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मौत से पहले पुलिस को दी थी तहरीर, अब खेत में गणेश लोधी की संदिग्ध मौत; पत्नी और परिजनों के बयानों में विरोधाभास

पत्नी बोली—पति ने पी रखी थी शराब और करता था शक; परिवार का दावा—गणेश शराब नहीं पीता था, भाई ने पत्नी व एक अन्य व्यक्ति पर लगाए गंभीर आरोप


सिद्धार्थनगर। सदर थाना क्षेत्र में करीब 40 वर्षीय गणेश लोधी की खेत में संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला इसलिए भी संवेदनशील हो गया है क्योंकि परिजनों के अनुसार गणेश ने अपनी मौत से पहले पुलिस को एक तहरीर देकर पत्नी और एक अन्य व्यक्ति को लेकर गंभीर आरोप लगाए थे तथा अपने साथ किसी अप्रिय घटना की आशंका जताई थी। अब गणेश की मौत के बाद उसके भाई ने पत्नी और एक अन्य व्यक्ति की भूमिका पर संदेह जताते हुए कार्रवाई की मांग की है। वहीं मृतक की सास ने भी अपनी बेटी के व्यवहार को लेकर आरोप लगाए हैं। दूसरी ओर पत्नी का कहना है कि उसका पति उस पर शक करता था और घटना वाले दिन उसने शराब पी रखी थी। परिवार का दावा इसके ठीक उलट है कि गणेश शराब नहीं पीता था। फिलहाल मौत का कारण स्पष्ट नहीं है और आरोपों की सत्यता पुलिस जांच व पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही सामने आ सकेगी।


| कई सवाल छोड़ गई खेत में हुई मौत

मृतक की पहचान गणेश लोधी पुत्र स्वर्गीय दशरथ लोधी, निवासी सरोजनीनगर उर्फ मोडिला, वार्ड नंबर-8, थाना सदर, जनपद सिद्धार्थनगर के रूप में बताई गई है। परिजनों के अनुसार 30 जुलाई को गणेश अपनी पत्नी के साथ सदर थाना क्षेत्र के ग्राम रेहरा स्थित खेत में फसल काटने गया था। इसी दौरान संदिग्ध परिस्थितियों में उसकी मौत हो गई।

खेत में पत्नी के साथ गया था गणेश

परिजनों से मिली जानकारी के मुताबिक गणेश अपनी पत्नी कमलावती के साथ खेत में काम करने गया था। इसी दौरान उसकी हालत बिगड़ने और मौत होने की बात सामने आई। परिजनों का दावा है कि मौत के बाद गणेश की नाक से खून दिखाई दिया था और कुछ अन्य शारीरिक परिस्थितियां भी नजर आईं।

हालांकि केवल इन परिस्थितियों के आधार पर मौत का कारण निर्धारित नहीं किया जा सकता। यह मौत प्राकृतिक कारणों से हुई, किसी चिकित्सकीय समस्या के कारण हुई अथवा इसके पीछे कोई अन्य वजह है, इसका निष्कर्ष पोस्टमार्टम और जांच के आधार पर ही निकलेगा।

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| मौत से पहले दी गई तहरीर ने बढ़ाई मामले की गंभीरता

मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू गणेश द्वारा पूर्व में पुलिस को दी गई बताई जा रही तहरीर है। उपलब्ध कराई गई तहरीर की प्रति में गणेश ने अपनी पत्नी और एक अन्य व्यक्ति के संबंधों को लेकर आरोप लगाए थे। तहरीर में उसने यह भी आशंका जताई थी कि उसके साथ कोई अप्रिय घटना हो सकती है।

तहरीर में यह भी उल्लेख है कि पूर्व में दोनों पक्षों के बीच विवाद सामने आया था। शिकायत में लगाए गए सभी आरोप गणेश के कथन हैं और उनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

बताया जा रहा है कि उस समय मामला पुलिस तक पहुंचने के बाद दोनों पक्षों को समझाने-बुझाने का प्रयास किया गया था। उस शिकायत पर पुलिस स्तर से वास्तव में क्या कार्रवाई हुई थी, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।

पत्नी का पक्ष—“पति मुझ पर शक करता था”

गणेश की मौत के बाद उसकी पत्नी कमलावती से घटना के संबंध में पूछे जाने पर उसने कहा कि उसका पति उस पर शक करता था। पत्नी के मुताबिक घटना वाले दिन गणेश उसके साथ खेत में काम कर रहा था और उसने शराब पी रखी थी।

पत्नी के इस बयान के बाद मामले में एक और सवाल जुड़ गया है।


| परिवार बोला—गणेश शराब नहीं पीता था

मृतक के परिवार ने पत्नी के शराब संबंधी दावे से असहमति जताई है। परिजनों का कहना है कि गणेश शराब का सेवन नहीं करता था।

इस तरह पत्नी और मृतक के परिजनों के बयानों में स्पष्ट विरोधाभास सामने आया है।

गणेश ने घटना वाले दिन शराब का सेवन किया था अथवा नहीं, इसे फिलहाल प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता। पोस्टमार्टम के दौरान किए गए आवश्यक चिकित्सकीय/फॉरेंसिक परीक्षण और जांच से इस पहलू पर स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

भाई ने पत्नी और एक अन्य व्यक्ति पर लगाया हत्या का आरोप

घटना के बाद मृतक के भाई की ओर से पुलिस को तहरीर देकर गणेश की पत्नी और एक अन्य व्यक्ति पर हत्या का आरोप लगाए जाने की बात सामने आई है। परिजनों का आरोप है कि पत्नी की एक व्यक्ति से नजदीकी को लेकर गणेश परेशान रहता था और इसका विरोध करता था।

यहां स्पष्ट करना आवश्यक है कि हत्या का आरोप अभी परिजनों का आरोप है। किसी व्यक्ति की संलिप्तता अथवा अपराध सिद्ध होने की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।


