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मुख्यमंत्री का बड़ा ऐलान- अनुदेशक, शिक्षामित्र, रसोइया और आंगनबाड़ी कर्मियों का मानदेय बढ़ेगा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के बजट सत्र में विधान परिषद को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने बजट में अनुदेशक, शिक्षामित्र, रसोइया और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय वृद्धि की व्यवस्था की है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सभी संबंधित कर्मियों का मानदेय जल्द ही बढ़ाया जाएगा।

इसके साथ ही उन्होंने प्रदेश में कैशलेस व्यवस्था लागू करने की घोषणा करते हुए बताया कि यह नई व्यवस्था 1 अप्रैल से प्रभावी हो जाएगी।

बजट सत्र में कर्मचारियों के हित में बड़ा फैसला

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि सरकार प्रदेश के शिक्षा और पोषण से जुड़े कर्मचारियों के योगदान को भली-भांति समझती है। उन्होंने कहा कि अनुदेशक, शिक्षामित्र, रसोइया और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता जमीनी स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

सरकार ने बजट में इनके मानदेय बढ़ाने के लिए आवश्यक प्रावधान कर दिए हैं, जिससे लाखों परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा।

1 अप्रैल से लागू होगी कैशलेस व्यवस्था

मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि प्रदेश में कैशलेस व्यवस्था लागू की जा रही है, जो 1 अप्रैल से प्रभावी होगी। इस कदम का उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना और कर्मचारियों को सुविधाजनक भुगतान प्रणाली उपलब्ध कराना है।

सरकार का दावा है कि इससे भुगतान प्रक्रिया तेज और सुगम होगी।

उत्तर प्रदेश अनुदेशक संघ ने जताया आभार

इस घोषणा के बाद उत्तर प्रदेश अनुदेशक संघ के अध्यक्ष विक्रम सिंह ने सरकार और मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया।

उन्होंने कहा, “हमारा 25,000 अनुदेशकों का परिवार सरकार का धन्यवाद ज्ञापित करता है। मुख्यमंत्री जी ने हमारे लंबे समय से लंबित मुद्दे को गंभीरता से लिया है। यह निर्णय अनुदेशक परिवार के लिए राहत भरा है।”

उन्होंने आगे कहा कि सरकार द्वारा मानदेय वृद्धि का निर्णय प्रदेश के शिक्षा तंत्र को और सशक्त बनाएगा।

शिक्षा और पोषण व्यवस्था को मिलेगा मजबूती

विशेषज्ञों का मानना है कि मानदेय वृद्धि से कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा और शिक्षा तथा आंगनबाड़ी सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा।

प्रदेश में बड़ी संख्या में अनुदेशक, शिक्षामित्र और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे में यह फैसला व्यापक प्रभाव डाल सकता है।

दबिश से लौट रही पुलिस की स्कॉर्पियो दुर्घटनाग्रस्त, दारोगा की हुई मौत; कई घायल

गोरखपुर। महराजगंज से दबिश देकर लौट रही गोरखपुर पुलिस की टीम की स्कॉर्पियो श्यामदेउरवा क्षेत्र में दर्दनाक हादसे का शिकार हो गई। वाहन अनियंत्रित होकर पहले डिवाइडर से टकराया और फिर सड़क किनारे पेड़ से जा भिड़ा। इस दुर्घटना में दारोगा संतोष कुमार की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एसएसआई रमेश चंद्र कुशवाहा, महिला दारोगा गीता समेत पांच पुलिसकर्मी घायल हो गए।

प्राप्त जानकारी के अनुसार पुलिस टीम महराजगंज में एक मामले में दबिश देकर वापस गोरखपुर लौट रही थी। देर रात श्यामदेउरवा थाना क्षेत्र में अचानक वाहन अनियंत्रित हो गया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि स्कॉर्पियो का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। आसपास के लोगों की सूचना पर स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और सभी घायलों को तत्काल अस्पताल भिजवाया।

