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कंपोजिट विद्यालय विशुनपुर में चला कुष्ठ रोग जागरूकता अभियान

सिद्धार्थनगर,खेसरहा। जिले के विकास खंड खेसरहा अंतर्गत कंपोजिट विद्यालय विशुनपुर मुस्तहकम में स्वास्थ्य विभाग द्वारा कुष्ठ रोग जागरूकता अभियान चलाया गया। इस अभियान का उद्देश्य स्कूली बच्चों के माध्यम से समाज में कुष्ठ रोग के प्रति फैली भ्रांतियों को दूर करना और समय पर उपचार के प्रति जागरूक करना था।

कार्यक्रम के दौरान सीएचसी खेसरहा की एएनएम राजेश श्रीवास्तव ने विद्यालय के बच्चों को कुष्ठ रोग (Leprosy) के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी। उन्होंने सरल भाषा में समझाया कि कुष्ठ रोग एक संक्रमणजनित लेकिन पूरी तरह से इलाज योग्य बीमारी है और सरकार द्वारा इसका उपचार पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध कराया जाता है।

कुष्ठ रोग के लक्षणों की दी जानकारी

एएनएम ने बच्चों को बताया कि यदि शरीर पर ऐसे सफेद या तांबे रंग के धब्बे दिखाई दें जिनमें सुन्नपन हो, या हाथ-पैरों में झनझनाहट और संवेदना में कमी महसूस हो, तो यह कुष्ठ रोग का प्रारंभिक संकेत हो सकता है। ऐसे लक्षण दिखने पर डरने की जरूरत नहीं है, बल्कि तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जांच करवानी चाहिए।

भ्रम दूर करने पर जोर

कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि कुष्ठ रोग छूने मात्र से नहीं फैलता और मरीजों से भेदभाव करना गलत है। समय पर इलाज मिलने से रोग पूरी तरह ठीक हो जाता है और मरीज सामान्य जीवन जी सकता है।

राजेश श्रीवास्तव ने बच्चों से अपील की कि वे अपने गांव और घर में यदि किसी व्यक्ति में ऐसे लक्षण देखें तो उसे छिपाएं नहीं, बल्कि सीएचसी खेसरहा या नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में ले जाकर जांच और इलाज कराएं।

बच्चों ने दिखाई रुचि

विद्यालय के छात्रों ने इस जागरूकता कार्यक्रम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और स्वास्थ्य से जुड़े कई प्रश्न भी पूछे। शिक्षकों ने भी इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम बच्चों को स्वास्थ्य के प्रति सजग बनाते हैं।

स्वास्थ्य विभाग की पहल सराहनीय

स्वास्थ्य विभाग द्वारा चलाया जा रहा यह अभियान ग्रामीण क्षेत्रों में कुष्ठ रोग उन्मूलन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। जागरूकता के माध्यम से ही इस बीमारी को जड़ से समाप्त किया जा सकता है।

इस दौरान शिक्षक महेश विश्वकर्मा, निर्मल, सुजीता, सत्यपाल, अनुराधा रसोइया शंकर तथा अन्य लोग उपस्थित रहे

धूमधाम से मनी रविदास जयंती

कपिलवस्तु विधानसभा के विकासखंड लोटन अंतर्गत ग्राम सभा हरिगांव में संत शिरोमणि गुरु रविदास जयंती धूमधाम से मनाई गई जिसके मुख्य अतिथि सांसद जगदंबिका पाल रहे। संत रविदास जयंती पर सांसद जगदंबिका पाल ने कहा कि, संत शिरोमणि गुरु रविदास एक महान समाज सुधारक, कवि और ईश्वर के अनन्य भक्त थे उन्होंने समानता, सामाजिक समरसता और मानव जाति की एकता का संदेश दिया उनका एक प्रसिद्ध वाक्य “मन चंगा तो कठौती में गंगा”, उनके द्वारा रचित यह प्रसिद्ध वाक्य मन की पवित्रता को ही सच्ची भक्ति मानता है कार्यक्रम को पूर्व जिला अध्यक्ष लाल जी त्रिपाठी उर्फ लाल बाबा ने भी अपने संबोधन में महान संत रविदास पर अपनी शुभकामनाएं लोगों को दिया तथा कार्यक्रम का संचालन पूर्व प्रदेश कार्यसमिति सदस्य राजेंद्र पांडे ने किया इस अवसर पर लालबेनी,चंद्रमणि चौरसिया ,रामकुमार, राजेंद्र सीताराम, डॉक्टर नंदकुमार ,रमेश ,अब्दुल सलाम ,कृष्ण चंद्र सिंह ,मोनी सिंह ,मनोज कुमार ,घनश्याम साहनी सहित सैकड़ों लोग उपस्थित रहे

यूजीसी नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक पर सिद्धार्थनगर के अधिवक्ताओं ने जताई खुशी

सिद्धार्थनगर। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) से जुड़े नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाई गई रोक का विभिन्न वर्गों में स्वागत किया जा रहा है। न्यायालय के इस निर्णय को कई लोगों ने संतुलित और न्यायसंगत कदम बताया है। सिद्धार्थनगर में भी इस फैसले को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।

विस्तृत सुनवाई का रास्ता खुला

सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के कुछ नए प्रावधानों पर फिलहाल रोक लगाते हुए मामले की विस्तृत सुनवाई का रास्ता खोला है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अदालत का यह कदम नियमों की संवैधानिक वैधता, प्रभाव और व्यवहारिक पक्षों की गहन समीक्षा सुनिश्चित करेगा। इससे शिक्षा व्यवस्था से जुड़े सभी पक्षों को अपनी बात रखने का अवसर मिलेगा।

बार एसोसिएशन अध्यक्ष ने जताई खुशी 

सिद्धार्थनगर बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अखंड प्रताप सिंह ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का स्वागत करते हुए कहाकि,

यह निर्णय स्वागत योग्य है। सर्वोच्च न्यायालय ने संवैधानिक संतुलन और न्यायिक विवेक का परिचय दिया है। ऐसे महत्वपूर्ण विषयों पर व्यापक विचार-विमर्श आवश्यक होता है।”

आगे उन्होंने कहा कि, शिक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में लागू होने वाले नियमों पर सभी हितधारकों की राय जरूरी है।”

मार्च में होगी अगली सुनवाई 

सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी और केंद्र सरकार से जवाब माँगा है। अगली सुनवाई 19 मार्च 2026 को होगी, जिसमें अदालत नियमों की वैधता, प्रभाव और सुधार की दिशा पर विचार करेगी।

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