मृतक की सास ने भी बेटी पर लगाए आरोप

मामले में एक असामान्य पहलू तब सामने आया जब मृतक की सास ने भी अपनी बेटी के आचरण को लेकर गंभीर आरोप लगाए।

उनका दावा है कि उनकी बेटी का गांव में किराये पर रहने वाले एक व्यक्ति के साथ मेल-जोल था, जिसका उनका दामाद गणेश विरोध करता था। उन्होंने भी दामाद की मौत को लेकर संदेह जताया और जांच की मांग की।

हालांकि सास द्वारा लगाए गए आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इन्हें जांच से पहले तथ्य नहीं माना जा सकता।

एक वर्ष से संबंध होने की चर्चा, पुष्टि नहीं

स्थानीय स्तर पर पत्नी और एक अन्य व्यक्ति के बीच करीब एक वर्ष से कथित नजदीकी होने की चर्चाएं सामने आई हैं। कुछ लोग इसी कथित संबंध को गणेश की मौत से जोड़कर देख रहे हैं।

FT News Digital ऐसी चर्चाओं की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता। किसी कथित प्रेम संबंध को हत्या का कारण बताना जांच पूरी होने से पहले उचित नहीं होगा। पुलिस को उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही इस पहलू की सत्यता निर्धारित करनी होगी।

दो बच्चों के सिर से उठा पिता का साया

बताया जा रहा है कि गणेश की उम्र करीब 40 वर्ष थी, जबकि पत्नी कमलावती की उम्र लगभग 35 वर्ष बताई गई है। परिवार में करीब 14 वर्षीय बेटा दुर्गेश और लगभग आठ वर्षीय बेटी दुर्गावती हैं।

गणेश की अचानक मौत के बाद परिवार में मातम है। वहीं आरोप-प्रत्यारोप के बीच दोनों बच्चों की स्थिति भी बेहद संवेदनशील बनी हुई है।

जिला अस्पताल में जुटी भीड़, पुलिस ने पत्नी-बच्चों को सुरक्षा में बैठाया

गणेश की मौत की जानकारी मिलने के बाद जिला अस्पताल में परिजनों और परिचितों की भीड़ जमा हो गई। मौजूद लोगों में आक्रोश को देखते हुए अस्पताल परिसर स्थित पुलिस चौकी के पुलिसकर्मियों ने स्थिति संभाली।

बताया गया कि किसी अप्रिय घटना की आशंका को देखते हुए मृतक की पत्नी और बच्चों को पुलिस ने सुरक्षा की दृष्टि से अपने पास बैठा लिया। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजे जाने की जानकारी है।

जांच के सामने ये अहम सवाल

◆ गणेश लोधी की मौत का वास्तविक कारण क्या है?

◆ मौत से पहले दी गई कथित तहरीर पर पुलिस ने क्या कार्रवाई की थी?

◆ पत्नी के शराब संबंधी बयान और परिवार के दावे में कौन-सा तथ्य सही है?

◆ परिजनों द्वारा जिस दूसरे व्यक्ति का जिक्र किया जा रहा है, उसकी भूमिका क्या थी?

◆ नाक से खून आने के दावे का चिकित्सकीय कारण क्या था?

◆ क्या मौत में किसी तीसरे व्यक्ति की भूमिका है या मामला किसी अन्य कारण से जुड़ा है?

इन सवालों के जवाब अनुमान या आरोपों से नहीं, बल्कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट, वैज्ञानिक साक्ष्य और पुलिस जांच से ही मिल सकते हैं।


| आरोप गंभीर, लेकिन फैसला जांच से पहले नहीं

गणेश लोधी की मौत से पहले दी गई बताई जा रही तहरीर और मौत के बाद परिवार की ओर से लगाए जा रहे आरोप निश्चित रूप से जांच के महत्वपूर्ण बिंदु हैं। पत्नी और परिवार के परस्पर विरोधी बयान भी जांच एजेंसी के सामने अहम पहलू हो सकते हैं।

लेकिन कानून की दृष्टि से आरोप और अपराध सिद्ध होना दो अलग बातें हैं। किसी महिला या अन्य व्यक्ति को जांच पूरी होने से पहले हत्यारा घोषित करना न केवल अनुचित होगा बल्कि कानूनी रूप से भी जोखिमपूर्ण हो सकता है।

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पुलिस के सामने अब पूर्व शिकायत, घटनास्थल की परिस्थितियां, संबंधित लोगों के बयान, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और उपलब्ध अन्य साक्ष्यों को जोड़कर निष्पक्ष जांच करने की चुनौती है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस की आधिकारिक जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि गणेश लोधी की मौत कैसे हुई और क्या इसमें किसी व्यक्ति की आपराधिक भूमिका थी।

दो स्कूलों में लगातार चोरी से सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल, तीन दिन में दूसरी वारदात से शिक्षक और ग्रामीण चिंतित

स्कूलों के रसोईघर बने निशाना, गैस सिलेंडर चोरी होने से पुलिस के सामने खुलासे की चुनौती


स्थान : बर्डपुर/सिद्धार्थनगर

मुख्य बिंदु

तीन दिन के भीतर दो सरकारी विद्यालयों में चोरी।

दोनों मामलों में रसोईघर का ताला तोड़कर गैस सिलेंडर चोरी।

शिक्षकों और ग्रामीणों में बढ़ी चिंता।

पुलिस से शीघ्र खुलासे और सुरक्षा बढ़ाने की मांग।

सिद्धार्थनगर।

सिद्धार्थनगर जिले के सरकारी प्राथमिक विद्यालय लगातार चोरों के निशाने पर दिखाई दे रहे हैं। तीन दिनों के भीतर दो अलग-अलग विद्यालयों में रसोईघर का ताला तोड़कर गैस सिलेंडर चोरी होने की घटनाओं ने विद्यालयों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लगातार हुई इन वारदातों के बाद शिक्षक और ग्रामीणों में चिंता का माहौल है, जबकि पुलिस से शीघ्र खुलासे की उम्मीद जताई जा रही है।

