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सिद्धार्थनगर बार एसोसिएशन की बड़ी कार्रवाई: अधिवक्ता इजहार अहमद खान की सदस्यता समाप्त, चैम्बर सील

सिद्धार्थनगर। सिविल सिद्धार्थ बार एसोसिएशन की कार्यकारिणी ने अधिवक्ता इजहार अहमद खान के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए उनकी सदस्यता समाप्त कर दी है। कार्यकारिणी के सर्वसम्मत निर्णय के बाद उनके चैम्बर को भी तत्काल प्रभाव से सील कर दिया गया।

आपातकालीन बैठक में लिया गया निर्णय

जानकारी के अनुसार, दिनांक 03 फरवरी 2026 को सायं 4 बजे बार एसोसिएशन की आपातकालीन बैठक अध्यक्ष अखण्ड प्रताप सिंह की अध्यक्षता एवं महामंत्री कृपाशंकर त्रिपाठी के संचालन में आयोजित की गई। बैठक में सभी कार्यकारिणी सदस्य उपस्थित रहे।

बैठक के दौरान अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि इजहार अहमद खान द्वारा अधिवक्ता समुदाय के खिलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया, जिसकी ऑडियो रिकॉर्डिंग कार्यकारिणी को सुनाई गई। इसके बाद उन्हें 6 फरवरी 2026 तक स्पष्टीकरण देने हेतु नोटिस जारी किया गया था।

स्पष्टीकरण न मिलने पर बढ़ी कार्रवाई

निर्धारित समय तक संतोषजनक जवाब न मिलने पर 6 फरवरी को दोपहर 1 बजे पुनः कार्यकारिणी की बैठक बुलाई गई। बैठक में पूर्व में लगे आरोपों और हालिया घटनाओं पर चर्चा के बाद कार्यकारिणी ने अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का निर्णय लिया।

कार्यकारिणी ने जताई गंभीर आपत्ति

बैठक में बताया गया कि अधिवक्ता पर पूर्व में भी विवादित आचरण के आरोप लग चुके हैं। हालिया घटना के बाद बार परिसर और अधिवक्ता समुदाय में आक्रोश का माहौल बताया गया। कार्यकारिणी ने इसे बार की गरिमा और अनुशासन के विरुद्ध मानते हुए कड़ा कदम उठाया।

सदस्यता समाप्त, चैम्बर किया गया सील

कार्यकारिणी ने सर्वसम्मति से इजहार अहमद खान की बार एसोसिएशन सदस्यता समाप्त करने का प्रस्ताव पारित किया। साथ ही उनके चैम्बर को सील कर कार्यकारिणी के नियंत्रण में लेने का आदेश दिया गया, जिसका तत्काल अनुपालन भी कराया गया।

बार एसोसिएशन अध्यक्ष ने कहा कि

बार एसोसिएशन अध्यक्ष अखंड प्रताप सिंह और पदाधिकारियों ने कहा कि संगठन की गरिमा, अनुशासन और पेशे की मर्यादा बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है, और भविष्य में भी किसी भी अनुशासनहीनता पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

Breaking News: यूपी में SIR की तारीख एक माह बढ़ी, अब 6 मार्च तक कर सकेंगे दावा-आपत्ति

उत्तर प्रदेश में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची में दावा और आपत्ति दर्ज कराने की समय-सीमा को एक माह के लिए बढ़ा दिया गया है। अब मतदाता 6 मार्च 2026 तक नाम जोड़ने, हटाने या संशोधन के लिए आवेदन कर सकेंगे।

प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) नवदीप रिणवा ने यह जानकारी देते हुए कहा कि बड़ी संख्या में फॉर्म-6 प्राप्त होने के कारण यह निर्णय लिया गया है।

अब 6 मार्च तक मिलेगा मतदाताओं को मौका

मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि

मतदाता सूची में नाम जुड़वाने, कटवाने और संशोधन के लिए अब 6 मार्च तक समय मिलेगा

नोटिसों का निराकरण 27 मार्च 2026 तक किया जाएगा

अंतिम मतदाता सूची 10 अप्रैल 2026 को प्रकाशित की जाएगी

हर बूथ पर रोज दो घंटे मौजूद रहेंगे बीएलओ

मतदाताओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए निर्वाचन आयोग ने निर्देश दिए हैं कि

बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) हर दिन

सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक

अपने-अपने पोलिंग स्टेशनों पर मौजूद रहेंगे

फॉर्म भरने में मतदाताओं की सहायता करेंगे और जरूरी प्रपत्र उपलब्ध कराएंगे

राज्यभर में 8,990 एईआरओ करेंगे सुनवाई

सीईओ नवदीप रिणवा ने बताया कि

पूरे प्रदेश में 8,990 सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (AERO)

दावे और आपत्तियों की सुनवाई करेंगे

आंकड़ों में SIR की स्थिति

मतदाता सूची से 2.89 करोड़ नाम हटाए गए

12.55 करोड़ मतदाताओं की ड्राफ्ट सूची जारी

प्रतिदिन 2.5 से 3 लाख लोग फॉर्म-6 भर रहे हैं

कुल 3.26 करोड़ मतदाताओं को नोटिस जारी होनी है

अब तक 2.37 करोड़ नोटिस जारी

86.27 लाख को नोटिस मिल चुकी

30.30 लाख मतदाताओं की सुनवाई पूरी

महिला और युवा मतदाता अभी भी पीछे

चुनाव आयोग के अनुसार

6 जनवरी तक 16.18 लाख लोगों ने फॉर्म-6 भरा

6 जनवरी से 4 फरवरी के बीच 37.80 लाख आवेदन

5 फरवरी को एक ही दिन में 3.51 लाख फॉर्म-6 जमा

अभी भी बड़ी संख्या में महिला और युवा मतदाता सूची से बाहर हैं

उन्हें शामिल करने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं

नोटिस पाने वाले सिर्फ 13% मतदाताओं की हो सकी सुनवाई

वर्ष 2003 की मतदाता सूची से मिलान न हो पाने वाले और तार्किक विसंगति वाले मतदाताओं को नोटिस भेजी जा रही है।

कुल 3.26 करोड़ मतदाताओं को नोटिस दी जानी है

अब तक केवल 13 प्रतिशत की ही सुनवाई हो सकी

अभी 1.53 करोड़ नोटिस जारी होना बाकी

इसी वजह से दावा-आपत्ति और सुनवाई की समय-सीमा बढ़ाई गई है।

चुनाव आयोग की अपील

चुनाव आयोग ने सभी पात्र नागरिकों से अपील की है कि वे तय समय-सीमा के भीतर अपने नाम की जांच कर लें और किसी भी त्रुटि की स्थिति में दावा-आपत्ति जरूर दर्ज कराएं, ताकि कोई भी योग्य मतदाता अंतिम सूची से वंचित न रहे।

सुप्रीम कोर्ट के नियमित करने और 17 हजार के फैसले से सिद्धार्थनगर के अनुदेशकों में खुशी की लहर..बांटी मिठाईयां

सिद्धार्थनगर। सुप्रीम कोर्ट द्वारा अनुदेशक शिक्षकों का मानदेय ₹17,000 प्रतिमाह किए जाने के ऐतिहासिक और न्यायपूर्ण निर्णय के बाद जनपद सिद्धार्थनगर में खुशी का माहौल है। वर्षों से चल रहे संघर्ष, धरना-प्रदर्शन और कानूनी लड़ाई के बाद आए इस फैसले को शिक्षकों ने अपने सम्मान और अधिकार की बड़ी जीत बताया है।

वर्षों के संघर्ष का मिला परिणाम

अनुदेशक शिक्षक लंबे समय से मानदेय बढ़ोतरी और सेवा सुरक्षा की मांग को लेकर आंदोलनरत थे। यह फैसला उनके धैर्य, एकजुटता और निरंतर संघर्ष की जीत माना जा रहा है। शिक्षकों का कहना है कि इस निर्णय से न सिर्फ आर्थिक स्थिति सुधरेगी बल्कि सामाजिक सम्मान भी बढ़ेगा।

