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रसोई के मसालों पर खाद्य विभाग का शिकंजा, सिद्धार्थनगर में छापेमारी; 4 नमूने जांच को भेजे गए

सिद्धार्थनगर। रसोई में इस्तेमाल होने वाले मसालों की गुणवत्ता को लेकर खाद्य सुरक्षा विभाग ने जिले में विशेष अभियान चलाते हुए विभिन्न प्रतिष्ठानों पर छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान हल्दी, लाल मिर्च और सब्जी मसाले के कुल चार नमूने संग्रहित कर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए हैं। रिपोर्ट में गड़बड़ी मिलने पर संबंधित प्रतिष्ठानों के विरुद्ध विधिक कार्रवाई की जाएगी।

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कहां-कहां से लिए गए नमूने

सुभाषनगर, शोहरतगढ़ – हल्दी पाउडर (गोल्डी ब्रांड)

 तेतरी बाजार, नौगढ़ – सब्जी मसाला (कैच ब्रांड)

 इंदिरा नगर, बांसी – लाल मिर्च पाउडर (आर.एल. ब्रांड)

 इंदिरा नगर, बांसी – हल्दी पाउडर (गर्नी ब्रांड)

सारांश

मसालों की गुणवत्ता जांच के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत खाद्य सुरक्षा विभाग ने जिले के विभिन्न क्षेत्रों में छापेमारी कर चार नमूने एकत्र किए हैं। सभी नमूने प्रयोगशाला भेज दिए गए हैं और रिपोर्ट आने के बाद खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम-2006 के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी।

मुख्य खबर

आयुक्त, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन, उत्तर प्रदेश तथा जिलाधिकारी सिद्धार्थनगर के निर्देश पर जिले में मसालों की गुणवत्ता जांच के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में सहायक आयुक्त (खाद्य) द्वितीय आर.एल. यादव के नेतृत्व में खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के सचल दल ने विभिन्न प्रतिष्ठानों पर छापामार कार्रवाई की।

अभियान के दौरान शोहरतगढ़ क्षेत्र के सुभाषनगर स्थित प्रतिष्ठान से गोल्डी ब्रांड हल्दी पाउडर, नौगढ़ के तेतरी बाजार से कैच ब्रांड सब्जी मसाला, तथा बांसी के इंदिरा नगर क्षेत्र से आर.एल. ब्रांड लाल मिर्च पाउडर एवं गर्नी ब्रांड हल्दी पाउडर के नमूने लिए गए।

खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा कुल चार नमूनों को सील कर जांच हेतु प्रयोगशाला भेजा गया है। अधिकारियों का कहना है कि प्रयोगशाला की रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद यदि किसी नमूने में गुणवत्ता मानकों का उल्लंघन या मिलावट पाई जाती है तो संबंधित के विरुद्ध खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम-2006 के अंतर्गत नियमानुसार विधिक कार्रवाई की जाएगी।


मिलावटखोरों में मचा हड़कंप

खाद्य सुरक्षा विभाग की अचानक हुई कार्रवाई से व्यापारिक प्रतिष्ठानों में हड़कंप की स्थिति रही। विभाग ने स्पष्ट किया है कि जनस्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा और खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की नियमित निगरानी की जाएगी।

कार्रवाई में शामिल अधिकारी :

आर.एल. यादव (सहायक आयुक्त खाद्य-।।), खाद्य सुरक्षा अधिकारी हीरा लाल एवं नीरज कुमार चौधरी।

रिपोर्ट : FT News Digital | सिद्धार्थनगर

“सच और… कुछ नहीं”

गांव पहुंचा प्रशासन, चौपाल में खुली विकास की किताब; डीएम बोले—पात्रों का हक मारने वालों पर होगी कड़ी कार्रवाई

 

सिद्धार्थनगर। विकास खण्ड भनवापुर की ग्राम पंचायत नावडीह में आयोजित ग्राम चौपाल “गांव की समस्या-गांव में समाधान” कार्यक्रम में जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन ने ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं और अधिकारियों को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि पात्र लाभार्थियों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने में किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि जनता का हक छीनने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।

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के प्रमुख निर्देश

✔ सभी पात्र लोगों का आयुष्मान कार्ड बनाएं

✔ पेंशन से वंचित लोगों का सत्यापन कर लाभ दिलाएं

✔ राशन वितरण में अनियमितता बिल्कुल न हो

✔ भूमि विवाद व पैमाइश के मामलों का समयबद्ध निस्तारण

✔ किसान सम्मान निधि व फसल बीमा की समस्याएं दूर करें

✔ जन्म, आय, जाति व निवास प्रमाण पत्र समय से जारी हों

✔ फार्मर रजिस्ट्री कराकर किसानों को योजनाओं से जोड़ें

सारांश

ग्राम चौपाल में जिलाधिकारी ने ग्रामीणों से सीधे संवाद कर सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत जानी। ग्रामीणों ने बताया कि अधिकांश योजनाओं का लाभ मिल रहा है। डीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि किसी भी पात्र व्यक्ति को योजना से वंचित न रखा जाए तथा सभी शिकायतों का मौके पर समाधान सुनिश्चित किया जाए।