ताजा मामला कपिलवस्तु कोतवाली क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय मिश्रौलिया का है। विद्यालय प्रशासन के अनुसार गुरुवार सुबह स्कूल पहुंचने पर रसोईघर का ताला टूटा मिला। जांच करने पर गैस सिलेंडर गायब पाया गया। इसके बाद विद्यालय की ओर से पुलिस को सूचना देकर कार्रवाई की मांग की गई।

विद्यालय के प्रधानाध्यापक श्याम नारायण ने बताया कि घटना की सूचना पुलिस को दे दी गई है और चोरी का खुलासा करने तथा जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की गई है।

स्थानीय लोगों के अनुसार इससे पहले 27 जुलाई की रात चिल्हिया थाना क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय रमवापुर में भी इसी तरह रसोईघर का ताला तोड़कर दो गैस सिलेंडर चोरी किए गए थे। दोनों विद्यालयों के बीच लगभग दो किलोमीटर की दूरी बताई जा रही है। लगातार सामने आई इन घटनाओं से विद्यालयों में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।

ग्रामीणों और शिक्षकों ने विद्यालय परिसरों की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने, रात्रि गश्त बढ़ाने तथा घटनाओं का शीघ्र खुलासा करने की मांग की है।

पुलिस की ओर से मामले की जांच की जा रही है। चोरी की घटनाओं के संबंध में आधिकारिक जांच पूरी होने के बाद ही कारणों और जिम्मेदार व्यक्तियों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।



संपादकीय टिप्पणी

विद्यालय शिक्षा के मंदिर माने जाते हैं। यदि लगातार सरकारी स्कूल ही चोरों के निशाने पर आने लगें, तो यह केवल संपत्ति की चोरी का मामला नहीं बल्कि सुरक्षा व्यवस्था को और प्रभावी बनाने की आवश्यकता का संकेत भी है। ऐसे मामलों में त्वरित जांच, नियमित रात्रि गश्त और विद्यालय परिसरों की सुरक्षा मजबूत करना आवश्यक है।

नशा मुक्त भारत की मुहिम को मिलेगा युवाओं का दम, सिद्धार्थनगर में 8 विधाओं की जिला स्तरीय प्रतियोगिताएं

05 अगस्त को होगी प्रतियोगिता, 04 अगस्त तक करें ऑनलाइन आवेदन; विजेताओं को मिलेगा राज्य और राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने का अवसर


आयोजक: माय भारत (MY Bharat), युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार

अभियान: नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत

आवेदन की अंतिम तिथि: 04 अगस्त 2026

प्रतियोगिता: 05 अगस्त 2026, प्रातः 9:00 बजे

स्थान: बुद्ध विद्यापीठ डिग्री कॉलेज, सिद्धार्थनगर


युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत संचालित “नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत” अभियान के तहत सिद्धार्थनगर के युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का सुनहरा अवसर मिला है। 15 से 29 वर्ष आयु वर्ग के युवा आठ विभिन्न प्रतियोगिताओं में भाग लेकर जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर तक अपनी पहचान बना सकेंगे।

मुख्य खबर

सिद्धार्थनगर। माय भारत (MY Bharat) के तत्वावधान में “नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत” अभियान के अंतर्गत जनपद के युवाओं के लिए जिला स्तरीय प्रतियोगिताओं हेतु ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए गए हैं।

इस अभियान का उद्देश्य केवल प्रतियोगिताएं आयोजित करना नहीं, बल्कि युवाओं में नशा मुक्त जीवनशैली, सामाजिक जागरूकता, रचनात्मक सोच और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी की भावना विकसित करना है।

प्रतियोगिताओं का आयोजन 05 अगस्त 2026 को बुद्ध विद्यापीठ डिग्री कॉलेज, सिद्धार्थनगर में होगा। इच्छुक प्रतिभागी 04 अगस्त 2026 तक MY Bharat Portal पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

इन 8 विधाओं में दिखा सकेंगे प्रतिभा

वाद-विवाद प्रतियोगिता

स्लोगन (नारा) लेखन

चित्रकला

समूह नृत्य

रील एवं लघु फिल्म निर्माण

कविता लेखन / स्लैम पोएट्री

संगीत एवं रैप

नुक्कड़ नाटक

प्रत्येक प्रतिभागी केवल एक प्रतियोगिता में भाग ले सकेगा।

जिले से राष्ट्रीय मंच तक का अवसर

जिला स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागी राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में सिद्धार्थनगर का प्रतिनिधित्व करेंगे। राज्य स्तर के विजेताओं को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिभा प्रदर्शन और सम्मानित होने का अवसर मिलेगा।

निष्पक्ष होगा मूल्यांकन

हर प्रतियोगिता का मूल्यांकन तीन सदस्यीय निर्णायक मंडल द्वारा किया जाएगा। प्रतिभागियों की रचनात्मकता, विषय की समझ, प्रस्तुति, मौलिकता और सामाजिक संदेश के आधार पर प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान का चयन किया जाएगा।

सारांश

15–29 वर्ष के युवाओं से आवेदन आमंत्रित।

8 विधाओं में होगी जिला स्तरीय प्रतियोगिता।

आवेदन की अंतिम तिथि 04 अगस्त।

05 अगस्त को बुद्ध विद्यापीठ डिग्री कॉलेज में आयोजन।

विजेताओं को राज्य व राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने का मौका।

संपादकीय टिप्पणी

नशे के विरुद्ध जागरूकता केवल कानून से नहीं, बल्कि युवाओं की सकारात्मक भागीदारी से मजबूत होती है। यदि युवा अपनी रचनात्मक प्रतिभा के माध्यम से समाज को सही संदेश दें, तो यह अभियान जनजागरण का प्रभावी माध्यम बन सकता है।

