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मुख्यमंत्री योगी के हाथों सम्मानित हुए गोरखपुर के अनुदेशक देवेंद्र लाल

लखनऊ के लोक भवन में आयोजित हुआ भव्य सम्मान समारोह

गोरखपुर। लखनऊ स्थित लोक भवन में आयोजित अंशकालिक अनुदेशक सम्मान समारोह में गोरखपुर के अनुदेशक देवेंद्र लाल को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, शिक्षामंत्री संदीप सिंह हाथों सम्मानित किया गया। समारोह के दौरान प्रदेश भर से आए अनुदेशकों के बीच उत्साह का माहौल देखने को मिला। मुख्यमंत्री द्वारा सम्मानित होने के बाद देवेंद्र लाल ने सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए इसे अनुदेशकों के सम्मान और संघर्ष की बड़ी जीत बताया।

17 हजार मानदेय से मिली राहत

सम्मान समारोह के बाद देवेंद्र लाल ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में अनुदेशकों का मानदेय 17 हजार रुपये किया जाना सराहनीय कदम है। उन्होंने कहा कि पहले 7 हजार रुपये मानदेय में परिवार चलाना बेहद मुश्किल होता था, लेकिन अब 8 हजार रुपये की बढ़ोतरी से अनुदेशकों को बड़ी राहत मिली है।

उन्होंने कहा,“पहले सीमित मानदेय में घर का खर्च चलाना काफी कठिन था। सरकार ने हमारी समस्याओं को समझा और मानदेय बढ़ाकर हमें सम्मान देने का काम किया है। इससे प्रदेश के हजारों अनुदेशकों में नई ऊर्जा आई है।”

नियमितीकरण की भी जताई उम्मीद

देवेंद्र लाल ने मुख्यमंत्री से उम्मीद जताते हुए कहा कि प्रदेश सरकार भविष्य में अनुदेशकों को नियमित करने की दिशा में भी सकारात्मक निर्णय लेगी। उन्होंने कहा कि अनुदेशक लंबे समय से शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में योगदान दे रहे हैं और सरकार को उनकी सेवाओं का स्थायी समाधान करना चाहिए।

उन्होंने विश्वास व्यक्त करते हुए कहा,

“हमें पूरा भरोसा है कि मुख्यमंत्री जी जल्द ही हमें हमारे ही पद पर नियमित करने का कार्य भी करेंगे।”

शिक्षा विभाग और संगठन पदाधिकारियों का जताया आभार

देवेंद्र लाल ने इस अवसर पर बेसिक शिक्षा विभाग और संगठन के पदाधिकारियों के प्रति भी आभार व्यक्त किया। उन्होंने गोरखपुर के एडी बेसिक शिक्षा, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, प्रदेश अध्यक्ष विक्रम सिंह, प्रमुख सचिव बेसिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा तथा महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी का विशेष धन्यवाद ज्ञापित किया।

अनुदेशकों में दिखा उत्साह का माहौल

लोक भवन में आयोजित इस सम्मान समारोह को लेकर प्रदेश भर के अनुदेशकों में खासा उत्साह देखने को मिला। कार्यक्रम में सरकार की ओर से शिक्षा के क्षेत्र में योगदान देने वाले अनुदेशकों को सम्मानित कर उनका मनोबल बढ़ाने का प्रयास किया गया। समारोह के बाद कई अनुदेशकों ने इसे ऐतिहासिक पहल बताते हुए मुख्यमंत्री का आभार जताया।

मुख्यमंत्री योगी के हाथों सम्मानित हुए गोरखपुर के अनुदेशक देवेंद्र लाल

लखनऊ के लोक भवन में आयोजित हुआ भव्य सम्मान समारोह

गोरखपुर। लखनऊ स्थित लोकभवन में आयोजित अंशकालिक अनुदेशक सम्मान समारोह में गोरखपुर के अनुदेशक देवेंद्र लाल को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथों सम्मानित किया गया। समारोह के दौरान प्रदेश भर से आए अनुदेशकों के बीच उत्साह का माहौल देखने को मिला। मुख्यमंत्री द्वारा सम्मानित होने के बाद देवेंद्र लाल ने सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए इसे अनुदेशकों के सम्मान और संघर्ष की बड़ी जीत बताया।

“17 हजार मानदेय से मिली राहत”

सम्मान समारोह के बाद देवेंद्र लाल ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में अनुदेशकों का मानदेय 17 हजार रुपये किया जाना सराहनीय कदम है। उन्होंने कहा कि पहले 7 हजार रुपये मानदेय में परिवार चलाना बेहद मुश्किल होता था, लेकिन अब 8 हजार रुपये की बढ़ोतरी से अनुदेशकों को बड़ी राहत मिली है।

उन्होंने कहा,“पहले सीमित मानदेय में घर का खर्च चलाना काफी कठिन था। सरकार ने हमारी समस्याओं को समझा और मानदेय बढ़ाकर हमें सम्मान देने का काम किया है। इससे प्रदेश के हजारों अनुदेशकों में नई ऊर्जा आई है।”