सभी घायलों का इलाज बीआरडी मेडिकल कॉलेज में चल रहा है, जहां उनकी हालत पर चिकित्सकों की निगरानी रखी जा रही है। हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस विभाग में शोक की लहर दौड़ गई। वरिष्ठ अधिकारियों ने अस्पताल पहुंचकर घायलों का हालचाल लिया।

पुलिस द्वारा दुर्घटना के कारणों की जांच की जा रही है। प्राथमिक तौर पर वाहन के अनियंत्रित होने को हादसे की वजह माना जा रहा है। मृतक दारोगा के परिजनों को सूचना दे दी गई है और आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है।

गोरखपुर में संघ शताब्दी वर्ष पर सामाजिक सद्भाव बैठक, सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने दिया एकता का संदेश

गोरखपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के गोरक्ष प्रांत की ओर से संघ शताब्दी वर्ष के अंतर्गत रविवार को तारामंडल स्थित बाबा गम्भीरनाथ प्रेक्षागृह में सामाजिक सद्भाव बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में विभिन्न जाति, समाज और पंथ के प्रमुख प्रतिनिधियों की सहभागिता रही। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने सामाजिक एकता और समरसता पर जोर दिया।

स्वार्थ का अपनापन टिकता नहीं है

अपने उद्बोधन में डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि समाज वही है, जिसका परस्पर जुड़ाव हो। स्वार्थ पर आधारित संबंध स्थायी नहीं होते। उन्होंने कहा कि अन्य देशों में मनुष्य-मनुष्य का संबंध सौदे की तरह देखा जाता है, लेकिन भारत में संबंध अपनेपन पर आधारित हैं।

उन्होंने कहा कि हमारे देश में विविधताएं हैं, अनेक रीति-रिवाज हैं, फिर भी समाज एक सूत्र में बंधा है। यही भारतीय संस्कृति की विशेषता है।

जीवन का सत्य भगवान हैं

सरसंघचालक ने कहा कि भारत विविधता में एकता का देश है क्योंकि यहां एक चैतन्य सबमें समान रूप से विद्यमान है, जिसे हम भगवान कहते हैं। भारत को हम माता मानते हैं।

उन्होंने कहा कि अलग-अलग वेशभूषा, भाषा और रंग-रूप कभी अलगाव का कारण नहीं बनते। हमारी संस्कृति में नारी को वात्सल्य और सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है। समाज का लक्ष्य जीवन के सत्य को जानना है और जीवन का सत्य भगवान हैं।

समान लक्ष्य और समान संस्कृति पर जोर

डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि समाज सद्भाव से चलता है। केवल कानून और पुलिस से समाज नहीं चल सकता। यदि समाज में सद्भावना नहीं होगी तो व्यवस्था टिक नहीं पाएगी।

उन्होंने कहा कि संघ के 100 वर्ष पूरे होना उत्सव का विषय नहीं, बल्कि आत्ममंथन का अवसर है। ब्लॉक स्तर पर वर्ष में दो-तीन बार बैठकर समाज के विषयों पर चर्चा होनी चाहिए।

हिन्दू समाज में पूर्ण स्वतंत्रता

सरसंघचालक ने कहा कि हिन्दू समाज में पूर्ण स्वतंत्रता है। हमें यह विचार करना चाहिए कि हम समाज के लिए क्या कर रहे हैं और क्या कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि अपनी जाति-समाज की चिंता करना अच्छी बात है, लेकिन हमें बड़े समाज के हित को ध्यान में रखकर कार्य करना चाहिए। भारत स्वार्थ नहीं देखता, बल्कि विश्व के संकट में सहायता के लिए आगे आता है।

समाज स्वयं आगे बढ़े, संघ करेगा सहयोग

कार्यक्रम में विभिन्न समाजों और पंथों के प्रतिनिधियों ने भी अपने विचार साझा किए। जिज्ञासाओं के उत्तर देते हुए डॉ. भागवत ने कहा कि समाज स्तर पर कार्य स्वयं करना होगा, केवल संघ के भरोसे नहीं रहना चाहिए।