ककरहवा में छात्र-छात्राओं, एसएसबी और सामाजिक संस्थाओं की संयुक्त रैली, ‘सतर्क समाज ही रोक सकता है मानव तस्करी’

ककरहवा में छात्र-छात्राओं, एसएसबी और सामाजिक संस्थाओं की संयुक्त रैली, ‘सतर्क समाज ही रोक सकता है मानव तस्करी’

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स्थान: ककरहवा, सिद्धार्थनगर

अवसर: अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी रोकथाम दिवस

मुख्य उद्देश्य: मानव तस्करी के प्रति जनजागरूकता और सामाजिक सहभागिता बढ़ाना


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भारत-नेपाल सीमा पर मानव तस्करी के खिलाफ गुरुवार को जागरूकता की मजबूत आवाज गूंजी। सिद्धार्थनगर के सीमावर्ती कस्बा ककरहवा में अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी रोकथाम दिवस पर छात्र-छात्राओं, एसएसबी, शिक्षकों और सामाजिक संस्थाओं ने विशाल जागरूकता रैली निकालकर लोगों को इस गंभीर अपराध के प्रति सतर्क रहने का संदेश दिया। सीमा क्षेत्र में आयोजित यह अभियान आमजन को जागरूक करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

मुख्य खबर

सिद्धार्थनगर। भारत-नेपाल सीमा से लगे ककरहवा क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी रोकथाम दिवस के अवसर पर मानव सेवा संस्थान, गोरखपुर (शाखा ककरहवा) एवं राजकीय इंटर कॉलेज ककरहवा के संयुक्त तत्वावधान में व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत राजकीय इंटर कॉलेज परिसर से हुई, जहां से छात्र-छात्राओं ने हाथों में जागरूकता संबंधी बैनर और तख्तियां लेकर रैली निकाली। रैली ककरहवा बाजार एवं सीमा क्षेत्र के प्रमुख मार्गों से होकर गुजरी। इस दौरान प्रतिभागियों ने मानव तस्करी के खिलाफ जागरूकता से जुड़े नारे लगाकर लोगों से सतर्क रहने और संदिग्ध गतिविधियों की सूचना संबंधित एजेंसियों को देने की अपील की।

रैली के समापन पर आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में 43वीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल के ककरहवा इंचार्ज असिस्टेंट कमांडेंट नीलेश मासुले ने कहा कि मानव तस्करी केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी का भी मुद्दा है। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में नागरिकों की सतर्कता और समय पर दी गई सूचना इस अपराध की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

मानव सेवा संस्थान की आलिया गुप्ता (FAC), अखिलेश कुमार (CH) तथा मानव संसाधन एवं महिला विकास संस्थान के राम शंकर (ब्लॉक कोऑर्डिनेटर) ने छात्र-छात्राओं को मानव तस्करी के विभिन्न स्वरूपों, इसके दुष्परिणामों और बचाव के उपायों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि जागरूकता ही इस अपराध के खिलाफ सबसे प्रभावी हथियार है।

विद्यालय के प्रधानाचार्य अजय कुमार श्रीवास्तव ने विद्यार्थियों से समाज में जागरूकता फैलाने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना संबंधित विभागों तक पहुंचाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में शिक्षक-शिक्षिकाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं की सहभागिता रही। अंत में सभी प्रतिभागियों ने मानव तस्करी मुक्त समाज के निर्माण का सामूहिक संकल्प लिया।


भारत-नेपाल सीमा पर निकली जागरूकता रैली।

छात्र-छात्राओं ने मानव तस्करी के खिलाफ दिया संदेश।

एसएसबी व सामाजिक संस्थाओं ने किया संयुक्त आयोजन।

सीमा क्षेत्र में लोगों से सतर्क रहने की अपील।

मानव तस्करी मुक्त समाज बनाने का लिया संकल्प।

संपादकीय टिप्पणी

मानव तस्करी एक गंभीर सामाजिक और अंतरराष्ट्रीय अपराध है, जिसकी रोकथाम केवल सुरक्षा एजेंसियों के भरोसे संभव नहीं। समाज, विद्यालय, परिवार और प्रशासन की संयुक्त जागरूकता ही इस अपराध के खिलाफ सबसे मजबूत सुरक्षा कवच बन सकती है। सीमावर्ती क्षेत्रों में ऐसे अभियान लोगों को सचेत करने और अपराधियों के मंसूबों को विफल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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“कागजों में बनी नाली, जमीन पर सवाल! ₹54,441 के भुगतान पर उठे बड़े सवाल”

₹54,441 का भुगतान, लेकिन नाली गायब?

सरकारी रिकॉर्ड में खर्च दर्ज, ग्रामीण बोले—बरसात में घरों में भर रहा पानी; डीएम के आदेश के बाद भी कार्रवाई का इंतजार


स्थान: ग्राम पंचायत सिकरी (बेलहसा), विकास खंड इटवा, जनपद सिद्धार्थनगर


रिकॉर्ड एक कहानी बयां कर रहे हैं, जबकि ग्रामीण दूसरी। सिद्धार्थनगर के इटवा ब्लॉक स्थित ग्राम पंचायत सिकरी (बेलहसा) में नाली निर्माण को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। ग्राम पंचायत की कैश बुक में ₹54,441 के भुगतान का उल्लेख है, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि धरातल पर नाली का निर्माण पूरा नहीं हुआ। शिकायत जिलाधिकारी तक पहुंचने और जांच के निर्देश दिए जाने के बावजूद ग्रामीणों का कहना है कि अब तक स्थिति जस की तस बनी हुई है।

सरकारी कागजों में भुगतान, जमीन पर सवाल

ग्रामीणों द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों के अनुसार 05 फरवरी 2026 को परशुराम के घर से तालाब तक नाली निर्माण के नाम पर ₹54,441 का भुगतान दर्ज है। वहीं, मौके की तस्वीरें और ग्रामीणों के आरोप यह सवाल खड़ा करते हैं कि यदि भुगतान हुआ तो कार्य पूरा क्यों नहीं दिख रहा?

