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5 लाख तक कैशलेस इलाज की सौगात: सिद्धार्थनगर में शिक्षकों को मिले स्वास्थ्य कार्ड, मुख्यमंत्री योजना का हुआ शुभारंभ

IMG 20260726 WA0818मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना लागू, उच्च शिक्षा विभाग के शिक्षकों व आश्रितों को मिलेगा ₹5 लाख तक निःशुल्क उपचार


IMG 20260726 WA0829उच्च शिक्षा विभाग के शिक्षकों और उनके आश्रितों के लिए बड़ी राहत लेकर आई मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना का शुभारंभ शनिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आगरा से किया। सिद्धार्थनगर में विकास भवन स्थित अंबेडकर सभागार में कार्यक्रम का लाइव प्रसारण देखा गया तथा शिक्षकों को कैशलेस स्वास्थ्य कार्ड वितरित किए गए।

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सिद्धार्थनगर।

उच्च शिक्षा विभाग के शिक्षकों एवं उनके आश्रितों को बेहतर स्वास्थ्य सुरक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना का शुभारंभ शनिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा आगरा से किया गया। सिद्धार्थनगर के विकास भवन स्थित अंबेडकर सभागार में आयोजित कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों एवं शिक्षकों ने इसका सीधा प्रसारण देखा।

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कार्यक्रम में सांसद जगदम्बिका पाल, विधायक जय प्रताप सिंह, विधायक श्यामधनी राही, विधायक सैय्यदा खातून, पूर्व विधायक राघवेन्द्र प्रताप सिंह, जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन तथा मुख्य विकास अधिकारी बलराम सिंह सहित अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। कार्यक्रम के आरंभ में जिलाधिकारी ने अतिथियों का पुष्प, अंगवस्त्र एवं गमला भेंट कर स्वागत किया।

सांसद जगदम्बिका पाल ने कहा कि मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना के तहत उच्च शिक्षा विभाग के शिक्षकों एवं उनके आश्रितों को ₹5 लाख तक कैशलेस उपचार की सुविधा मिलेगी। उन्होंने इसे शिक्षकों के लिए महत्वपूर्ण कदम बताते हुए कहा कि प्रदेश में शिक्षकों की सामाजिक सुरक्षा को भी मजबूत करने की दिशा में प्रयास किए गए हैं।

विधायक जय प्रताप सिंह ने कहा कि सरकार द्वारा शिक्षकों के हित में शुरू की गई यह योजना उन्हें बेहतर स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि शिक्षक समाज निर्माण की आधारशिला हैं और उनके कल्याण के लिए संचालित योजनाएं महत्वपूर्ण हैं।

विधायक श्यामधनी राही ने कहा कि सरकार समाज के विभिन्न वर्गों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए लगातार कार्य कर रही है और शिक्षकों को स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान करना उसी दिशा में एक अहम पहल है।

विधायक सैय्यदा खातून एवं पूर्व विधायक राघवेन्द्र प्रताप सिंह ने भी योजना की सराहना करते हुए शिक्षकों को शुभकामनाएं दीं।

कार्यक्रम के दौरान जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों ने शिक्षकों को मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा कार्ड वितरित किए। अंत में मुख्य विकास अधिकारी बलराम सिंह ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

कार्यक्रम में सांसद प्रतिनिधि एस.पी. अग्रवाल, सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक दीनानाथ यादव, शिक्षकगण एवं संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

इन बॉक्स

योजना की प्रमुख बातें

✅ उच्च शिक्षा विभाग के शिक्षकों एवं उनके आश्रितों को मिलेगा लाभ

✅ ₹5 लाख तक कैशलेस इलाज की सुविधा

✅ सिद्धार्थनगर में शिक्षकों को वितरित किए गए स्वास्थ्य कार्ड

✅ अंबेडकर सभागार में देखा गया मुख्यमंत्री के कार्यक्रम का लाइव प्रसारण

✅ जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों की मौजूदगी में हुआ आयोजन

सारांश

मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना का शुभारंभ।

सिद्धार्थनगर में शिक्षकों को कैशलेस स्वास्थ्य कार्ड वितरित।

योजना के तहत ₹5 लाख तक निःशुल्क कैशलेस उपचार की सुविधा।

जनप्रतिनिधियों ने शिक्षकों को दी शुभकामनाएं और योजना की सराहना की।

टिप्पणी

उच्च शिक्षा विभाग के शिक्षकों के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़ी यह पहल चिकित्सा खर्च की चिंता कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। योजना का उद्देश्य शिक्षकों और उनके आश्रितों को समय पर गुणवत्तापूर्ण इलाज उपलब्ध कराना है।

(यह समाचार जिला सूचना कार्यालय द्वारा जारी आधिकारिक विज्ञप्ति पर आधारित है।)

माटीकला से आत्मनिर्भरता की नई उड़ान: सिद्धार्थनगर में 6 उद्यमी सम्मानित, सांसद बोले- मिट्टी के उत्पादों को दें नई पहचान