उन्होंने कहा कि खंड स्तर पर समाज के प्रमुख लोग मिलकर जिम्मेदारी लें और किसी भी समस्या का समाधान सामूहिक रूप से करें। देश ठीक रहेगा तो हम भी ठीक रहेंगे।

पंगत में किया सहभोज, भारत माता की आरती के साथ समापन

बैठक के बाद सरसंघचालक ने विभिन्न जाति और पंथ के प्रतिनिधियों के साथ पंगत में भोजन किया। मंच पर प्रांत संघचालक डॉ. महेंद्र अग्रवाल भी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम की प्रस्तावना सह प्रांत सद्भाव प्रमुख शिवाजी राय ने रखी तथा सामाजिक सद्भाव प्रमुख डॉ. राकेश कुमार सिंह ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का समापन भारत माता की आरती के साथ हुआ।

गोरखपुर में सनसनी: बैंक क्लर्क की पत्नी की संदिग्ध मौत, मायके पक्ष बोला– “गला घोंटकर लटकाया गया”

उत्तर प्रदेश जनपद गोरखपुर। तिवारीपुर थाना क्षेत्र के दुर्गाबाड़ी रोड पर गुरुवार शाम एक घर के अंदर जो दृश्य सामने आया, उसने पूरे इलाके को हिला कर रख दिया। बैंक ऑफ बड़ौदा में कार्यरत क्लर्क विनय सागर की पत्नी काजल सोनकर (30) का शव कमरे में फंदे से लटका मिला। सूचना मिलते ही क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई और कुछ ही देर में मामला हंगामे में बदल गया।

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 बंद कमरे में लटकी मिली काजल
परिवार के मुताबिक, घर के भीतर कमरे में काजल फंदे से लटकी मिली। सबसे पहले सास की नजर उस पर पड़ी, जिसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को नीचे उतरवाया और पूरे कमरे को जांच के दायरे में लिया।
काजल की शादी तीन साल पहले गोरखनाथ क्षेत्र से हुई थी। एक साल की मासूम बच्ची भी है, जो अब मां के साये से वंचित हो गई।
यह आत्महत्या नहीं, हत्या है” — मायके पक्ष का सीधा आरोप
घटना की खबर मिलते ही काजल की मां, चाचा रामआशीष और अन्य परिजन मौके पर पहुंच गए। उन्होंने ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि काजल की पहले गला दबाकर हत्या की गई और फिर उसे फंदे से लटका दिया गया।
परिजनों का दावा है कि घटना के समय पति विनय सागर और उसकी मां घर पर मौजूद नहीं थे। आरोप है कि सूचना के बाद दोनों घर छोड़कर चले गए। इससे संदेह और गहरा गया।
गुस्साए परिजनों ने मौके पर हंगामा किया। इस दौरान घर में कहासुनी और हाथापाई की भी स्थिति बन गई। पुलिस को काफी मशक्कत के बाद माहौल शांत कराना पड़ा।
मौके पर पहुंचे अधिकारी, फॉरेंसिक टीम ने जुटाए साक्ष्य
मामले की गंभीरता को देखते हुए सीओ कोतवाली ओंकार दत्त तिवारी और तिवारीपुर थाना प्रभारी पंकज सिंह पुलिस बल के साथ पहुंचे। फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया और जरूरी साक्ष्य जुटाए।
शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की असली वजह साफ हो पाएगी।
एक साल की बच्ची को साथ ले गए ननिहाल वाले
घटना के बाद मायके पक्ष एक साल की बच्ची को अपने साथ ले गया। काजल के पिता राममिलन का पहले ही निधन हो चुका है। अब मायके पक्ष इंसाफ की मांग कर रहा है।
सवाल जो जांच के घेरे में
क्या काजल ने खुदकुशी की या उसकी जान ली गई?
घटना के वक्त घर में असल में कौन मौजूद था?
पति और सास की भूमिका क्या रही?
क्या दांपत्य जीवन में तनाव था?
इन सभी बिंदुओं पर पुलिस जांच में जुटी है।
पुलिस का कहना
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, “मामले की हर एंगल से जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फॉरेंसिक साक्ष्य के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। दोषी पाए जाने पर सख्त कदम उठाए जाएंगे।”