मुख्य खबर

सिद्धार्थनगर, 12 जून। जिलाधिकारी श्री शिवशरणप्पा जीएन की अध्यक्षता एवं मुख्य विकास अधिकारी श्री बलराम सिंह की उपस्थिति में विकास खण्ड भनवापुर के अंतर्गत ग्राम पंचायत नावडीह में ग्राम चौपाल “गांव की समस्या-गांव में समाधान” कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत ग्राम प्रधान द्वारा जिलाधिकारी एवं मुख्य विकास अधिकारी का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत करने से हुई। इसके बाद जिलाधिकारी ने ग्रामीणों से सीधे संवाद स्थापित करते हुए विभिन्न सरकारी योजनाओं की जमीनी स्थिति की समीक्षा की।

ग्रामीणों ने बताया कि शासन द्वारा संचालित योजनाओं का लाभ उन्हें प्राप्त हो रहा है। इस पर जिलाधिकारी ने कहा कि आज गांव में सभी विभागों के अधिकारी मौजूद हैं, इसलिए जो भी समस्या हो, उसका तत्काल समाधान कराया जाए।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत सभी पात्र लोगों के कार्ड बनाए जाएं ताकि उन्हें पांच लाख रुपये तक की निःशुल्क उपचार सुविधा मिल सके। साथ ही किसानों की प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना तथा किसान सम्मान निधि से जुड़ी समस्याओं का भी प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण किया जाए।

जिलाधिकारी ने कहा कि प्रदेश सरकार की मंशा है कि गांव के अंतिम व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचे। इसी उद्देश्य से जनपद में लगातार ग्राम चौपालों का आयोजन किया जा रहा है।

उन्होंने वृद्धावस्था, विधवा एवं दिव्यांग पेंशन से वंचित लोगों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए कहा कि पात्र लाभार्थियों का सत्यापन कर शीघ्र पेंशन स्वीकृत कराई जाए। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्वयं सहायता समूहों से जुड़ने की अपील भी की गई।

राशन वितरण व्यवस्था पर विशेष जोर देते हुए डीएम ने कहा कि किसी भी स्तर पर अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी तथा पात्र परिवारों का नाम राशन कार्ड सूची में जोड़ा जाए। उन्होंने वरासत, भूमि विवाद, पैमाइश तथा अन्य राजस्व मामलों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।

जिलाधिकारी ने कहा कि जन्म प्रमाण पत्र, आय, जाति एवं निवास प्रमाण पत्र निर्धारित समय सीमा में जारी किए जाएं। साथ ही आपदा राहत एवं कृषक दुर्घटना बीमा योजना का लाभ पात्र व्यक्तियों तक पहुंचाया जाए।

ग्रामीणों से संवाद के दौरान उन्होंने सभी किसानों से फार्मर रजिस्ट्री कराने की अपील की ताकि वे सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ आसानी से प्राप्त कर सकें। इसके अलावा उन्होंने आगामी जनगणना कार्य में प्रगणकों का सहयोग करने का भी आह्वान किया।

ग्राम चौपाल में विभिन्न विभागों द्वारा स्टॉल लगाकर योजनाओं की जानकारी दी गई तथा अधिकारियों ने अपने-अपने विभागों की योजनाओं के बारे में विस्तार से ग्रामीणों को अवगत कराया।


“जनता का हक नहीं मारा जाएगा”

जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन ने साफ शब्दों में कहा कि केंद्र एवं प्रदेश सरकार की योजनाओं का लाभ प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए। यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी द्वारा लापरवाही अथवा हीलाहवाली की गई तो उसके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

रिपोर्ट : FT News Digital | सिद्धार्थनगर

“सच और… कुछ नहीं”

365 मंदिरों और कुओं को मिलेगा नया जीवन! बिस्कोहर बनेगा पर्यटन का नया केंद्र

डीएम शिवशरणप्पा ने किया ऐतिहासिक धरोहरों का निरीक्षण, जीर्णोद्धार की तैयारी तेज

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सिद्धार्थनगर के नगर पंचायत बिस्कोहर में स्थित ऐतिहासिक 365 मंदिरों और कुओं के संरक्षण एवं विकास की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जी.एन. ने स्वयं मौके पर पहुंचकर इन प्राचीन धरोहरों का निरीक्षण किया और इनके जीर्णोद्धार की प्रगति की जानकारी ली। शासन स्तर पर प्रस्ताव भेजे जाने के बाद अब पर्यटन विभाग इनके पुनरुद्धार का कार्य कराएगा।

