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श्रद्धा और भक्ति भाव से मनाई गई स्वर्गीय प्रो. जनार्दन प्रसाद की जयंती

अयोध्या। पावन नगरी अयोध्या में स्वर्गीय प्रो. जनार्दन प्रसाद की जयंती श्रद्धा, भक्ति और गरिमामय वातावरण में मनाई गई। करुणा निधान भवन मंदिर में 18 एवं 19 जुलाई को आयोजित दो दिवसीय कार्यक्रम में परिवारजनों, विद्वानों, शिक्षकों, शोधार्थियों तथा श्रद्धालुओं की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। सभी ने प्रो. जनार्दन प्रसाद के व्यक्तित्व, कृतित्व एवं उनके आदर्शों का भावपूर्ण स्मरण करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की।

कार्यक्रम का शुभारंभ 18 जुलाई को सुंदरकांड पाठ से हुआ। श्रद्धालुओं ने भक्ति-भाव के साथ श्रीरामचरितमानस का सामूहिक पाठ किया, जिससे संपूर्ण परिसर भक्तिमय वातावरण में सराबोर हो गया। वक्ताओं ने कहा कि श्रीरामचरितमानस प्रो. जनार्दन प्रसाद के जीवन का आधार रहा और उन्होंने अपने संपूर्ण जीवन में इसके आदर्शों को आत्मसात किया।

19 जुलाई को प्रो. जनार्दन प्रसाद की पुण्य स्मृति को समर्पित कृति ‘अनमोल निधि’ का विमोचन किया गया। उपस्थित विद्वानों ने इस पुस्तक की सराहना करते हुए इसे आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणादायी और मूल्यवान धरोहर बताया।

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने प्रो. जनार्दन प्रसाद के शिक्षा, अध्यात्म एवं समाज के प्रति योगदान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनका जीवन ज्ञान, सेवा और संस्कारों का अनुपम उदाहरण था।

समारोह के समापन अवसर पर आयोजक परिवार की गायत्री प्रकाश प्रोफ़ेसर गीता सक्सेना आदि ने सभी अतिथियों, विद्वानों, सहयोगियों एवं शुभचिंतकों के प्रति आभार व्यक्त किया। आयोजकों ने कहा कि इस आयोजन के माध्यम से न केवल प्रो. जनार्दन प्रसाद की स्मृतियों को जीवंत रखने का प्रयास किया गया, बल्कि अध्यात्म और ज्ञान की परंपरा को आगे बढ़ाने का भी संकल्प लिया गया। यह आयोजन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।

इस कार्यक्रम में अयोध्या के सभी प्रमुख धर्म गुरु साधु संत भक्तगण आदि शामिल रहे और सभी ने भंडारा प्रसाद ग्रहण किया सभी का आयोजन समिति की ओर से अंग वस्त्र दक्षिणा देकर स्वागत सम्मान किया गया.

सिद्धार्थनगर में टेट अनिवार्यता के मुद्दे पर टीएफआई ने सांसद को सौंपा मांग पत्र

सिद्धार्थनगर : टीचर्स फेडरेशन आफ़ इंडिया (टीएफआई) के एक प्रतिनिधिमंडल ने आज डुमरियागंज के सांसद जगदंबिका पाल के आवास पर उनसे मुलाकात की। इस दौरान संगठन के पदाधिकारियों ने शिक्षकों के लिए टेट अनिवार्यता को समाप्त कराने से जुड़े मुद्दे को लेकर सांसद को एक मांग पत्र सौंपा। यह मांग पत्र राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद द्वारा 23 अगस्त 2010 को निर्धारित की गई न्यूनतम योग्यता के नियमों से संबंधित है, जिसमें संगठन ने संसद द्वारा इसे निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम (आरटीई) में पूरी तरह सम्मिलित कराने की मांग की है।इस ज्ञापन में द गैजेट ऑफ इंडिया के सेक्शन 23 का संदर्भ दिया गया है, जिसके तहत किसी भी व्यक्ति को शिक्षक के रूप में नियुक्त होने के लिए तय शैक्षणिक योग्यता प्राप्त करना अनिवार्य होता है परंतु पूर्व से नियुक्त शिक्षकों के लिए टेट की अनिवार्यता नहीं है। इसके साथ ही पत्र में 10 अगस्त 2017 को किए गए संशोधन का भी विशेष उल्लेख किया गया है। सांसद ने शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षकों की सेवा सुरक्षा बेहद संवेदनशील विषय हैं। वह हमेशा शिक्षकों के संघर्ष में साथ रहे हैं। सांसद ने विश्वास दिलाया कि उच्चतम न्यायालय के निर्णय से उत्पन्न विसंगतियों को दूर कराने के लिए वह संसद में मुद्दा उठाएँगे और संसद से बाहर भी पूरा सहयोग करेंगे। टीएफआई के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व उप्र प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष राधेरमण त्रिपाठी ने कहा कि सांसद ने हमेशा शिक्षक हितों की सुरक्षा के लिए कार्य किया है। दिल्ली धरने में भी पहुंचकर सांसद ने शिक्षकों को संबल प्रदान किया था। कहा कि शिक्षकों को विश्वास है कि सांसद जी के सहयोग से 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टेट अनिवार्यता से मुक्ति मिलेगी। कार्यक्रम में संगठन के जिला उपाध्यक्ष अशोक कुमार के पुत्र आनंद कुमार को नीट परीक्षा में सफलता मिलने पर सांसद द्वारा सम्मानित किया गया। इस दौरान जिला कार्यसमिति के पदाधिकारियों सहित समस्त ब्लॉक कार्यसमिति व संघर्ष समिति के पदाधिकारीगण मौजूद रहे।