जिला अध्यक्ष अनिल पांडेय ने जताया आभार

परिषदीय अनुदेशक कल्याण एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष अनिल पांडेय ने कहा कि:

“यह फैसला अनुदेशक शिक्षकों की एकजुटता और संघर्ष का परिणाम है। माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने शिक्षा से जुड़े हजारों परिवारों को बड़ी राहत दी है।”

उन्होंने न्यायपालिका के प्रति आभार व्यक्त किया।

मानदेय वृद्धि सम्मान की जीत:मीडिया प्रभारी

जिला मीडिया प्रभारी सत्यपाल सिंह कौशिक ने कहाकि,

“यह सिर्फ मानदेय बढ़ोतरी नहीं बल्कि सम्मान और सामाजिक सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम है। यह फैसला अनुदेशक शिक्षकों के भविष्य को सुरक्षित करेगा और शिक्षा व्यवस्था को भी मजबूत करेगा।”

पदाधिकारियों ने जताई खुशी

महामंत्री रामानंद उपाध्याय और मधुकर मंजुल ने भी फैसले पर खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि यह निर्णय हजारों परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएगा।

मिठाई बांटकर मनाई खुशी

इस अवसर पर अनुपम कुंवर, सौम्य सोनकर, रविकांत, बुद्धिराम, विष्णु, दिलीप साहनी, संतोष सिंह, पप्पू सिंह, सत्य मृत्युंजयधर द्विवेदी, अजीजुररहमान सहित कई अनुदेशक शिक्षकों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशी साझा की।

शिक्षा व्यवस्था को मिलेगा मजबूती

विशेषज्ञों का मानना है कि मानदेय वृद्धि से शिक्षकों का मनोबल बढ़ेगा, जिससे प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा और ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था को स्थिरता मिलेगी।

सिद्धार्थनगर सिविल कोर्ट में ‘राम द्वार’ का भव्य उद्घाटन, जिला जज अजय कुमार श्रीवास्तव ने दिया सामाजिक संदेश

जनपद सिद्धार्थनगर के सिविल कोर्ट परिसर में बने “राम द्वार” का विधिवत उद्घाटन तृतीय जनपद न्यायाधीश अजय कुमार श्रीवास्तव द्वारा फीता काटकर किया गया। यह अवसर पूरे न्यायालय परिसर के लिए उत्सव जैसा बन गया, जहाँ अधिवक्ताओं ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर बधाई और शुभकामनाएं दीं।

धार्मिक और सांस्कृतिक भावनाओं से जुड़ा आयोजन

राम द्वार के उद्घाटन समारोह में न्यायिक गरिमा के साथ-साथ सांस्कृतिक आस्था की झलक भी देखने को मिली। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में अधिवक्ता उपस्थित रहे और इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बने। आयोजन के बाद भंडारे का भी आयोजन किया गया, जिसमें सभी ने प्रसाद ग्रहण किया।

मेरे लिए यह गर्व का क्षण: जिला जज 

उद्घाटन के दौरान तृतीय जनपद न्यायाधीश अजय कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि:

“यह मेरे लिए अत्यंत गर्व व हर्ष का विषय है कि मुझे राम द्वार का उद्घाटन करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। हम सभी को प्रभु श्रीराम के आदर्शों का अनुकरण करना चाहिए। साथ ही अधिवक्ताओं से अनुरोध है कि अनावश्यक हड़ताल से बचें और न्याय व्यवस्था को सुचारु रूप से चलने दें।”

उनके इस संदेश को उपस्थित अधिवक्ताओं ने गंभीरता से सुना और सराहा।

अधिवक्ता संघ की भी रही सक्रिय भागीदारी

कार्यक्रम में सिद्धार्थ सिविल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अखण्ड प्रताप सिंह भी मौजूद रहे। उन्होंने इस अवसर को न्यायालय परिवार के लिए गौरवपूर्ण बताते हुए कहा कि, “इस तरह के निर्माण न्यायिक परिसर की गरिमा बढ़ाते हैं और अधिवक्ताओं को एकता का संदेश देते हैं।”