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पुरातात्विक महत्व से भरपूर बिस्कोहर के 365 मंदिर और कुएं वर्षों से अपनी पहचान बनाए हुए हैं। अब इनके संरक्षण और सौंदर्यीकरण की योजना पर तेजी से काम शुरू होने जा रहा है, जिससे क्षेत्र को नई पर्यटन पहचान मिलने की उम्मीद है।

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मुख्य बिंदु

✔ डीएम शिवशरणप्पा जी.एन. ने किया निरीक्षण

✔ 365 मंदिरों और कुओं का होगा जीर्णोद्धार

✔ पुरातत्व विभाग ने सर्वे रिपोर्ट शासन को भेजी

✔ पर्यटन विभाग कराएगा विकास कार्य

✔ बिस्कोहर को मिलेगी नई पर्यटन पहचान

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सिद्धार्थनगर। जनपद की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहरों को संरक्षित करने की दिशा में प्रशासन ने महत्वपूर्ण पहल शुरू कर दी है। शुक्रवार को जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जी.एन. ने नगर पंचायत बिस्कोहर में स्थित ऐतिहासिक 365 मंदिरों एवं कुओं का स्थलीय निरीक्षण किया।

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने इन प्राचीन धरोहरों की वर्तमान स्थिति का जायजा लिया तथा संबंधित अधिकारियों से इनके संरक्षण एवं विकास को लेकर विस्तृत जानकारी प्राप्त की। उन्होंने बताया कि पुरातात्विक महत्व के दृष्टिगत बिस्कोहर के 365 मंदिरों और कुओं का सर्वेक्षण पुरातत्व विभाग द्वारा कराया गया है तथा इसकी रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है।

जिलाधिकारी ने कहा कि शासन स्तर से स्वीकृति मिलने के बाद पर्यटन विभाग द्वारा इन ऐतिहासिक स्थलों का जीर्णोद्धार एवं सौंदर्यीकरण कराया जाएगा। इससे न केवल क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत सुरक्षित होगी बल्कि पर्यटन की संभावनाओं को भी नया आयाम मिलेगा।

स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि इन प्राचीन धरोहरों का समुचित विकास होता है तो बिस्कोहर प्रदेश के प्रमुख धार्मिक एवं ऐतिहासिक पर्यटन स्थलों में अपनी अलग पहचान बना सकता है।

निरीक्षण के दौरान उपजिलाधिकारी इटवा कुणाल, नगर पंचायत बिस्कोहर के अधिशासी अधिकारी अखिलेश कुमार दीक्षित सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

सारांश :

IMG 20260612 WA1400 की ऐतिहासिक पहचान माने जाने वाले 365 मंदिरों और कुओं के संरक्षण की दिशा में प्रशासन सक्रिय हो गया है। पुरातत्व विभाग की रिपोर्ट शासन को भेजी जा चुकी है और जल्द ही पर्यटन विभाग इनके जीर्णोद्धार का कार्य शुरू कर सकता है।

 

आईजीआरएस में लापरवाही पड़ी भारी, डीएम ने रोका जून का वेतन

आईजीआरएस शिकायतों में लापरवाही पर डीएम सख्त, कई अधिकारियों का जून माह का वेतन बाधित

शिकायत निस्तारण में अनदेखी पड़ी भारी, जिलाधिकारी ने दिखाई सख्ती; तहसील से लेकर नगर निकाय और शिक्षा विभाग तक कार्रवाई की जद में


सिद्धार्थनगर। जन शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों पर जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जी.एन. ने कड़ा रुख अपनाया है। आईजीआरएस संदर्भों की समीक्षा के दौरान शिकायतों के निस्तारण में गंभीर अनियमितताएं पाए जाने पर जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों का जून माह का वेतन बाधित करने के निर्देश दिए हैं।

सारांश

जिलाधिकारी ने आईजीआरएस शिकायतों की समीक्षा में पाई गंभीर कमियां।

आवेदकों से संपर्क, स्थलीय जांच और फीडबैक की प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ।

तहसील नौगढ़ और शोहरतगढ़ के राजस्व अधिकारियों सहित कई विभाग कार्रवाई की जद में।

जून माह का वेतन बाधित करने का दिया गया निर्देश।

🔲 जन शिकायतों में लापरवाही पर प्रशासन का  कड़ा संदेश

आईजीआरएस प्रणाली के माध्यम से आने वाली शिकायतों का समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण शासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। समीक्षा के दौरान निर्धारित प्रक्रिया का पालन न होने पर जिलाधिकारी की यह कार्रवाई प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