शीर्षक: बरसात के बीच विकास की रफ्तार, ₹4.49 करोड़ के लघु सेतु निर्माण का सदर विधायक श्यामधनी राही ने किया निरीक्षण

तेतरी–सोहास–लोटन मार्ग पर निर्माणाधीन पुल का लिया जायजा, गुणवत्ता के साथ समयबद्ध निर्माण पर दिया जोर, संभावित बाढ़ से निपटने के लिए शासन-प्रशासन पूरी तरह सतर्क

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सिद्धार्थनगर। बरसात के मौसम में आवागमन की कठिनाइयों से जूझ रहे तेतरी–सोहास–लोटन मार्ग के लोगों के लिए राहत की उम्मीद अब मजबूत होती दिखाई दे रही है। उत्तर प्रदेश शासन की राज्य योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत लगभग ₹4.49 करोड़ की लागत से निर्माणाधीन 5×6×6 मीटर लघु सेतु का शनिवार को सदर विधायक श्यामधनी राही ने स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने निर्माण कार्य की प्रगति, गुणवत्ता और सुरक्षा व्यवस्थाओं का जायजा लेते हुए संबंधित अधिकारियों एवं कार्यदायी संस्था को निर्धारित समय सीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण निर्माण कार्य पूरा करने के निर्देश दिए।

तेतरी–सोहास–लोटन मार्ग क्षेत्र के अनेक गांवों को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। प्रतिदिन किसान, विद्यार्थी, मरीज, व्यापारी और आम नागरिक इसी मार्ग से आवागमन करते हैं। बरसात के दौरान जलस्तर बढ़ने पर लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसी समस्या के स्थायी समाधान के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश शासन द्वारा इस महत्वपूर्ण लघु सेतु परियोजना को स्वीकृति प्रदान की गई, जिसका निर्माण कार्य वर्तमान में प्रगति पर है।

निरीक्षण के दौरान विधायक श्यामधनी राही ने कहा कि यह पुल केवल एक निर्माण परियोजना नहीं, बल्कि क्षेत्र के विकास और लोगों की सुविधा से जुड़ी महत्वपूर्ण कड़ी है। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य तेजी से कराया जा रहा है और प्रयास है कि इसे शीघ्र पूरा कर जनता को समर्पित किया जाए, जिससे वर्षभर सुरक्षित एवं सुगम आवागमन सुनिश्चित हो सके।

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संभावित बाढ़ की आशंका पर विधायक ने कहा कि बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं पर किसी का नियंत्रण नहीं होता, लेकिन शासन और प्रशासन पूरी सतर्कता के साथ स्थिति पर नजर बनाए हुए है। आमजन को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए सभी आवश्यक तैयारियां की जा रही हैं तथा हर परिस्थिति से निपटने के लिए संबंधित विभागों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।

निरीक्षण के दौरान बृजेशधर दूबे, सत्य प्रकाश सिंह, लल्लू, रमेश, अमिरका, विद्या सहित अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधि, कार्यकर्ता एवं ग्रामीण उपस्थित रहे। क्षेत्रवासियों ने उम्मीद जताई कि पुल के निर्माण के बाद वर्षों से चली आ रही आवागमन की समस्या का स्थायी समाधान होगा और बरसात के दिनों में भी लोगों को सुरक्षित एवं निर्बाध आवागमन की सुविधा मिल सकेगी।

सारांश: लगभग ₹4.49 करोड़ की लागत से निर्माणाधीन तेतरी–सोहास–लोटन मार्ग के लघु सेतु का सदर विधायक श्यामधनी राही ने निरीक्षण कर गुणवत्ता और समयबद्ध निर्माण पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पुल बनने से क्षेत्र के लोगों को बड़ी राहत मिलेगी तथा संभावित बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए शासन-प्रशासन पूरी तरह तैयार है।

 

हर बारिश में मौत का इंतजार! जर्जर काशीराम आवासों में सहमे गरीब परिवार, आखिर कब मिलेगी सुरक्षित छत?

