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खेत की मिट्टी से निकला 2314 प्राचीन सिक्कों का खजाना, इतिहास के नए अध्याय की उम्मीद

नेपाल के कपिलवस्तु क्षेत्र में खेत की जुताई के दौरान मिट्टी के भीतर दबा तांबे का एक पारंपरिक करवा मिला, जिसमें 2314 प्राचीन सिक्के सुरक्षित पाए गए। विशेषज्ञों का मानना है कि वैज्ञानिक परीक्षण के बाद इन सिक्कों की वास्तविक आयु, धातु, कालखंड और ऐतिहासिक महत्व स्पष्ट हो सकेगा।

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नेपाल के कपिलवस्तु नगर क्षेत्र में खेत की जुताई के दौरान हुई एक असाधारण खोज ने इतिहासकारों और पुरातत्व विशेषज्ञों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। मिट्टी में दबे तांबे के पारंपरिक करवे से 2314 प्राचीन सिक्के मिलने के बाद पूरे क्षेत्र में उत्सुकता का माहौल है। बरामद सामग्री को सुरक्षित संरक्षण और वैज्ञानिक अध्ययन के लिए संग्रहालय के सुपुर्द कर दिया गया है।

सारांश (Summary)

खेत की खुदाई के दौरान मिला तांबे का पारंपरिक करवा।

करवे के भीतर मिले 2314 प्राचीन सिक्के।

सिक्कों को सुरक्षित रखकर वैज्ञानिक परीक्षण के लिए संग्रहालय भेजा गया।

विशेषज्ञ परीक्षण के बाद ही सिक्कों के कालखंड और ऐतिहासिक महत्व की आधिकारिक पुष्टि होगी।

खोज से कपिलवस्तु के समृद्ध ऐतिहासिक अतीत पर नए शोध की संभावना बढ़ी।

पूरी खबर

नेपाल के कपिलवस्तु क्षेत्र से सामने आई एक महत्वपूर्ण पुरातात्विक खोज ने इतिहास प्रेमियों और शोधकर्ताओं के बीच नई उत्सुकता पैदा कर दी है। स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार, नगरपालिक क्षेत्र के एक खेत में कृषि कार्य के दौरान मिट्टी के भीतर दबा तांबे का पारंपरिक करवा मिला। जब इसे सावधानीपूर्वक बाहर निकाला गया तो उसके भीतर बड़ी संख्या में प्राचीन सिक्के सुरक्षित मिले। बाद में गिनती करने पर इनकी संख्या 2314 पाई गई।

घटना की सूचना संबंधित प्रशासन और संग्रहालय विभाग को दी गई। इसके बाद अधिकारियों और विशेषज्ञों की टीम मौके पर पहुंची तथा बरामद करवे और सभी सिक्कों को अपने कब्जे में लेकर सुरक्षित संरक्षण के लिए संग्रहालय भेज दिया गया। अब इनका वैज्ञानिक परीक्षण, धातु विश्लेषण, संरक्षण और ऐतिहासिक अध्ययन किया जाएगा।

इतिहासकारों का मानना है कि कपिलवस्तु भारतीय उपमहाद्वीप की प्राचीन सभ्यताओं और भगवान गौतम बुद्ध के जीवन से जुड़े सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में से एक माना जाता है। इसी कारण यहां समय-समय पर पुरातात्विक महत्व की वस्तुएं मिलने की घटनाएं सामने आती रही हैं। हालांकि इस बार मिले सिक्कों का संबंध किस राजवंश, किस कालखंड या किस आर्थिक व्यवस्था से है, इसका अंतिम निष्कर्ष केवल विशेषज्ञों की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि प्राचीन सिक्के केवल मुद्रा नहीं होते, बल्कि वे अपने समय की अर्थव्यवस्था, व्यापार, शासन व्यवस्था, धार्मिक प्रभाव, कला और सांस्कृतिक विकास के महत्वपूर्ण साक्ष्य भी होते हैं। ऐसे सिक्कों के अध्ययन से इतिहास के उन अध्यायों पर भी प्रकाश पड़ सकता है, जिनके बारे में अभी सीमित जानकारी उपलब्ध है।

फिलहाल संग्रहालय प्रशासन ने सभी सिक्कों को सुरक्षित संरक्षण में रखा है। वैज्ञानिक परीक्षण और पुरातात्विक अध्ययन पूरा होने के बाद ही इनके वास्तविक काल, धातु संरचना, ऐतिहासिक महत्व और प्रामाणिकता पर आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक की जाएगी।

इतिहास से जुड़ी विशेष जानकारी

प्राचीन कपिलवस्तु को शाक्य गणराज्य की राजधानी माना जाता है और इसका उल्लेख बौद्ध ग्रंथों सहित अनेक ऐतिहासिक स्रोतों में मिलता है। यही कारण है कि यह क्षेत्र दक्षिण एशिया के महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थलों में गिना जाता है। यहां से समय-समय पर प्राप्त अवशेष इस क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत की ओर संकेत करते हैं। वर्तमान में मिले सिक्के भी इस विरासत की एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो सकते हैं, हालांकि इसका अंतिम निर्णय वैज्ञानिक जांच पूरी होने के बाद ही संभव होगा।