मुख्य खबर

जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जी.एन. ने 11 जून 2026 को आईजीआरएस पोर्टल पर दर्ज कुछ शिकायतों का परीक्षण किया। जांच के दौरान पाया गया कि कई मामलों में शासन द्वारा निर्धारित शिकायत निस्तारण प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।

समीक्षा में यह तथ्य सामने आया कि शिकायतकर्ताओं से संपर्क स्थापित नहीं किया गया, कई मामलों में स्थलीय निरीक्षण नहीं हुआ तथा जांच के निष्कर्षों से आवेदकों को अवगत कराने की प्रक्रिया भी पूरी नहीं की गई। इसे शिकायत निस्तारण प्रणाली में गंभीर लापरवाही माना गया।

जांच के दौरान तहसील नौगढ़ एवं शोहरतगढ़ के तहसीलदार, नायब तहसीलदार, नौ लेखपाल, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, नगर पालिका परिषद सिद्धार्थनगर के अधिशासी अधिकारी, नगर पंचायत बढ़नी तथा उसका बाजार के अधिशासी अधिकारियों के स्तर पर कमियां पाई गईं।

मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों का जून माह का वेतन बाधित करने के निर्देश जारी किए हैं। प्रशासनिक हलकों में इस कार्रवाई को जवाबदेही तय करने और शिकायत निस्तारण व्यवस्था को प्रभावी बनाने की दिशा में कड़ा संदेश माना जा रहा है।


🔲 क्या हैं प्रमुख कमियां?

शिकायतकर्ता से संपर्क नहीं किया गया।

स्थलीय निरीक्षण नहीं कराया गया।

जांच रिपोर्ट की जानकारी आवेदक को नहीं दी गई।

शासन की निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ।


(नोट: यह समाचार जिला प्रशासन द्वारा जारी आधिकारिक सूचना के आधार पर तैयार किया

गया है।)


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**”सच और… कुछ नहीं”**

आईजीआरएस शिकायतों में लापरवाही पर डीएम सख्त, कई अधिकारियों का जून माह का वेतन बाधित

आईजीआरएस शिकायतों में लापरवाही पर डीएम सख्त, कई अधिकारियों का जून माह का वेतन बाधित


शिकायत निस्तारण में अनदेखी पड़ी भारी, जिलाधिकारी ने दिखाई सख्ती; तहसील से लेकर नगर निकाय और शिक्षा विभाग तक कार्रवाई की जद में


सिद्धार्थनगर। जन शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों पर जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जी.एन. ने कड़ा रुख अपनाया है। आईजीआरएस संदर्भों की समीक्षा के दौरान शिकायतों के निस्तारण में गंभीर अनियमितताएं पाए जाने पर जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों का जून माह का वेतन बाधित करने के निर्देश दिए हैं।

सारांश

जिलाधिकारी ने आईजीआरएस शिकायतों की समीक्षा में पाई गंभीर कमियां।

आवेदकों से संपर्क, स्थलीय जांच और फीडबैक की प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ।

तहसील नौगढ़ और शोहरतगढ़ के राजस्व अधिकारियों सहित कई विभाग कार्रवाई की जद में।

जून माह का वेतन बाधित करने का दिया गया निर्देश।


🔲 जन शिकायतों में लापरवाही पर प्रशासन का  कड़ा संदेश

आईजीआरएस प्रणाली के माध्यम से आने वाली शिकायतों का समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण शासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। समीक्षा के दौरान निर्धारित प्रक्रिया का पालन न होने पर जिलाधिकारी की यह कार्रवाई प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।


मुख्य खबर

जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जी.एन. ने 11 जून 2026 को आईजीआरएस पोर्टल पर दर्ज कुछ शिकायतों का परीक्षण किया। जांच के दौरान पाया गया कि कई मामलों में शासन द्वारा निर्धारित शिकायत निस्तारण प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।

समीक्षा में यह तथ्य सामने आया कि शिकायतकर्ताओं से संपर्क स्थापित नहीं किया गया, कई मामलों में स्थलीय निरीक्षण नहीं हुआ तथा जांच के निष्कर्षों से आवेदकों को अवगत कराने की प्रक्रिया भी पूरी नहीं की गई। इसे शिकायत निस्तारण प्रणाली में गंभीर लापरवाही माना गया।

जांच के दौरान तहसील नौगढ़ एवं शोहरतगढ़ के तहसीलदार, नायब तहसीलदार, नौ लेखपाल, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, नगर पालिका परिषद सिद्धार्थनगर के अधिशासी अधिकारी, नगर पंचायत बढ़नी तथा उसका बाजार के अधिशासी अधिकारियों के स्तर पर कमियां पाई गईं।

मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों का जून माह का वेतन बाधित करने के निर्देश जारी किए हैं। प्रशासनिक हलकों में इस कार्रवाई को जवाबदेही तय करने और शिकायत निस्तारण व्यवस्था को प्रभावी बनाने की दिशा में कड़ा संदेश माना जा रहा है।


🔲 क्या हैं प्रमुख कमियां?