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स्थान: सिद्धार्थनगर, काशीराम आवास परिसर

मामला: दो आवासों की छत ध्वस्त, जलभराव और जर्जर भवनों से बढ़ी चिंता

राहत: घटना में कोई जनहानि नहीं

मांग: तकनीकी जांच, मरम्मत और सुरक्षित वैकल्पिक आवास की व्यवस्था

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सिद्धार्थनगर। जिन काशीराम आवासों को आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के सुरक्षित आशियाने के रूप में बनाया गया था, आज वही आवास कई गरीब परिवारों के लिए चिंता और भय का कारण बनते दिखाई दे रहे हैं। लगातार बारिश के बीच दो आवासीय भवनों की छत गिरने की घटना ने पूरे परिसर को दहला दिया है। राहत की बात यह रही कि घटना के समय संबंधित आवासों में कोई मौजूद नहीं था, लेकिन अब यहां रहने वाले परिवारों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि अगला हादसा कहीं उनके घर में न हो जाए।

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🔹 दो आवासीय भवनों की छत गिरने से मचा हड़कंप

🔹 ऊपर से जर्जर छतें, नीचे जलभराव की गंभीर समस्या

🔹 गरीब परिवारों का दावा—वर्षों से नियमित रखरखाव नहीं हुआ

🔹 बारिश के मौसम में बढ़ा खतरा, बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा पर चिंता

🔹 स्थानीय लोगों ने तकनीकी जांच और स्थायी समाधान की मांग उठाई

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मुख्य खबर

सिद्धार्थनगर। काशीराम आवास परिसर की तस्वीरें और मौके से सामने आए दृश्य कई गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। परिसर के कुछ भवनों की छतें जर्जर दिखाई दे रही हैं। हाल ही में दो आवासीय ब्लॉकों की छत का हिस्सा गिरने की घटना सामने आई। गनीमत रही कि हादसे के समय संबंधित आवास खाली थे, जिससे कोई जनहानि नहीं हुई।

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मौके पर मौजूद स्थानीय लोगों का कहना है कि एक तरफ लगातार बारिश से छतों में रिसाव और जर्जरता बढ़ रही है, वहीं दूसरी तरफ परिसर में जल निकासी की समुचित व्यवस्था न होने के कारण लंबे समय तक जलभराव बना रहता है। उनका कहना है कि भवनों के आसपास जमा पानी और नियमित रखरखाव के अभाव ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।

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एफटी न्यूज़ डिजिटल की टीम जब मौके पर पहुंची तो कई स्थानों पर जलभराव, दीवारों पर सीलन, उखड़ता प्लास्टर और जर्जर होती इमारतें दिखाई दीं। परिसर में रहने वाले लोगों ने बताया कि बरसात के दिनों में उन्हें सबसे अधिक डर अपने बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर रहता है।

यहां रहने वाले अधिकांश परिवार आर्थिक रूप से कमजोर हैं। दिहाड़ी मजदूरी और छोटे-मोटे काम करके जीवन यापन करने वाले इन लोगों के लिए यही आवास उनकी पूरी पूंजी है। ऐसे में वे न तो आसानी से कहीं और जा सकते हैं और न ही अपने स्तर पर भवनों की मरम्मत करा सकते हैं।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि यदि समय-समय पर भवनों का निरीक्षण, आवश्यक मरम्मत और जल निकासी व्यवस्था पर प्रभावी काम होता, तो शायद आज हालात इतने गंभीर नहीं होते। हालांकि इस संबंध में संबंधित विभाग का पक्ष सामने आना अभी शेष है।

घटना के बाद लोगों ने मांग की है कि पूरे काशीराम आवास परिसर का स्वतंत्र तकनीकी सर्वे (Structural Safety Audit) कराया जाए। जिन भवनों में खतरा अधिक है, वहां रहने वाले परिवारों को अस्थायी रूप से सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट किया जाए तथा स्थायी मरम्मत या पुनर्निर्माण की कार्ययोजना बनाई जाए।