यह समाचार उपलब्ध सार्वजनिक सूचनाओं एवं प्रकाशित समाचारों के आधार पर तैयार किया गया है। सिक्कों की आयु, कालखंड, प्रामाणिकता एवं ऐतिहासिक महत्व संबंधी अंतिम पुष्टि संबंधित पुरातत्व विशेषज्ञों और संग्रहालय की आधिकारिक वैज्ञानिक जांच रिपोर्ट के बाद ही मानी जाएगी।

जिलाधिकारी ने की दिव्यांग सशक्तिकरण विभाग की समीक्षा

सिद्धार्थनगर। आज दिनांक-22.07.2026 को जिलाधिकारी महोदय की अध्यक्षता में दिव्यांग सशक्तिकरण विभाग द्वारा विभिन्न समितियां-जिला दिव्यांग समिति, जिला प्रबंधन समिति, यूनिक डिसेबिलिटी अनुश्रवण समिति, लोकल लेवल कमेटी की बैठक की गई। बैठक में जिलाधिकारी महोदय द्वारा दिव्यांगों को रोजगार से जोड़ने हेतु पर्पल फेयर (रोजगार मेला) लगाने के निर्देश दिए गए। मुख्य चिकित्साधिकारी को दिव्यांग बोर्ड में उचित पेयजल की व्यवस्था रैंप की व्यवस्था एवं https://swavlambancard.gov.in/ पोर्टल पर लम्बित आवेदनो को शत प्रतिशत निस्तारित करने हेतु आवश्यक कार्यवाही के निर्देश दिया गया। साथ ही जिलाधिकारी महोदय द्वारा मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय में दिव्यांग प्रकोष्ठ के गठन किए जाने के निर्देश दिया गया। बैठक में मुख्य चिकित्सा अधिकारी, पुलिस उप अधीक्षक नौगढ़, जिला दिव्यांगजन सशक्तिकरण अधिकारी, जिला सेवायोजन अधिकारी, जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी, जिला समाज कल्याण अधिकारी, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी, प्रबंधक संचित विकास संस्थान, प्रतिनिधि सिद्धार्थ महाविद्यालय कर्मचारीगण आदि उपस्थित रहे।

कमरे में फंदे से लटका मिला युवती का शव, जांच में जुटी पुलिस; परिजनों ने जताई आशंका

रुक्मणी उर्फ रेनू (19) का शव घर के कमरे में फंदे से लटका मिला। सूचना पर मिश्रौलिया पुलिस और फोरेंसिक टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजते हुए जांच शुरू कर दी है।


मृतका: रुक्मणी उर्फ रेनू (19 वर्ष)

पिता: कन्हैया निषाद

निवासी: ग्राम चेतीया टोला,मरवटीया थाना मिश्रौलिया, जनपद सिद्धार्थनगर

घटना: कमरे में फंदे से लटका मिला शव

पुलिस कार्रवाई: फोरेंसिक जांच, पंचनामा, पोस्टमार्टम

स्थिति: जांच जारी


सिद्धार्थनगर। जनपद के मिश्रौलिया थाना क्षेत्र के ग्राम चेतीया टोला,मरवटीया जनपद सिद्धार्थनगरमें मंगलवार सुबह 19 वर्षीय युवती का शव घर के कमरे में फंदे से लटका मिलने से पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई। सूचना मिलते ही पुलिस और फोरेंसिक टीम मौके पर पहुंची तथा आवश्यक साक्ष्य संकलित करने के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच सभी पहलुओं से की जा रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई होगी।

सारांश

19 वर्षीय युवती का कमरे में मिला शव।

मिश्रौलिया पुलिस व फोरेंसिक टीम ने किया घटनास्थल का निरीक्षण।

शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।

परिजनों ने कुछ आशंकाएं जताई हैं।

पुलिस ने किसी भी व्यक्ति की भूमिका की पुष्टि नहीं की है।

जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे होगी कार्रवाई।

पूरी खबर

सिद्धार्थनगर जनपद के ग्राम चेतीया टोला,मरवटीया थाना मिश्रौलिया, जनपद सिद्धार्थनगर में मंगलवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया, जब एक 19 वर्षीय युवती का शव उसके घर के कमरे में फंदे से लटका मिला। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय लोगों की भीड़ मौके पर जुट गई। सूचना पर मिश्रौलिया थाना पुलिस और फोरेंसिक टीम मौके पर पहुंची तथा घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया।

मृतका की पहचान रुक्मणी उर्फ रेनू (19 वर्ष) पुत्री कन्हैया निषाद निवासी ग्राम मरवटीया के रूप में हुई है। परिजनों के अनुसार सुबह जब काफी देर तक कमरे का दरवाजा नहीं खुला तो आवाज लगाने के बावजूद कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस की मौजूदगी में दरवाजा खुलवाया गया, जहां युवती का शव फंदे से लटका मिला।

पुलिस ने आवश्यक कानूनी कार्रवाई करते हुए घटनास्थल का निरीक्षण कराया और फोरेंसिक टीम से साक्ष्य संकलित कराए। इसके बाद पंचनामा भरकर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया।

मृतका के पिता कन्हैया निषाद ने बताया कि लगभग छह माह पूर्व उनकी पुत्री की मंगनी बांसी तहसील क्षेत्र के पूर्व गोनहा गांव निवासी युवक से हुई थी। उनका कहना है कि दोनों के बीच मोबाइल पर बातचीत होती थी, जिसको लेकर परिवार में आपत्ति भी थी। पिता ने घटना को लेकर कुछ आशंकाएं व्यक्त की हैं।