ग्रामीणों का कहना है कि पुरानी नाली को तोड़ दिया गया, लेकिन नई नाली का निर्माण नहीं कराया गया। आरोप है कि कुछ स्थानों पर मिट्टी डालकर जल निकासी का रास्ता भी बाधित कर दिया गया, जिससे बरसात में पानी लोगों के घरों और रास्तों में भर रहा है।

शिकायत पहुंची डीएम तक, फिर भी समाधान का इंतजार

ग्रामीणों ने 08 जुलाई 2026 को जिलाधिकारी सिद्धार्थनगर को शिकायती पत्र देकर पूरे मामले की जांच की मांग की। ग्रामीणों का दावा है कि जांच के निर्देश भी दिए गए, लेकिन अब तक न तो जांच रिपोर्ट सार्वजनिक हुई और न ही किसी जिम्मेदार के खिलाफ कार्रवाई की जानकारी मिली है।

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ग्रामीणों के प्रमुख सवाल

जब भुगतान दर्ज है तो निर्माण कार्य पूरा क्यों नहीं हुआ?

यदि कार्य अधूरा है तो भुगतान किस आधार पर हुआ?

जांच के निर्देश के बाद भी कार्रवाई में देरी क्यों?

बरसात में जलभराव की समस्या का जिम्मेदार कौन?

प्रशासन से ग्रामीणों की मांग

ग्रामीणों ने मांग की है कि पूरे मामले की तकनीकी एवं वित्तीय जांच कराई जाए। यदि किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए तथा अधूरी नाली का निर्माण तत्काल पूरा कराया जाए।

FT NEWS DIGITAL की अपील

FT NEWS DIGITAL किसी भी व्यक्ति या संस्था को दोषी नहीं ठहराता। यह समाचार ग्रामीणों द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों, शिकायत पत्र और स्थानीय लोगों के आरोपों पर आधारित है। संबंधित ग्राम प्रधान, सचिव, खंड विकास अधिकारी या अन्य संबंधित अधिकारियों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

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सारांश

₹54,441 भुगतान का रिकॉर्ड सामने आया।

ग्रामीणों ने नाली निर्माण अधूरा होने का आरोप लगाया।

बरसात में जलभराव से लोगों को परेशानी।

डीएम को शिकायत और जांच की मांग।

प्रशासन से निष्पक्ष जांच और शीघ्र समाधान की अपेक्षा।

 

बूढ़ी राप्ती नदी के तट पर दिखा घड़ियाल, ग्रामीणों में दहशत; वन विभाग की टीम घंटों करती रही तलाश

ब्रेकिंग न्यूज़

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सिद्धार्थनगर के जोगिया विकासखंड अंतर्गत ग्राम तनजवा में गुरुवार सुबह बूढ़ी राप्ती नदी के दाहिने तट पर एक घड़ियाल दिखाई देने से इलाके में हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और खोजबीन शुरू कर दी। हालांकि घड़ियाल नदी में उतर गया, जिससे उसका पता नहीं चल सका। घटना के बाद ग्रामीणों में भय का माहौल है और नदी किनारे लोगों की भारी भीड़ जुट गई।

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सिद्धार्थनगर के जोगिया विकासखंड अंतर्गत ग्राम तनजवा में गुरुवार सुबह बूढ़ी राप्ती नदी के दाहिने तट पर एक घड़ियाल दिखाई देने से इलाके में हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और खोजबीन शुरू कर दी। हालांकि घड़ियाल नदी में उतर गया, जिससे उसका पता नहीं चल सका। घटना के बाद ग्रामीणों में भय का माहौल है और नदी किनारे लोगों की भारी भीड़ जुट गई।

सिद्धार्थनगर

जनपद के जोगिया विकासखंड, तहसील बांसी के ग्राम तनजवा में गुरुवार सुबह करीब 7:30 बजे उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब नदी किनारे शौच के लिए गए ग्रामीणों ने बूढ़ी राप्ती नदी के दाहिने तट पर एक घड़ियाल देखा।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, घड़ियाल कुछ देर तक नदी के किनारे मौजूद रहा। ग्रामीणों ने तत्काल इसकी सूचना वन विभाग की बांसी रेंज को दी। सूचना मिलते ही वन विभाग सक्रिय हो गया और अधिकारियों की टीम मौके पर पहुंच गई।

मौके पर क्षेत्रीय वन अधिकारी शिवकुमार गुप्ता, वन दरोगा प्रदीप कुमार, वन दरोगा अरबाज खान, वन संरक्षक अरुणेश कुमार, वन संरक्षक जगदीश यादव तथा क्षेत्रीय सहायक राजू वाकर ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और घड़ियाल की तलाश शुरू की।

लेकिन वन विभाग की टीम के पहुंचने से पहले ही घड़ियाल नदी में उतर चुका था। इसके बाद अधिकारियों ने नदी किनारे और आसपास के क्षेत्र में काफी देर तक खोजबीन की, लेकिन समाचार लिखे जाने तक घड़ियाल का दोबारा पता नहीं चल सका।

घटना की जानकारी फैलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण नदी किनारे पहुंच गए। बढ़ती भीड़ को देखते हुए वन विभाग के अधिकारियों ने लोगों को सुरक्षित दूरी बनाए रखने और नदी के किनारे अनावश्यक भीड़ न लगाने की अपील की।