न्यायाधीशगणों की रही मौजूदगी

इस अवसर पर अरविंद राय (न्यायाधीश मोटर दुर्घटना न्यायालय), मो.रफी (अपर जनपद न्यायाधीश प्रथम), विशेष न्यायाधीश विरेंद्र, न्यायालय एससी-एसटी मनोज तिवारी भी मौजूद रहे।

भंडारे का हुआ आयोजन 

उद्घाटन के बाद आयोजित भंडारे में अधिवक्ताओं और अन्य उपस्थित लोगों ने सहभागिता की। पूरे वातावरण में उल्लास और सौहार्द का माहौल रहा।

वर्दी हुई शर्मसार..4 लाख रिश्वत लेते इंस्पेक्टर हुआ गिरफ्तार

बेंगलुरू: बीते 31 जनवरी को बेंगलुरु में भ्रष्टाचार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत एंटी करप्शन ब्यूरो / लोकायुक्त पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक पुलिस इंस्पेक्टर को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है।

जानकारी के मुताबिक, के.पी. अग्रहार पुलिस स्टेशन में तैनात इंस्पेक्टर गोविंदराजू पर आरोप है कि उन्होंने एक व्यक्ति को धोखाधड़ी के मामले में फंसाने की चेतावनी देते हुए उससे चार लाख रुपये की अवैध मांग की थी। पीड़ित द्वारा शिकायत दर्ज कराए जाने के बाद सतर्कता एजेंसी ने पूरे मामले की गोपनीय जांच की और फिर जाल बिछाया।

जैसे ही तय योजना के तहत रिश्वत की रकम दी गई, एसीबी की टीम ने मौके पर पहुंचकर इंस्पेक्टर को रंगे हाथों दबोच लिया। कार्रवाई के दौरान इंस्पेक्टर द्वारा कथित तौर पर हंगामा करने और लोगों का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश भी सामने आई, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

हालांकि, जांच एजेंसी ने तकनीकी और भौतिक साक्ष्यों के आधार पर गिरफ्तारी की पुष्टि की है। फिलहाल आरोपी से पूछताछ जारी है और यह भी जांच की जा रही है कि क्या इस तरह की गतिविधियों में अन्य लोग भी शामिल थे।

इस घटना के बाद पुलिस विभाग में खलबली मच गई है, वहीं भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई को लेकर आम लोगों में चर्चा तेज हो गई है।

 

 

 

पाकिस्तान के हाथ से फिसलता बलूचिस्तान

अरविंद जयतिलक

(वरिष्ठ पत्रकार)