सीतापुर में मासूम से दरिंदगी के बाद हत्या: गांव में दहशत, आरोपी पुलिस मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार

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सीतापुर, उत्तर प्रदेश | फरवरी 2026
उत्तर प्रदेश के सीतापुर जनपद के बिसवां कोतवाली क्षेत्र के एक गांव में इंसानियत को झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। पांच वर्षीय मासूम बच्ची के साथ कथित दुष्कर्म के बाद उसकी हत्या कर दी गई। घटना के बाद पूरे इलाके में शोक और आक्रोश का माहौल है।
कैसे सामने आया मामला
परिवार के अनुसार, सोमवार दोपहर बच्ची घर के बाहर खेल रही थी। कुछ देर बाद जब वह दिखाई नहीं दी तो परिजनों ने तलाश शुरू की। ग्रामीणों की मदद से काफी खोजबीन की गई, लेकिन देर रात गांव के बाहरी हिस्से में एक परित्यक्त झोपड़ी के पास बच्ची का शव बरामद हुआ।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और क्षेत्र को घेराबंदी कर जांच शुरू की।
पोस्टमार्टम में क्या सामने आया
अधिकारिक सूत्रों के अनुसार, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बच्ची के साथ दुष्कर्म की पुष्टि हुई है तथा गला दबाकर हत्या किए जाने के संकेत मिले हैं। पुलिस ने संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है।
आरोपी की गिरफ्तारी
पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए विशेष टीम गठित की। जांच के दौरान संदिग्ध की पहचान कर उसे पकड़ने का प्रयास किया गया। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने भागने की कोशिश की, जिसके बाद हुई मुठभेड़ में उसके पैर में गोली लगी और उसे गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपी का इलाज चल रहा है।
पुलिस का कहना है कि मामले की जांच साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है और जल्द ही चार्जशीट दाखिल की जाएगी।
कानूनी प्रक्रिया
मामले में भारतीय दंड संहिता और पॉक्सो एक्ट की संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि दोषी को सख्त से सख्त सजा दिलाने के लिए प्रभावी पैरवी की जाएगी।
जिले का पूर्व रिकॉर्ड
सीतापुर जिले में पूर्व में भी नाबालिगों के साथ जघन्य अपराध के मामलों में अदालतें कड़ी सजा सुना चुकी हैं। सितंबर 2025 में एक पुराने मामले में दोषी को “दुर्लभतम श्रेणी” मानते हुए मृत्युदंड की सजा दी गई थी। इससे स्पष्ट है कि न्यायालय ऐसे मामलों में कठोर रुख अपनाता रहा है।
सामाजिक सवाल
यह घटना एक बार फिर समाज में बच्चों की सुरक्षा, अभिभावकीय सतर्कता और सामुदायिक जागरूकता पर गंभीर प्रश्न खड़े करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में त्वरित न्याय और सामाजिक संवेदनशीलता दोनों आवश्यक हैं।

UGC-NET में हर्ष प्रताप सिंह का शानदार प्रदर्शन, सांसद रविकिशन ने दी बधाई

गोरखपुर: UGC-NET परीक्षा 2026 के परिणाम में गोरखपुर के लिए गर्व की खबर सामने आई है। दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के शिक्षाशास्त्र विभाग के छात्र हर्ष प्रताप सिंह का चयन हुआ है। खास बात यह है कि विभाग से इस परीक्षा में एकमात्र चयनित अभ्यर्थी के रूप में उन्होंने यह उपलब्धि हासिल की है।