सारांश

यह खबर किसी व्यक्ति या विभाग पर आरोप लगाने के लिए नहीं, बल्कि उन गरीब परिवारों की आवाज़ शासन और प्रशासन तक पहुंचाने का प्रयास है, जो हर बारिश में भय के साये में जीवन बिताने को मजबूर हैं। यदि समय रहते प्रभावी कदम उठाए जाते हैं तो किसी संभावित बड़े हादसे को रोका जा सकता है।

एफटी न्यूज़ डिजिटल की अपील

गरीब परिवारों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। यदि किसी भवन के जर्जर होने की आशंका है तो संबंधित विभाग तत्काल तकनीकी जांच कराकर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करे, ताकि कोई भी परिवार किसी अप्रिय घटना का शिकार न बने।


यह खबर दृश्य साक्ष्यों, मौके के निरीक्षण और स्थानीय निवासियों के बयानों के आधार पर संतुलित पत्रकारिता शैली में तैयार की गई है। जहां स्थानीय लोगों के दावे हैं, उन्हें उसी रूप में प्रस्तुत किया गया है। संबंधित विभाग का पक्ष उपलब्ध होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए।

सम्पूर्ण समाधान दिवस के अवसर पर सदर तहसील पर जिलाधिकारी व वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने किया सुनवाई

सिद्धार्थनगर। आज दिनांक 18.07.2026 को जनपद सिद्धार्थनगर के तहसील सदर में सम्पूर्ण समाधान दिवस (तहसील दिवस) का आयोजन किया गया । जिसमें जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थनगर, उपजिलाधिकारी शोहरतगढ़ उपस्थित रहें । तहसील दिवस में प्राप्त शिकायती प्रार्थना-पत्रों के सम्बन्ध में जनता की समस्याओं को गंभीरतापूर्वक सुना गया एवं उसके निस्तारण हेतु सम्बन्धित को आवश्यक दिशा-निर्देश दिया गया । उक्त तहसील दिवस में राजस्व विभाग के अधिकारी/कर्मचारीगण व तहसील सदर क्षेत्र के प्रभारी निरीक्षक/थाना प्रभारी मौजूद रहे । जनसुनवाई के उपरान्त एक पेड मां के नाम अभियान के तहत पर्यावरण संरक्षण एवं हरियाली बढ़ाने के उद्देश्य से तहसील परिसर मे वृक्षा रोपण किया गया ।

NH-730 पर मौत बनकर दौड़ी रफ्तार, पिकअप की टक्कर से एक की मौत, दो जिंदगी और मौत से जूझ रहे

 

शोहरतगढ़ के मड़वा मार्ग पर दर्दनाक हादसा, पूरी घटना सीसीटीवी में कैद


सिद्धार्थनगर। जनपद के शोहरतगढ़ तहसील क्षेत्र अंतर्गत मड़वा मार्ग स्थित राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-730) पर शनिवार को हुए भीषण सड़क हादसे में बाइक सवार तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। इनमें एक लगभग 60 वर्षीय व्यक्ति की मौके पर ही मृत्यु हो गई, जबकि दो अन्य घायलों का उपचार जारी है। घटना का वीडियो सीसीटीवी कैमरे में कैद होने की जानकारी सामने आई है।


सिद्धार्थनगर में एक बार फिर तेज रफ्तार का कहर देखने को मिला। शोहरतगढ़ के मड़वा मार्ग स्थित NH-730 पर एक पिकअप वाहन और बाइक की टक्कर ने कुछ ही सेकंड में खुशियों को मातम में बदल दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बाइक सवार सड़क पर दूर जा गिरे। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और स्थानीय लोग घायलों की मदद के लिए दौड़ पड़े।

विस्तृत समाचार

सिद्धार्थनगर। शोहरतगढ़ तहसील क्षेत्र के मड़वा मार्ग स्थित राष्ट्रीय राजमार्ग-730 पर शनिवार को एक दर्दनाक सड़क दुर्घटना हो गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, एक पिकअप वाहन और बाइक के बीच हुई टक्कर में बाइक पर सवार तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। इनमें से लगभग 60 वर्षीय एक व्यक्ति ने घटनास्थल पर ही दम तोड़ दिया, जबकि दो अन्य घायलों को उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, टक्कर के बाद घटनास्थल पर चीख-पुकार मच गई। आसपास मौजूद लोगों ने बिना समय गंवाए राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया और घायलों को तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास किया। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस भी मौके पर पहुंची और आवश्यक कार्रवाई शुरू की।