शिकायतकर्ता से संपर्क नहीं किया गया।

स्थलीय निरीक्षण नहीं कराया गया।

जांच रिपोर्ट की जानकारी आवेदक को नहीं दी गई।

शासन की निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ।


(नोट: यह समाचार जिला प्रशासन द्वारा जारी आधिकारिक सूचना के आधार पर तैयार किया


गया है।)

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“सच और… कुछ नहीं”

हाईवे बना मंडी? नौगढ़ में सड़क किनारे निर्माण सामग्री के ढेर पर उठे सवाल

नेशनल हाईवे पर अतिक्रमण से बढ़ा खतरा, सड़क किनारे निर्माण सामग्री के कारोबार पर उठे सवालIMG 20260612 WA1393

राहगीरों की सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को लेकर ग्रामीणों ने उठाई आवाज


सिद्धार्थनगर। सदर थाना क्षेत्र के नौगढ़ पुलिस चौकी अंतर्गत नगर पालिका क्षेत्र तथा बर्डपुर नंबर-14 के झंडेनगर और गरीबपुर के आसपास नेशनल हाईवे के किनारे एवं बस स्टॉप के समीप निर्माण सामग्री के भंडारण और कारोबार को लेकर स्थानीय लोगों ने गंभीर चिंता जताई है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क किनारे गिट्टी, मोरंग, बालू, सीमेंट और सरिया रखे जाने से यातायात प्रभावित हो रहा है तथा दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ गई है। लोगों ने जनहित में प्रशासन से जांच कर आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।

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ग्रामीणों की प्रमुख शिकायतें

हाईवे किनारे निर्माण सामग्री रखे जाने का आरोप।

बस स्टॉप और सड़क के आसपास आवागमन प्रभावित होने की शिकायत।

धूल और प्रदूषण से स्थानीय लोगों को परेशानी।

दुर्घटनाओं की आशंका को लेकर बढ़ी चिंता।

प्रशासन से अतिक्रमण हटाने और जांच की मांग।


जनहित से जुड़े सवाल

 क्या हाईवे किनारे निर्माण सामग्री का भंडारण नियमों के अनुरूप है?

 क्या सड़क सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा है?

 क्या राहगीरों और वाहन चालकों की सुरक्षा प्रभावित हो रही है?

 स्थानीय लोगों की शिकायतों पर क्या होगी कार्रवाई?


जांच के बाद ही स्पष्ट होगी वास्तविक स्थिति।

विस्तृत खबर

सिद्धार्थनगर जिले के नौगढ़ क्षेत्र में नेशनल हाईवे के किनारे निर्माण सामग्री के कारोबार और भंडारण को लेकर स्थानीय नागरिकों में नाराजगी देखने को मिल रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क और बस स्टॉप के आसपास गिट्टी, मोरंग, बालू, सीमेंट तथा सरिया जैसी सामग्री रखे जाने से राहगीरों और वाहन चालकों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि सड़क किनारे सामग्री रखे जाने से उड़ने वाली धूल आसपास के घरों तक पहुंच रही है, जिससे पर्यावरण और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। वहीं, यातायात प्रभावित होने और दुर्घटनाओं की आशंका को लेकर भी लोगों ने चिंता व्यक्त की है।

ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि संबंधित विभाग मौके का निरीक्षण कर यह सुनिश्चित करे कि कहीं सड़क सुरक्षा मानकों और सार्वजनिक भूमि से जुड़े नियमों का उल्लंघन तो नहीं हो रहा है। उनका कहना है कि यदि कोई अनियमितता पाई जाती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

हालांकि, इस संबंध में संबंधित कारोबारियों या प्रशासनिक अधिकारियों का पक्ष प्राप्त नहीं हो सका है। इसलिए सभी आरोप और दावे स्वतंत्र जांच तथा प्रशासनिक सत्यापन के अधीन हैं।

सारांश

नौगढ़ क्षेत्र में नेशनल हाईवे किनारे निर्माण सामग्री के कथित भंडारण और कारोबार को लेकर स्थानीय लोगों ने सड़क सुरक्षा, यातायात व्यवस्था और प्रदूषण से जुड़े सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच कर जनहित में आवश्यक कदम उठाने की मांग की है। मामले की वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

 

बढ़नी ब्लॉक में प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल, सरकारी कार्यों में कथित हस्तक्षेप की जांच की मांग

भुगतान व्यवस्था, कार्यक्षेत्र आवंटन और प्रशासनिक निर्णयों को लेकर चर्चाएं तेज; आधिकारिक जांच का इंतजार


