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उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक और केशव प्रसाद मौर्य से मिले अनुदेशक

प्रदेश अध्यक्ष विक्रम सिंह के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने शीर्ष अधिकारियों और उपमुख्यमंत्रियों के सामने रखीं मांगें, आत्मरक्षा प्रशिक्षण मानदेय पर भी जल्द शासनादेश की उम्मीद

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के परिषदीय अनुदेशकों के नियमितीकरण, एरियर भुगतान समेत विभिन्न मांगों को लेकर एक बार फिर संगठन ने शासन स्तर पर आवाज बुलंद की है। परिषदीय अनुदेशक कल्याण एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष विक्रम सिंह के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने शासन के वरिष्ठ अधिकारियों और उपमुख्यमंत्रियों से मुलाकात कर अनुदेशकों की समस्याओं के समाधान की मांग उठाई।

संगठन का कहना है कि प्रदेश के करीब 24,296 अनुदेशकों के भविष्य और सम्मान से जुड़े मुद्दों को लेकर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। प्रतिनिधिमंडल ने उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक से मुलाकात कर मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा। संगठन के अनुसार, उपमुख्यमंत्री ने मांगों को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री स्तर पर वार्ता का आश्वासन दिया।

इसी क्रम में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को भी ज्ञापन सौंपा गया संगठन के मुताबिक, उन्होंने अनुदेशकों से जुड़े मुद्दों के निस्तारण के लिए अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी शर्मा को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

आत्मरक्षा प्रशिक्षण मानदेय पर जल्द शासनादेश की उम्मीद

संगठन ने बताया कि लगातार फॉलोअप के बाद आत्मरक्षा प्रशिक्षण के मानदेय को लेकर भी महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत 48 दिवसीय प्रशिक्षण के लिए प्रति विद्यालय 6,000 रुपये मानदेय का प्रावधान बताया गया है। इसके अलावा प्रशिक्षण प्रमाणपत्र और बैनर के लिए 1,500 रुपये के प्रस्ताव पर भी कार्रवाई चलने की बात संगठन ने कही है।

प्रतिनिधिमंडल में प्रदेश अध्यक्ष विक्रम सिंह, वरिष्ठ उपाध्यक्ष अमिताभ वर्मा और अभिषेक राय, प्रदेश उपाध्यक्ष एवं लखनऊ जिलाध्यक्ष सुशील यादव, प्रदेश मीडिया प्रभारी एवं लखनऊ जिला महासचिव सुमित पाल समेत गोरखपुर के अनुदेशक साथी सुनील यादव और नीरज भारती शामिल रहे।

संगठन ने प्रदेशभर के अनुदेशकों से एकजुटता बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि नियमितीकरण और एरियर भुगतान की मांग को लेकर संघर्ष अंतिम समाधान तक जारी रहेगा। संगठन का दावा है कि अनुदेशकों के अधिकार और सम्मान की लड़ाई को शासन स्तर तक मजबूती से उठाया जा रहा है।

एरियर का रास्ता साफ होने के बाद सिद्धार्थनगर के अनुदेशकों में खुशी की लहर

सिद्धार्थनगर। वर्षों तक सीमित मानदेय और आर्थिक तंगी से जूझते रहे अनुदेशकों के लिए सुप्रीम कोर्ट का फैसला नई उम्मीद लेकर आया है। वर्ष 2017-18 से एरियर का रास्ता साफ होने के बाद जिले के 258 अनुदेशकों के चेहरों पर मुस्कान लौट आई है। अनुमान है कि शासनादेश जारी होने के बाद प्रत्येक अनुदेशक को करीब 9 लाख रुपये तक का एरियर मिलेगा। यही वजह है कि वर्षों से अधूरे पड़े सपने अब साकार होते दिखाई दे रहे हैं।

भविष्य के लिए पैसा जमा करूंगा

अनुदेशक जिला अध्यक्ष अनिल पांडेय कहते हैं कि कम मानदेय के कारण वह अपने बच्चों को बेहतर स्कूल में नहीं पढ़ा सके। अब एरियर मिलने की उम्मीद ने उनके सपनों को नई उड़ान दी है। उनका कहना है कि सबसे पहले बच्चों की पढ़ाई पर खर्च करेंगे और भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए पैसा जमा करेंगे

अब बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाऊंगा”

अनुदेशक रविकांत हैं कि वर्षों से जमीन खरीदकर अपना घर बनाने की इच्छा थी, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण यह संभव नहीं हो सका। एरियर मिलते ही सबसे पहले जमीन खरीदकर अपने आशियाने का सपना पूरा करेंगे।

गाड़ी का सपना पूरा करूंगा

अनुदेशक बुद्धिराम कहते हैं कि उनका सबसे बड़ा सपना अपना पक्का घर बनाना है। साथ ही विद्यालय आने-जाने की परेशानी दूर करने के लिए एक नई मोटरसाइकिल भी खरीदेंगे।

बेटियों की शादी करूंगा

अनुदेशक विष्णु वरुण कहते हैं कि घर की मरम्मत लंबे समय से टल रही है और बेटियों की शादी की जिम्मेदारी भी सामने है। एरियर मिलने पर दोनों महत्वपूर्ण कार्य पूरे किए जाएंगे।

अब नियमितीकरण का इंतजार 

जिला मीडिया प्रभारी सत्यपाल सिंह कौशिक का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला केवल आर्थिक राहत नहीं, बल्कि वर्षों के संघर्ष, धैर्य और सम्मान की जीत है। अब सभी की निगाहें राज्य सरकार पर टिकी हैं। उनका आग्रह है कि जल्द से जल्द शासनादेश जारी कर एरियर का भुगतान कराया जाए और हमें नियमित किया जाए। ताकि न्यायालय के फैसले का वास्तविक लाभ प्रत्येक अनुदेशक तक पहुँच सके।

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