगों में राष्ट्रप्रेम और राष्ट्रीय एकता की भावना को और मजबूत करने का माध्यम बनी।

वक्ताओं ने नागरिकों से ‘हर घर तिरंगा, हर दिल तिरंगा’ के संकल्प को मजबूत करने और देश की एकता, अखंडता तथा गौरव के लिए अपनी जिम्मेदारी निभाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में रामकुमार कुंवर, राजेंद्र पांडे, विजयकांत चतुर्वेदी, आशीष शुक्ला, फतेह बहादुर सिंह, डॉ. सीमा मिश्रा, पवन मिश्रा, फूलचंद जायसवाल, अभिषेक पाल, सत्यप्रकाश राही, सिद्धार्थ चौधरी सहित जिले के अन्य पदाधिकारी, कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी मौजूद रहे।

विशेष टिप्पणी

बारिश की बूंदों के बीच तिरंगे को थामे आगे बढ़ते कदम इस यात्रा की सबसे खास तस्वीर रहे। मौसम ने लोगों को रोकने की कोशिश जरूर की, लेकिन देशभक्ति के जज्बे के सामने बारिश भी फीकी नजर आई। भारत माता चौक पर माल्यार्पण और गगनभेदी जयकारों के साथ यात्रा का समापन हुआ।


| यात्रा की खास बातें

हाइडिल तिराहा से शुरुआत → बारिश के बीच तिरंगा यात्रा → भारत माता के जयकारों से गूंजा जिला मुख्यालय → भारत माता चौक पर माल्यार्पण → गगनभेदी नारों के साथ यात्रा का समापन

 

एक सेंटर मिला तो पूरे जिले की जांच क्यों नहीं?

सिद्धार्थनगर में अल्ट्रासाउंड सेंटरों की निगरानी पर बड़ा सवाल, कार्रवाई के बावजूद दोबारा संचालन की शिकायत ने बढ़ाई चिंता

सिद्धार्थनगर। जनपद में अल्ट्रासाउंड सेंटरों के संचालन और उनकी निगरानी व्यवस्था को लेकर एक बार फिर बड़ा सवाल सामने आया है। खुनियांव ब्लॉक के बढ़या चौराहे पर नोडल अधिकारी के आकस्मिक निरीक्षण में एक अल्ट्रासाउंड सेंटर के बिना पंजीकरण संचालित पाए जाने की जानकारी सामने आने के बाद अब सवाल केवल एक सेंटर तक सीमित नहीं रह गया है।

जानकारी के अनुसार सिद्धार्थ पैथालॉजी एंड दीक्षा पाली क्लिनिक में निरीक्षण के दौरान अल्ट्रासाउंड संबंधी गतिविधियां संचालित मिलीं। उपलब्ध जानकारी में यह भी बताया गया है कि संबंधित संस्थान के विरुद्ध पूर्व में सीलिंग और मुकदमे जैसी कार्रवाई की जा चुकी है। इसके बावजूद दोबारा संचालन की स्थिति सामने आने की बात कही जा रही है।

यदि पूर्व में कार्रवाई हुई थी, तो फिर संचालन कैसे शुरू हुआ?

यही इस पूरे मामले का सबसे बड़ा सवाल है।

अब पूरे सिद्धार्थनगर की हो आकस्मिक जांच

एक स्थान पर निरीक्षण के दौरान यदि नियमों से जुड़ी कमी सामने आती है, तो क्या जिले के बाकी अल्ट्रासाउंड सेंटरों का भी अचानक और निष्पक्ष भौतिक सत्यापन नहीं होना चाहिए?

कितने सेंटर पंजीकृत हैं?

कितनों का पंजीकरण वैध है?

कितने सेंटरों पर पूर्व में कार्रवाई हो चुकी है?

कार्रवाई के बाद उनकी वर्तमान स्थिति क्या है?

और क्या पंजीकरण से संबंधित रिकॉर्ड तथा मौके की वास्तविक स्थिति एक-दूसरे से मेल खाते हैं?

इन सवालों का जवाब कागजों से नहीं, बल्कि जिलेभर में आकस्मिक निरीक्षण से ज्यादा स्पष्ट हो सकता है।

PCPNDT अधिनियम के तहत अल्ट्रासाउंड/इमेजिंग सुविधा वाले संबंधित केंद्रों का पंजीकरण आवश्यक है और Appropriate Authority को निरीक्षण तथा नियमों के उल्लंघन की स्थिति में कार्रवाई के अधिकार दिए गए हैं।

दो बार कार्रवाई के बाद तीसरी बार संचालन? जांच में सामने आएगा सच

यदि किसी केंद्र के विरुद्ध पहले सीलिंग अथवा मुकदमे की कार्रवाई हुई थी और बाद में उसी स्थान पर किसी दूसरे नाम से संचालन की बात सामने आ रही है, तो यह रिकॉर्ड के आधार पर जांच का विषय है।

क्या नया पंजीकरण हुआ था?

क्या मशीन और संस्था का विवरण विभागीय रिकॉर्ड में दर्ज था?

क्या पूर्व कार्रवाई के बाद दोबारा निरीक्षण हुआ?

यदि हुआ तो उसकी रिपोर्ट क्या थी?

इन सवालों के जवाब संबंधित विभाग के रिकॉर्ड से ही सामने आने चाहिए।

‘बाबू संभाल रहे हैं’—तो अंतिम जवाबदेही किसकी?

स्वास्थ्य विभाग से जुड़े कामकाज को लेकर अक्सर यह बात सुनने को मिलती है कि “रिकॉर्ड और काम तो बाबू संभाल रहे हैं।”

लेकिन जनहित का सवाल यह है कि यदि पंजीकरण, नवीनीकरण, निरीक्षण और कार्रवाई से जुड़े रिकॉर्ड किसी कर्मचारी के स्तर पर रखे जाते हैं, तो अंतिम निगरानी और जवाबदेही किस अधिकारी की है?

यह किसी कर्मचारी पर आरोप लगाने का सवाल नहीं है।

सवाल सिर्फ इतना है कि व्यवस्था में जिम्मेदारी की स्पष्ट रेखा क्या है और यदि कोई अनधिकृत संचालन सामने आता है तो इसकी जवाबदेही तय कैसे होती है?