बढ़नी ब्लॉक में VDO के कार्यों में बाहरी हस्तक्षेप के आरोप, प्रशासनिक व्यवस्था पर उठे सवाल

सरकारी कार्यों के संचालन और भुगतान प्रणाली को लेकर चर्चा तेज, जांच की मांग


बढ़नी (सिद्धार्थनगर)। विकास खंड बढ़नी में ग्राम विकास अधिकारी (वीडीओ) के कार्यों में कथित बाहरी हस्तक्षेप और सरकारी भुगतान प्रणाली के संचालन को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। स्थानीय स्तर पर उठ रहे सवालों और विभिन्न माध्यमों से सामने आए आरोपों के बाद प्रशासनिक व्यवस्था की पारदर्शिता पर बहस छिड़ गई है। हालांकि, इन आरोपों की अभी तक किसी सक्षम अधिकारी द्वारा आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन मामले की निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो रही है।


आरोप क्या हैं?

वीडीओ के सरकारी कार्यों में कथित रूप से परिजन के हस्तक्षेप की चर्चा।

भुगतान प्रक्रिया से जुड़े उपकरण और कार्य संचालन को लेकर सवाल।

कार्यक्षेत्र के पुनर्वितरण को लेकर भी चर्चाएं।

स्थानीय स्तर पर निष्पक्ष जांच और स्पष्ट जवाबदेही की मांग।


मुख्य बिंदु

सरकारी कार्यों में पारदर्शिता पर उठे सवाल।

 भुगतान प्रणाली के संचालन को लेकर चर्चा।

 प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका पर सवालिया निशान।

आधिकारिक जांच के बाद ही स्थिति होगी स्पष्ट।

जनहित में निष्पक्ष जांच की मांग।


खबर

विकास खंड बढ़नी में इन दिनों प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर कई तरह की चर्चाएं सामने आ रही हैं। क्षेत्र में यह आरोप लगाए जा रहे हैं कि एक ग्राम विकास अधिकारी के कार्यों में कथित रूप से बाहरी व्यक्ति का प्रभाव देखा जा रहा है। साथ ही भुगतान प्रक्रिया और कुछ प्रशासनिक निर्णयों को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।

सूत्रों और स्थानीय चर्चाओं के अनुसार, हाल के दिनों में कार्यक्षेत्र के पुनर्वितरण और कुछ अतिरिक्त ग्राम पंचायतों के आवंटन को लेकर भी लोगों के बीच चर्चा बनी हुई है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

मामले को लेकर सबसे अधिक चर्चा सरकारी भुगतान प्रणाली से जुड़े उपकरणों और कार्य संचालन को लेकर हो रही है। जनप्रतिनिधियों तथा स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि सरकारी कार्यों में किसी भी स्तर पर अनधिकृत हस्तक्षेप हुआ है तो इसकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए, ताकि स्थिति स्पष्ट हो सके और जनता का विश्वास बना रहे।

विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी वित्तीय एवं प्रशासनिक प्रक्रियाओं में निर्धारित नियमों का पालन अत्यंत आवश्यक है। यदि कहीं कोई अनियमितता सामने आती है तो संबंधित विभाग द्वारा उसकी जांच कर उचित कार्रवाई की जानी चाहिए।

फिलहाल पूरे मामले में प्रशासन की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में सभी आरोप जांच और सक्षम अधिकारियों की पुष्टि के अधीन हैं।

सारांश

बढ़नी ब्लॉक में सरकारी कार्यों के संचालन, भुगतान व्यवस्था और कथित बाहरी हस्तक्षेप को लेकर उठे सवालों ने प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है। आरोपों की पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन जनहित में निष्पक्ष जांच और तथ्यों को सार्वजनिक किए जाने की मांग जोर पकड़ रही है। जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकेगी।

बढ़नी ब्लॉक में प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल, सरकारी कार्यों में कथित हस्तक्षेप की जांच की मांग

भुगतान व्यवस्था, कार्यक्षेत्र आवंटन और प्रशासनिक निर्णयों को लेकर चर्चाएं तेज; आधिकारिक जांच का इंतजार


बढ़नी ब्लॉक में VDO के कार्यों में बाहरी हस्तक्षेप के आरोप, प्रशासनिक व्यवस्था पर उठे सवाल

सरकारी कार्यों के संचालन और भुगतान प्रणाली को लेकर चर्चा तेज, जांच की मांग


बढ़नी (सिद्धार्थनगर)। विकास खंड बढ़नी में ग्राम विकास अधिकारी (वीडीओ) के कार्यों में कथित बाहरी हस्तक्षेप और सरकारी भुगतान प्रणाली के संचालन को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। स्थानीय स्तर पर उठ रहे सवालों और विभिन्न माध्यमों से सामने आए आरोपों के बाद प्रशासनिक व्यवस्था की पारदर्शिता पर बहस छिड़ गई है। हालांकि, इन आरोपों की अभी तक किसी सक्षम अधिकारी द्वारा आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन मामले की निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो रही है।


आरोप क्या हैं?