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माटीकला बोर्ड स्थापना पखवाड़ा के तहत जागरूकता कार्यक्रम आयोजित, जनप्रतिनिधियों ने स्वरोजगार और नवाचार पर दिया जोर

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सिद्धार्थनगर के विकास भवन स्थित अंबेडकर सभागार में उत्तर प्रदेश माटीकला बोर्ड के तत्वावधान में आयोजित माटीकला जागरूकता कार्यक्रम (माटीकला बोर्ड स्थापना पखवाड़ा) में माटीकला से जुड़े कारीगरों और उद्यमियों को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया गया। कार्यक्रम में छह लाभार्थियों को सम्मानित किया गया तथा स्वरोजगार, प्रशिक्षण और सरकारी योजनाओं से जुड़कर आत्मनिर्भर बनने का आह्वान किया गया।

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सिद्धार्थनगर।

उत्तर प्रदेश माटीकला बोर्ड की विपणन विकास सहायता एवं प्रचार-प्रसार योजना के अंतर्गत आयोजित माटीकला जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन शनिवार को विकास भवन स्थित अंबेडकर सभागार में किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता डुमरियागंज सांसद जगदम्बिका पाल ने की। इस अवसर पर बांसी विधायक जय प्रताप सिंह, कपिलवस्तु विधायक श्यामधनी राही, जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन तथा मुख्य विकास अधिकारी बलराम सिंह सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी मौजूद रहे।

कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य विकास अधिकारी बलराम सिंह द्वारा अतिथियों का अंगवस्त्र भेंट कर स्वागत करने से हुई।

सांसद जगदम्बिका पाल ने कहा कि माटीकला से जुड़ी पारंपरिक कला एक समय समाप्त होने की कगार पर पहुंच गई थी, लेकिन राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं और माटीकला बोर्ड के माध्यम से इसे नया जीवन मिला है। उन्होंने कहा कि मिट्टी से बने उत्पाद अब देश ही नहीं बल्कि विदेशों तक पहुंच रहे हैं। सरकार टूलकिट, प्रशिक्षण और ऋण जैसी योजनाओं के माध्यम से कारीगरों को आत्मनिर्भर बनाने का कार्य कर रही है। उन्होंने लोगों से स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने और माटीकला उद्योग से जुड़ने की अपील की।

बांसी विधायक जय प्रताप सिंह ने कहा कि माटीकला बोर्ड के गठन के बाद कुम्हार समुदाय को नई पहचान मिली है। प्रशिक्षण, मिट्टी की उपलब्धता और ऋण सुविधा के जरिए रोजगार के नए अवसर सृजित हुए हैं। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक के साथ माटीकला उद्योग तेजी से आगे बढ़ रहा है।

कपिलवस्तु विधायक श्यामधनी राही ने कहा कि सरकार की योजनाओं से पारंपरिक कारीगरों का मनोबल बढ़ा है और बैंकिंग सहायता के माध्यम से वे अपने व्यवसाय का विस्तार कर रहे हैं। उन्होंने माटीकला से जुड़े सभी उद्यमियों को शुभकामनाएं दीं।

कार्यक्रम के दौरान जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों ने माटीकला बोर्ड से जुड़े छह लाभार्थियों को सम्मानित किया। अंत में मुख्य विकास अधिकारी बलराम सिंह ने सभी अतिथियों, अधिकारियों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।

कार्यक्रम में सांसद प्रतिनिधि एस.पी. अग्रवाल, जिला ग्रामोद्योग अधिकारी गंगाधर दुबे सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं बड़ी संख्या में माटीकला उद्यमी उपस्थित रहे।

सारांश

माटीकला बोर्ड स्थापना पखवाड़ा के तहत जागरूकता कार्यक्रम आयोजित।

सांसद, विधायक, डीएम और सीडीओ की मौजूदगी में हुआ कार्यक्रम।

माटीकला से जुड़े 6 लाभार्थियों का सम्मान।

प्रशिक्षण, टूलकिट, ऋण और स्वरोजगार योजनाओं पर दिया गया जोर।

पारंपरिक माटीकला को आधुनिक तकनीक से जोड़कर आत्मनिर्भरता का संदेश।


मुख्य बिंदु

स्थान: अंबेडकर सभागार, विकास भवन, सिद्धार्थनगर

आयोजन: उत्तर प्रदेश माटीकला बोर्ड

6 लाभार्थी हुए सम्मानित

,स्वरोजगार प्रशिक्षण और ऋण योजनाओं की दी गई जानकारी

जनप्रतिनिधियों ने माटीकला को बढ़ावा देने का किया आह्वान

टिप्पणी

माटीकला केवल एक पारंपरिक कला नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और स्वरोजगार का मजबूत माध्यम है। ऐसे जागरूकता कार्यक्रम कारीगरों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने और स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

 

43वीं वाहिनी, स.सी.बल द्वारा सीमावर्ती ग्रामीणों हेतु निःशुल्क मानव चिकित्सा शिविर का आयोजन*