हालांकि, परिजनों द्वारा व्यक्त की गई आशंकाओं की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस ने फिलहाल किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध आरोप की पुष्टि नहीं की है और न ही किसी को घटना के लिए जिम्मेदार ठहराया है।

मिश्रौलिया पुलिस का कहना है कि परिजनों से प्राप्त तहरीर के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की गई है। फोरेंसिक टीम द्वारा साक्ष्य संकलित किए गए हैं तथा पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

टिप्पणी

यह घटना एक परिवार के लिए अत्यंत दुखद है। ऐसे मामलों में किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले जांच एजेंसियों को अपना कार्य पूरा करने देना आवश्यक है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फोरेंसिक साक्ष्य और जांच के निष्कर्ष ही घटना की वास्तविक परिस्थितियों को स्पष्ट करेंगे। पत्रकारिता की जिम्मेदारी भी यही है कि अपुष्ट आरोपों को तथ्य के रूप में प्रस्तुत करने के बजाय केवल जांच से प्रमाणित तथ्यों को ही प्रमुखता दी जाए।

(यह खबर कानूनी रूप से संतुलित है। इसमें किसी व्यक्ति को दोषी नहीं ठहराया गया है, बल्कि पुलिस और परिजनों के पक्ष को अलग-अलग स्पष्ट करते हुए जांच जारी होने का उल्लेख किया गया है।)

मनरेगा अनियमितता पर डीएम का बड़ा प्रहार, हरैया के प्रशासक हटाए गए

डीएम का बड़ा एक्शन: हरैया ग्राम पंचायत के प्रशासक पद से अब्दुल कयूम हटाए गए, मनरेगा अनियमितता मामले में कार्रवाई

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मनरेगा कार्यों में वित्तीय अनियमितता की जांच के बाद पहले वसूली का आदेश, धनराशि जमा न होने पर जिलाधिकारी ने प्रशासक पद से हटाया। सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) जोगिया को नया प्रशासक नामित किया गया।


सिद्धार्थनगर। जनपद के जोगिया विकासखंड अंतर्गत हरैया ग्राम पंचायत में मनरेगा कार्यों से जुड़े प्रकरण में जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जी.एन. ने बड़ा प्रशासनिक निर्णय लिया है। जारी आदेश के अनुसार निवर्तमान ग्राम प्रधान एवं वर्तमान प्रशासक अब्दुल कयूम को प्रशासक पद से तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया है। साथ ही ग्राम पंचायत का प्रभार सहायक विकास अधिकारी (पंचायत), जोगिया को सौंप दिया गया है।


सिद्धार्थनगर जिले की हरैया ग्राम पंचायत में मनरेगा कार्यों में कथित वित्तीय अनियमितताओं की शिकायत के बाद प्रशासनिक कार्रवाई तेज हो गई है। उपलब्ध आधिकारिक आदेश के अनुसार, शिकायत मिलने के बाद संबंधित प्रकरण की जांच कराई गई, जिसमें कुछ कार्यों में वित्तीय विचलन पाए जाने का उल्लेख किया गया।

जांच रिपोर्ट के आधार पर संबंधित पक्ष को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। अभिलेखों के अनुसार, अब्दुल कयूम ने अपने स्पष्टीकरण में आरोपों से असहमति जताते हुए प्राकृतिक परिस्थितियों और तकनीकी कारणों का हवाला दिया तथा अपने पक्ष में विभिन्न तर्क प्रस्तुत किए।

जिलाधिकारी द्वारा उपलब्ध अभिलेखों एवं स्पष्टीकरण का परीक्षण किए जाने के बाद 18 जून 2026 को ₹28,245.19 की वसूली का आदेश पारित किया गया। आदेश में यह भी उल्लेख है कि निर्धारित धनराशि जमा नहीं किए जाने के कारण आगे की प्रशासनिक कार्रवाई की गई।

इसके बाद जिलाधिकारी ने हरैया ग्राम पंचायत के प्रशासक पद से अब्दुल कयूम को तत्काल प्रभाव से हटाने का आदेश जारी किया। साथ ही शासनादेशों के अनुरूप सहायक विकास अधिकारी (पंचायत), जोगिया को ग्राम पंचायत का नया प्रशासक नामित कर दिया गया।

जारी आदेश में संबंधित अधिकारियों को यह भी निर्देशित किया गया है कि जांच में जिन बिंदुओं का उल्लेख किया गया है, उनके संबंध में नियमानुसार आवश्यक विधिक एवं प्रशासनिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

क्या है मामला?

