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सिद्धार्थनगर में स्वास्थ्य सेवाओं पर सख्त नजर: डीएम ने मेडिकल कॉलेज इमरजेंसी का किया औचक निरीक्षण, कन्या जन्मोत्सव में 15 माताओं का सम्मान

सिद्धार्थनगर। जनपद में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने के उद्देश्य से जिलाधिकारी ने माधव प्रसाद त्रिपाठी चिकित्सा महाविद्यालय की इमरजेंसी का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO), मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (CMS) सहित वरिष्ठ डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मी मौजूद रहे।

डीएम ने इमरजेंसी वार्ड में भर्ती मरीजों से सीधे संवाद कर उन्हें मिल रही सुविधाओं की जानकारी ली। साथ ही साफ-सफाई, दवा उपलब्धता, उपचार प्रक्रिया और चिकित्सकीय सेवाओं का गहन निरीक्षण किया।

🏥 जीवनरक्षक उपकरण और ऑक्सीजन व्यवस्था की समीक्षा

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने इमरजेंसी में उपलब्ध जीवनरक्षक उपकरण, ऑक्सीजन सप्लाई, दवाओं के स्टॉक और मरीजों के रजिस्ट्रेशन सिस्टम की समीक्षा की।

उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि आपातकालीन सेवाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और मरीजों को त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण इलाज हर हाल में सुनिश्चित किया जाए।साफ-सफाई और सूचना व्यवस्था पर विशेष जोर

डीएम ने अस्पताल परिसर में साफ-सफाई को और बेहतर बनाने, मरीजों व तीमारदारों को जरूरी जानकारी उपलब्ध कराने और गंभीर मरीजों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।

अधिकारियों ने अस्पताल की मौजूदा व्यवस्थाओं और सुधार कार्यों की जानकारी भी जिलाधिकारी को दी।

कन्या जन्मोत्सव: बेटियों के जन्म पर खुशियों का जश्न

इसी दौरान मेडिकल कॉलेज के एमसीएच विंग स्थित लेबर वार्ड में कन्या जन्मोत्सव का भव्य आयोजन किया गया। नवजात बालिकाओं के जन्म पर केक काटकर खुशियां मनाई गईं, जिससे पूरे वार्ड में उत्सव का माहौल रहा।

15 प्रसूताओं को किया गया सम्मानित

कार्यक्रम में जिलाधिकारी, सीएमओ, प्राचार्य, सीएमएस, बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. नम्रता सहित चिकित्सा स्टाफ मौजूद रहा।

इस अवसर पर शहजादी, अंजू, किरन, चंद्रकला, अनीता, संध्या, निर्मला, सुंदरी समेत 15 प्रसूताओं को सम्मानित कर उपहार वितरित किए गए।

बेटियां हैं समाज की शक्ति: जिलाधिकारी

जिलाधिकारी ने कहा कि बेटियां परिवार और समाज की शक्ति हैं। उनके जन्म को उत्सव के रूप में मनाना सकारात्मक सोच और सामाजिक बदलाव का प्रतीक है।

उन्होंने माताओं को “घर में लक्ष्मी के आगमन” की शुभकामनाएं देते हुए सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने की अपील की।

स्वास्थ्य और योजनाओं की दी गई जानकारी

कार्यक्रम में सुकन्या समृद्धि योजना, नवजात शिशुओं के टीकाकरण, नियमित स्वास्थ्य परीक्षण और स्तनपान के महत्व पर विस्तृत जानकारी दी गई।

डॉ. नम्रता ने कंगारू मदर केयर (KMC) और नवजात देखभाल के जरूरी उपायों पर भी जागरूक किया।

सकारात्मक संदेश के साथ कार्यक्रम संपन्न

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बालिका जन्म के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करना, लिंग समानता को बढ़ावा देना और मातृ-शिशु स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाना रहा।

पहले ही प्रयास में बड़ी सफलता: सिद्धार्थनगर के श्रेयांश चौबे बने सेंट्रल एक्साइज इंस्पेक्टर

सिद्धार्थनगर। जनपद के तेतरी बाजार क्षेत्र अंतर्गत बसडिलिया निवासी श्रेयांश चौबे ने SSC CGL परीक्षा के घोषित परिणाम में सेंट्रल एक्साइज इंस्पेक्टर पद पर चयनित होकर जिले का नाम रोशन किया है। खास बात यह है कि श्रेयांश ने यह सफलता अपने पहले ही प्रयास में हासिल की, जो उनकी कड़ी मेहनत और लगन का परिणाम है।