सांसद रवि किशन ने दी बधाई

हर्ष की इस सफलता पर गोरखपुर लोकसभा क्षेत्र के सांसद रवि किशन शुक्ला ने उन्हें बधाई संदेश जारी करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है। रविकिशन ने कहा कि,

प्रिय हर्ष प्रताप सिंह जी

“कल UGC – NET परीक्षा का परिणाम घोषित हुआ जिसमें विश्वविद्यालय द्वारा हमको अवगत कराया गया कि दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय गोरखपुर के शिक्षाशास्त्र विभाग से एकमात्र आपका चयन हुआ है। विभाग की इस उपलब्धि से मन प्रसन्नचित हो उठा । आपको आपके भविष्य की हार्दिक शुभकामनाएं महादेव आपको शीघ्र डॉक्टर की उपाधि प्रदान कराएं । विभाग द्वारा यह सूचना पाया और ऐसा भी सुना कि आप भविष्य में इससे भी अच्छा प्रदर्शन करेंगे और सभी के चहेते बने रहेंगे। यह भी ज्ञात हुआ कि विश्वविद्यालय के प्रत्येक कार्यक्रम में सदैव आपका प्रदर्शन अच्छा रहा है।आपको आपके उज्ज्वल भविष्य की हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई प्रिय।”

बेहतर प्रदर्शन के लिए पहचाने जाते हैं हर्ष

विश्वविद्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, हर्ष प्रताप सिंह विश्वविद्यालय के विभिन्न शैक्षणिक कार्यक्रमों में हमेशा सक्रिय और उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्रों में शामिल रहे हैं। उनकी इस सफलता से अन्य छात्रों को भी प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं की तैयारी के लिए प्रेरणा मिलेगी।

विभाग के लिए गर्व का क्षण

विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, हर्ष प्रताप सिंह का चयन शिक्षाशास्त्र विभाग के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। विभाग के शिक्षकों और छात्रों में इस सफलता को लेकर खुशी का माहौल है। कुलपति पूनम टंडन, प्रोफेसर मीतू सिंह कौशिक आदि लोगों ने हर्ष की इस सफलता पर खुशी व्यक्त की है।

यह उपलब्धि न केवल छात्र की मेहनत और लगन को दर्शाती है, बल्कि विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता को भी मजबूत करती है।

परिवार और विश्वविद्यालय में खुशी का माहौल

हर्ष प्रताप सिंह की इस सफलता से पिता अजय सिंह, माता पुनीता सिंह, भाई राघवेंद्र, बहन राजनीता, हर्षिता, आकाश, शिवम तथा अन्य लोगों ने खुशी जाहिर की है।

चीनी मांझे पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई, कोतवाली क्षेत्र में चला सघन चेकिंग अभियान*

गोरखपुर : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सख्ती के बाद जनपद में प्रतिबंधित चीनी मांझे के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। शासन के निर्देशों का पालन कराते हुए शुक्रवार को कोतवाली थाना क्षेत्र में पतंग और मांझा बेचने वाली दुकानों पर सघन चेकिंग अभियान चलाया गया।

सीओ कोतवाली ओमकार दत्त तिवारी के नेतृत्व में पुलिस टीम ने क्षेत्र की कई दुकानों पर पहुंचकर मांझे की गहन जांच की। इस दौरान दुकानों में रखे स्टॉक को खंगाला गया और यह सुनिश्चित किया गया कि कहीं भी प्रतिबंधित चाइनीज मांझा की बिक्री या भंडारण न हो।

दुकानों को दिया निर्देश 

हालांकि अभियान के दौरान किसी भी दुकान पर प्रतिबंधित मांझा बरामद नहीं हुआ, लेकिन पुलिस ने सभी दुकानदारों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि चाइनीज मांझा पूरी तरह प्रतिबंधित है। यदि कोई भी दुकानदार इसकी बिक्री करते हुए पाया गया तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