*43वीं वाहिनी, स.सी.बल द्वारा सीमावर्ती ग्रामीणों हेतु निःशुल्क मानव चिकित्सा शिविर का आयोजन*

दिनांक 25.07.2026 को नागरिक कल्याण कार्यक्रम के अंतर्गत 43वीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल सिद्धार्थनगर द्वारा चिकित्सा अधिकारी डॉ राम विलास, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शोहरतगढ़ के सहयोग से एफ-समवाय, खूनवा के अंतर्गत आने वाले Vribrant Village मदरहना जनुबी में शिविर लगाकर निःशुल्क मानव चिकित्सा सेवा प्रदान किया गया I इस शिविर के माध्यम से सीमाई क्षेत्र के गाँव महला,महली, मदरहना जनूबी, एवं पड़रहवा गाँव के 55 पुरुष ,38 महिला और 18 बच्चों के साथ कुल -111 लोगो का स्वास्थ्य परीक्षण कर निःशुल्क दवा वितरित किया गया I साथ ही ग्रामीणों को मौसम को ध्यान रखते हुए स्वच्छता, संतुलित आहार एवं नियमित स्वास्थ्य परीक्षण के प्रति जागरूक किया गया ।

उपरोक्त आयोजन के दौरान 43वीं वाहिनी स.सी.ब. सीमा चौकी खूनवा के समवाय प्रभारी अभिषेक कुमार सिंह (सहायक कमान्डेंट) एवं सहायक उप निरीक्षक फार्मासिस्ट आशुतोष कुमार, आरक्षी/सामान्य शिवशंकर उपाध्याय,और कार्मिको के साथ-साथ स्थानीय ग्राम प्रधान व अन्य ग्रामीण उपस्थित रहे I

पेपर लीक और भर्ती अनियमितताओं के विरोध में भीम आर्मी का राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन

जंतर-मंतर लाठीचार्ज की निष्पक्ष जांच, भर्ती व्यवस्था में सुधार और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली की उठाई मांग


देश में प्रतियोगी परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर उठ रहे सवालों के बीच भीम आर्मी भारत एकता मिशन ने सोमवार को जिलाधिकारी सिद्धार्थनगर के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। संगठन ने प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक, भर्ती अनियमितताओं तथा 20 जुलाई 2026 को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों पर हुए कथित पुलिस बल प्रयोग के मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। साथ ही परीक्षा एवं भर्ती प्रणाली को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और समयबद्ध बनाने के लिए प्रभावी सुधार लागू करने की अपील की।


प्रमुख मांगें

🔹 प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और भर्ती अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच।

🔹 जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान हुए कथित पुलिस बल प्रयोग की उच्चस्तरीय जांच।

🔹 परीक्षा एवं भर्ती प्रक्रिया को तकनीकी रूप से सुरक्षित और पारदर्शी बनाया जाए।

🔹 दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई हो।

🔹 युवाओं के लिए निष्पक्ष और भरोसेमंद भर्ती व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।


| ज्ञापन में क्या कहा गया?

संगठन द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया कि पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं और भर्तियों को लेकर कथित अनियमितताओं एवं पेपर लीक की घटनाओं ने अभ्यर्थियों के बीच चिंता का माहौल पैदा किया है। संगठन का कहना है कि लाखों युवा वर्षों तक कठिन परिश्रम और आर्थिक चुनौतियों का सामना करते हुए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। ऐसे में यदि परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता पर प्रश्न उठते हैं, तो युवाओं का मनोबल प्रभावित होता है।

ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि 20 जुलाई 2026 को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों पर हुए कथित पुलिस बल प्रयोग की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए। संगठन का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने का अधिकार सुरक्षित है और यदि किसी स्तर पर बल प्रयोग हुआ है तो उसकी वस्तुनिष्ठ जांच आवश्यक है।

भीम आर्मी भारत एकता मिशन ने मांग की कि भविष्य में प्रतियोगी परीक्षाओं को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए प्रभावी कानून, आधुनिक तकनीकी सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत निगरानी तंत्र लागू किया जाए, ताकि अभ्यर्थियों का विश्वास मजबूत हो सके।

ज्ञापन में यह भी कहा गया कि भर्ती प्रक्रियाओं में यदि किसी स्तर पर अनियमितता सिद्ध होती है तो संबंधित जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही शिक्षा एवं भर्ती व्यवस्था में व्यापक सुधार के लिए केंद्र सरकार से आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया गया। संगठन ने अपने ज्ञापन में केंद्रीय शिक्षा मंत्री के संबंध में नैतिक जिम्मेदारी तय करने की मांग का भी उल्लेख किया है।

संगठन का कहना है कि युवाओं को निष्पक्ष अवसर, पारदर्शी परीक्षा प्रणाली और संविधान के अनुरूप न्याय मिलना चाहिए। ज्ञापन सौंपे जाने के बाद अब इस पर संबंधित संवैधानिक एवं सरकारी स्तर पर होने वाली कार्रवाई पर अभ्यर्थियों की निगाहें टिकी हैं।