क्या सिर्फ एक जगह जांच से पूरी तस्वीर सामने आएगी?

सिद्धार्थनगर में केवल अल्ट्रासाउंड सेंटर ही नहीं, बल्कि निजी अस्पताल, क्लीनिक, पैथालॉजी और अन्य स्वास्थ्य प्रतिष्ठानों की भी नियमानुसार जांच की आवश्यकता पर सवाल उठ रहे हैं।

यदि प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ब्लॉकवार व्यापक आकस्मिक निरीक्षण कराए और उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक करे, तो जिले की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।

कहां पंजीकरण वैध है, कहां नवीनीकरण लंबित है, कहां पूर्व में कार्रवाई हुई और कार्रवाई के बाद क्या स्थिति है—इन सभी सवालों का रिकॉर्ड आधारित जवाब जनता के सामने आना चाहिए।

सीएमओ कार्यालय से जुड़े सवाल—आरोप नहीं, जवाब की मांग

इस पूरे मामले में निगरानी, पंजीकरण और कार्रवाई से जुड़े काम स्वास्थ्य विभाग के अधिकार क्षेत्र से संबंधित हैं। इसलिए यह स्वाभाविक है कि जवाबदेही को लेकर सवाल विभागीय स्तर पर भी उठेंगे।

लेकिन FT News Digital किसी अधिकारी या कर्मचारी पर मिलीभगत, संरक्षण अथवा भ्रष्टाचार का आरोप नहीं लगा रहा है।

हमारा सवाल सीधा है—

अगर पूर्व कार्रवाई के बावजूद किसी केंद्र के दोबारा संचालित होने की बात सामने आती है, तो विभागीय रिकॉर्ड में इसकी निगरानी कैसे हुई?

अगर जिले में कहीं और भी ऐसी शिकायतें हैं, तो क्या उनका सत्यापन कराया जाएगा?

और अगर जांच में अनियमितता मिलती है, तो क्या जिम्मेदारी तय होगी?

यही वह सवाल है जिसका जवाब सीएमओ कार्यालय और संबंधित Appropriate Authority के आधिकारिक पक्ष से जनता को मिलना चाहिए।

FT NEWS DIGITAL की पड़ताल का सवाल

एक जगह कमी सामने आई है—अब पूरे सिद्धार्थनगर की आकस्मिक जांच कब होगी?

क्योंकि मामला किसी एक क्लिनिक का नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी व्यवस्था और जनता के भरोसे का है।

यदि व्यवस्था सही है तो व्यापक जांच से यह साबित हो जाएगा।

यदि कहीं कमी है तो कार्रवाई से वह सामने आ जाएगी।

जनता को आरोप नहीं, रिकॉर्ड चाहिए।

सवाल नहीं, जवाब चाहिए।

और कार्रवाई हुई है तो उसका असर जमीन पर भी दिखाई देना चाहिए।

नोट: यह रिपोर्ट उपलब्ध जानकारी और निरीक्षण से संबंधित दावों के आधार पर तैयार की गई है। किसी व्यक्ति, अधिकारी, कर्मचारी या संस्था पर मिलीभगत, भ्रष्टाचार या संरक्षण का निष्कर्ष नहीं लगाया जा रहा है। संबंधित विभाग/संस्था का आधिकारिक पक्ष प्राप्त होने पर उसे खबर में शामिल किया जाएगा। अंतिम तथ्य संबंधित जांच और सक्षम प्राधिकारी की रिपोर्ट से ही निर्धारित होंगे।

नेपाल से भारत आ रही बाइक से 1.63 लाख रुपये बरामद, दो पकड़े गए

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सिद्धार्थनगर/बढ़नी। भारत-नेपाल सीमा पर अवैध गतिविधियों की रोकथाम के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत 43वीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल को बड़ी कार्रवाई में सफलता मिली है। सीमा चौकी कपसिहवा की नाका पार्टी ने नेपाल से भारत की ओर आ रहे दो व्यक्तियों को मोटरसाइकिल समेत पकड़ा। तलाशी के दौरान उनके पास से 1 लाख 63 हजार रुपये की भारतीय मुद्रा बरामद होने की बात एसएसबी ने कही है।

 

एसएसबी के अनुसार, 13 अगस्त 2026 को सीमा चौकी कपसिहवा की टीम आसूचना के आधार पर नाका ड्यूटी पर तैनात थी। इसी दौरान अनधिकृत मार्ग से एक मोटरसाइकिल पर सवार दो व्यक्तियों के नेपाल से भारत की ओर आने की जानकारी मिली।

 

नाका पार्टी ने दोनों व्यक्तियों को रोककर तलाशी ली। तलाशी के दौरान उनके पास से कुल ₹1,63,000 की भारतीय मुद्रा बरामद हुई। एसएसबी के मुताबिक, पूछताछ के दौरान दोनों व्यक्ति बरामद धनराशि से संबंधित कोई वैध कागजात प्रस्तुत नहीं कर सके।

 

पकड़े गए व्यक्तियों ने अपना नाम इब्राहीम पठान पुत्र रोजन अली, उम्र 26 वर्ष, निवासी हरदौना, जिला कपिलवस्तु, नेपाल तथा दूसरे ने रामू प्रसाद यादव पुत्र राजाराम यादव, उम्र 32 वर्ष, निवासी गोपालपुर, थाना तौलीहवा, जिला कपिलवस्तु, नेपाल बताया।

 

एसएसबी के मुताबिक, बरामद ₹1,63,000 की भारतीय मुद्रा, मोटरसाइकिल और दोनों व्यक्तियों को अग्रिम विधिक कार्रवाई के लिए सीमा शुल्क कार्यालय बढ़नी, जिला सिद्धार्थनगर को सुपुर्द कर दिया गया है।

 


क्या-क्या बरामद

 

– भारतीय मुद्रा — ₹1,63,000

– एक मोटरसाइकिल

– दो व्यक्ति पकड़े गए

– कार्रवाई — 43वीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल, सीमा चौकी कपसिहवा

 

सीमा पर एसएसबी की निगरानी तेज

 