बताया जा रहा है कि यह पूरी दुर्घटना सड़क किनारे लगे सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड हो गई है। वीडियो में हादसे के बाद की स्थिति और स्थानीय लोगों द्वारा तत्काल राहत पहुंचाने के प्रयास दिखाई देते हैं। यह वीडियो अब सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बना हुआ है।

समाचार लिखे जाने तक दुर्घटना के कारणों की जांच की जा रही थी। पुलिस द्वारा पंचनामा, आवश्यक वैधानिक कार्रवाई तथा दुर्घटना के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। वाहन की गति, दुर्घटना की परिस्थितियां तथा अन्य तथ्यों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

सारांश

शोहरतगढ़ के मड़वा मार्ग स्थित NH-730 पर हुए भीषण सड़क हादसे में बाइक सवार तीन लोग दुर्घटना का शिकार हुए। एक व्यक्ति की मौके पर मृत्यु हो गई, जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल हैं। घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद हुई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और आगे की विधिक कार्रवाई जारी है।

(संपादकीय अस्वीकरण)

यह समाचार प्रत्यक्ष रूप से प्राप्त प्रारंभिक जानकारी पर आधारित है। दुर्घटना के कारण, जिम्मेदारी तथा अन्य तथ्यों की अंतिम पुष्टि पुलिस जांच और संबंधित अधिकारियों की आधिकारिक सूचना के बाद ही मानी जाएगी।

 

जिलाधिकारी ने किया जलजमाव का निरीक्षण

सिद्धार्थनगर 18 जुलाई 2026/जिलाधिकारी श्री शिवशरणप्पा जीएन द्वारा भारी बारिश से नगर पालिका परिषद, सिद्धार्थनगर क्षेत्र में जलजमाव का निरीक्षण किया गया।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी श्री शिवशरणप्पा जीएन ने वी-मार्ट के सामने, हाइडिल तिराहा का निरीक्षण किया। जिलाधिकारी ने अधिशासी अधिकारी नगर पालिका परिषद सिद्धार्थनगर को नालो की सफाई कराकर जल निकासी की व्यवस्था कराने का निर्देश दिया। जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि जिन क्षेत्रों में जल जमाव है जल निकासी की समुचित व्यवस्था कराये।
इस अवसर पर अधिशासी अधिकारी नगर पालिका परिषद सिद्धार्थनगर अजय कुमार सिंह, उपस्थित थे।

प्रेस की आजादी पर दिल्ली हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी, जवाबदेही सुनिश्चित करने की जरूरत बताई

नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रेस की स्वतंत्रता को लोकतंत्र की आधारशिला बताते हुए कहा है कि इसके साथ जवाबदेही भी उतनी ही आवश्यक है। अदालत ने टिप्पणी की कि डिजिटल दौर में मोबाइल और माइक्रोफोन के सहारे स्वयं को पत्रकार बताने वाले लोगों की संख्या बढ़ी है। ऐसे में सरकार और विधायिका उपयुक्त नियामक व्यवस्था पर विचार कर सकती है, ताकि स्वतंत्र पत्रकारिता सुरक्षित रहे और गैर-जिम्मेदार गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।


देश में तेजी से बढ़ते डिजिटल मीडिया और सोशल मीडिया के दौर में पत्रकारिता की विश्वसनीयता, जवाबदेही और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि प्रेस की स्वतंत्रता संविधान प्रदत्त अधिकार है, लेकिन इसका उपयोग जिम्मेदारी, निष्पक्षता और कानून के दायरे में रहकर किया जाना चाहिए।


प्रेस की स्वतंत्रता लोकतंत्र की ताकत, लेकिन जवाबदेही भी उतनी ही जरूरी : दिल्ली हाईकोर्ट


नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान प्रेस की स्वतंत्रता और पत्रकारिता की जिम्मेदारी पर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि स्वतंत्र एवं निष्पक्ष प्रेस लोकतंत्र का मजबूत स्तंभ है। न्यायालय ने कहा कि लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके साथ नैतिक आचरण, तथ्यपरक रिपोर्टिंग और सार्वजनिक जवाबदेही भी आवश्यक है।

अदालत ने कहा कि वर्तमान समय में डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया के विस्तार के कारण समाचारों का प्रसार पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज हो गया है। इस दौरान ऐसे कई लोग भी सामने आए हैं जो केवल मोबाइल फोन और माइक्रोफोन के सहारे स्वयं को पत्रकार बताते हैं, जबकि अनेक मामलों में उनके पास पत्रकारिता का प्रशिक्षण, संपादकीय व्यवस्था अथवा संस्थागत जवाबदेही का अभाव दिखाई देता है।