सारांश

भीम आर्मी भारत एकता मिशन ने राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन भेजा।

प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और भर्ती अनियमितताओं पर चिंता जताई।

जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान हुए कथित पुलिस बल प्रयोग की जांच की मांग।

परीक्षा एवं भर्ती प्रणाली में पारदर्शिता और तकनीकी सुधार लागू करने की अपील।

दोषियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई और युवाओं के हितों की रक्षा की मांग।

टिप्पणी

देश की शिक्षा और भर्ती व्यवस्था से जुड़े मुद्दे लाखों युवाओं के भविष्य से सीधे जुड़े हैं। ऐसे मामलों में विभिन्न संगठनों द्वारा अपनी मांगों को लोकतांत्रिक माध्यम से उठाना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है। वहीं, कथित अनियमितताओं या किसी भी घटना की पुष्टि संबंधित जांच एजेंसियों और सक्षम प्राधिकार के निष्कर्षों से ही होती है। पारदर्शी, निष्पक्ष और विश्वसनीय परीक्षा व्यवस्था युवाओं के विश्वास को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जाती है।


संपादकीय नोट: इस समाचार में प्रयुक्त “कथित”, “संगठन का आरोप”, “ज्ञापन में कहा गया” और “मांग की गई” जैसे शब्द संबंधित पक्ष के दावों को दर्शाते हैं। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि का दावा नहीं किया जा रहा है। समाचार का उद्देश्य ज्ञापन में उठाए गए मुद्दों को तथ्यात्मक एवं संतुलित रूप में प्रस्तुत करना है, जिससे चैनल, प्रकाशन और संवाददाता कानूनी रूप से सुरक्षित रहें।

छात्र हितों को लेकर कांग्रेस का कैंडल मार्च, निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली की उठी मांग

सिद्धार्थ नगर ब्यूरो रिपोर्ट 

जिला कांग्रेस कमेटी सिद्धार्थनगर के तत्वावधान में शनिवार को नौगढ़ में छात्र हितों, शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता तथा लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर कैंडल मार्च एवं सत्याग्रह आयोजित किया गया। कार्यक्रम उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के निर्देश पर आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारियों, छात्र नेताओं, युवाओं एवं कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।

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मुख्य बिंदु

– नौगढ़ में कांग्रेस का शांतिपूर्ण कैंडल मार्च।

– छात्र हितों और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग।

– महात्मा गांधी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि देकर सत्याग्रह का समापन।

– शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही और निष्पक्ष जांच की मांग।


कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने नौगढ़ तहसील परिसर से नगर पालिका परिषद स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा तक हाथों में मोमबत्तियां लेकर शांतिपूर्ण मार्च निकाला। इस दौरान शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली तथा छात्रों के अधिकारों की सुरक्षा की मांग उठाई गई।

विस्तृत समाचार

मार्च के दौरान कांग्रेस नेताओं ने कहा कि छात्रों का भविष्य निष्पक्ष एवं पारदर्शी परीक्षा प्रणाली पर निर्भर करता है। जिला कांग्रेस अध्यक्ष काज़ी सुहेल अहमद ने कहा कि परीक्षा प्रणाली को लेकर उठ रही चिंताओं ने छात्रों और अभिभावकों की चिंता बढ़ाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों की आवाज़ को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जा रहा है तथा सरकार को परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में प्रभावी कदम उठाने चाहिए।

उन्होंने मांग की कि यदि किसी परीक्षा में अनियमितता के आरोप सामने आते हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए तथा छात्रों के हितों की रक्षा सुनिश्चित की जाए।

कार्यक्रम का समापन महात्मा गांधी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने सत्य, अहिंसा एवं लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

कार्यक्रम में जावेद मोकीम, अनिल सिंह अन्नू, सादिक अहमद, राजन श्रीवास्तव, पंकज चतुर्वेदी, सतीश चन्द्र त्रिपाठी, अश्विनी सिंह सोलंकी, रितेश त्रिपाठी, डॉ. प्रमोद कुमार, होरी लाल श्रीवास्तव, मोबीन खान, सुदामा प्रसाद, संतोष चौधरी, रियाजउद्दीन राईनी, आशुतोष मिश्रा, जोखन प्रजापति, अकरम अली, श्याम प्रकाश पांडेय, प्रेमजीत तिवारी, शिवपूजन, भोला पांडेय, कासिम, रियाज़ मनिहार, रवि प्रजापति, शौकत अली सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

सारांश

नौगढ़ में आयोजित कांग्रेस के कैंडल मार्च में छात्र हितों, शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली तथा लोकतांत्रिक अधिकारों की सुरक्षा की मांग उठाई गई। नेताओं ने परीक्षा संबंधी कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच और जवाबदेही तय करने की मांग की।

टिप्पणी

शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता और प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता लाखों विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ा विषय है। किसी भी परीक्षा में अनियमितताओं के आरोप सामने आने पर उनकी निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच आवश्यक है। इस समाचार में उल्लिखित आरोप कांग्रेस नेताओं के सार्वजनिक बयान हैं। इन आरोपों की पुष्टि किसी सक्षम न्यायिक अथवा जांच एजेंसी द्वारा होना शेष हो सकता है।


(यह समाचार कांग्रेस पार्टी द्वारा आयोजित कार्यक्रम एवं नेताओं के सार्वजनिक बयानों पर आधारित है। FT News Digital इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता।)

शहादत दिवस पर पूर्व सांसद फूलन देवी को सपा नेताओं ने किया नमन, संघर्ष और स्वाभिमान की विरासत को किया याद

कौन थीं फूलन देवी?