एसएसबी के अनुसार भारत-नेपाल सीमा पर तस्करी और अन्य अवैध गतिविधियों की रोकथाम के लिए नाका, पेट्रोलिंग और अन्य अभियान लगातार चलाए जा रहे हैं। बल का कहना है कि अवैध मुद्रा, नशीली दवाओं, मानव तस्करी, वन्य जीव एवं अन्य प्रतिबंधित वस्तुओं की तस्करी पर प्रभावी कार्रवाई की जा रही है।

 

सारांश

 

भारत-नेपाल सीमा पर 43वीं वाहिनी एसएसबी की कपसिहवा सीमा चौकी की नाका पार्टी ने दो व्यक्तियों को मोटरसाइकिल समेत पकड़ा। एसएसबी के मुताबिक तलाशी में ₹1.63 लाख भारतीय मुद्रा बरामद हुई, जिसके संबंध में दोनों कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके। आगे की कार्रवाई के लिए दोनों को सीमा शुल्क कार्यालय बढ़नी को सौंप दिया गया।

 

टिप्पणी

 

भारत-नेपाल सीमा पर अवैध गतिविधियों की रोकथाम सुरक्षा और आर्थिक व्यवस्था दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण है। इस कार्रवाई में बरामद धनराशि के स्रोत और उसके सीमा पार ले जाने से जुड़े तथ्यों की आगे की जांच संबंधित सीमा शुल्क विभाग द्वारा की जाएगी। अंतिम निष्कर्ष जांच और विधिक प्रक्रिया के आधार पर ही सामने आएगा।

 

 

25 हजार का इनामी वांछित गिरफ्तार, तमंचा-कारतूस बरामद

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सिद्धार्थनगर। अपराध एवं अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत सिद्धार्थनगर पुलिस को बड़ी कार्रवाई में सफलता मिलने का दावा किया गया है। जनपदीय एसओजी, सर्विलांस सेल और थाना भवानीगंज पुलिस की संयुक्त टीम ने उत्तर प्रदेश गैंगस्टर एक्ट के एक मामले में वांछित 25 हजार रुपये के इनामी अभियुक्त को गिरफ्तार किया है।

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पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार अभियुक्त की पहचान मोहम्मद आरिफ पुत्र जुम्मन अहमद, निवासी भरवटिया मुस्तकहम, थाना डुमरियागंज, जनपद सिद्धार्थनगर के रूप में हुई है।

पुलिस की ओर से जारी प्रेस नोट के अनुसार, संयुक्त टीम ने 13 अगस्त 2026 को भवानीगंज थाना क्षेत्र के बिथरिया तिराहे से अभियुक्त को गिरफ्तार किया। तलाशी के दौरान उसके कब्जे से 315 बोर का एक देशी तमंचा और एक जिंदा कारतूस बरामद किए जाने की बात पुलिस ने कही है।

पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार व्यक्ति थाना डुमरियागंज में दर्ज मु0अ0सं0 26/2026, धारा 2(ख)(1), 3(1) उत्तर प्रदेश गैंगस्टर एक्ट से संबंधित मामले में वांछित था और उसकी गिरफ्तारी पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित था।

एसओजी-सर्विलांस और भवानीगंज पुलिस की संयुक्त कार्रवाई

यह कार्रवाई वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. अभिषेक महाजन के निर्देशन में, अपर पुलिस अधीक्षक प्रशांत कुमार प्रसाद के निर्देशन तथा क्षेत्राधिकारी डुमरियागंज बृजेश कुमार वर्मा के पर्यवेक्षण में की गई।

संयुक्त टीम में भवानीगंज थानाध्यक्ष विजय शंकर सिंह, एसओजी प्रभारी चन्द्रकान्त पाण्डेय, सर्विलांस सेल प्रभारी हरेंद्र चौहान सहित एसओजी, सर्विलांस सेल और थाना भवानीगंज के पुलिसकर्मी शामिल रहे।

पुलिस ने बताया कि गिरफ्तारी और बरामदगी के बाद आवश्यक विधिक कार्रवाई पूरी करते हुए अभियुक्त को माननीय न्यायालय के समक्ष पेश किया गया।


25 हजार का इनाम, गैंगस्टर एक्ट में वांछित

पुलिस के अनुसार गिरफ्तार मोहम्मद आरिफ गैंगस्टर एक्ट के मामले में वांछित था। उसकी गिरफ्तारी पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित था। भवानीगंज क्षेत्र में संयुक्त पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए उसे पकड़ा और तलाशी में 315 बोर का देशी तमंचा व एक जिंदा कारतूस बरामद करने का दावा किया है।

सारांश

सिद्धार्थनगर पुलिस के मुताबिक गैंगस्टर एक्ट के मामले में वांछित 25 हजार रुपये के इनामी अभियुक्त को एसओजी, सर्विलांस सेल और भवानीगंज पुलिस की संयुक्त टीम ने गिरफ्तार किया। पुलिस ने उसके कब्जे से 315 बोर का देशी तमंचा और एक जिंदा कारतूस बरामद करने की बात कही है।

खबर पर टिप्पणी

अपराध के खिलाफ पुलिस की सक्रियता किसी भी क्षेत्र में कानून-व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। इस कार्रवाई में एसओजी, सर्विलांस और स्थानीय थाना पुलिस की संयुक्त भूमिका सामने आई है। हालांकि, किसी भी आरोपी को न्यायालय के अंतिम निर्णय से पहले दोषी नहीं माना जा सकता। ऐसे मामलों में पुलिस की कार्रवाई के साथ न्यायिक प्रक्रिया का पालन भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

अपराध के खिलाफ पुलिस की सक्रियता किसी भी क्षेत्र में कानून-व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। इस कार्रवाई में एसओजी, सर्विलांस और स्थानीय थाना पुलिस की संयुक्त भूमिका सामने आई है। हालांकि, किसी भी आरोपी को न्यायालय के अंतिम निर्णय से पहले दोषी नहीं माना जा सकता। ऐसे मामलों में पुलिस की कार्रवाई के साथ न्यायिक प्रक्रिया का पालन भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

 

सरकारी पोखरी पर कब्जे की शिकायत से गरमाया मामला, जांच के आदेश से बढ़ी हलचल

 