शुरुआत से ही रहे मेधावी छात्र

श्रेयांश चौबे शुरू से ही पढ़ाई में बेहद मेधावी रहे हैं। उन्होंने अपनी हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की पढ़ाई रेयान इंटरनेशनल स्कूल, शाहजहांपुर से पूरी की। इसके बाद उन्होंने बीटेक की डिग्री केएनआईटी सुल्तानपुर से हासिल की। उच्च शिक्षा के दौरान ही उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू कर दी थी, जिसका परिणाम आज सबके सामने है।

पहले प्रयास में ही रचा इतिहास

SSC CGL जैसी कठिन परीक्षा में पहले ही प्रयास में सफलता हासिल करना अपने आप में बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। श्रेयांश की इस सफलता ने क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणा का कार्य किया है। उनकी मेहनत, अनुशासन और समर्पण ने यह साबित कर दिया कि सही दिशा में प्रयास करने से सफलता निश्चित है।

परिवार में खुशी का माहौल

इस उपलब्धि से श्रेयांश के परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई है। उनके पिता धर्मेंद्र कुमार चौबे, माता पूनम चौबे, बाबा बाबू राम चौबे, नाना विश्वंभर नाथ उपाध्याय और नानी आरती देवी सहित परिवार के अन्य सदस्यों बृजेश उपाध्याय, पवन चौबे और इंद्रेश उपाध्याय ने गर्व व्यक्त करते हुए उनकी सफलता पर हर्ष जताया है।

युवाओं के लिए बने प्रेरणा स्रोत

श्रेयांश चौबे की यह सफलता सिद्धार्थनगर सहित पूरे क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणादायक है। यह संदेश देती है कि कठिन परिश्रम, सही मार्गदर्शन और आत्मविश्वास के बल पर कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

श्रेयांश चौबे की यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे जिले के लिए गौरव की बात है। उनकी यह सफलता आने वाली पीढ़ी को आगे बढ़ने और अपने सपनों को साकार करने की प्रेरणा देगी।

मिठवल के चरथरी विद्यालय में गूंजा सम्मान का स्वर, सेवानिवृत्त शिक्षक वरुणेंद्र राय को दी गई भावभीनी विदाई

सिद्धार्थनगर। मिठवल विकास खंड अंतर्गत पूर्व माध्यमिक विद्यालय चरथरी में आज एक गरिमामय एवं भावनात्मक सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्राथमिक विद्यालय हसवापार के सेवानिवृत्त शिक्षक वरुणेंद्र राय को उनके दीर्घकालीन शैक्षिक योगदान के लिए सम्मानित किया गया।

शिक्षकों ने जताया गर्व और सम्मान

इस अवसर पर शिक्षक संघ अध्यक्ष रमेश मिश्रा ने कहा कि वरुणेंद्र राय का पूरा जीवन शिक्षा और संस्कारों को समर्पित रहा है। उन्होंने विद्यार्थियों को न केवल पढ़ाया, बल्कि उन्हें एक बेहतर नागरिक बनने की दिशा भी दिखाई।

प्रधानाचार्य धर्मेंद्र कुमार मिश्र ने कहा कि ऐसे शिक्षक शिक्षा जगत की रीढ़ होते हैं, जिनकी कार्यशैली और समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनते हैं।

अंगवस्त्र और स्मृति चिन्ह देकर किया सम्मानित

समारोह के दौरान अतुल दुबे, राजीव कुमार, रविकांत सहित अन्य शिक्षकों ने वरुणेंद्र राय को अंगवस्त्र, पुष्पगुच्छ एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर उनका सम्मान किया। इस दौरान विद्यालय का वातावरण भावुक हो उठा और सभी ने उनके उज्जवल भविष्य की कामना की।

सेवानिवृत्त शिक्षक का भावुक संबोधन

अपने संबोधन में वरुणेंद्र राय ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षा सेवा उनके जीवन की सबसे बड़ी पूंजी रही है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों का प्यार और सहयोग उन्हें हमेशा याद रहेगा।

अनुदेशकों के लिए बड़ी सौगात: 17 हजार मानदेय कैबिनेट से मंजूर, विक्रम सिंह ने मुख्यमंत्री का जताया आभार