वीडीओ के सरकारी कार्यों में कथित रूप से परिजन के हस्तक्षेप की चर्चा।

भुगतान प्रक्रिया से जुड़े उपकरण और कार्य संचालन को लेकर सवाल।

कार्यक्षेत्र के पुनर्वितरण को लेकर भी चर्चाएं।

स्थानीय स्तर पर निष्पक्ष जांच और स्पष्ट जवाबदेही की मांग।


मुख्य बिंदु

सरकारी कार्यों में पारदर्शिता पर उठे सवाल।

 भुगतान प्रणाली के संचालन को लेकर चर्चा।

 प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका पर सवालिया निशान।

आधिकारिक जांच के बाद ही स्थिति होगी स्पष्ट।

जनहित में निष्पक्ष जांच की मांग।


खबर

विकास खंड बढ़नी में इन दिनों प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर कई तरह की चर्चाएं सामने आ रही हैं। क्षेत्र में यह आरोप लगाए जा रहे हैं कि एक ग्राम विकास अधिकारी के कार्यों में कथित रूप से बाहरी व्यक्ति का प्रभाव देखा जा रहा है। साथ ही भुगतान प्रक्रिया और कुछ प्रशासनिक निर्णयों को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।

सूत्रों और स्थानीय चर्चाओं के अनुसार, हाल के दिनों में कार्यक्षेत्र के पुनर्वितरण और कुछ अतिरिक्त ग्राम पंचायतों के आवंटन को लेकर भी लोगों के बीच चर्चा बनी हुई है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

मामले को लेकर सबसे अधिक चर्चा सरकारी भुगतान प्रणाली से जुड़े उपकरणों और कार्य संचालन को लेकर हो रही है। जनप्रतिनिधियों तथा स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि सरकारी कार्यों में किसी भी स्तर पर अनधिकृत हस्तक्षेप हुआ है तो इसकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए, ताकि स्थिति स्पष्ट हो सके और जनता का विश्वास बना रहे।

विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी वित्तीय एवं प्रशासनिक प्रक्रियाओं में निर्धारित नियमों का पालन अत्यंत आवश्यक है। यदि कहीं कोई अनियमितता सामने आती है तो संबंधित विभाग द्वारा उसकी जांच कर उचित कार्रवाई की जानी चाहिए।

फिलहाल पूरे मामले में प्रशासन की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में सभी आरोप जांच और सक्षम अधिकारियों की पुष्टि के अधीन हैं।

सारांश

बढ़नी ब्लॉक में सरकारी कार्यों के संचालन, भुगतान व्यवस्था और कथित बाहरी हस्तक्षेप को लेकर उठे सवालों ने प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है। आरोपों की पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन जनहित में निष्पक्ष जांच और तथ्यों को सार्वजनिक किए जाने की मांग जोर पकड़ रही है। जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकेगी।

वन विभाग पर उठे सवाल: गिरे आम के पेड़ की कथित कटान-बिक्री की शिकायत, जांच की मांग!

सिद्धार्थनगर, उत्तर प्रदेश। जनपद के नौगढ़ रेंज क्षेत्र में संरक्षित वन भूमि पर स्थित एक आम के पेड़ की कटान एवं उसके निस्तारण को लेकर शिकायत दर्ज कराए जाने का मामला सामने आया है। शिकायतकर्ता दुर्गेश मिश्रा, निवासी पलिया निधि, ब्लॉक नौगढ़, तहसील शोहरतगढ़ ने उत्तर प्रदेश के जनसुनवाई (IGRS) पोर्टल के माध्यम से संबंधित प्रकरण की जांच कराए जाने और आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।

शिकायत के अनुसार, नौगढ़ रेंज के धेंसा नानकार क्षेत्र में संरक्षित वन भूमि पर स्थित एक आम का पेड़ लगभग दस दिन पूर्व आए आंधी-तूफान के दौरान गिर गया था। शिकायतकर्ता का कहना है कि बाद में उक्त पेड़ को काटकर उसका निस्तारण किए जाने की जानकारी उन्हें स्थानीय स्तर पर प्राप्त हुई। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि इस संबंध में आवश्यक अनुमति और विभागीय प्रक्रिया का पालन किए जाने को लेकर संदेह व्यक्त किया गया है।