सिद्धार्थनगर में सरकारी जमीनों की सुरक्षा पर उठे सवाल, प्रशासन की जांच पर टिकी निगाहें

सिद्धार्थनगर। नगर पालिका क्षेत्र में सरकारी पोखरी और कथित अतिक्रमण को लेकर मामला अब प्रशासन के संज्ञान में पहुंच गया है। भाजपा जिला अध्यक्ष दीपक मौर्य ने जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन को लिखित शिकायत देकर संबंधित पोखरी की जमीनों की पैमाइश कराने, अभिलेखों की जांच करने तथा यदि अतिक्रमण की पुष्टि हो तो नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है।

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शिकायत में सिविल लाइन स्थित शास्त्री नगर में पंजाब नेशनल बैंक के सामने सरकारी पोखरी की जमीन पर कुछ लोगों द्वारा कथित रूप से कब्जे का प्रयास किए जाने का उल्लेख किया गया है। इसके अलावा शास्त्री नगर क्षेत्र में पोखरी की जमीन पर कथित कब्जे और निर्माण को लेकर भी शिकायत की गई है।

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वाल्मीकि नगर की पोखरी को लेकर भी शिकायत

वार्ड संख्या-1 वाल्मीकि नगर निवासी बालमुकुंद त्रिपाठी ने भी पोखरी की जमीन के दायरे को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि क्षेत्र में पहले करीब पांच बीघे की पोखरी बताई जाती थी, लेकिन समय के साथ इसका दायरा कम हुआ है।

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उन्होंने गाटा संख्या 408, 409 और 410 से संबंधित जमीन को लेकर भी शिकायत की है और कुछ लोगों पर कथित रूप से पोखरी की जमीन पर कब्जा करने के आरोप लगाए हैं।

बालमुकुंद त्रिपाठी का कहना है कि इस संबंध में उन्होंने संबंधित अधिकारियों से शिकायतें की हैं। उन्होंने कुछ लोगों की ओर से धमकी दिए जाने का भी आरोप लगाया है।

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हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और किसी व्यक्ति को इन आरोपों के आधार पर दोषी नहीं माना जा सकता।

DM ने गठित की जांच टीम

मामले में जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन ने कहा कि प्रकरण उनके संज्ञान में आया है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए अपर जिलाधिकारी न्यायिक की अगुवाई में टीम गठित किए जाने की जानकारी दी।

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जिलाधिकारी के अनुसार जांच टीम मौके पर जाकर पूरे प्रकरण की जांच-पड़ताल करेगी। जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद तथ्यों के आधार पर संबंधित के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

अब प्रशासनिक जांच में यह स्पष्ट होगा कि शिकायत में जिन जमीनों का उल्लेख किया गया है, उनका राजस्व अभिलेखों में वास्तविक दर्जा क्या है और मौके पर उनकी स्थिति क्या है।


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सबसे बड़ा सवाल

सरकारी पोखरी की जमीन आखिर कितनी सुरक्षित?

पोखरी और सरकारी जमीन से जुड़े मामलों में केवल शिकायत या आरोप के आधार पर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है। वास्तविक स्थिति राजस्व अभिलेख, पैमाइश और मौके की जांच से ही स्पष्ट हो सकती है।

यदि जांच में सरकारी जमीन पर अतिक्रमण की पुष्टि होती है तो नियमानुसार कार्रवाई और जमीन की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की अगली जिम्मेदारी होगी। वहीं यदि आरोप सही नहीं पाए जाते हैं तो जांच के जरिए स्थिति भी स्पष्ट होनी चाहिए।

सारांश

सिद्धार्थनगर में सरकारी पोखरी की जमीन पर कथित कब्जे को लेकर शिकायत के बाद प्रशासन सक्रिय हुआ है। भाजपा जिला अध्यक्ष दीपक मौर्य ने जिलाधिकारी से शिकायत कर पैमाइश और कार्रवाई की मांग की है। वाल्मीकि नगर निवासी बालमुकुंद त्रिपाठी ने भी पोखरी की जमीन और गाटा संख्या 408, 409 व 410 को लेकर शिकायत की है। जिलाधिकारी ने ADM न्यायिक की अगुवाई में जांच टीम गठित करने की बात कही है। अब जांच रिपोर्ट पर सबकी नजर है।

संपादकीय टिप्पणी

सरकारी जमीन किसी व्यक्ति की निजी संपत्ति नहीं होती। पोखरी और तालाब जैसी सार्वजनिक संपत्तियां केवल आज के लिए नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी महत्वपूर्ण हैं।

ऐसे मामलों में सबसे जरूरी है कि कार्रवाई आरोप या प्रभाव के आधार पर नहीं, बल्कि राजस्व रिकॉर्ड, मौके की पैमाइश और निष्पक्ष जांच के आधार पर हो।

अगर जांच में अतिक्रमण मिलता है तो कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए और अगर शिकायत में लगाए गए आरोप सही नहीं मिलते तो वह तथ्य भी सामने आना चाहिए।

कानून सबके लिए समान है—सरकारी जमीन की सुरक्षा भी इसी सिद्धांत पर होनी चाहिए।

 

सिद्धार्थनगर में लोधी समाज की नई पहल, गांव-गांव पहुंच रहा जागरूकता का संदेश

अवंती बाई लोधी जयंती और कल्याण सिंह पुण्यतिथि कार्यक्रम को लेकर जनसंपर्क तेज, सदस्यता अभियान के साथ लगाए जा रहे जागरूकता बोर्ड


सिद्धार्थनगर। अखिल भारतीय लोधी राजपूत कल्याण महासभा की ओर से जिले में सामाजिक जागरूकता और संगठन विस्तार का अभियान तेज किया गया है। आगामी 16 अगस्त को वीरांगना महारानी अवंती बाई लोधी जयंती तथा 21 अगस्त को स्वर्गीय कल्याण सिंह की पुण्यतिथि को लेकर समाज के लोगों के बीच जनसंपर्क किया जा रहा है। इसी क्रम में गांव-गांव पहुंचकर लोगों को संगठन से जोड़ने और महापुरुषों के विचारों से प्रेरणा लेने का संदेश दिया जा रहा है।