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फूलन देवी भारतीय राजनीति और सामाजिक विमर्श की चर्चित हस्तियों में रही हैं। उनका जीवन अत्यंत संघर्षपूर्ण रहा। बाद में उन्होंने राजनीति में प्रवेश किया और उत्तर प्रदेश की मिर्जापुर लोकसभा सीट से सांसद निर्वाचित हुईं। 25 जुलाई 2001 को नई दिल्ली में उनकी हत्या कर दी गई थी। उनके समर्थक उन्हें सामाजिक अन्याय और शोषण के खिलाफ संघर्ष का प्रतीक मानते हैं, जबकि उनके जीवन के कुछ पहलू लंबे समय तक विवाद और न्यायिक चर्चाओं का विषय भी रहे। इसी कारण उनके व्यक्तित्व का उल्लेख करते समय संतुलित और तथ्यपरक दृष्टिकोण आवश्यक माना जाता है।

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महराजगंज में समाजवादी पार्टी जिला कार्यालय पर पूर्व सांसद फूलन देवी के शहादत दिवस पर श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई। कार्यक्रम में पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी तथा उनके संघर्षपूर्ण जीवन और सामाजिक न्याय के लिए किए गए प्रयासों को याद किया।

सारांश

सपा जिला कार्यालय पर श्रद्धांजलि सभा आयोजित।

नेताओं ने फूलन देवी के जीवन और संघर्षों को किया याद।

वंचितों, शोषितों और सामाजिक न्याय के मुद्दों पर हुई चर्चा।

बड़ी संख्या में पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता रहे मौजूद।

विस्तृत समाचार

महराजगंज। समाजवादी पार्टी के जिला कार्यालय पर पूर्व सांसद फूलन देवी के शहादत दिवस के अवसर पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिलाध्यक्ष विद्यासागर यादव ने की।

सभा में उपस्थित नेताओं एवं कार्यकर्ताओं ने पूर्व सांसद फूलन देवी के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान उनके संघर्षपूर्ण जीवन, सामाजिक न्याय के मुद्दों पर उनकी सक्रियता तथा राजनीतिक योगदान का उल्लेख किया गया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वरिष्ठ सपा नेता आनंद निषाद ने कहा कि उनके अनुसार फूलन देवी ने अपने जीवन में अनेक कठिन परिस्थितियों का सामना किया और शोषित एवं वंचित वर्गों के अधिकारों की आवाज बुलंद की। उन्होंने कहा कि संसद तक पहुंचने का उनका सफर संघर्ष, साहस और आत्मसम्मान की मिसाल के रूप में देखा जाता है।

जिलाध्यक्ष विद्यासागर यादव ने कहा कि समाजवादी पार्टी सामाजिक न्याय, समान अवसर और वंचित वर्गों के सम्मान के मुद्दों को लगातार उठाती रही है। उन्होंने कहा कि अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाने का संदेश समाज के लिए प्रेरणास्रोत बना रहेगा।

श्रद्धांजलि सभा में जिला सचिव शमसुद्दीन अली, प्रणव गौतम, हरेंद्र कृष्ण त्रिपाठी, सुमन ओझा, श्रीपति आजाद, बिंद्रेश कन्नौजिया, सत्यभामा सिंह, गोविंद निषाद, सुभाष यादव, जितेंद्र यादव, राजेश पासवान, अमित निषाद सहित समाजवादी पार्टी के अनेक पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

टिप्पणी

फूलन देवी का जीवन भारतीय समाज, राजनीति और न्याय व्यवस्था से जुड़े कई जटिल प्रश्नों का हिस्सा रहा है। एक ओर उनके समर्थक उन्हें सामाजिक उत्पीड़न के खिलाफ संघर्ष का प्रतीक मानते हैं, वहीं उनके जीवन से जुड़े कुछ घटनाक्रम लंबे समय तक कानूनी और सामाजिक बहस का विषय रहे। ऐसे में उनके व्यक्तित्व और विरासत पर चर्चा करते समय तथ्यों, संतुलन और संवेदनशीलता के साथ विभिन्न पक्षों को समझना आवश्यक है।

अपार आईडी सृजन में शिथिलता पर 13 विद्यालयों को अंतिम चेतावनी, दोबारा लापरवाही पर मान्यता प्रत्याहरण की संस्तुति संभव

रिपोर्ट: एफटी न्यूज़ डिजिटल, शोहरतगढ़ (सिद्धार्थनगर)


मामला क्या है?