लखनऊ/उत्तर प्रदेश: प्रदेश सरकार द्वारा अनुदेशकों के मानदेय को बढ़ाकर 17 हजार रुपये किए जाने के कैबिनेट फैसले के बाद पूरे उत्तर प्रदेश में खुशी की लहर दौड़ गई है। लंबे समय से मानदेय वृद्धि की मांग कर रहे अनुदेशकों के लिए यह फैसला किसी बड़ी राहत से कम नहीं है।

विक्रम सिंह ने जताया आभार, कहा,सरकार ने समझी हमारी पीड़ा

इस महत्वपूर्ण निर्णय पर अनुदेशक संघ के प्रदेश अध्यक्ष विक्रम सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, शिक्षामंत्री संदीप सिंह और शिक्षक विधायक श्रीचंद शर्मा का आभार व्यक्त किया।

उन्होंने कहा कि यह निर्णय प्रदेश के करीब 25 हजार अनुदेशकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएगा और उनके सम्मान को भी बढ़ाएगा।

“यह सिर्फ मानदेय नहीं, सम्मान की जीत” – विक्रम सिंह

विक्रम सिंह ने अपने वक्तव्य में कहा कि यह सिर्फ मानदेय वृद्धि नहीं बल्कि अनुदेशकों के संघर्ष और आत्मसम्मान की जीत है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी महाराज ने हमेशा शिक्षा और शिक्षकों के हितों को प्राथमिकता दी है, जिसका यह परिणाम है।

शिक्षा व्यवस्था को मिलेगा मजबूती का आधार

विक्रम सिंह ने कहा कि, मानदेय में वृद्धि से अनुदेशकों का मनोबल बढ़ेगा, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता में भी सुधार आएगा। यह कदम प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने की दिशा में अहम साबित होगा।

प्रदेशभर में जश्न का माहौल

फैसले के बाद कई जिलों में अनुदेशकों ने खुशी जताई और सरकार के प्रति आभार प्रकट किया। सोशल मीडिया पर भी इस निर्णय की सराहना हो रही है।

भाजपा स्थापना दिवस पर बांसी में जोश: विधायक जय प्रताप सिंह ने फहराया ध्वज, जनसेवा का दिया संदेश

बांसी, सिद्धार्थनगर। भारतीय जनता पार्टी के 47वें स्थापना दिवस के अवसर पर पूरे क्षेत्र में उत्साह, ऊर्जा और संगठन के प्रति समर्पण का माहौल देखने को मिला। पूर्व कैबिनेट मंत्री व वर्तमान विधायक बांसी राजा जय प्रताप सिंह ने अपने आवास राजमहल बांसी पर पार्टी का ध्वज फहराया।

संगठन के मूल्यों को किया याद

ध्वजारोहण के दौरान जय प्रताप सिंह ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी केवल एक राजनीतिक दल नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण के संकल्प से जुड़ा एक मजबूत संगठन है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे पार्टी की विचारधारा को आत्मसात करते हुए जनसेवा में सक्रिय भूमिका निभाएं।

राष्ट्र सेवा और सुशासन का संकल्प

उन्होंने कहा कि भाजपा विश्व का सबसे बड़ा राजनीतिक संगठन है, जो राष्ट्र सेवा, लोक-कल्याण, सुशासन और गरीबों के उत्थान के संकल्प के साथ निरंतर कार्य कर रहा है। स्थापना दिवस हमें यह प्रेरणा देता है कि हम अपने कर्तव्यों के प्रति और अधिक जिम्मेदार बनें और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखें।

उन्होंने कहा कि, “भाजपा केवल एक राजनीतिक संगठन नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का एक मजबूत माध्यम है, जो सेवा, सुशासन और समर्पण के पथ पर निरंतर आगे बढ़ रहा है।”

संकल्प से संगठन 

भाजपा का स्थापना दिवस केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि संगठन की विचारधारा, सेवा भावना और राष्ट्र के प्रति समर्पण को पुनः याद करने का अवसर है। इस मौके पर लिए गए संकल्प ही पार्टी को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा तय करते हैं।

खबर का हुआ असर: 25 साल से जर्जर सड़क पर शुरू हुआ निर्माण, बेदौली-खोजीपुर-खरचौला मार्ग पर दौड़ी विकास की रफ्तार

सिद्धार्थनगर। बांसी-डुमरियागंज मार्ग पर स्थित बेदौली-खोजीपुर-खरचौला मार्ग, जो पिछले 25 वर्षों से बदहाली की मार झेल रहा था, अब विकास की राह पर लौटता नजर आ रहा है। 4 दिन पहले इस सड़क की दुर्दशा को प्रमुखता से उठाए जाने के बाद प्रशासन हरकत में आया और अब यहां निर्माण कार्य तेजी से शुरू कर दिया गया है।