सिद्धार्थनगर में अखिल भारतीय लोधी राजपूत कल्याण महासभा की गतिविधियां लगातार बढ़ती नजर आ रही हैं। संगठन की ओर से सामाजिक एकजुटता, जागरूकता और समाज के युवाओं को शिक्षा एवं सामाजिक प्रगति की दिशा में आगे बढ़ाने को लेकर जनसंपर्क अभियान चलाया जा रहा है।

इसी अभियान के तहत अलग-अलग स्थानों पर जागरूकता एवं सदस्यता संबंधी बोर्ड लगाए जा रहे हैं, जिन पर संगठन से जुड़ने वाले लोगों के नाम अंकित किए जा रहे हैं। तस्वीरों में महासभा से जुड़े पदाधिकारी और कार्यकर्ता बोर्ड लगाते तथा स्थानीय लोगों से संवाद करते दिखाई दे रहे हैं।

संगठन के जिला अध्यक्ष अर्जुन सिंह लोधी के नेतृत्व में चल रहे इस अभियान का उद्देश्य समाज के लोगों को एक मंच पर जोड़ना और अपने महापुरुषों के जीवन, संघर्ष तथा विचारों से प्रेरणा लेने के लिए जागरूक करना बताया गया है।

बोर्ड पर वीरांगना महारानी अवंती बाई लोधी सहित समाज और देश के प्रेरणास्रोत महापुरुषों के चित्र लगाए गए हैं। इनके माध्यम से संगठन की ओर से समाज को अपने गौरवशाली इतिहास और महापुरुषों के योगदान से जोड़ने का संदेश दिया जा रहा है।

16 अगस्त को प्रस्तावित कार्यक्रम

महासभा की ओर से 16 अगस्त को महारानी अवंती बाई लोधी जयंती समारोह आयोजित करने की तैयारी की जा रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार जिला मुख्यालय में कार्यक्रम के साथ नगर पालिका क्षेत्र से रोड शो और जनसभा का कार्यक्रम प्रस्तावित है।

वहीं 21 अगस्त को स्वर्गीय कल्याण सिंह की पुण्यतिथि के अवसर पर लखनऊ में होने वाले कार्यक्रम में सिद्धार्थनगर से बड़ी संख्या में लोगों को पहुंचाने की तैयारी की जा रही है। संगठन की ओर से दो हजार से अधिक लोगों के लखनऊ पहुंचने का लक्ष्य बताया गया है।

इसके लिए कार्यकर्ताओं की ओर से गांव-गांव संपर्क किया जा रहा है और समाज के लोगों को कार्यक्रम की जानकारी दी जा रही है।

शिक्षा से राजनीति तक आगे बढ़ने का संदेश

महासभा से जुड़े लोगों का कहना है कि समाज की तरक्की केवल संगठन की संख्या बढ़ाने से नहीं, बल्कि शिक्षा, सामाजिक जागरूकता, आपसी सहयोग और युवाओं की भागीदारी से होगी।

संगठन की ओर से स्वर्गीय कल्याण सिंह के विचारों और समाज के अन्य महापुरुषों के संघर्ष को नई पीढ़ी तक पहुंचाने पर भी जोर दिया जा रहा है।

अभियान में शामिल कार्यकर्ताओं का कहना है कि सिद्धार्थनगर में लोधी समाज के लोग लगातार संगठन से जुड़ रहे हैं और आने वाले समय में सामाजिक क्षेत्र में अपनी भागीदारी और मजबूत करने का प्रयास किया जाएगा।


| समाज के लिए संदेश

“महापुरुषों का सम्मान तभी सार्थक, जब उनके विचारों को जीवन में उतारें”

संगठन की यह पहल केवल कार्यक्रम आयोजित करने तक सीमित न रहकर यदि शिक्षा, रोजगार, सामाजिक सहयोग, युवाओं के मार्गदर्शन और जरूरतमंद परिवारों की मदद जैसे विषयों से भी जुड़ती है, तो इसका व्यापक सामाजिक प्रभाव दिखाई दे सकता है।

समाज की असली ताकत संख्या में नहीं, बल्कि शिक्षित, जागरूक और एक-दूसरे के सहयोगी समाज के निर्माण में है।

सारांश

सिद्धार्थनगर में अखिल भारतीय लोधी राजपूत कल्याण महासभा का जनसंपर्क अभियान तेज। 16 अगस्त को महारानी अवंती बाई लोधी जयंती समारोह और रोड शो-जनसभा की तैयारी। 21 अगस्त को कल्याण सिंह पुण्यतिथि कार्यक्रम के लिए लखनऊ जाने की तैयारी। गांव-गांव लगाए जा रहे जागरूकता बोर्ड, नए सदस्यों को संगठन से जोड़ने का अभियान जारी।

संपादकीय टिप्पणी

किसी भी समाज की पहचान केवल उसके इतिहास से नहीं, बल्कि उसके वर्तमान प्रयासों और आने वाली पीढ़ी के भविष्य से होती है।

महापुरुषों की तस्वीरें लगाना और जयंती-पुण्यतिथि मनाना अपनी जगह महत्वपूर्ण है, लेकिन उनके विचारों को शिक्षा, सामाजिक सेवा, अनुशासन, समान अवसर और युवाओं के विकास से जोड़ना उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है।

सिद्धार्थनगर में चल रहा यह अभियान यदि इसी सोच के साथ आगे बढ़ता है और समाज के अधिक से अधिक लोग सकारात्मक सामाजिक कार्यों से जुड़ते हैं, तो निश्चित रूप से इसका लाभ आने वाली पीढ़ी को मिल सकता है।

एकजुट समाज वही है, जो अपने इतिहास का सम्मान करे, वर्तमान की जिम्मेदारी समझे और भविष्य की पीढ़ी के लिए रास्ता तैयार करे।

 

कहाँ हो मंगरू, अब कहाँ पर पढ़त हौ?