अपार (APAAR) आईडी सृजन की धीमी प्रगति पर 13 मान्यता प्राप्त विद्यालयों को अंतिम चेतावनी जारी।

 कब होगी समीक्षा?

27 जुलाई 2026 को खण्ड शिक्षा अधिकारी कार्यालय द्वारा पुनः समीक्षा।

क्या हो सकती है कार्रवाई?

प्रगति संतोषजनक न मिलने पर विद्यालयों की मान्यता प्रत्याहरण के लिए उच्चाधिकारियों को संस्तुति भेजी जा सकती है।

किसने जारी किया नोटिस?

खण्ड शिक्षा अधिकारी, शोहरतगढ़ संजय कुमार।


शिक्षा विभाग ने अपार (APAAR) आईडी सृजन में अपेक्षित प्रगति न करने वाले विद्यालयों के प्रति सख्त रुख अपनाया है। शोहरतगढ़ विकास खण्ड के 13 मान्यता प्राप्त विद्यालयों को अंतिम चेतावनी जारी करते हुए स्पष्ट किया गया है कि यदि निर्धारित तिथि तक कार्य में सुधार नहीं हुआ तो संबंधित विद्यालयों के विरुद्ध मान्यता प्रत्याहरण की संस्तुति उच्चाधिकारियों को भेजी जा सकती है।

विस्तृत समाचार

शोहरतगढ़, सिद्धार्थनगर।

खण्ड शिक्षा अधिकारी कार्यालय, शोहरतगढ़ द्वारा जारी आधिकारिक नोटिस के अनुसार 25 जुलाई 2026 को अपार (APAAR) आईडी सृजन की समीक्षा की गई। समीक्षा में पाया गया कि कुछ विद्यालयों में नामांकित छात्र-छात्राओं के सापेक्ष अपार आईडी सृजन की प्रगति विभागीय अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं है, जिसके चलते बड़ी संख्या में विद्यार्थी अभी भी इस प्रक्रिया से वंचित हैं।

जारी नोटिस के अनुसार उदय प्रताप इंटर कॉलेज गोपालगंज खुरहुरिया, सरस्वती शिशु मंदिर इंटर कॉलेज शोहरतगढ़, सेंट थॉमस स्कूल शोहरतगढ़, सावित्री देवी पब्लिक स्कूल गौहनिया, जीवन ज्योति आदर्श शिक्षा संस्थान रमवापुर खास, न्यू पब्लिक स्कूल महमुदवा ग्रांट, कृष्ण शिशु विद्यालय जूनियर हाई स्कूल शोहरतगढ़, सरस्वती रामरतन पब्लिक स्कूल, दिनेश सिद्धार्थ इंटर कॉलेज चिल्हिया, सेठ रामकुमार खातान बालिका इंटर कॉलेज शोहरतगढ़, ग्लोरियस कॉन्वेंट स्कूल चोड़ार, जय गुरुदेव बाल विद्या मंदिर सहित कुल 13 विद्यालयों की प्रगति असंतोषजनक दर्ज की गई है।

खण्ड शिक्षा अधिकारी द्वारा जारी नोटिस में कहा गया है कि 27 जुलाई 2026 को पुनः समीक्षा की जाएगी। यदि समीक्षा के दौरान भी संबंधित विद्यालयों द्वारा विभागीय निर्देशों का समुचित अनुपालन नहीं पाया जाता है, तो नियमानुसार उनके विरुद्ध विद्यालय की मान्यता प्रत्याहरण (Recognition Withdrawal) की कार्रवाई के लिए उच्चाधिकारियों को संस्तुति भेजी जा सकती है। नोटिस में इसकी जिम्मेदारी संबंधित विद्यालय प्रबंधन पर निर्धारित की गई है।

खण्ड शिक्षा अधिकारी संजय कुमार ने सभी प्रधानाचार्यों एवं प्रबंधकों को निर्देशित किया है कि वे अपार आईडी सृजन का कार्य प्राथमिकता के आधार पर पूर्ण कराते हुए विभागीय आदेशों का शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित करें, ताकि कोई भी छात्र-छात्रा इस महत्वपूर्ण प्रक्रिया से वंचित न रहे।

टिप्पणी

अपार (APAAR) आईडी राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत विद्यार्थियों की शैक्षणिक पहचान को डिजिटल स्वरूप देने की एक महत्वपूर्ण पहल है। ऐसे में समयबद्ध आईडी सृजन विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ी विभिन्न शैक्षणिक सेवाओं और रिकॉर्ड प्रबंधन के लिए आवश्यक माना जा रहा है। विभाग द्वारा जारी नोटिस इसी प्रक्रिया को समय पर पूरा कराने की प्रशासनिक कार्रवाई का हिस्सा है।