वन विभाग ने ग्रामीणों को चेतावनी दी है कि जब तक स्थिति पूरी तरह स्पष्ट न हो जाए, तब तक नदी में उतरने, बच्चों को अकेले नदी किनारे भेजने अथवा किसी भी वन्यजीव के नजदीक जाने से बचें। विभाग की टीम लगातार क्षेत्र में निगरानी कर रही है और घड़ियाल की तलाश जारी है।


: प्रशासन की अपील

✔ नदी के किनारे अनावश्यक भीड़ न लगाएं।

✔ बच्चों को अकेले नदी के पास न जाने दें।

✔ किसी भी वन्यजीव को पकड़ने या छेड़ने का प्रयास न करें।

✔ घड़ियाल दिखाई देने पर तत्काल वन विभाग को सूचना दें।

✔ अफवाहों से बचें और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।

तथ्य एक नजर में

स्थान: ग्राम तनजवा, विकासखंड जोगिया, तहसील बांसी

नदी: बूढ़ी राप्ती

समय: सुबह लगभग 7:30 बजे

घटना: नदी किनारे घड़ियाल दिखाई दिया

कार्रवाई: वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची, खोज अभियान जारी

स्थिति: समाचार लिखे जाने तक घड़ियाल का पता नहीं चल सका

संपादकीय टिप्पणी

बरसात के मौसम में नदियों का जलस्तर बढ़ने के साथ जलीय वन्यजीव नए क्षेत्रों में दिखाई दे सकते हैं। ऐसे मामलों में घबराने के बजाय सतर्कता बरतना और वन विभाग के निर्देशों का पालन करना सबसे सुरक्षित उपाय है। फिलहाल वन विभाग द्वारा खोज अभियान जारी है और लोगों से नदी के आसपास विशेष सावधानी बरतने की अपील की गई है।


(यह समाचार वन विभाग से प्राप्त स्थानीय सूचना, प्रत्यक्षदर्शियों के विवरण और मौके पर उपलब्ध तथ्यों के आधार पर तैयार किया गया है। समाचार में किसी प्रकार की अपुष्ट या भ्रामक जानकारी शामिल नहीं की गई है।)

घर में नागिन के अंडों से निकले 31 सांप! पूरे गांव में दहशत, देखने उमड़ी भीड़

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सिद्धार्थनगर के बढ़नी क्षेत्र में एक परिवार के घर से लगातार निकल रहे सांपों का आखिरकार राज खुल गया। घर के भीतर नागिन द्वारा दिए गए अंडों से अब तक 31 सांप निकलने की पुष्टि होने के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। सूचना पर वन विभाग ने मौके पर पहुंचकर निगरानी शुरू कर दी है और लोगों से सतर्क रहने की अपील की है।

सिद्धार्थनगर।

जनपद के बढ़नी क्षेत्र स्थित एक गांव में उस समय हड़कंप मच गया जब एक घर से लगातार छोटे-छोटे सांप निकलने लगे। शुरुआत में परिवार ने इसे सामान्य घटना समझा, लेकिन जब रोजाना सांप दिखाई देने लगे तो ग्रामीणों में दहशत फैल गई। सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची टीम ने जांच की तो पता चला कि घर के सुरक्षित हिस्से में एक नागिन ने अंडे दिए थे। इन्हीं अंडों से अब तक 31 सांप निकल चुके हैं।

घटना के बाद आसपास के लोगों की भारी भीड़ मौके पर जुट गई। हर कोई इस अनोखी घटना को अपनी आंखों से देखने के लिए पहुंचने लगा। वहीं, परिवार के सदस्य भय के कारण घर में रहने से भी घबरा रहे हैं।

वन विभाग की टीम ने मौके का निरीक्षण कर लोगों से अपील की है कि किसी भी सांप को पकड़ने या मारने का प्रयास न करें। यदि कहीं सांप दिखाई दे तो तुरंत संबंधित विभाग या प्रशिक्षित स्नेक रेस्क्यू टीम को सूचना दें।

विशेषज्ञों के अनुसार बरसात का मौसम सांपों के प्रजनन का समय होता है। मादा सांप सुरक्षित और शांत स्थान पर अंडे देती है। अनुकूल वातावरण मिलने पर एक साथ बड़ी संख्या में बच्चे निकल सकते हैं। इसी कारण घर से लगातार सांप निकलने की घटना सामने आई।

फिलहाल वन विभाग पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है। आसपास के लोगों को भी घरों की नियमित सफाई करने, झाड़ियों और कबाड़ को हटाने तथा बच्चों को सतर्क रखने की सलाह दी गई है।


क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

बरसात सांपों के प्रजनन का प्रमुख मौसम माना जाता है।

मादा सांप सुरक्षित स्थान पर अंडे देती है।

एक बार में कई अंडों से लगभग एक साथ बच्चे निकल सकते हैं।

सांप दिखाई देने पर घबराएं नहीं, सुरक्षित दूरी बनाएं।

तुरंत वन विभाग या प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम को सूचना दें।

संपादकीय टिप्पणी

यह घटना जितनी चौंकाने वाली है, उतनी ही सावधानी बरतने की भी जरूरत है। अफवाहों से बचें, सांपों को लेकर अंधविश्वास न फैलाएं और केवल अधिकृत अधिकारियों एवं विशेषज्ञों की सलाह का पालन करें। बरसात के मौसम में सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।

(यह समाचार उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी और संबंधित विभागों द्वारा साझा तथ्यों के आधार पर तैयार किया गया है। किसी भी प्रकार की अपुष्ट या अंधविश्वास आधारित जानकारी को शामिल नहीं किया गया है।)

सावन का पावन महीना शुरू: आखिर क्यों है भगवान शिव का सबसे प्रिय मास, जानिए इसकी धार्मिक, वैज्ञानिक और सामाजिक महत्ता

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🕉️ विशेष रिपोर्ट | FT News Digital