पाकिस्तान के ब्लूचिस्तान प्रांत में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और ब्लूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) के लड़ाकों के बीच छिड़ी जंग से एक बात स्पष्ट है कि अब ब्लूचिस्तान बहुत अधिक समय तक पाकिस्तान का हिस्सा नहीं रहने वाला। जिस तरह ब्लूचिस्तान लिबरेशन आर्मी के लड़ाके सड़क पर उतरकर पाकिस्तानी सैनिकों से सीधा मोर्चा ले रहे हैं उससे साफ है कि वे आरपार की लड़ाई के मूड में हैं। निःसंदेह पाकिस्तानी सेना की कार्रवाई में बड़े पैमाने पर ब्लूचिस्तान लिबरेशन आर्मी के लड़ाकों को नुकसान हुआ है लेकिन जिस तरह पाकिस्तानी हूकुमत के खिलाफ उठी बगावत की लौ तेज हो रही है उससे साफ है कि पाकिस्तान का विखंडन निकट है। गौर करें तो यह पहली बार नहीं है जब ब्लूचिस्तान लिबरेशन आर्मी के लड़ाकों द्वारा अपनी आजादी का बिगुल फूंका गया है। वे पाकिस्तान के निर्माण के समय से ही अपनी आजादी की मांग कर रहे हैं। आमतौर पर उनके आंदोलन का आधार लोकतांत्रिक है लेकिन जब पाकिस्तानी सरकार का अत्याचार बढ़ा तो उन्हें हथियार उठाने की जरुरत आन पड़ी। अब वे अपनी आजादी के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। देखा भी जा रहा है कि वे पाकिस्तान की सरकार और सेना दोनों को कड़ी चुनौती परोस रहे हैं। याद होगा अभी गत वर्ष ही बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) के लड़ाकों ने जाफर एक्सप्रेस ट्रेन को हाइजैक कर पाकिस्तानी हुकूमत के माथे पर शिकन ला दिया था। इससे निपटने में पाकिस्तानी सेना के पसीने छूट गए थे। उस समय पाकिस्तान ने बीएलए लड़ाकों के हाथ तीस पाकिस्तानी सैनिकों की हत्या की बात कबूली थी। ध्यान देना होगा कि बलोच लिबरेशन आर्मी लगातार मांग करता आ रहा है कि पाकिस्तान सरकार बलूच के राजनीतिक कैदियों, गायब हुए लोगों, अलगाववादी नेताओं, लड़ाकों और उनके कार्यकर्ताओं को बिना किसी शर्त के रिहा करे। अन्यथा उन्हें खतरनाक परिणाम भुगतना होगा। लेकिन पाकिस्तान का अत्याचार जारी है। मौजू सवाल यह है कि फिर पाकिस्तान बलूचिस्तान में अलगाववाद की उठ रही लपटों से कैसे निपटेगा? जिस तरह बलूचिस्तान की डोर उसके हाथ से फिसलती जा रही है उससे तो यहीं रेखांकित होता है कि आने वाले कुछ वर्षों में बलूचिस्तान अपनी आजादी की जंग में कामयाब होगा। ऐसा इसलिए कि पाकिस्तान में चौतरफा अराजकता का माहौल है। खैबर पख्तुनवां में भी आग लगी है। सिंध प्रांत भी उबल रहा है। पाकिस्तान की भूमि पर फन फैलाए बैठे आतंकी संगठन भी अब पाकिस्तानी संप्रभुता के लिए नई चुनौती परोस रहे हैं। फिर बलूचिस्तान कब तक पाकिस्तान का अविभाजित अंग बना रहेगा। जानना आवश्यक है कि बलूचिस्तान तेल और खनिज से संपन्न पाकिस्तान का सबसे बड़ा और कम आबादी वाला राज्य है। यहां सर्वाधिक आबादी बलूचों की है और उनका आरोप है कि पाकिस्तान की सरकार उनके साथ भेदभाव और शोषण करती है। उनके खनिज संपदा का जमकर दोहन करती है लेकिन उनकी बुनियादी जरुरतों का तनिक भी ख्याल नहीं रखती है। कहना गलत नहीं होगा कि राजनीतिक तौर पर बलूचों के साथ भेदभाव, नाइंसाफी और शोषण ने वहां के लोगों के मन में पाकिस्तानी सरकार के खिलाफ नफरत का भाव भर दिया है। गौर करें तो पाकिस्तानी सेना दशकों से बलूचिस्तान में अलगावादियों का उत्पीड़न व हत्या कर रही है। अब तक पाकिस्तानी सेना के हाथों हजारों बलूच नागरिक मारे जा चुके हैं। पाकिस्तानी सेना द्वारा 2006 में बलोच नेता नवाब अकबर बुगती की हत्या के बाद बलूचियों पर अत्याचार पहले से बढ़ गया है। याद होगा 2005 में बलूच नेता नवाब अकबर बुगती और मीर बलाच मार्री द्वारा पाकिस्तान सरकार के समक्ष 15 सूत्री मांग रखी गयी थी। इस मांग में बलूचिस्तान प्रांत के संसाधनों पर ज्यादा नियंत्रण और सैनिक ठिकानों के निर्माण पर रोक का मुद्दा शीर्ष पर था। लेकिन पाकिस्तानी सरकार ने इन मांगों को सिरे से खारिज कर दिया। नतीजा टकराव बढ़ गया। जबकि हकीकत है कि बलूचिस्तान के नागरिक अलगाववादी नहीं बल्कि अपने अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं। बलूचिस्तान प्राकृतिक संसाधनों से लैस है। पाकिस्तान