शिकायत के आधार पर मनरेगा कार्यों की जांच कराई गई।

जांच में वित्तीय विचलन का उल्लेख किया गया।

संबंधित पक्ष से स्पष्टीकरण प्राप्त किया गया।

₹28,245.19 की वसूली का आदेश जारी हुआ।

धनराशि जमा न होने पर प्रशासक पद से हटाने की कार्रवाई की गई।

एडीओ (पंचायत) जोगिया को नया प्रशासक बनाया गया।

टिप्पणी (संपादकीय)

स्थानीय निकायों में विकास कार्यों की पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। यदि किसी मामले में अनियमितता के आरोप सामने आते हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच और नियमानुसार कार्रवाई प्रशासनिक व्यवस्था में विश्वास बनाए रखने के लिए आवश्यक मानी जाती है। वहीं संबंधित पक्ष को अपना पक्ष रखने का अवसर देना भी प्राकृतिक न्याय का महत्वपूर्ण सिद्धांत है।

कानूनी रूप से सुरक्षित नोट

यह समाचार जिलाधिकारी, सिद्धार्थनगर द्वारा जारी आधिकारिक आदेश तथा उपलब्ध प्रशासनिक अभिलेखों पर आधारित है। समाचार में वर्णित कार्रवाई प्रशासनिक आदेश के अनुसार प्रस्तुत की गई है। किसी भी अंतिम दायित्व या आपराधिक उत्तरदायित्व का निर्धारण सक्षम न्यायालय अथवा विधिक प्रक्रिया के अधीन होगा।

रातभर चली सपा की रणनीति बैठक, आंदोलन की अगली रूपरेखा पर हुआ मंथन

रातभर चली सपा की रणनीति बैठक, आंदोलन की अगली रूपरेखा पर हुआ मंथन

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अखिलेश यादव की गिरफ्तारी के विरोध के बीच संतकबीरनगर में जुटे नेता और कार्यकर्ता, संगठन की एकजुटता पर दिया जोर

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अर्जुन सिंह की एक रिपोर्ट


स्थान: संतकबीरनगर (खलीलाबाद)

मौका: समाजवादी पार्टी की रणनीतिक बैठक

मुख्य मुद्दा: आंदोलन की आगामी रणनीति और संगठनात्मक तैयारी


◆ देर रात तक चली रणनीतिक बैठक

◆ बड़ी संख्या में सपा नेता और कार्यकर्ता रहे मौजूद

◆ आगामी कार्यक्रमों और संगठनात्मक मजबूती पर चर्चा

◆ लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन जारी रखने पर जोर


समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की गिरफ्तारी के विरोध में चल रहे राजनीतिक घटनाक्रम के बीच संतकबीरनगर में मंगलवार देर रात समाजवादी पार्टी की एक महत्वपूर्ण रणनीतिक बैठक आयोजित की गई। बैठक में बड़ी संख्या में पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भाग लिया तथा आंदोलन की आगामी रूपरेखा और संगठनात्मक मजबूती को लेकर विस्तार से मंथन किया।

मुख्य समाचार

खलीलाबाद में आयोजित बैठक में जिले के वरिष्ठ पदाधिकारी, पूर्व जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे। बैठक के दौरान हालिया राजनीतिक घटनाक्रम पर चर्चा की गई तथा संगठन को बूथ स्तर तक और अधिक सक्रिय बनाने पर बल दिया गया।

बैठक में नेताओं ने कार्यकर्ताओं से संयम बनाए रखते हुए लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने की अपील की। साथ ही भविष्य में प्रस्तावित कार्यक्रमों को प्रभावी बनाने के लिए संगठनात्मक समन्वय बढ़ाने पर भी विचार-विमर्श हुआ।

सूत्रों के अनुसार बैठक में आंदोलन के अगले चरण, जनसंपर्क अभियान तथा कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारियों पर भी चर्चा की गई। हालांकि पार्टी की ओर से आगामी कार्यक्रमों की औपचारिक घोषणा अभी नहीं की गई है।

गौरतलब है कि इससे पहले जिले में समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया था, जिसके दौरान पुलिस और प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से कार्रवाई की थी। उसी क्रम में आयोजित यह बैठक राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

सारांश

संतकबीरनगर में देर रात आयोजित समाजवादी पार्टी की रणनीतिक बैठक में आंदोलन की आगामी दिशा, संगठन की मजबूती और कार्यकर्ताओं की भूमिका पर व्यापक चर्चा हुई। बैठक में लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से विरोध जारी रखने पर जोर दिया गया। फिलहाल पार्टी के अगले कार्यक्रमों की आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।

नोट (संपादकीय): यह समाचार उपलब्ध फोटो, वीडियो और संबंधित पक्षों से प्राप्त जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। किसी भी नए आधिकारिक बयान या प्रशासनिक अपडेट के सामने आने पर समाचार को अद्यतन किया जा सकता है।

जिले की अधिकांश नदियों का जलस्तर घटा, बाणगंगा अब भी खतरे के निशान से ऊपर

जिले की अधिकांश नदियों का जलस्तर घटा, बाणगंगा अब भी खतरे के निशान से ऊपर

बारिश थमने से मिली राहत, प्रशासन ने नदी किनारे रहने वालों को सतर्क रहने की दी सलाह


स्थान: सिद्धार्थनगर

रिपोर्ट: सिंचाई विभाग, 22 जुलाई 2026 (प्रातः 8 बजे)

इनबॉक्स (Info Box)

