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अनुदेशकों की जीत की ओर कदम: सुप्रीम कोर्ट की चेतावनी—‘27 अक्टूबर तक आदेश (नियमित) लागू करो या जेल जाने को तैयार रहो’

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के हजारों अनुदेशकों (Instructors) के नियमितीकरण और 9 सालों के बकाए (एरियर) को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार के अफसरों पर शिकंजा कस दिया है। जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस विजय विश्नोई की पीठ ने सरकार की टालमटोल पर कड़ा रुख अपनाते हुए साफ कर दिया है कि अदालत के आदेश से खिलवाड़ अब बर्दाश्त नहीं होगा।

जानिए कोर्ट रूम में क्या हुआ?

अदालत का सीधा सवाल: पीठ ने सुनवाई की शुरुआत में ही सरकारी वकील से पूछा—“क्या आपने हमारे पुराने आदेश का पालन किया?”

अनुदेशकों के वकील की दलील: अनुदेशकों के वकील पी. एस. पटवालिया ने कोर्ट को बताया कि 10 साल से ज्यादा सेवा दे चुके संविदाकर्मियों को नियमित (स्थायी) करने और 9 साल का बकाया (एरियर) देने का स्पष्ट आदेश था। इसके बावजूद अफसर मानमानी कर रहे हैं और अनुदेशकों को पक्का करने के बजाय फिर से 11 महीने का संविदा नोटिस थमा रहे हैं। यह सीधे तौर पर अदालत की अवमानना (Contempt) है।

अधिकारियों के पास कोई बहाना नहीं: जब सरकारी वकील (ASGI) ने जवाब देने के लिए समय मांगा, तो कोर्ट ने पूछा कि क्या आपने फैसले पर पुनर्विचार (Review) की मांग की थी? इस पर खुद सरकारी पक्ष को स्वीकार करना पड़ा कि सरकार की पुनर्विचार याचिका खारिज हो चुकी है।

अदालत की फटकार: कोर्ट ने दो टूक कहा कि जब फैसला अंतिम हो चुका है, तो बहस खत्म हो जाती है। अब अफसरों के पास आदेश का पालन करने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है।

सुप्रीम कोर्ट का कड़ा आदेश

सरकार की ढिलाई से नाराज सुप्रीम कोर्ट ने अफसरों की जवाबदेही तय करते हुए अपना लिखित आदेश जारी किया:

23 जुलाई 2026 को ही सरकार की पुनर्विचार याचिका खारिज की जा चुकी है, इसलिए फैसला पूरी तरह अंतिम है।

सरकार और संबंधित विभाग को निर्देश लागू करने के लिए अंतिम मौका दिया जाता है।

यदि 27 अक्टूबर 2026 (अगली तारीख) तक अनुदेशकों को उनका हक नहीं दिया गया, तो जिम्मेदार अधिकारियों (उत्तरदाता 2 और 3 अर्थात प्रमुख सचिव) को न सिर्फ व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होना पड़ेगा, बल्कि उन्हें सीधे जेल भेजा जाएगा।

एरियर का रास्ता साफ होने के बाद सिद्धार्थनगर के अनुदेशकों में खुशी की लहर

सिद्धार्थनगर। वर्षों तक सीमित मानदेय और आर्थिक तंगी से जूझते रहे अनुदेशकों के लिए सुप्रीम कोर्ट का फैसला नई उम्मीद लेकर आया है। वर्ष 2017-18 से एरियर का रास्ता साफ होने के बाद जिले के 258 अनुदेशकों के चेहरों पर मुस्कान लौट आई है। अनुमान है कि शासनादेश जारी होने के बाद प्रत्येक अनुदेशक को करीब 9 लाख रुपये तक का एरियर मिलेगा। यही वजह है कि वर्षों से अधूरे पड़े सपने अब साकार होते दिखाई दे रहे हैं।

भविष्य के लिए पैसा जमा करूंगा

अनुदेशक जिला अध्यक्ष अनिल पांडेय कहते हैं कि कम मानदेय के कारण वह अपने बच्चों को बेहतर स्कूल में नहीं पढ़ा सके। अब एरियर मिलने की उम्मीद ने उनके सपनों को नई उड़ान दी है। उनका कहना है कि सबसे पहले बच्चों की पढ़ाई पर खर्च करेंगे और भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए पैसा जमा करेंगे

अब बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाऊंगा”

अनुदेशक रविकांत हैं कि वर्षों से जमीन खरीदकर अपना घर बनाने की इच्छा थी, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण यह संभव नहीं हो सका। एरियर मिलते ही सबसे पहले जमीन खरीदकर अपने आशियाने का सपना पूरा करेंगे।

गाड़ी का सपना पूरा करूंगा

अनुदेशक बुद्धिराम कहते हैं कि उनका सबसे बड़ा सपना अपना पक्का घर बनाना है। साथ ही विद्यालय आने-जाने की परेशानी दूर करने के लिए एक नई मोटरसाइकिल भी खरीदेंगे।

बेटियों की शादी करूंगा

अनुदेशक विष्णु वरुण कहते हैं कि घर की मरम्मत लंबे समय से टल रही है और बेटियों की शादी की जिम्मेदारी भी सामने है। एरियर मिलने पर दोनों महत्वपूर्ण कार्य पूरे किए जाएंगे।

अब नियमितीकरण का इंतजार 

जिला मीडिया प्रभारी सत्यपाल सिंह कौशिक का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला केवल आर्थिक राहत नहीं, बल्कि वर्षों के संघर्ष, धैर्य और सम्मान की जीत है। अब सभी की निगाहें राज्य सरकार पर टिकी हैं। उनका आग्रह है कि जल्द से जल्द शासनादेश जारी कर एरियर का भुगतान कराया जाए और हमें नियमित किया जाए। ताकि न्यायालय के फैसले का वास्तविक लाभ प्रत्येक अनुदेशक तक पहुँच सके।

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