के कुल प्राकृतिक गैस का एक तिहाई यही से निकलता है। लेकिन विडंबना है कि उसका आनुपातिक लाभ बलूचिस्तान को नहीं मिलता है। उदाहरण के लिए 1952 में बलूचिस्तान के डेरा बुगती में गैस के भंडार का पता लगा और 1954 से गैस का उत्पादन शुरु हो गया। पाकिस्तान के अन्य तीनों प्रांतों को उसका लाभ तुरंत मिलने लगा लेकिन बलूचिस्तान को यह लाभ 1985 में मिला। इसी तरह चीन के साथ तांबा, सोना और चांदी उत्पादन करने की पाकिस्तानी चगाई मरुस्थल योजना 2002 में आकार ली। तय हुआ कि बलूचिस्तान को उसका वाजिब लाभ मिलेगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इस योजना के तहत प्राप्त लाभ में चीन का हिस्सा 75 फीसद और पाकिस्तान का 25 फीसद है। लेकिन इस 25 फीसद में बलूचिस्तान के हिस्से में सिर्फ 2 फीसद ही आता है। यह स्थिति तब है जब पाकिस्तानी संविधान के 18 वें संशोधन के मुताबिक बलूचिस्तान को विशेष अधिकार प्राप्त है। इसी नाइंसाफी का नतीजा है कि बलूचिस्तान के नागरिक आक्रोशित हैं और पाकिस्तान से अलग होने की मांग कर रहे हैं। वैसे भी गौर करें तो बलूचिस्तान कभी भी पाकिस्तान का नैसर्गिक हिस्सा नहीं रहा है। इतिहास में जाएं तो 15 अगस्त, 1947 को भारत के साथ ही बलूचिस्तान ने भी अपनी आजादी का एलान किया था। लेकिन अप्रैल 1948 में पाकिस्तानी सेना ने मीर अहमद यार खान को अपना राज्य कलात छोड़ने पर मजबूर कर दिया। उनसे जबरन कलात की आजादी के खिलाफ समझौते पर हस्ताक्षर करवाया गया जबकि उनके भाई प्रिंस अब्दुल करीम खान इस समझौते के विरुद्ध थे। वे किसी भी कीमत पर बलूचिस्तान का 23 फीसद हिस्सा पाकिस्तान को देने को तैयार नहीं थे। लिहाजा उन्होंने 1948 में पाकिस्तान के खिलाफ अलगाव का बिगुल फूंक दिया। उनके नेतृत्व में बलूच नागरिकों ने अफगानिस्तान की जमीन से पाक सैनिकों के खिलाफ गुरिल्ला जंग छेड़ दिया। इस संघर्ष को नवाब नवरोज खान ने आगे बढ़ाया लेकिन इसकी कीमत उन्हें भारी चुकानी पड़ी। पाकिस्तान की सरकार ने उनके दोनों बेटों और भतीजों को फांसी पर लटका दिया। इस अत्याचार के बाद भी जब बलूचों का स्वर धीमा नहीं पड़ा तो यहां 1973-74 में मार्शल लॉ लागू कर दिया गया और अलगाववादियों के विरुद्ध दमनात्मक कार्रवाई तेज हो गयी। इस दौरान तकरीबन 8000 बलूची नागरिक मारे गए और हजारों घायल हुए। लेकिन गौर करें तो पाकिस्तानी सेना के जुल्म के बाद भी आजादी का स्वर थमा नहीं है। मौजूदा समय में बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी, बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट, यूनाइटेड बलोच आर्मी, लश्कर ए बलूचिस्तान और बलूचिस्तान लिबरेशन यूनाइटेड फ्रंट जैसे संगठन बलूचिस्तान की आजादी के लिए आंदोलित हैं। पाकिस्तान के लिए यह मुसीबत पैदा करने वाला है कि भारत ही नहीं अमेरिका भी बलूचिस्तान पर पाकिस्तानी सेना द्वारा मानवाधिकार हनन और अत्याचारपूर्ण कार्रवाई का अनैतिक मान रहा है। याद होगा गत वर्ष पहले कैलिफोर्निया के रिपब्लिकन सांसद दाना रोहराबचेर ने दो अन्य सांसदों के समर्थन से अमेरिकी कांग्रेस में बलूचिस्तान के लोगों के लिए इन जुल्मों के खिलाफ ‘आत्मनिर्णयन’ के अधिकार की मांग वाला प्रस्ताव पेश किया था। इस प्रस्ताव में कहा गया था कि बलूचिस्तान का प्रदेश पाकिस्तान, ईरान और अफगानिस्तान में फैला हुआ है और यहां के लोगों को संप्रभु अधिकार प्राप्त नहीं है। याद होगा वर्ष 2016 में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बलूचिस्तान में मानवाधिकारों के उलंघन का मुद्दा उठाए जाने से पाकिस्तान घिर गया था। तब उसकी बोलती बंद हो गयी थी। उसे इतना करारा झटका लगा था कि वह निर्वासित बलूच नेताओं से बातचीत को तैयार हो गया था। तब बलूचिस्तान प्रांत के मुख्यमंत्री नवाब सनाउल्ला जेहरी और पाकिस्तानी सेना के दक्षिणी कमान के कमांडर आमिर रियाज ने बलूच नेताओं से बातचीत का पैगाम भेजा। तब बलूच नेताओं ने भारतीय प्रधानमंत्री के समर्थन से उत्साहित होकर भारत का शुक्रिया जताया था। दो राय नहीं कि आने वाले दिनों दुनिया के अन्य देश भी बलूचिस्तान के मसले पर मुखर होंगें और पाकिस्तान की मुश्किलें बढ़ेगी।