दुर्गेश मिश्रा द्वारा दर्ज शिकायत में मांग की गई है कि संबंधित मामले की निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि पेड़ के निस्तारण की प्रक्रिया वन विभाग के नियमों एवं निर्धारित प्रावधानों के अनुरूप की गई थी या नहीं। शिकायतकर्ता ने यह भी अनुरोध किया है कि जांच में यदि किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

उल्लेखनीय है कि वन भूमि पर स्थित पेड़ों के कटान, निस्तारण अथवा बिक्री से संबंधित मामलों में निर्धारित विभागीय प्रक्रियाओं और अनुमति की आवश्यकता होती है। ऐसे मामलों में अंतिम स्थिति जांच और सक्षम अधिकारियों की रिपोर्ट के आधार पर ही स्पष्ट हो सकती है।

जनसुनवाई पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यह शिकायत वर्तमान में विचाराधीन (Pending) बताई जा रही है। मामले में अभी तक संबंधित विभाग अथवा अधिकारियों की ओर से कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं हुई है।

महत्वपूर्ण: यह समाचार जनसुनवाई पोर्टल पर दर्ज शिकायत और शिकायतकर्ता द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी पर आधारित है। समाचार में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। मामले की वास्तविक स्थिति संबंधित विभागीय जांच एवं सक्षम अधिकारियों की रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

“गिरे आम के पेड़ की कटान-बिक्री का आरोप, वन विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
  1. वन विभाग पर उठे सवाल: गिरे आम के पेड़ की कथित कटान-बिक्री की शिकायत, जांच की मांग
    महादेवा नानकार में आंधी से गिरे पेड़ के निस्तारण को लेकर विवाद, जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत दर्ज
    सिद्धार्थनगर, संवाददाता। नौगढ़ वन रेंज के महादेवा नानकार क्षेत्र में आंधी-तूफान के दौरान गिरे एक आम के पेड़ के निस्तारण को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। मामले में एक स्थानीय निवासी ने जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत दर्ज कर आरोप लगाया है कि संरक्षित वन भूमि के निकट स्थित उक्त पेड़ को बिना निर्धारित प्रक्रिया और वैध अनुमति के कटवाकर बेच दिया गया। शिकायत फिलहाल संबंधित विभाग के स्तर पर लंबित बताई जा रही है।

 

जनसुनवाई पोर्टल पर दर्ज शिकायत ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिकायतकर्ता ने मामले की उच्चस्तरीय जांच कर जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है। हालांकि समाचार लिखे जाने तक विभाग का आधिकारिक पक्ष प्राप्त नहीं हो सका था।

शिकायत में क्या कहा गया है?
शिकायतकर्ता का दावा है कि महादेवा नानकार क्षेत्र में आंधी से गिरा आम का पेड़ कई दिनों तक मौके पर पड़ा रहा। बाद में उसे काटकर हटाया गया। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि पेड़ के निस्तारण में निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया। शिकायत में संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भूमिका की जांच की मांग की गई है।
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जांच में सामने आ सकते हैं ये सवाल
क्या पेड़ के निस्तारण की विधिवत अनुमति ली गई थी?
क्या विभागीय अभिलेखों में इसकी प्रविष्टि दर्ज है?
पेड़ कटान और हटाने की प्रक्रिया किसके आदेश पर हुई?
क्या निस्तारण नियमानुसार किया गया?
शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है?

महादेवा नानकार क्षेत्र में स्थित एक आम का पेड़ हाल ही में आए आंधी-तूफान में गिर गया था। शिकायतकर्ता के अनुसार पेड़ संरक्षित वन क्षेत्र के निकट स्थित था। जनसुनवाई पोर्टल पर दर्ज शिकायत में आरोप लगाया गया है कि बाद में उक्त पेड़ को काटकर हटाया गया तथा उसकी बिक्री कर दी गई।
शिकायतकर्ता ने अपने आवेदन में पूरे प्रकरण की जांच कर संबंधित अभिलेखों और अनुमति संबंधी दस्तावेजों की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह सरकारी संपत्ति के निस्तारण संबंधी नियमों के उल्लंघन का मामला हो सकता है।
उधर, समाचार लिखे जाने तक वन विभाग अथवा संबंधित अधिकारियों की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं हो सकी थी। ऐसे में आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है।
प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार
मामला अब जांच के दायरे में है। जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत लंबित होने के कारण क्षेत्र के लोगों की निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई और विभागीय जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
(अस्वीकरण : यह समाचार शिकायतकर्ता द्वारा जनसुनवाई पोर्टल पर दर्ज कराए गए आरोपों एवं उपलब्ध दस्तावेजों पर आधारित है। समाचार पत्र/चैनल इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता। संबंधित विभाग का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)

महादेवा नानकार का मामला, जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत दर्ज; जांच रिपोर्ट का इंतजार

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