मुख्य राहत: अधिकांश नदियों का जलस्तर घटा।

चिंता: बाणगंगा नदी अभी भी खतरे के निशान से लगभग 5 सेंटीमीटर ऊपर।

निगरानी: सिंचाई विभाग और जिला प्रशासन की लगातार नजर।

अपील: नदी किनारे रहने वाले लोग सतर्क रहें, अफवाहों से बचें।


सिद्धार्थनगर जनपद में लगातार हुई बारिश के बाद अब राहत के संकेत मिलने लगे हैं। सिंचाई विभाग द्वारा जारी 22 जुलाई 2026 की प्रातः 8 बजे की गेज रिपोर्ट के अनुसार जिले की अधिकांश नदियों का जलस्तर पिछले 24 घंटे के मुकाबले घटा है। हालांकि बाणगंगा नदी अभी भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, जिसके चलते प्रशासन पूरी तरह सतर्क है और हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है।

मुख्य समाचार

सिंचाई विभाग की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार राप्ती, बूढ़ी राप्ती, कूड़ा, घोघी, जमुआर तथा अन्य प्रमुख नदियों के जलस्तर में गिरावट दर्ज की गई है। इससे बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद जगी है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि बाणगंगा नदी का जलस्तर अभी भी खतरे के निशान से लगभग 5 सेंटीमीटर ऊपर दर्ज किया गया है। ऐसे में नदी किनारे बसे गांवों और निचले इलाकों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है।

सिंचाई विभाग के अधिकारियों द्वारा सभी गेज स्थलों की नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है। वहीं जिला प्रशासन ने संबंधित विभागों को अलर्ट मोड में रहने और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक तैयारियां बनाए रखने के निर्देश दिए हैं।

प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि नदी किनारे अनावश्यक आवाजाही न करें, बच्चों को नदी के पास न जाने दें तथा केवल प्रशासन और सिंचाई विभाग द्वारा जारी आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें।

यदि आगामी दिनों में भारी वर्षा नहीं होती है तो जिले में बाढ़ की स्थिति में और सुधार आने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि प्रशासन का कहना है कि जलस्तर पर लगातार निगरानी जारी रहेगी।

सारांश

बारिश थमने के बाद सिद्धार्थनगर में राहत के संकेत मिले हैं और अधिकांश नदियों का जलस्तर घटा है। इसके बावजूद बाणगंगा नदी का जलस्तर अभी भी खतरे के निशान से ऊपर होने के कारण प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। लोगों से सावधानी बरतने और आधिकारिक निर्देशों का पालन करने की अपील की गई है।

— संवाददाता, FT News Digital | सिद्धार्थनगर

महिला उत्पीड़न पर जीरो टॉलरेंस का संदेश, 15 दिन में रिपोर्ट तलब

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महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों पर सख्त संदेश: सिद्धार्थनगर पहुंचीं राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष, 13 मामलों की जनसुनवाई, मेडिकल कॉलेज और जिला जेल का किया औचक निरीक्षण

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राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. बबिता सिंह चौहान ने महिला सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य और सरकारी योजनाओं की समीक्षा की। अधिकारियों को समयबद्ध कार्रवाई, मेडिकल कॉलेज और जिला जेल में व्यवस्थाएं सुधारने के दिए निर्देश। IMG 20260721 WA0699

स्थान: विकास भवन, सिद्धार्थनगर

अध्यक्षता: डॉ. बबिता सिंह चौहान, अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग

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मुख्य बिंदु: महिला जनसुनवाई, समीक्षा बैठक, मेडिकल कॉलेज व जिला जेल निरीक्षण


सुनवाई

🔹 15 दिन में निस्तारण रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश।

🔹 महिला सुरक्षा, तस्करी रोकने और हेल्पलाइन प्रचार पर विशेष जोर।

🔹 मेडिकल कॉलेज में स्वास्थ्य सेवाओं और साफ-सफाई की समीक्षा।

🔹 ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ के तहत कन्या जन्मोत्सव आयोजित।

🔹 जिला जेल में महिला बंदियों की सुविधाओं का निरीक्षण।

सिद्धार्थनगर।

महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग ने सिद्धार्थनगर में सख्त रुख अपनाया। आयोग की अध्यक्ष डॉ. बबिता सिंह चौहान ने सोमवार को विकास भवन सभागार में आयोजित महिला जनसुनवाई एवं जिला स्तरीय समीक्षा बैठक में महिला उत्पीड़न, घरेलू हिंसा, दहेज प्रताड़ना और छेड़छाड़ से जुड़े मामलों की सुनवाई करते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि हर मामले का निष्पक्ष, गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।

बैठक में कुल 13 प्रार्थना-पत्र प्रस्तुत किए गए। आयोग अध्यक्ष ने कहा कि किसी भी पीड़ित महिला के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए तथा पुलिस महिला उत्पीड़न के मामलों में तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करे। पति-पत्नी के विवादों में दोनों पक्षों को सुनकर कानून के अनुरूप समाधान निकालने पर भी जोर दिया गया।

उन्होंने महिलाओं की गुमशुदगी और मानव तस्करी की घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए पुलिस और संबंधित विभागों को प्रभावी निगरानी और रोकथाम के निर्देश दिए। साथ ही नुक्कड़ नाटक, चौपाल और जनजागरूकता अभियानों के माध्यम से महिलाओं को उनके अधिकारों और सरकारी योजनाओं की जानकारी देने पर बल दिया।

बैठक में समाज कल्याण, महिला कल्याण, पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभागों को निर्देश दिया गया कि पात्र लाभार्थियों तक योजनाओं का लाभ हर हाल में पहुंचे। आयुष्मान कार्ड बनवाने के लिए विशेष शिविर आयोजित करने और पात्र परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा से जोड़ने के भी निर्देश दिए गए।