चालकों और बच्चों के लिए खतरनाक

सीओ ओमकार दत्त तिवारी ने बताया कि चीनी मांझा आम लोगों, खासकर दोपहिया वाहन चालकों और बच्चों के लिए बेहद खतरनाक साबित होता है और इससे कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। इसी कारण शासन स्तर से इसके निर्माण, बिक्री और उपयोग पर रोक लगाई गई है।

आम जनता से अपील

पुलिस ने आम जनता से भी अपील की है कि सुरक्षित मांझे का ही इस्तेमाल करें और प्रतिबंधित सामग्री की सूचना तुरंत प्रशासन को दें। प्रशासन का यह अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा।

पूर्वोत्तर रेलवे में सेवानिवृत्त कर्मियों को दी गई विदाई

लखनऊ। 04 फरवरी 2026। पूर्वोत्तर रेलवे लखनऊ मण्डल के मण्डल रेल प्रबन्धक श्री गौरव अग्रवाल के मार्गदर्शन एवं वरिष्ठ मण्डल कार्मिक अधिकारी श्री राहुल यादव के नेतृत्व में आज मण्डल रेल प्रबन्धक कार्यालय, लखनऊ के ’बहुउद्देशीय हाल’ में समापक भुगतान कार्यक्रम में मण्डल वित्त प्रबंधक श्री उमेश कुमार एवं सहायक मण्डल कार्मिक अधिकारी श्री प्रमोद कुमार भारती/द्वितीय द्वारा सेवानिवृत्त रेलवे कर्मचारियों के स्थान पर रिक्त हुये पद के विरुद्ध तत्काल 12 पात्र कार्यरत कर्मचारियों को पदोन्नति आदेश प्रदान किया गया। कार्यरत कर्मचारी के सेवानिवृत्त होने पर उसके स्थान पर तत्काल पदोन्नति का लाभ प्राप्त होने पर रेलवे कर्मचारियों ने हर्ष व्यक्त किया है।

इस दौरान 23 रेल कर्मचारियों को सेवानिवृृत्त होने पर भाव भीनी विदाई देते हुए सहायक मण्डल कार्मिक अधिकारी श्री प्रमोद कुमार भारती/द्वितीय ने समापक भुगतान के रूप में समापक राशि का प्रपत्र एवं सेवानिवृत्ति प्रमाण पत्र प्रदान किया गया। सेवानिवृत्त कर्मचारियों को उनकी रेलवे के प्रति समर्पण, निष्ठा एवं अतुलनीय योगदान के लिए आभार व्यक्त किया गया। उन्होंने सेवानिवृत्त हुए रेलकर्मियों के दीर्घायु की कामना की। इस अवसर पर अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।

 

 

 

 

गाजियाबाद में दिल दहला देने वाली घटना: तीन नाबालिग बहनों की सामूहिक मौत से मचा हड़कंप

गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश।
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है, जिसने पूरे प्रदेश को स्तब्ध कर दिया है। यहां एक रिहायशी बहुमंजिला इमारत की नौवीं मंजिल से कूदकर तीन नाबालिग बहनों की मौत हो गई। इस हृदयविदारक घटना से इलाके में सनसनी फैल गई है और हर कोई गहरे सदमे में है।
मृतक बच्चियों की पहचान निशिका (16 वर्ष), प्राची (14 वर्ष) और पाखी (12 वर्ष) के रूप में हुई है। तीनों सगी बहनें थीं और एक ही परिवार के साथ उक्त सोसाइटी में रह रही थीं।
मौके पर पहुंची पुलिस, शव पोस्टमार्टम के लिए भेजे गए
घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय पुलिस, फॉरेंसिक टीम और वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने तीनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। घटनास्थल को सील कर साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।
हर एंगल से जांच, डिजिटल गतिविधियों की भी पड़ताल
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह मामला सामूहिक आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है, लेकिन इसके पीछे के कारणों को लेकर अभी कोई आधिकारिक निष्कर्ष नहीं निकाला गया है।
प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि बच्चियां मोबाइल फोन और ऑनलाइन गतिविधियों से जुड़ी हो सकती हैं, हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया है कि गेमिंग ऐप या किसी डिजिटल प्लेटफॉर्म की भूमिका की अभी पुष्टि नहीं हुई है।
मोबाइल फोन, कॉल डिटेल, ऐप उपयोग, परिवारिक परिस्थितियों और मानसिक स्थिति—सभी पहलुओं की गहन जांच की जा रही है।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
घटना के बाद परिवार में कोहराम मचा हुआ है। माता-पिता और परिजन सदमे में हैं और किसी से बात करने की स्थिति में नहीं हैं। पड़ोसियों और स्थानीय लोगों के अनुसार, परिवार सामान्य और शांत स्वभाव का था, जिससे यह घटना और भी चौंकाने वाली बन गई है।
पुलिस का आधिकारिक बयान
पुलिस अधिकारियों का कहना है—
“मामले की जांच बेहद संवेदनशील तरीके से की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट, डिजिटल साक्ष्य और परिजनों के बयान के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। अभी किसी भी कारण की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।”
समाज के लिए गंभीर चेतावनी
इस दर्दनाक घटना ने बच्चों की मानसिक सेहत, डिजिटल दुनिया की निगरानी और अभिभावकीय सतर्कता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों से नियमित संवाद और उनकी ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर बेहद जरूरी है।
यदि आप या कोई मानसिक तनाव में है
तो परिवार, दोस्तों या विशेषज्ञों से बात करना बेहद जरूरी है। सहायता के लिए स्थानीय हेल्पलाइन और काउंसलिंग सेवाएं उपलब्ध हैं।

भारी भरकम बजट में पुरानी पेंशन पर चुप्पी, कर्मचारियों में निराशा और रोष

केंद्र सरकार के वित्त मंत्री द्वारा संसद में प्रस्तुत वर्ष 2026–27 के लगभग 53.5 लाख करोड़ रुपये के बजट को विकासोन्मुख और व्यापक बताया जा रहा है, लेकिन कर्मचारियों के लिए सबसे संवेदनशील मुद्दा — पुरानी पेंशन योजना (OPS) — इस बजट से नदारद दिखी। इसी बात को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के कर्मचारियों में निराशा और आक्रोश का माहौल है।

यह बात राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद बस्ती मंडल के मंडल अध्यक्ष अरुण कुमार प्रजापति ने कही। उन्होंने कहा कि बजट में हर क्षेत्र के लिए प्रावधान किए गए, लेकिन कर्मचारियों के बुढ़ापे की सामाजिक सुरक्षा मानी जाने वाली पुरानी पेंशन पर न तो कोई चर्चा हुई और न ही किसी प्रकार का बजटीय संकेत मिला।

लंबे समय से चल रही है आर-पार की लड़ाई”

अरुण कुमार प्रजापति ने बताया कि केंद्र और राज्य सरकारों के कर्मचारी लंबे समय से पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर संघर्षरत हैं। कई चरणों में आंदोलन, ज्ञापन और प्रदर्शन के बावजूद सरकार की ओर से कोई ठोस पहल सामने नहीं आई है।

उन्होंने कहा कि अब कर्मचारी संगठनों ने इस लड़ाई को और व्यापक रूप से एकजुट होकर लड़ने का निर्णय लिया है।

सरकार से पुनर्विचार की अपील

मंडल अध्यक्ष ने केंद्र सरकार से अपील की कि कर्मचारियों के भविष्य और बुढ़ापे की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पुरानी पेंशन बहाली के मुद्दे पर गंभीरता से पुनर्विचार किया जाए और ऐतिहासिक निर्णय लिया जाए।

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