डेस्क रिपोर्ट | FT News Digital

सावन का महीना शुरू होते ही मंदिरों में घंटियों की गूंज, “हर-हर महादेव” के जयकारे, कांवड़ियों की आस्था और शिवालयों में उमड़ती श्रद्धालुओं की भीड़ पूरे वातावरण को भक्तिमय बना देती है। हिंदू धर्म में सावन को भगवान शिव की आराधना का सबसे पवित्र और फलदायी महीना माना जाता है। मान्यता है कि इस पूरे महीने श्रद्धा, संयम और भक्ति के साथ शिव की पूजा करने से जीवन के दुख दूर होते हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।

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क्यों मनाया जाता है सावन? जानिए पौराणिक कथा

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान जब हलाहल विष निकला तो उसके प्रभाव से तीनों लोक संकट में पड़ गए। देवताओं और असुरों की रक्षा के लिए भगवान शिव ने वह विष अपने कंठ में धारण कर लिया। विष की तीव्रता से उनका कंठ नीला पड़ गया और तभी से उन्हें नीलकंठ कहा जाने लगा।

मान्यता है कि विष की गर्मी को शांत करने के लिए देवताओं ने भगवान शिव पर गंगाजल अर्पित किया। इसी परंपरा के चलते सावन में जलाभिषेक का विशेष महत्व माना जाता है। श्रद्धालु गंगा और अन्य पवित्र नदियों से जल लाकर शिवलिंग पर अर्पित करते हैं।

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सावन और प्रकृति का गहरा संबंध

सावन वर्षा ऋतु का प्रमुख महीना है। इस समय धरती हरियाली से ढक जाती है, नदियां और तालाब भरने लगते हैं तथा किसानों के लिए खेती का सबसे महत्वपूर्ण समय शुरू होता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि वर्षा के इस मौसम में वातावरण में नमी बढ़ने से संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाता है। इसलिए भारतीय परंपरा में इस समय सात्विक भोजन, उपवास और संयमित जीवनशैली पर विशेष बल दिया गया है।

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सावन में सोमवार का महत्व

सावन के प्रत्येक सोमवार को विशेष व्रत रखा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। अविवाहित युवतियां योग्य जीवनसाथी की कामना से व्रत रखती हैं, जबकि विवाहित महिलाएं परिवार की सुख-समृद्धि और पति की लंबी आयु की प्रार्थना करती हैं।

जनजीवन पर सावन का प्रभाव

सावन केवल धार्मिक आस्था का महीना नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।

शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ जाती है।

कांवड़ यात्रा से धार्मिक पर्यटन और स्थानीय व्यापार को बढ़ावा मिलता है।

फूल, बेलपत्र, दूध, पूजा सामग्री और प्रसाद की दुकानों पर रौनक बढ़ जाती है।

ग्रामीण क्षेत्रों में खेती-किसानी की गतिविधियां तेज हो जाती हैं।

धार्मिक आयोजनों और भजन-कीर्तन से सामाजिक एकता और सांस्कृतिक परंपराएं मजबूत होती हैं।

क्या है सावन का वैज्ञानिक संदेश?

आयुर्वेद के अनुसार वर्षा ऋतु में पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है। इसलिए उपवास, हल्का भोजन और संयमित दिनचर्या स्वास्थ्य के लिए लाभकारी मानी जाती है। यही कारण है कि सावन में सात्विक भोजन और नियमित पूजा-पाठ की परंपरा को भी स्वास्थ्य से जोड़कर देखा जाता है।

श्रद्धा के साथ सावधानी भी जरूरी

प्रशासन और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह है कि कांवड़ यात्रा या मंदिर दर्शन के दौरान भीड़भाड़ वाले स्थानों पर सतर्क रहें, स्वच्छता बनाए रखें और यातायात नियमों का पालन करें, ताकि आस्था के साथ सुरक्षा भी बनी रहे।

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संपादकीय टिप्पणी

सावन केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, प्रकृति, स्वास्थ्य और सामाजिक समरसता का अद्भुत संगम है। यह महीना हमें संयम, सेवा, प्रकृति संरक्षण और भगवान शिव के आदर्शों पर चलने की प्रेरणा देता है। यदि श्रद्धा के साथ पर्यावरण संरक्षण, जल बचाने और स्वच्छता का संकल्प भी लिया जाए, तो सावन का वास्तविक संदेश समाज तक और प्रभावी ढंग से पहुंचेगा।

— FT News Digital Desk

“हर-हर महादेव… बोल बम!”

भारत-नेपाल सीमा पर SSB की बड़ी कार्रवाई, 35 बोरी यूरिया खाद और 2 साइकिल बरामद; दो व्यक्ति पकड़े गए

 


IMG 20260729 WA1070स्थान: खुनवा बॉर्डर, सिद्धार्थनगर

तिथि: 29 जुलाई 2026


भारत-नेपाल सीमा पर तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत 43वीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल (SSB) की सीमा चौकी खुनवा की टीम ने विशेष नाका ड्यूटी के दौरान 35 बोरी यूरिया खाद और दो साइकिल बरामद करते हुए दो व्यक्तियों को पकड़ लिया। पकड़े गए आरोपियों एवं बरामद सामान को अग्रिम कार्रवाई के लिए कस्टम विभाग के सुपुर्द कर दिया गया है।

विस्तृत समाचार

सिद्धार्थनगर। भारत-नेपाल सीमा पर अवैध तस्करी के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के तहत 43वीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल (SSB) को एक महत्वपूर्ण सफलता मिली है। बुधवार को सीमा चौकी खुनवा की विशेष नाका ड्यूटी ने पिलर संख्या 554/1 के निकट कार्रवाई करते हुए 35 बोरी यूरिया खाद एवं दो साइकिल बरामद की तथा दो व्यक्तियों को हिरासत में लिया।