नियमितीकरण की भी जताई उम्मीद

देवेंद्र लाल ने मुख्यमंत्री से उम्मीद जताते हुए कहा कि प्रदेश सरकार भविष्य में अनुदेशकों को नियमित करने की दिशा में भी सकारात्मक निर्णय लेगी। उन्होंने कहा कि अनुदेशक लंबे समय से शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में योगदान दे रहे हैं और सरकार को उनकी सेवाओं का स्थायी समाधान करना चाहिए।

उन्होंने विश्वास व्यक्त करते हुए कहा,

“हमें पूरा भरोसा है कि मुख्यमंत्री जी जल्द ही हमें हमारे ही पद पर नियमित करने का कार्य भी करेंगे।”

शिक्षा विभाग और संगठन पदाधिकारियों का जताया आभार

देवेंद्र लाल ने इस अवसर पर बेसिक शिक्षा विभाग और संगठन के पदाधिकारियों के प्रति भी आभार व्यक्त किया। उन्होंने गोरखपुर के एडी बेसिक शिक्षा, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, प्रदेश अध्यक्ष विक्रम सिंह, प्रमुख सचिव बेसिक शिक्षा पार्थसारथी सेन शर्मा तथा महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी का विशेष धन्यवाद ज्ञापित किया।

अनुदेशकों में दिखा उत्साह का माहौल

लोक भवन में आयोजित इस सम्मान समारोह को लेकर प्रदेश भर के अनुदेशकों में खासा उत्साह देखने को मिला। कार्यक्रम में सरकार की ओर से शिक्षा के क्षेत्र में योगदान देने वाले अनुदेशकों को सम्मानित कर उनका मनोबल बढ़ाने का प्रयास किया गया। समारोह के बाद कई अनुदेशकों ने इसे ऐतिहासिक पहल बताते हुए मुख्यमंत्री का आभार जताया।

सुप्रीम कोर्ट के नियमित करने और 17 हजार के फैसले से सिद्धार्थनगर के अनुदेशकों में खुशी की लहर..बांटी मिठाईयां

सिद्धार्थनगर। सुप्रीम कोर्ट द्वारा अनुदेशक शिक्षकों का मानदेय ₹17,000 प्रतिमाह किए जाने के ऐतिहासिक और न्यायपूर्ण निर्णय के बाद जनपद सिद्धार्थनगर में खुशी का माहौल है। वर्षों से चल रहे संघर्ष, धरना-प्रदर्शन और कानूनी लड़ाई के बाद आए इस फैसले को शिक्षकों ने अपने सम्मान और अधिकार की बड़ी जीत बताया है।

वर्षों के संघर्ष का मिला परिणाम

अनुदेशक शिक्षक लंबे समय से मानदेय बढ़ोतरी और सेवा सुरक्षा की मांग को लेकर आंदोलनरत थे। यह फैसला उनके धैर्य, एकजुटता और निरंतर संघर्ष की जीत माना जा रहा है। शिक्षकों का कहना है कि इस निर्णय से न सिर्फ आर्थिक स्थिति सुधरेगी बल्कि सामाजिक सम्मान भी बढ़ेगा।

जिला अध्यक्ष अनिल पांडेय ने जताया आभार

परिषदीय अनुदेशक कल्याण एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष अनिल पांडेय ने कहा कि:

“यह फैसला अनुदेशक शिक्षकों की एकजुटता और संघर्ष का परिणाम है। माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने शिक्षा से जुड़े हजारों परिवारों को बड़ी राहत दी है।”

उन्होंने न्यायपालिका के प्रति आभार व्यक्त किया।

मानदेय वृद्धि सम्मान की जीत:मीडिया प्रभारी

जिला मीडिया प्रभारी सत्यपाल सिंह कौशिक ने कहाकि,

“यह सिर्फ मानदेय बढ़ोतरी नहीं बल्कि सम्मान और सामाजिक सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम है। यह फैसला अनुदेशक शिक्षकों के भविष्य को सुरक्षित करेगा और शिक्षा व्यवस्था को भी मजबूत करेगा।”

पदाधिकारियों ने जताई खुशी

महामंत्री रामानंद उपाध्याय और मधुकर मंजुल ने भी फैसले पर खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि यह निर्णय हजारों परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएगा।

मिठाई बांटकर मनाई खुशी

इस अवसर पर अनुपम कुंवर, सौम्य सोनकर, रविकांत, बुद्धिराम, विष्णु, दिलीप साहनी, संतोष सिंह, पप्पू सिंह, सत्य मृत्युंजयधर द्विवेदी, अजीजुररहमान सहित कई अनुदेशक शिक्षकों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशी साझा की।

शिक्षा व्यवस्था को मिलेगा मजबूती

विशेषज्ञों का मानना है कि मानदेय वृद्धि से शिक्षकों का मनोबल बढ़ेगा, जिससे प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा और ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था को स्थिरता मिलेगी।

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