शिक्षा और बालिका सुरक्षा पर विशेष फोकस

डॉ. बबिता सिंह चौहान ने बेसिक शिक्षा विभाग और माध्यमिक शिक्षा विभाग को निर्देश दिए कि विद्यालयों में शिक्षकों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित की जाए। स्कूलों में छात्राओं के लिए स्वच्छ महिला शौचालय, सैनिटरी पैड वेंडिंग मशीन, आत्मरक्षा प्रशिक्षण और महिला सुरक्षा संबंधी जागरूकता कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाएं। विद्यालय से बाहर रहने वाली बालिकाओं को कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों से जोड़ने पर भी विशेष जोर दिया गया।

मेडिकल कॉलेज का निरीक्षण

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बैठक के बाद आयोग अध्यक्ष ने माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज का निरीक्षण किया। उन्होंने इमरजेंसी वार्ड में भर्ती मरीजों से बातचीत कर स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी ली तथा डॉक्टरों को समय पर ड्यूटी करने और मरीजों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। अस्पताल परिसर में साफ-सफाई और बारिश के कारण हुए जलभराव को तत्काल दूर कराने के निर्देश भी दिए।

इसी दौरान ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ अभियान के तहत कन्या जन्मोत्सव मनाया गया। नवजात बालिकाओं की माताओं को उपहार वितरित किए गए तथा गर्भवती महिलाओं की गोदभराई और बच्चों का अन्नप्राशन कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। आयोग अध्यक्ष ने कन्या सुमंगला योजना का अधिक से अधिक लाभ पात्र परिवारों तक पहुंचाने पर बल दिया।

जिला जेल में महिला बंदियों से संवाद

इसके बाद आयोग अध्यक्ष ने जिला जेल का निरीक्षण किया। महिला बैरक में विचाराधीन महिला बंदियों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं तथा सिलाई-कढ़ाई प्रशिक्षण का अवलोकन किया। उन्होंने जेल प्रशासन को निर्देश दिए कि महिला बंदियों के नियमित स्वास्थ्य परीक्षण, स्वच्छता और आवश्यक सुविधाओं में किसी प्रकार की कमी न रहे।


सिद्धार्थनगर दौरे पर पहुंचीं उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. बबिता सिंह चौहान ने महिला जनसुनवाई में 13 मामलों की सुनवाई करते हुए अधिकारियों को 15 दिन के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट देने के निर्देश दिए। साथ ही मेडिकल कॉलेज और जिला जेल का निरीक्षण कर महिला सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया।

सारांश (Summary)

उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग ने सिद्धार्थनगर में महिला सुरक्षा और कल्याण से जुड़े मुद्दों पर प्रशासनिक तैयारियों की समीक्षा की। जनसुनवाई, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा व्यवस्था और जेल निरीक्षण के माध्यम से आयोग ने विभिन्न विभागों को समयबद्ध और संवेदनशील कार्रवाई के निर्देश दिए।

✍️ समाचार टिप्पणी (Editorial Comment)

महिलाओं से जुड़े मामलों में त्वरित सुनवाई और विभागीय जवाबदेही प्रशासनिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। हालांकि, इन निर्देशों का वास्तविक प्रभाव तभी दिखाई देगा जब निर्धारित समयसीमा में मामलों का निष्पक्ष निस्तारण हो और महिला सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं का लाभ जमीनी स्तर तक प्रभावी ढंग से पहुंचे। यह दौरा केवल समीक्षा तक सीमित न रहकर परिणामों में भी परिवर्तित हो, यही इसकी वास्तविक सफलता होगी।

17 साल से रुकी चकबंदी को मिलेगी रफ्तार? प्रशासन ने गांव पहुंचकर शुरू किया जनजागरूकता अभियान

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एडीएम (न्याय) डॉ. ज्ञान प्रकाश ने ग्रामीणों से किया संवाद, ड्रोन, रोवर और AI तकनीक से पारदर्शी चकबंदी का दिया भरोसा, आम सहमति से आगे बढ़ेगी प्रक्रिया।


स्थान: ग्राम सोनौरा तप्पा नादेपार, तहसील नौगढ़, सिद्धार्थनगर

कार्यक्रम: चकबंदी जागरूकता अभियान

सिद्धार्थनगर।

जनपद के ग्राम सोनौरा तप्पा नादेपार में वर्षों से रुकी चकबंदी प्रक्रिया को फिर से गति देने के उद्देश्य से प्रशासन ने जनजागरूकता अभियान शुरू कर दिया है। इसी क्रम में अपर जिलाधिकारी (न्याय) एवं उप संचालक चकबंदी डॉ. ज्ञान प्रकाश ने गांव पहुंचकर ग्रामीणों के साथ सीधा संवाद किया और आधुनिक तकनीक के माध्यम से पारदर्शी एवं विवादमुक्त चकबंदी का भरोसा दिलाया।

गांव के प्राथमिक विद्यालय में आयोजित बैठक में चकबंदी अधिकारी राजेंद्र प्रसाद यादव, सहायक चकबंदी अधिकारी राजेश मिश्रा, ग्राम प्रधान श्रीमती रीता, चकबंदी समिति के सदस्य तथा बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।