सारांश

शोहरतगढ़ क्षेत्र के 13 विद्यालयों को अपार आईडी सृजन में धीमी प्रगति के कारण अंतिम चेतावनी दी गई है। 27 जुलाई को होने वाली अगली समीक्षा के बाद विभाग आगे की कार्रवाई पर निर्णय लेगा। फिलहाल यह विभागीय नोटिस के आधार पर जारी प्रशासनिक कार्रवाई है और अंतिम निर्णय समीक्षा रिपोर्ट पर निर्भर करेगा।


यह समाचार खण्ड शिक्षा अधिकारी, शोहरतगढ़ द्वारा जारी आधिकारिक नोटिस एवं विभागीय दस्तावेजों के आधार पर प्रकाशित किया गया है। समाचार में उल्लिखित तथ्य विभागीय अभिलेखों पर आधारित हैं। अंतिम प्रशासनिक निर्णय सक्षम प्राधिकारी द्वारा की जाने वाली समीक्षा एवं नियमानुसार आगे की प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।

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शिक्षामित्रों ने मुख्यमंत्री से लगाई गुहार, पांच सूत्रीय मांगों के समाधान की उठाई आवाज

 

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खबर विस्तार से:

सिद्धार्थनगर। उत्तर प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों में पिछले 26 वर्षों से सेवाएं दे रहे शिक्षामित्रों की विभिन्न समस्याओं के स्थायी समाधान की मांग को लेकर उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षा मित्र संघ ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। यह ज्ञापन कलेक्ट्रेट में अपर जिलाधिकारी गौरव श्रीवास्तव को दिया गया।


संघ के जिलाध्यक्ष इंद्रजीत यादव ने कहा कि शासन स्तर से शिक्षामित्रों के हित में कई आदेश जारी किए गए हैं, लेकिन अनेक जनपदों में उनका पूर्ण पालन अभी तक नहीं हो पाया है। उन्होंने बताया कि 3 जनवरी 2025 को जारी शासनादेश के तहत शिक्षामित्रों की मूल विद्यालय में वापसी तथा महिला शिक्षामित्रों को उनके पति के निवास स्थान की ग्राम पंचायत स्थित विद्यालय में स्थानांतरण का प्रावधान किया गया था। इसके बावजूद लखनऊ और बाराबंकी को छोड़कर अधिकांश जिलों में प्रक्रिया अधूरी है, जिससे कई शिक्षामित्रों को प्रतिदिन 80 से 90 किलोमीटर तक की दूरी तय कर विद्यालय पहुंचना पड़ रहा है।

ज्ञापन में संघ ने बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों के लिए आयोजित होने वाली विशेष टीईटी परीक्षा में शिक्षामित्रों को सम्मिलित करने का अवसर देने की मांग की। साथ ही टीईटी एवं एनसीटीई के मानकों को पूरा करने वाले लगभग 60 हजार शिक्षामित्रों को सुपरटेट से छूट देकर शिक्षक पद पर समायोजित करने की भी मांग उठाई गई।

इसके अतिरिक्त शिक्षामित्रों को 11 माह के बजाय 12 माह का मानदेय, योग्यता एवं अनुभव के आधार पर सेवानिवृत्ति आयु 60 वर्ष से बढ़ाकर 62 वर्ष किए जाने तथा सेवा के दौरान आकस्मिक निधन होने पर उनके आश्रित परिवार को आर्थिक सहायता एवं एक सदस्य को योग्यता के अनुसार नौकरी दिए जाने की भी मांग की गई।

जिला महामंत्री यशवंत सिंह ने मुख्यमंत्री से शिक्षामित्रों की समस्याओं के शीघ्र एवं स्थायी समाधान के लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी करने का अनुरोध किया।

इस दौरान जिला संरक्षक श्याम नारायण त्रिपाठी, अशोक मिश्रा, उपेंद्र सिंह, धर्मेंद्र त्रिपाठी, सुनील मिश्रा, यूनुस खान, अनुपमा द्विवेदी, घनश्याम पांडेय, अखिलेश त्रिपाठी, लवकुश, मुक्तनाथ सहित बड़ी संख्या में शिक्षामित्र उपस्थित रहे।

 

 

शिक्षामित्रों ने मुख्यमंत्री से लगाई गुहार, पांच सूत्रीय मांगों के समाधान की उठाई आवाज

 

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खबर विस्तार से:

सिद्धार्थनगर। उत्तर प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों में पिछले 26 वर्षों से सेवाएं दे रहे शिक्षामित्रों की विभिन्न समस्याओं के स्थायी समाधान की मांग को लेकर उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षा मित्र संघ ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। यह ज्ञापन कलेक्ट्रेट में अपर जिलाधिकारी गौरव श्रीवास्तव को दिया गया।