न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि उसकी टिप्पणी का उद्देश्य किसी पत्रकार, मीडिया संस्थान या डिजिटल प्लेटफॉर्म की स्वतंत्रता को सीमित करना नहीं है। अदालत का कहना था कि प्रेस की स्वतंत्रता संविधान के मूल्यों का महत्वपूर्ण हिस्सा है और उसका संरक्षण आवश्यक है, किंतु इसके साथ कानून, पत्रकारिता की नैतिकता तथा नागरिकों के अधिकारों का सम्मान भी सुनिश्चित होना चाहिए।

इसी संदर्भ में हाईकोर्ट ने सरकार और विधायिका से इस दिशा में उपयुक्त नियामक व्यवस्था पर विचार करने की आवश्यकता जताई, जिससे एक ओर निष्पक्ष एवं स्वतंत्र पत्रकारिता को संरक्षण मिले और दूसरी ओर फर्जी, गैर-जिम्मेदार अथवा भय पैदा करने वाली गतिविधियों के मामलों में प्रभावी जवाबदेही तय की जा सके।

विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल पत्रकारिता के बढ़ते प्रभाव के बीच यह टिप्पणी मीडिया की विश्वसनीयता, तथ्यपरकता और पेशेवर मानकों को लेकर एक महत्वपूर्ण संदेश के रूप में देखी जा रही है। हालांकि किसी भी प्रकार की नियामक व्यवस्था संविधान द्वारा प्रदत्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तथा प्रेस की आजादी के अनुरूप ही बनाई जाएगी।

सारांश

दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि प्रेस की स्वतंत्रता लोकतंत्र की आत्मा है, लेकिन इसके साथ जवाबदेही, तथ्यपरकता, निष्पक्षता और कानून का पालन भी अनिवार्य है। अदालत ने सरकार एवं विधायिका को ऐसा संतुलित नियामक ढांचा विकसित करने पर विचार करने की आवश्यकता बताई है, जिससे स्वतंत्र पत्रकारिता सुरक्षित रहे और गैर-जिम्मेदार गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सके।

(अस्वीकरण)यह समाचार न्यायालय की सार्वजनिक टिप्पणियों पर आधारित है। इसमें किसी व्यक्ति, संस्था, मीडिया संगठन अथवा पत्रकार के संबंध में कोई स्वतंत्र आरोप या निष्कर्ष प्रस्तुत नहीं किया गया है। संबंधित मामले का अंतिम निर्णय सक्षम न्यायालय द्वारा विधि के अनुसार किया जाएगा।

दो माह में उखड़ी लाखों की इंटरलॉकिंग! पहली बारिश में खुली गुणवत्ता की परतें, ग्रामीणों ने उठाए गंभीर सवाल

तेजगढ़ ग्राम पंचायत में हाल ही में बनी सड़क क्षतिग्रस्त होने का दावा, भुगतान संबंधी दस्तावेज़ों का हवाला देते हुए निष्पक्ष तकनीकी जांच की मांग।


सिद्धार्थनगर। विकासखंड बांसी की ग्राम पंचायत तेजगढ़ में हाल ही में निर्मित इंटरलॉकिंग सड़क पहली ही बरसात के बाद क्षतिग्रस्त होने का मामला चर्चा का विषय बन गया है। सड़क के कई हिस्सों में इंटरलॉकिंग ईंटें उखड़ने और किनारों के क्षतिग्रस्त होने के बाद ग्रामीणों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए पूरे प्रकरण की निष्पक्ष तकनीकी जांच की मांग की है।


ग्रामीणों का आरोप है कि लाखों रुपये की लागत से निर्मित इंटरलॉकिंग सड़क महज दो महीने के भीतर ही जगह-जगह उखड़ने लगी। उनका कहना है कि यदि निर्माण कार्य निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप किया गया होता तो सड़क पहली ही बरसात में इस प्रकार क्षतिग्रस्त नहीं होती।

मुख्य समाचार

ग्रामीणों के अनुसार सड़क के कई हिस्सों में इंटरलॉकिंग ईंटें बाहर निकल आई हैं तथा किनारों पर धंसाव और टूट-फूट देखी जा रही है। उनका आरोप है कि निर्माण कार्य में मजबूत बेस तैयार करने और निर्धारित गुणवत्ता वाली सामग्री के उपयोग में लापरवाही बरती गई।