गुरु जी की कलम से — शिक्षा व्यवस्था पर करारा व्यंग्य

विशेष संवाददाता | FT News Digital


प्रदेश में शिक्षक पदों की रिक्तियों और भर्ती प्रक्रिया को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। एक ओर सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी की चर्चा है, तो दूसरी ओर बड़ी संख्या में शिक्षित अभ्यर्थी भर्ती प्रक्रिया का इंतजार कर रहे हैं। इसी तस्वीर को व्यंग्य के जरिए सामने लाता है मंगरू और गुरु जी का यह संवाद—जहाँ सवाल सीधा है, लेकिन जवाब तलाशना आसान नहीं।

सुबह-सुबह मिला मंगरू, माथे पर चिंता की लकीरें

सुबह-सुबह मंगरू मिला। चेहरे पर वही पुरानी मासूमियत थी, लेकिन माथे पर चिंता की लकीरें कुछ ज्यादा गहरी थीं।

मैंने पूछा—

“कहाँ हो मंगरू?”

वह बोला—

“यहीं हैं गुरुजी, लेकिन समझ में नहीं आ रहा कि अब पढ़ें कहाँ और पढ़ाएँ कौन?”

मैंने कहा—

“अरे, हुआ क्या?”

मंगरू ने जेब से अखबार निकाला और बोला—

“गुरुजी, खबरों में शिक्षक पदों की बड़ी संख्या में रिक्तियां बताई जा रही हैं। उधर लाखों पढ़े-लिखे लड़के-लड़कियां भर्ती का इंतजार कर रहे हैं। स्कूल में शिक्षक कम हैं और बेरोजगारों के घर में डिग्रियों का ढेर लगा है। अब आप ही बताइए—पढ़ा कहाँ जाए और पढ़ाए कौन?”

मैंने समझाते हुए कहा—

“धैर्य रखो मंगरू, भर्ती की प्रक्रिया और आयोग भी तो हैं।”

मंगरू मुस्कुराया और बोला—

“गुरुजी, हमारे यहां आयोग बनते-बनते बच्चे जवान हो जाते हैं और भर्ती निकलते-निकलते कई अभ्यर्थी उम्र की सीमा के करीब पहुंच जाते हैं।”

स्कूल में बच्चे हैं, शिक्षक कितने?

मंगरू की बात पूरी भी नहीं हुई थी कि उसने शिक्षा व्यवस्था की दूसरी तस्वीर सामने रख दी।

वह बोला—

“गुरुजी, गांव के स्कूल में कई कक्षाएं हैं, बच्चों की संख्या भी अच्छी-खासी है, लेकिन शिक्षक सीमित हैं। अब एक शिक्षक पढ़ाए या हाजिरी संभाले? दूसरा बच्चों को पढ़ाए या सरकारी रिपोर्ट और ऑनलाइन पोर्टल पूरा करे?”

यही सवाल आज कई सरकारी स्कूलों की कार्यप्रणाली को लेकर होने वाली चर्चाओं के केंद्र में रहता है।

शिक्षकों पर पढ़ाने के अलावा विभिन्न प्रशासनिक और गैर-शैक्षणिक कार्यों का बोझ होने की शिकायतें भी समय-समय पर सामने आती रही हैं। सवाल यह है कि यदि शिक्षक का ज्यादा समय रिपोर्टिंग, डाटा और दूसरे कामों में चला जाए तो कक्षा में बच्चों को पढ़ाने के लिए पर्याप्त समय कैसे मिले?

मोबाइल बना नया गुरु!

इतने में चाय वाला बोल पड़ा—

“बाबूजी, अब बच्चों को मास्टर से ज्यादा मोबाइल पढ़ाता है।”

मंगरू जोर से हंसा और बोला—

“सही कह रहे हो चच्चा। बच्चा स्कूल में गुरुजी को कम और घर में इंटरनेट को ज्यादा गुरु मानता है। फर्क सिर्फ इतना है कि इंटरनेट कभी छुट्टी नहीं लेता!”

मजाक के पीछे सवाल गंभीर था।

डिजिटल दौर में मोबाइल और इंटरनेट बच्चों के लिए जानकारी का बड़ा माध्यम बन चुके हैं। लेकिन तकनीक शिक्षक का विकल्प नहीं हो सकती। किताब, शिक्षक और तकनीक—तीनों का संतुलित इस्तेमाल ही शिक्षा को मजबूत बना सकता है।


| मंगरू का सवाल बड़ा है

“स्कूल है, बच्चे हैं, किताबें हैं…

फिर सवाल सिर्फ इतना क्यों है कि पढ़ाएगा कौन?”

मंगरू का कहना है कि शिक्षा सुधार की चर्चा केवल नीतियों और घोषणाओं तक सीमित न रहकर स्कूल की वास्तविक जरूरतों तक पहुंचनी चाहिए।

नियम बदलते हैं, बयान बदलते हैं… बच्चे का क्या?

मंगरू ने अखबार का एक और पन्ना खोला। उसमें शिक्षा से जुड़े नियमों और पाठ्यक्रम को लेकर चल रही चर्चाओं का जिक्र था।

वह बोला—

“गुरुजी, पढ़ाई के नियम बदल रहे हैं, व्यवस्थाएं बदल रही हैं, बयान बदल रहे हैं… लेकिन बच्चों की चिंता कौन करेगा?”

मैंने कहा—

“देखो मंगरू, शिक्षा में सुधार जरूरी है। व्यवस्था में बदलाव भी समय की जरूरत है।”

वह बोला—

“सुधार से किसे एतराज है गुरुजी? लेकिन सुधार किताबों में ज्यादा दिखाई देता है, जमीन पर कम। पहले स्कूल में पर्याप्त शिक्षक तो पहुंचें, फिर उनसे पूरी उम्मीद भी रखिए।”

उसकी बात में व्यंग्य जरूर था, लेकिन सवाल गंभीर था।


| समस्या की तस्वीर

शिक्षा व्यवस्था से जुड़े प्रमुख सवाल

रिक्त शिक्षक पदों को भरने की प्रक्रिया कितनी तेज हो?

भर्ती प्रक्रिया में लगने वाले समय को कैसे कम किया जाए?

शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से कितना मुक्त किया जाए?

ग्रामीण स्कूलों में शिक्षक और छात्र का अनुपात कैसे सुधरे?

डिजिटल शिक्षा के साथ शिक्षक की भूमिका कैसे मजबूत हो?

बच्चों की पढ़ाई को प्रशासनिक प्रक्रियाओं से ऊपर कैसे रखा जाए?