जिसमें दम है गोली मार के दिखाओ- जानिए कथा के बीच में क्यों ललकारे राजन जी महाराज

गोरखपुर। शहर में चल रही प्रसिद्ध कथावाचक राजन जी महाराज की श्री राम कथा के दौरान एक विवादित घटना सामने आई है, जिसने श्रद्धालुओं के बीच चर्चा तेज कर दी है। कथा के दौरान राजन जी महाराज की टीम के एक सदस्य को कथित रूप से गोली मारने की धमकी दिए जाने की बात कही जा रही है। घटना के बाद राजन जी महाराज ने आहत होकर कथा बीच में छोड़ने का मन भी बना लिया था।

बताया जा रहा है कि इस पूरे घटनाक्रम का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें महाराज मंच से घटना का जिक्र करते हुए दिखाई देते हैं।

हमारे घर में ही हुआ बवाल: राजन जी महाराज 

कथा के दौरान सामने आए वीडियो में राजन जी महाराज कहते हुए सुनाई देते हैं कि:

“गोरखपुर, देवरिया, सीवान हमारा घर है। 16 साल की यात्रा में पहली बार ऐसी घटना हुई है। हमारे घर में भगदड़ जैसी स्थिति बनी। हमारी टीम के लोगों को गोली मारने को कहा गया… किसने मां का दूध पिया है,अगर किसी में हिम्मत है तो गोली मारकर दिखाओ”

उनका कहना था कि मंच पर लोगों की भीड़ चढ़ने की वजह से व्यवस्था बिगड़ी और इसके बाद टीम को मंच पर लोगों को आने से रोकना पड़ा, जिससे विवाद बढ़ गया।

27 जनवरी से 4 फरवरी तक चल रही है 9 दिवसीय राम कथा

गोरखपुर के चम्पा देवी पार्क में राजन जी महाराज की 9 दिवसीय श्री राम कथा का आयोजन 27 जनवरी से शुरू हुआ है, जिसका समापन 4 फरवरी को प्रस्तावित है।