ग्रामीणों ने कुछ भुगतान संबंधी दस्तावेज़ों का भी हवाला देते हुए मांग की है कि संबंधित कार्य पर हुए खर्च, निर्माण सामग्री की गुणवत्ता, तकनीकी स्वीकृति तथा भुगतान प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच कराई जाए। उनका कहना है कि यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों, तकनीकी कर्मचारियों एवं कार्यदायी संस्था के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और समाचार लिखे जाने तक संबंधित विभाग अथवा जिम्मेदार अधिकारियों का पक्ष प्राप्त नहीं हो सका। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

ग्रामीणों का कहना है कि सरकार की मंशा गांवों का समुचित विकास करना है, लेकिन यदि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर प्रभावी निगरानी नहीं हुई तो योजनाओं का उद्देश्य प्रभावित हो सकता है। अब यह देखना होगा कि जिला प्रशासन शिकायतों को किस स्तर पर जांच के दायरे में लेकर आगे की कार्रवाई करता है।


स्थान: ग्राम पंचायत तेजगढ़, विकासखंड बांसी, जनपद सिद्धार्थनगर

मुख्य बिंदु

पहली बरसात के बाद इंटरलॉकिंग सड़क क्षतिग्रस्त होने का दावा।

ग्रामीणों ने निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठाए।

भुगतान संबंधी दस्तावेज़ों के आधार पर जांच की मांग।

तकनीकी परीक्षण एवं जिम्मेदारी तय करने की मांग।

संबंधित विभाग का पक्ष आना शेष।

सारांश

तेजगढ़ ग्राम पंचायत में हाल ही में बनी इंटरलॉकिंग सड़क के क्षतिग्रस्त होने को लेकर ग्रामीणों ने गुणवत्ता और भुगतान प्रक्रिया की निष्पक्ष तकनीकी जांच की मांग की है। अब प्रशासनिक जांच और संबंधित विभाग के आधिकारिक पक्ष पर सभी की निगाहें टिकी हैं।

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“तस्वीरों में दिखाई दे रही क्षतिग्रस्त इंटरलॉकिंग सड़क, जबकि ग्रामीणों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए तकनीकी जांच की मांग की है।”

 

DM को गुहार, फिर भी नहीं सुनवाई! जलभराव में डूबा ककरही, ग्रामीणों का फूटा आक्रोश

DM को गुहार, फिर भी नहीं मिली राहत!


जलभराव में डूबा ककरही, ग्रामीण बोले— आखिर कब जागेगा प्रशासन?

10 दिन पहले सौंपा गया था शिकायत पत्र, लगातार बारिश के बीच सड़कें बनीं तालाब; महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों का निकलना हुआ मुश्किल


ग्रामीणों की पीड़ा

10 दिन पहले जिलाधिकारी को सौंपा गया शिकायत पत्र।

लगातार बारिश से मुख्य मार्ग पर जलभराव।

पानी निकासी की व्यवस्था नहीं होने का दावा।

महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग रोजाना परेशानी झेलने को मजबूर।

जर्जर सड़क और लटकते बिजली के तारों से दुर्घटना का खतरा।


क्या है पूरा मामला?

ग्राम पंचायत: ककरही

विकास खंड: जोगिया

जनपद: सिद्धार्थनगर

ग्रामीणों की प्रमुख मांगें

मुख्य मार्ग से तत्काल जल निकासी।

जर्जर सड़क का निर्माण।

नालियों की स्थायी व्यवस्था।

बिजली के जर्जर तारों की मरम्मत।

बरसात से पहले स्थायी विकास कार्य।


सिद्धार्थनगर जनपद के विकास खंड जोगिया अंतर्गत ग्राम पंचायत ककरही में लगातार हो रही बारिश ने ग्रामीणों की परेशानियां बढ़ा दी हैं। गांव के मुख्य मार्ग पर जलभराव और कीचड़ के कारण आवागमन प्रभावित है। ग्रामीणों का कहना है कि लगभग दस दिन पहले जिलाधिकारी को लिखित शिकायत देकर समस्या से अवगत कराया गया था, लेकिन अब तक उन्हें कोई ठोस राहत नहीं मिली। इससे नाराज ग्रामीणों ने मीडिया के सामने अपनी समस्याएं रखते हुए प्रशासन से शीघ्र कार्रवाई की मांग की है।