आयोग, कोर्ट और कैलेंडर के बीच अभ्यर्थी

मंगरू बोला—

“गुरुजी, पढ़े-लिखे नौजवान नौकरी के लिए तैयारी करते हैं। फिर भर्ती का इंतजार करते हैं। उसके बाद परीक्षा, परिणाम, दस्तावेज और कभी-कभी कानूनी प्रक्रिया… इसी बीच कैलेंडर बदलता रहता है।”

उसने मुस्कुराते हुए कहा—

“कई बार लगता है कि अभ्यर्थी नौकरी की तैयारी कम और इंतजार करने की तैयारी ज्यादा कर रहा है।”

व्यंग्य के इस अंदाज में भर्ती प्रक्रिया की देरी और अभ्यर्थियों की बेचैनी पर सवाल उठता है। हालांकि किसी भी भर्ती प्रक्रिया में नियम, पात्रता, परीक्षा और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन आवश्यक होता है।

असली सवाल कक्षा में बैठा बच्चा पूछता है

आज शिक्षा पर बहस खूब होती है। मंचों पर शिक्षा की योजनाओं की चर्चा होती है, सरकारी स्तर पर नई पहल और डिजिटल व्यवस्थाएं सामने आती हैं और अधिकारी अपने स्तर पर व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने की कोशिश करते हैं।

लेकिन असली सवाल तब सामने आता है, जब एक बच्चा स्कूल की कक्षा में बैठकर पूछता है—

“गुरुजी, आज कौन पढ़ाएगा?”

इस सवाल का जवाब किसी भाषण से नहीं, बल्कि स्कूल में मौजूद शिक्षक से मिलेगा।

मंगरू का आखिरी तीर

मंगरू जाने लगा तो मैंने पूछा—

“तो समाधान क्या है?”

वह पलटा और बोला—

“बहुत आसान है गुरुजी। पहले स्कूल में पर्याप्त शिक्षक भेजो, फिर शिक्षक को पढ़ाने दो। हर महीने नया आदेश, नया ऐप, नई रिपोर्ट और नया पोर्टल भेजने से पहले यह देखो कि बच्चे की कक्षा में गुरुजी मौजूद हैं या नहीं।”

मैं चुप रहा।

मंगरू ने जाते-जाते आखिरी तीर छोड़ा—

“सरकार कहती है—’सब पढ़ें, सब बढ़ें’… गांव वाले बस इतना पूछ रहे हैं—पहले यह तो बताइए, पढ़ाएगा कौन?”

मंगरू चला गया, लेकिन उसका सवाल वहीं रह गया।

स्कूल हैं, बच्चे हैं, किताबें हैं, योजनाएं हैं—अब जरूरत है कि कक्षा में पर्याप्त शिक्षक भी हों और उन्हें बच्चों को पढ़ाने का पूरा अवसर मिले।

गुरु जी की कलम से

यह व्यंग्य शिक्षा व्यवस्था से जुड़े व्यापक सवालों को सामने रखने का एक रचनात्मक प्रयास है। इसका उद्देश्य किसी व्यक्ति, संस्था या सरकार पर व्यक्तिगत आरोप लगाना नहीं, बल्कि व्यवस्था पर विचार करने के लिए सवाल उठाना है।

संक्षिप्त सारांश

शिक्षक पदों की रिक्तियों, भर्ती की प्रतीक्षा और सरकारी स्कूलों में शिक्षकों पर बढ़ते गैर-शैक्षणिक कार्यों को लेकर ‘गुरु जी की कलम से’ व्यंग्य के जरिए शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए गए हैं। मंगरू के संवाद के माध्यम से पूछा गया है कि जब स्कूल और बच्चे मौजूद हैं, तो कक्षा में पर्याप्त शिक्षक कब होंगे?

 

पोखरे और नुकीले बांसों के बीच फंसे बेजुबान के लिए देवदूत बनी पुलिस और ग्रामीण

जान जोखिम में डालकर बैल को सुरक्षित निकाला, मौके पर बुलाया गया पशु चिकित्सक

सिद्धार्थनगर। विशेष संवाददाता।थाना शिवनगर डिडई क्षेत्र के ग्राम तिलौला में पुलिस और ग्रामीणों की मानवीय पहल सामने आई है। यहां एक गहरे पोखरे में नुकीले बांसों और दलदल के बीच फंसे बैल को पुलिसकर्मियों और ग्रामीणों ने संयुक्त प्रयास से सुरक्षित बाहर निकाल लिया। रेस्क्यू के बाद मौके पर पशु चिकित्सक को बुलाकर बैल का उपचार कराया गया।

रातभर पोखरे में फंसा रहा बैल

प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम तिलौला स्थित एक पुराने पोखरे में रात के समय एक बैल गिर गया। पोखरे में दलदल और कटे हुए नुकीले बांस होने के कारण बैल उसमें बुरी तरह फंस गया। बताया गया कि पशु ने रातभर बाहर निकलने का प्रयास किया, लेकिन सफल नहीं हो सका।

सुबह ग्रामीणों को इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने तत्काल थाना शिवनगर डिडई पुलिस को सूचना दी।

सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस

सूचना मिलते ही थाना शिवनगर डिडई में तैनात मुख्य आरक्षी अजीत कुमार यादव, कांस्टेबल मोहम्मद नाजिस आजमी और कांस्टेबल बृजेश यादव मौके पर पहुंचे। पुलिस टीम ने स्थिति को देखते हुए ग्रामीणों को भी रेस्क्यू अभियान में शामिल किया।

इसी दौरान ग्राम तिलौला निवासी दर्पण गौंड़ ने साहस का परिचय देते हुए दलदल और पोखरे में उतरकर बैल को बाहर निकालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके साथ कुणाल मिश्रा, दिलीप मिश्रा, संदीप मिश्रा, मायाराम मिश्रा, उमेश चंद्र मिश्रा, आनंद मिश्रा और पिंकू शर्मा सहित अन्य ग्रामीणों ने भी सहयोग किया।

पुलिस और ग्रामीणों के घंटों चले प्रयास के बाद बैल को बांस और कीचड़ के बीच से सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