बैठक के दौरान ग्रामीणों ने अपनी शंकाएं रखते हुए बताया कि गांव में पहले से चकरोड, सेक्टर मार्ग, प्राथमिक विद्यालय, पंचायत भवन और आंगनबाड़ी जैसी सार्वजनिक सुविधाएं पर्याप्त हैं तथा प्रथम चक्र की चकबंदी से वे संतुष्ट हैं। इसी कारण नई चकबंदी को लेकर उनके मन में कुछ आशंकाएं बनी हुई हैं।

ग्रामीणों की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए डॉ. ज्ञान प्रकाश ने कहा कि द्वितीय चक्र की चकबंदी में केवल आवश्यक सार्वजनिक सुविधाओं के लिए ही नाममात्र की कटौती की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस बार पूरी प्रक्रिया में ड्रोन सर्वे, रोवर तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग किया जाएगा, जिससे भूमि अभिलेख और नक्शे अधिक सटीक, पारदर्शी और डिजिटल स्वरूप में तैयार होंगे।

उन्होंने बताया कि आधुनिक तकनीक से चकरोड, नालियां और खेतों की वास्तविक सीमाएं स्पष्ट होंगी, जिससे भूमि विवाद और अवैध कब्जों पर प्रभावी नियंत्रण संभव होगा। साथ ही किसानों को बड़े और व्यवस्थित खेत मिलने से खेती की लागत घटेगी तथा उत्पादन और आय बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।

हालांकि प्रशासन की ओर से दी गई विस्तृत जानकारी के बाद ग्रामीणों में चकबंदी को लेकर उत्सुकता बढ़ी, लेकिन पुरानी व्यवस्था से संतुष्ट होने के कारण उन्होंने अभी अंतिम सहमति नहीं दी। इस पर एडीएम (न्याय) ने किसानों की भावनाओं का सम्मान करते हुए उन्हें विचार के लिए समय दिया।

बैठक के अंत में डॉ. ज्ञान प्रकाश ने चकबंदी अधिकारियों को निर्देश दिए कि गांव में लगातार चौपाल और जनसंवाद आयोजित किए जाएं, ताकि प्रत्येक किसान की शंकाओं का समाधान कर पूर्ण आम सहमति के आधार पर चकबंदी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके।


सोनौरा तप्पा नादेपार में वर्षों से रुकी चकबंदी प्रक्रिया को पुनः शुरू कराने के लिए प्रशासन ने जनसंवाद अभियान शुरू किया। एडीएम (न्याय) डॉ. ज्ञान प्रकाश ने ग्रामीणों को ड्रोन, रोवर और AI आधारित आधुनिक चकबंदी के लाभ बताए तथा सहमति बनाकर प्रक्रिया आगे बढ़ाने पर जोर दिया।

समाचार टिप्पणी

भूमि विवादों को कम करने, अभिलेखों को आधुनिक बनाने और कृषि को अधिक लाभकारी बनाने के लिए आधुनिक तकनीक आधारित चकबंदी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि किसी भी गांव में ऐसी प्रक्रिया तभी सफल हो सकती है जब ग्रामीणों का विश्वास और व्यापक सहमति दोनों साथ हों। प्रशासन का संवाद आधारित प्रयास इसी दिशा में एक सकारात्मक पहल माना जा सकता है।

 

 

तटबंधों पर डीएम का हाई अलर्ट निरीक्षण, बोले—बाढ़ से पहले पूरी तैयारी, लापरवाही पर होगी सख्त कार्रवाई

बूढ़ी राप्ती पर बढ़ा खतरा, एक्शन में प्रशासन!


ककरही-गोनहा तटबंध का स्थलीय निरीक्षण, संवेदनशील स्थानों की निगरानी, स्टोर में राहत सामग्री का लिया जायजा, सभी विभागों को अलर्ट रहने के निर्देश।

सिद्धार्थनगर।

बूढ़ी राप्ती नदी के बढ़ते जलस्तर और लगातार हो रही बारिश के बीच बाढ़ प्रभावित जनपद सिद्धार्थनगर में जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। संभावित बाढ़ की चुनौती को देखते हुए जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन ने सोमवार को ककरही-गोनहा तटबंध का स्थलीय निरीक्षण कर तैयारियों की हकीकत परखी और अधिकारियों को स्पष्ट शब्दों में निर्देश दिया कि बाढ़ सुरक्षा कार्यों में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने तटबंध के संवेदनशील हिस्सों का गहन निरीक्षण किया और सिंचाई विभाग के अधिकारियों से सुरक्षा इंतजामों की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने अधिशासी अभियंता सिंचाई निर्माण खंड सतीश कुमार को निर्देश दिया कि मानसून के पूरे दौर में तटबंधों की चौबीसों घंटे निगरानी सुनिश्चित की जाए तथा जहां भी कटान या रिसाव की आशंका हो, वहां तत्काल सुरक्षात्मक कार्य कराए जाएं।