सिद्धार्थनगर से FT News Digital

गांव की गलियां पानी से लबालब हैं। कई स्थानों पर सड़कें तालाब जैसी दिखाई दे रही हैं। ऐसे में स्कूल जाने वाले बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और रोज कमाने-खाने वाले लोगों को रोजाना कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि जलभराव के कारण गांव में गंदगी बढ़ रही है, जिससे संक्रामक बीमारियों और जहरीले जीव-जंतुओं का खतरा भी बना हुआ है।

ग्रामीणों के अनुसार यह समस्या नई नहीं है। उनका कहना है कि कई बार ग्राम प्रधान, पंचायत सचिव और संबंधित अधिकारियों को मौखिक तथा लिखित रूप से अवगत कराया गया, लेकिन स्थायी समाधान नहीं हो पाया।

ग्रामीणों ने मीडिया को बताया कि जिलाधिकारी को दिए गए शिकायती पत्र में जल निकासी और सड़क निर्माण की मांग की गई थी। शिकायत के बाद भी स्थिति जस की तस रहने से लोगों में नाराजगी है।

मीडिया के सामने अपनी बात रखते हुए ग्रामीणों ने कहा कि बरसात के दौरान गांव का मुख्य मार्ग पूरी तरह जलमग्न हो जाता है, जिससे दैनिक जीवन प्रभावित हो जाता है। कई घरों के आसपास भी पानी जमा रहने की बात ग्रामीणों ने कही।

पूर्व ग्राम प्रधान भारत प्रसाद लोधी की अगुवाई में ग्रामीणों ने प्रशासन से गांव का स्थलीय निरीक्षण कराकर स्थायी समाधान की मांग की। इस दौरान रोहित लोधी, सत्यजीत, वरुण, मन्नू, पप्पू, सोनू, शशिकला, फूलवती, दुर्गावती, रामअवतार यादव, प्रेमलता लोधी, चंदन लोधी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।

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ग्राउंड रिपोर्ट

मौके पर मौजूद दृश्य बताते हैं कि कई स्थानों पर सड़क पर पानी जमा है और लोगों को उसी रास्ते से होकर गुजरना पड़ रहा है। महिलाओं और बच्चों को पानी के बीच आवागमन करते देखा गया। ग्रामीणों ने जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त कराने की मांग दोहराई।

जनता की मांग

गांव का तत्काल सर्वे कराया जाए।

जल निकासी की स्थायी व्यवस्था हो।

क्षतिग्रस्त सड़क का निर्माण कराया जाए।

बिजली के जर्जर तार बदले जाएं।

जिम्मेदार विभाग संयुक्त निरीक्षण कर रिपोर्ट सार्वजनिक करे।

प्रशासन का पक्ष

समाचार लिखे जाने तक संबंधित विभाग अथवा जिला प्रशासन की ओर से इस शिकायत पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो सकी थी। यदि प्रशासन का पक्ष प्राप्त होता है तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

सारांश

लगातार बारिश के बीच ककरही गांव में जलभराव की समस्या को लेकर ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि शिकायतों के बावजूद समस्या बनी हुई है और इससे आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है। अब ग्रामीण जिला प्रशासन से मौके का निरीक्षण कर शीघ्र समाधान की अपेक्षा कर रहे हैं।

 

फोटो-1: जिलाधिकारी कार्यालय में शिकायत पत्र सौंपते ग्रामीण प्रतिनिधि।

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फोटो-2: ककरही गांव के मुख्य मार्ग पर जलभराव के बीच आवागमन करती महिला।

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फोटो-3: गांव में जलभराव और कीचड़ से प्रभावित सड़क।


“ग्रामीणों का कहना है कि शिकायत के बावजूद अब तक समस्या का समाधान नहीं हुआ, जिससे बरसात में सामान्य जनजीवन प्रभावित है।”


ग्रामीणों की जुबानी

“हम चाहते हैं कि अधिकारी गांव में आकर खुद हालात देखें और जल निकासी व सड़क निर्माण का स्थायी समाधान कराएं।”


यह समाचार ग्रामीणों द्वारा उपलब्ध कराए गए शिकायत पत्र, मौके के दृश्य और उनके बयानों के आधार पर तैयार किया गया है। समाचार में व्यक्त आरोप संबंधित ग्रामीणों के दावे हैं। FT News Digital किसी व्यक्ति या संस्था को दोषी घोषित नहीं करता। यदि जिला प्रशासन, ग्राम पंचायत या संबंधित विभाग अपना पक्ष उपलब्ध कराता है, तो उसे भी समान प्रमुखता के साथ प्रकाशित किया जाएगा।

 

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