संघ के जिलाध्यक्ष इंद्रजीत यादव ने कहा कि शासन स्तर से शिक्षामित्रों के हित में कई आदेश जारी किए गए हैं, लेकिन अनेक जनपदों में उनका पूर्ण पालन अभी तक नहीं हो पाया है। उन्होंने बताया कि 3 जनवरी 2025 को जारी शासनादेश के तहत शिक्षामित्रों की मूल विद्यालय में वापसी तथा महिला शिक्षामित्रों को उनके पति के निवास स्थान की ग्राम पंचायत स्थित विद्यालय में स्थानांतरण का प्रावधान किया गया था। इसके बावजूद लखनऊ और बाराबंकी को छोड़कर अधिकांश जिलों में प्रक्रिया अधूरी है, जिससे कई शिक्षामित्रों को प्रतिदिन 80 से 90 किलोमीटर तक की दूरी तय कर विद्यालय पहुंचना पड़ रहा है।

ज्ञापन में संघ ने बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों के लिए आयोजित होने वाली विशेष टीईटी परीक्षा में शिक्षामित्रों को सम्मिलित करने का अवसर देने की मांग की। साथ ही टीईटी एवं एनसीटीई के मानकों को पूरा करने वाले लगभग 60 हजार शिक्षामित्रों को सुपरटेट से छूट देकर शिक्षक पद पर समायोजित करने की भी मांग उठाई गई।

इसके अतिरिक्त शिक्षामित्रों को 11 माह के बजाय 12 माह का मानदेय, योग्यता एवं अनुभव के आधार पर सेवानिवृत्ति आयु 60 वर्ष से बढ़ाकर 62 वर्ष किए जाने तथा सेवा के दौरान आकस्मिक निधन होने पर उनके आश्रित परिवार को आर्थिक सहायता एवं एक सदस्य को योग्यता के अनुसार नौकरी दिए जाने की भी मांग की गई।

जिला महामंत्री यशवंत सिंह ने मुख्यमंत्री से शिक्षामित्रों की समस्याओं के शीघ्र एवं स्थायी समाधान के लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी करने का अनुरोध किया।

इस दौरान जिला संरक्षक श्याम नारायण त्रिपाठी, अशोक मिश्रा, उपेंद्र सिंह, धर्मेंद्र त्रिपाठी, सुनील मिश्रा, यूनुस खान, अनुपमा द्विवेदी, घनश्याम पांडेय, अखिलेश त्रिपाठी, लवकुश, मुक्तनाथ सहित बड़ी संख्या में शिक्षामित्र उपस्थित रहे।

 

 

एरियर का रास्ता साफ होने के बाद सिद्धार्थनगर के अनुदेशकों में खुशी की लहर

सिद्धार्थनगर। वर्षों तक सीमित मानदेय और आर्थिक तंगी से जूझते रहे अनुदेशकों के लिए सुप्रीम कोर्ट का फैसला नई उम्मीद लेकर आया है। वर्ष 2017-18 से एरियर का रास्ता साफ होने के बाद जिले के 258 अनुदेशकों के चेहरों पर मुस्कान लौट आई है। अनुमान है कि शासनादेश जारी होने के बाद प्रत्येक अनुदेशक को करीब 9 लाख रुपये तक का एरियर मिलेगा। यही वजह है कि वर्षों से अधूरे पड़े सपने अब साकार होते दिखाई दे रहे हैं।

भविष्य के लिए पैसा जमा करूंगा

अनुदेशक जिला अध्यक्ष अनिल पांडेय कहते हैं कि कम मानदेय के कारण वह अपने बच्चों को बेहतर स्कूल में नहीं पढ़ा सके। अब एरियर मिलने की उम्मीद ने उनके सपनों को नई उड़ान दी है। उनका कहना है कि सबसे पहले बच्चों की पढ़ाई पर खर्च करेंगे और भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए पैसा जमा करेंगे

अब बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाऊंगा”

अनुदेशक रविकांत हैं कि वर्षों से जमीन खरीदकर अपना घर बनाने की इच्छा थी, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण यह संभव नहीं हो सका। एरियर मिलते ही सबसे पहले जमीन खरीदकर अपने आशियाने का सपना पूरा करेंगे।

गाड़ी का सपना पूरा करूंगा

अनुदेशक बुद्धिराम कहते हैं कि उनका सबसे बड़ा सपना अपना पक्का घर बनाना है। साथ ही विद्यालय आने-जाने की परेशानी दूर करने के लिए एक नई मोटरसाइकिल भी खरीदेंगे।

बेटियों की शादी करूंगा

अनुदेशक विष्णु वरुण कहते हैं कि घर की मरम्मत लंबे समय से टल रही है और बेटियों की शादी की जिम्मेदारी भी सामने है। एरियर मिलने पर दोनों महत्वपूर्ण कार्य पूरे किए जाएंगे।

अब नियमितीकरण का इंतजार 

जिला मीडिया प्रभारी सत्यपाल सिंह कौशिक का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला केवल आर्थिक राहत नहीं, बल्कि वर्षों के संघर्ष, धैर्य और सम्मान की जीत है। अब सभी की निगाहें राज्य सरकार पर टिकी हैं। उनका आग्रह है कि जल्द से जल्द शासनादेश जारी कर एरियर का भुगतान कराया जाए और हमें नियमित किया जाए। ताकि न्यायालय के फैसले का वास्तविक लाभ प्रत्येक अनुदेशक तक पहुँच सके।

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