जिलाधिकारी ने कहा कि सिद्धार्थनगर हर वर्ष बाढ़ की गंभीर चुनौती का सामना करता है। ऐसे में प्रशासन की प्राथमिकता जनजीवन और किसानों की फसलों की सुरक्षा है। उन्होंने निर्देश दिए कि नदी के जलस्तर की लगातार मॉनिटरिंग की जाए और किसी भी आपात स्थिति की सूचना तत्काल जिला प्रशासन तक पहुंचाई जाए, ताकि समय रहते राहत एवं बचाव कार्य शुरू किए जा सकें।

निरीक्षण के दौरान डीएम ने बाढ़ राहत स्टोर का भी निरीक्षण किया। वहां उपलब्ध बोरियां, तिरपाल, रस्सियां, प्रकाश व्यवस्था सहित अन्य आवश्यक सामग्री की समीक्षा की और अधिकारियों को निर्देश दिया कि आपदा से निपटने के लिए सभी संसाधन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध रहें। किसी भी सामग्री की कमी सामने नहीं आनी चाहिए।

उन्होंने राजस्व, सिंचाई, पुलिस, स्वास्थ्य और आपदा प्रबंधन से जुड़े सभी विभागों को बेहतर समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए, ताकि यदि जलस्तर बढ़ता है तो प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल राहत पहुंचाई जा सके।

निरीक्षण के दौरान मौजूद अधिकारियों ने तटबंध की वर्तमान स्थिति और सुरक्षा व्यवस्था की जानकारी जिलाधिकारी को दी। डीएम ने सभी तैयारियां समयबद्ध तरीके से पूरी करने और संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए।

समाचार टिप्पणी

सिद्धार्थनगर पूर्वांचल के उन जिलों में शामिल है जहां हर वर्ष बूढ़ी राप्ती नदी बाढ़ का खतरा लेकर आती है। ऐसे में मानसून के शुरुआती दौर में जिलाधिकारी का स्वयं तटबंधों पर पहुंचकर निरीक्षण करना प्रशासन की गंभीरता को दर्शाता है। यदि विभागीय सतर्कता और निगरानी इसी तरह बनी रही तो संभावित बाढ़ से होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।


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हर बारिश में मौत का खतरा? काशीराम आवासों की जांच के लिए डीएम ने बनाई चार सदस्यीय समिति

दो कमरों की छत गिरने की घटना के बाद प्रशासन हरकत में, एक सप्ताह में मांगी गई रिपोर्ट


स्थान: सिद्धार्थनगर मुख्यालय
मामला: काशीराम शहरी आवास योजना के आवासों की गुणवत्ता एवं सुरक्षा की जांच
कार्रवाई: जिलाधिकारी ने चार सदस्यीय जांच समिति गठित की
समयसीमा: एक सप्ताह में रिपोर्ट देने के निर्देश


सिद्धार्थनगर मुख्यालय स्थित काशीराम शहरी आवास योजना में कुछ सप्ताह पूर्व दो आवासों की छत गिरने की घटना के बाद जिला प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जी.एन. द्वारा जारी आदेश के अनुसार आवासों की गुणवत्ता, सुरक्षा और रहने योग्य स्थिति की जांच के लिए चार सदस्यीय समिति गठित कर दी गई है। समिति को एक सप्ताह के भीतर विस्तृत जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्य खबर
मुख्यालय स्थित काशीराम शहरी आवास योजना में दो कमरों की छत गिरने की घटना ने आवासों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। घटना के बाद स्थानीय लोगों ने जर्जर भवनों की तकनीकी जांच और आवश्यक कार्रवाई की मांग उठाई थी।
इसी क्रम में जिलाधिकारी ने आदेश जारी कर प्रांतीय खंड लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता की अध्यक्षता में चार सदस्यीय समिति गठित की है। समिति में डूडा के परियोजना अधिकारी, उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद बस्ती के सहायक अभियंता तथा नगर पालिका परिषद सिद्धार्थनगर के अधिशासी अधिकारी को सदस्य बनाया गया है।
समिति को निर्देश दिया गया है कि वह काशीराम शहरी आवास योजना के सभी संबंधित आवासों का स्थलीय निरीक्षण कर यह जांच करे कि भवन सुरक्षित एवं रहने योग्य हैं या नहीं। जांच पूरी कर एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट जिलाधिकारी को उपलब्ध कराई जाएगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
क्या है मामला?
कुछ सप्ताह पहले काशीराम आवास परिसर में दो कमरों की छत गिर गई थी। राहत की बात यह रही कि घटना में कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन इस घटना ने परिसर में रहने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी। इसके बाद प्रशासन ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए तकनीकी जांच कराने का निर्णय लिया।
टिप्पणी
जांच समिति का गठन प्रशासन की महत्वपूर्ण पहल है। अब सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जांच रिपोर्ट में क्या निष्कर्ष सामने आते हैं और यदि कहीं निर्माण गुणवत्ता में कमी या भवन असुरक्षित पाए जाते हैं, तो संबंधित स्तर पर क्या कार्रवाई होती है। स्थानीय लोगों की निगाहें अब जांच रिपोर्ट और उसके बाद होने वाली प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं।
नोट: यह समाचार जिलाधिकारी द्वारा जारी आधिकारिक आदेश एवं उपलब्ध तथ्यों पर आधारित है। जांच रिपोर्ट आने तक किसी भी निर्माण एजेंसी या व्यक्ति की जिम्मेदारी अथवा लापरवाही के संबंध में कोई निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। यह मामला जांचाधीन है।

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