मौके पर बुलाया गया पशु चिकित्सक

रातभर पानी और ठंड में फंसे रहने के कारण बैल की हालत खराब बताई गई। इसके बाद कांस्टेबल मोहम्मद नाजिस आजमी की ओर से स्थानीय पशु चिकित्सक से संपर्क किया गया। चिकित्सक ने मौके पर पहुंचकर पशु की जांच की और आवश्यक उपचार एवं दवा दी।

इसके बाद ग्रामीणों से बातचीत कर बैल के स्वस्थ होने तक उसके खान-पान और देखभाल की जिम्मेदारी सौंपे जाने की बात सामने आई।


रेस्क्यू में इन लोगों ने निभाई भूमिका

पुलिस टीम:मुख्य आरक्षी अजीत कुमार यादवकांस्टेबल मोहम्मद नाजिस आजमीकांस्टेबल बृजेश यादव

 

ग्रामीण सहयोगी:दर्पण गौंड़, कुणाल मिश्रा, दिलीप मिश्रा, संदीप मिश्रा, मायाराम मिश्रा, उमेश चंद्र मिश्रा, आनंद मिश्रा और पिंकू शर्मा सहित अन्य ग्रामीण।

 

इंसानियत की मिसाल बना रेस्क्यू

 

बेजुबान पशु को बचाने के लिए पुलिसकर्मियों और ग्रामीणों के एक साथ आने की यह पहल क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। घटना ने यह संदेश दिया कि संकट की घड़ी में सामूहिक प्रयास और संवेदनशीलता से किसी बेजुबान की भी मदद की जा सकती है।

 

नोट: खबर में किसी व्यक्ति पर कोई आरोप नहीं लगाया गया है। घटनाक्रम उपलब्ध जानकारी और बताए गए रेस्क्यू प्रयासों के आधार पर प्रस्तुत किया गया है।

स्कूली बच्चों से लेकर भाजपा कार्यकर्ताओं तक दिखा देशभक्ति का जोश, ‘हर घर तिरंगा’ का दिया संदेश

स्कूली बच्चों से लेकर भाजपा कार्यकर्ताओं तक दिखा देशभक्ति का जोश, ‘हर घर तिरंगा’ का दिया संदे

सिद्धार्थनगर/कपिलवस्तु। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राष्ट्रप्रेम और एकता का संदेश लेकर विधानसभा कपिलवस्तु क्षेत्र के मोहाना चौक से भव्य तिरंगा यात्रा निकाली गई। हाथों में राष्ट्रीय ध्वज थामे स्कूली बच्चों, भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं एवं पदाधिकारियों ने यात्रा में सहभागिता की। तिरंगों से सजे माहौल में देशभक्ति के नारों के बीच यात्रा ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया।


मोहाना चौक से निकली तिरंगा यात्रा में स्कूली बच्चों की भागीदारी ने कार्यक्रम को खास बना दिया। बच्चों के साथ भाजपा कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों ने हाथों में तिरंगा लेकर राष्ट्रप्रेम, एकता और देश के प्रति सम्मान का संदेश दिया। आयोजकों के अनुसार, यात्रा का उद्देश्य लोगों को ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के प्रति जागरूक करना और राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान के लिए प्रेरित करना रहा।


प्रमुख सहभागिता

तिरंगा यात्रा में ये रहे प्रमुख रूप से मौजूद

मंडल प्रभारी रमेश मणि, सदर विधायक श्याम धनी रही के प्रतिनिधि सत्य प्रकाश रही जिलाध्यक्ष अल्पसंख्यक मोर्चा खालिक रहमान, मंडल अध्यक्ष नौगढ़ देहात सोनू गुप्ता सहित नरेंद्र पटेल, अब्दुल गनी, अरशद खान, वीरेंद्र कुमार, अनिल चौधरी, गगन श्रीवास्तव, अजय गुप्ता एवं होली प्रधान समेत अनेक भाजपा कार्यकर्ता एवं पदाधिकारी यात्रा में शामिल रहे। इनके साथ स्कूली बच्चों ने भी तिरंगा यात्रा में सहभागिता की।

तिरंगे के साथ कदम से कदम मिलाते नजर आए बच्चे

मोहाना चौक से शुरू हुई यात्रा के दौरान स्कूली बच्चों के हाथों में लहराता तिरंगा लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा। बच्चों की मौजूदगी ने कार्यक्रम में उत्साह और ऊर्जा का माहौल बनाया। वहीं भाजपा कार्यकर्ता एवं पदाधिकारी भी राष्ट्रीय ध्वज लेकर यात्रा में शामिल हुए।

यात्रा के दौरान देशभक्ति की भावना से जुड़े नारों के साथ लोगों को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर अपने घरों पर तिरंगा फहराने के लिए प्रेरित किया गया। ‘हर घर तिरंगा’ के संदेश के साथ निकली यात्रा ने राष्ट्रध्वज के प्रति सम्मान और राष्ट्रीय एकता की भावना को सामने रखा।

राष्ट्रप्रेम और एकता का संदेश

आयोजकों का कहना रहा कि तिरंगा केवल राष्ट्रीय ध्वज नहीं, बल्कि देश की एकता, अखंडता और गौरव का प्रतीक है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से नई पीढ़ी को देश के प्रति सम्मान और जिम्मेदारी की भावना से जोड़ने का प्रयास किया जाता है।

तिरंगा यात्रा में स्कूली बच्चों और कार्यकर्ताओं की सहभागिता ने यह संदेश भी दिया कि राष्ट्रप्रेम किसी एक वर्ग या आयु तक सीमित नहीं है, बल्कि हर नागरिक की साझा जिम्मेदारी है।

संपादकीय टिप्पणी

तिरंगा हाथ में हो तो जिम्मेदारी भी साथ होनी चाहिए। राष्ट्रीय ध्वज देश के गौरव और एकता का प्रतीक है। मोहाना चौक से निकली इस यात्रा में बच्चों की सहभागिता विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। ऐसे कार्यक्रम तभी सार्थक माने जाएंगे, जब तिरंगे के प्रति सम्मान और देश के प्रति जिम्मेदारी की भावना कार्यक्रम समाप्त होने के बाद भी लोगों के व्यवहार में दिखाई दे।

जय हिंद! 🇮🇳

वंदे मातरम्! 🇮🇳

 

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