सूत्रों के अनुसार, कथा के तीसरे दिन यानी 29 जनवरी को आयोजकों के एक पक्ष और कथावाचक की टीम के बीच किसी बात को लेकर कहासुनी हुई, जो बाद में तीखी बहस में बदल गई।

आयोजकों और टीम के बीच कहासुनी, कथित धमकी से बढ़ा मामला

बताया जा रहा है कि विवाद के दौरान किसी व्यक्ति द्वारा कथावाचक की टीम को गोली मारने की धमकी दिए जाने की बात कही गई। हालांकि, इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।

घटना के बाद राजन महाराज ने कथा छोड़कर वापस जाने की इच्छा जताई, लेकिन स्थानीय जनप्रतिनिधि द्वारा समझाने के बाद उन्होंने कथा जारी रखने का निर्णय लिया।

भक्तों के सामने भावुक हुए महाराज

अगले दिन कथा के दौरान राजन महाराज ने भावुक स्वर में कहा:

“हम प्रेम से कथा सुनाने आए हैं, उसी प्रेम से सुनिए। 16 साल में पहली बार ऐसी स्थिति आई है।”

उनकी इस बात से पंडाल में मौजूद कई श्रद्धालु भावुक हो गए।

मुलाकात के नाम पर पैसे लेने वालों को चेतावनी

कथा के दौरान महाराज ने यह भी स्पष्ट किया कि उनसे मिलने के लिए किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाता।

उन्होंने कहाकि:

सुनने में आया है कि कोई हमसे मिलवाने के नाम पर 1100 रुपये ले रहा है। ऐसे लोग सावधान हो जाएं। हम देश-विदेश कहीं भी कथा करते हैं, मिलने के लिए कभी पैसा नहीं लेते।”

शहर की छवि पर सवाल

धार्मिक आयोजनों में इस तरह के विवाद को लेकर स्थानीय लोगों में भी चर्चा है। कई श्रद्धालुओं का मानना है कि ऐसे आयोजन शांति और श्रद्धा का संदेश देते हैं, ऐसे में विवाद दुखद है।

प्रशासनिक स्थिति स्पष्ट नहीं

इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अब तक किसी प्रशासनिक कार्रवाई या आधिकारिक बयान की पुष्टि नहीं हुई है। मामला जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

यूजीसी नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक पर सिद्धार्थनगर के अधिवक्ताओं ने जताई खुशी

सिद्धार्थनगर। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) से जुड़े नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाई गई रोक का विभिन्न वर्गों में स्वागत किया जा रहा है। न्यायालय के इस निर्णय को कई लोगों ने संतुलित और न्यायसंगत कदम बताया है। सिद्धार्थनगर में भी इस फैसले को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।

विस्तृत सुनवाई का रास्ता खुला

सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के कुछ नए प्रावधानों पर फिलहाल रोक लगाते हुए मामले की विस्तृत सुनवाई का रास्ता खोला है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अदालत का यह कदम नियमों की संवैधानिक वैधता, प्रभाव और व्यवहारिक पक्षों की गहन समीक्षा सुनिश्चित करेगा। इससे शिक्षा व्यवस्था से जुड़े सभी पक्षों को अपनी बात रखने का अवसर मिलेगा।

बार एसोसिएशन अध्यक्ष ने जताई खुशी 

सिद्धार्थनगर बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अखंड प्रताप सिंह ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का स्वागत करते हुए कहाकि,

यह निर्णय स्वागत योग्य है। सर्वोच्च न्यायालय ने संवैधानिक संतुलन और न्यायिक विवेक का परिचय दिया है। ऐसे महत्वपूर्ण विषयों पर व्यापक विचार-विमर्श आवश्यक होता है।”

आगे उन्होंने कहा कि, शिक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में लागू होने वाले नियमों पर सभी हितधारकों की राय जरूरी है।”

मार्च में होगी अगली सुनवाई 

सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी और केंद्र सरकार से जवाब माँगा है। अगली सुनवाई 19 मार्च 2026 को होगी, जिसमें अदालत नियमों की वैधता, प्रभाव और सुधार की दिशा पर विचार करेगी।

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