SSB के अनुसार, सूचना के आधार पर सीमा चौकी खुनवा की टीम विशेष नाका ड्यूटी पर तैनात थी। इसी दौरान कुछ संदिग्ध गतिविधियां दिखाई दीं। जब जवान मौके पर पहुंचे तो कुछ लोग साइकिल और सिर पर यूरिया खाद लादकर भारत से नेपाल की ओर अवैध रूप से ले जाने का प्रयास कर रहे थे।

SSB जवानों ने तत्काल पीछा किया, लेकिन अंधेरे और नेपाल सीमा निकट होने का लाभ उठाकर कुछ लोग फरार हो गए। हालांकि जवानों ने मौके से मुबारक (59 वर्ष), निवासी ग्राम करहिया, थाना शोहरतगढ़ तथा अरबाज (16 वर्ष), निवासी ग्राम करहिया, थाना शोहरतगढ़ को पकड़ लिया।

पूछताछ के बाद पकड़े गए दोनों व्यक्तियों, 35 बोरी यूरिया खाद तथा दो साइकिल को आवश्यक विधिक कार्रवाई के लिए कस्टम विभाग, खुनवा के सुपुर्द कर दिया गया।

SSB ने बताया कि भारत-नेपाल सीमा पर तस्करी रोकने के लिए अभियान लगातार जारी है। बल द्वारा समय-समय पर अवैध तस्करी, मानव तस्करी, मादक पदार्थ, अवैध मुद्रा, वन्यजीव एवं अन्य प्रतिबंधित वस्तुओं की तस्करी के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। ऐसे मामलों में संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कानूनी कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाती है।

सारांश

43वीं वाहिनी SSB की बड़ी कार्रवाई

35 बोरी यूरिया खाद और 2 साइकिल बरामद

दो व्यक्ति हिरासत में, कुछ संदिग्ध फरार

पिलर संख्या 554/1 के पास हुई कार्रवाई

मामला कस्टम विभाग खुनवा को सुपुर्द

भारत-नेपाल सीमा पर तस्करी के खिलाफ अभियान जारी

FT News Digital

भारत-नेपाल सीमा पर उर्वरक समेत आवश्यक वस्तुओं की अवैध तस्करी रोकना सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती है। SSB की यह कार्रवाई सीमा पर सतर्क निगरानी का उदाहरण है। मामले में आगे की जांच और विधिक कार्रवाई संबंधित विभाग द्वारा की जा रही है।

 

 

ई-पड़ताल सर्वे के लिए आवेदन आमंत्रित, युवाओं को मिलेगा प्रति गाटा मानदेय

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स्थान: सिद्धार्थनगर

तिथि: 29 जुलाई 2026


खरीफ सीजन 2026 में जनपद की बोई जाने वाली फसलों की ई-पड़ताल (ई-क्रॉप सर्वे) के लिए सर्वेयरों का चयन किया जाएगा। इच्छुक युवक-युवतियां 5 अगस्त 2026 की शाम 5 बजे तक निःशुल्क आवेदन कर सकते हैं। चयनित सर्वेयरों को प्रति गाटा सर्वे के आधार पर मानदेय तथा इंटरनेट खर्च भी दिया जाएगा।

विस्तृत समाचार

सिद्धार्थनगर। जनपद में खरीफ, रबी एवं जायद सीजन के दौरान बोई जाने वाली फसलों की ई-पड़ताल (ई-क्रॉप सर्वे) के लिए गाटों का सर्वे कार्य प्रत्येक वर्ष कराया जाता है। आगामी खरीफ सीजन-2026 के लिए यह सर्वे कार्य अगस्त माह से प्रस्तावित है।

मुख्य विकास अधिकारी बलराम सिंह ने बताया कि इच्छुक युवक एवं युवतियां संबंधित विकास खंड के राजकीय कृषि बीज भंडार से निःशुल्क आवेदन पत्र प्राप्त कर 5 अगस्त 2026 को शाम 5:00 बजे तक अपना आवेदन उप कृषि निदेशक के ई-मेल ddasdr55@gmail.com पर भेजने के साथ-साथ संबंधित विकास खंड के राजकीय कृषि बीज भंडार पर भी जमा करें।

उन्होंने बताया कि आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों का चयन निर्धारित मानकों के अनुसार किया जाएगा। आवेदन के लिए न्यूनतम शैक्षिक योग्यता हाईस्कूल निर्धारित की गई है। साथ ही अभ्यर्थी के पास नवीनतम वर्जन का 5G एंड्रॉयड स्मार्टफोन होना अनिवार्य है।

चयनित सर्वेयरों को वर्तमान व्यवस्था के अनुसार प्रति एकल सर्वे 5 रुपये प्रति गाटा तथा एक से अधिक सर्वे की स्थिति में अधिकतम 10 रुपये प्रति गाटा की दर से मानदेय दिया जाना प्रस्तावित है। इसके अतिरिक्त सर्वे अवधि के दौरान इंटरनेट कनेक्टिविटी के लिए 350 रुपये प्रति सर्वेयर प्रति सर्वेकाल का भुगतान भी निर्धारित किया गया है।

सारांश

कार्य: खरीफ 2026 ई-पड़ताल (ई-क्रॉप सर्वे)

आवेदन की अंतिम तिथि: 5 अगस्त 2026, शाम 5:00 बजे

योग्यता: हाईस्कूल एवं 5G एंड्रॉयड स्मार्टफोन

आवेदन स्थान: संबंधित राजकीय कृषि बीज भंडार एवं ई-मेल

मानदेय: ₹5 से ₹10 प्रति गाटा तथा ₹350 इंटरनेट भत्ता

FT News Digital टिप्पणी

यह पहल फसलों के डिजिटल रिकॉर्ड को सटीक बनाने के साथ-साथ ग्रामीण युवाओं को अस्थायी रोजगार का अवसर भी प्रदान करेगी। इच्छुक अभ्यर्थी निर्धारित समय सीमा के भीतर आवेदन कर इस अवसर का लाभ उठा सकते हैं।

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