ग्रामीणों को हो रही थी परेशानी 

यह सड़क लंबे समय से गड्ढों, जलभराव और टूट-फूट के कारण स्थानीय लोगों के लिए मुसीबत बनी हुई थी। स्कूली बच्चों, किसानों और मरीजों को रोजाना इस रास्ते से गुजरते समय भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। कई बार शिकायतों और मांगों के बावजूद जब कोई सुनवाई नहीं हुई, तब इस मुद्दे को FT News ने प्रमुखता से प्रकाशित किया।

निर्माण कार्य शुरू हुआ 

खबर के प्रकाशन के बाद प्रशासन ने त्वरित संज्ञान लेते हुए मौके पर टीम भेजी और सड़क निर्माण कार्य शुरू करा दिया। अब जेसीबी मशीनों की गूंज और सड़क पर बिछती नई परतें ग्रामीणों के लिए राहत और उम्मीद का संदेश लेकर आई हैं।

ग्रामीणों में खुशी की लहर 

ग्रामीणों की खुशी अब शब्दों में साफ झलक रही है। स्थानीय निवासी नीरज मिश्र ने कहाकि,

हमने कभी नहीं सोचा था कि खबर का इतना जल्दी असर होगा। 25 साल से हम इस सड़क की बदहाली झेल रहे थे, लेकिन अब काम शुरू होते देख बहुत राहत मिली है।”

वहीं अन्य ग्रामीणों ने कहाकि,

मीडिया ने हमारी आवाज को उठाया, तभी यह संभव हो पाया। अब उम्मीद है कि जल्द ही सड़क पूरी बनकर तैयार होगी और आवागमन आसान हो जाएगा।

इस निर्माण कार्य से न केवल क्षेत्र में आवागमन सुगम होगा, बल्कि व्यापार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच भी बेहतर होगी। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि यह पहल क्षेत्र के समग्र विकास की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगी।

सिद्धार्थनगर में सांसद व डीएम का औचक निरीक्षण: आरोग्य मेले में कम ओपीडी पर नाराजगी, गौशाला व्यवस्थाओं पर दिए सख्त निर्देश

सिद्धार्थनगर। जनपद सिद्धार्थनगर में आयोजित मुख्यमंत्री आरोग्य मेले के तहत जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जी एन ने नगरीय स्वास्थ्य केंद्र सनई और विकासखंड उसका क्षेत्र के नए स्वास्थ्य केंद्र महुलानी का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं, चिकित्सकों व स्टाफ की उपस्थिति, दवाओं की उपलब्धता और मरीजों को मिल रही सुविधाओं का गहन मूल्यांकन किया गया।

निरीक्षण में दोनों केंद्रों पर ओपीडी में मरीजों की संख्या अपेक्षाकृत कम पाए जाने पर जिलाधिकारी ने कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि मुख्यमंत्री आरोग्य मेले का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए, ताकि अधिक से अधिक लोग इस योजना का लाभ उठा सकें।

उन्होंने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को निर्देश दिए कि आशा व आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक किया जाए। साथ ही मरीजों का समुचित पंजीकरण, आवश्यक जांच, दवाओं की उपलब्धता, साफ-सफाई और उपकरणों की कार्यशीलता सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।

जिलाधिकारी ने स्पष्ट कहा कि यह योजना गरीब और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाएं देने के उद्देश्य से चलाई जा रही है, ऐसे में लापरवाही बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

इसी क्रम में आज महारिया गौशाला का निरीक्षण भी मा. सांसद डुमरियागंज जगदंबिका पाल और जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जी एन द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। निरीक्षण के दौरान गौवंश के रख-रखाव, साफ-सफाई, चारे-पानी और पशु स्वास्थ्य सेवाओं का जायजा लिया गया।

सांसद और जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि गौशाला में हरे चारे और स्वच्छ पेयजल की नियमित व्यवस्था हो तथा पशुओं के स्वास्थ्य परीक्षण और टीकाकरण को और मजबूत किया जाए। उन्होंने गौशाला को ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने पर जोर दिया।

इस दौरान सोमनाथ मौर्य द्वारा गौशाला के लिए हरा चारा एवं केयरटेकर मानदेय हेतु प्रतिमाह 30 हजार रुपये सहयोग देने की घोषणा की गई। अधिकारियों ने बताया कि गौशाला में पर्याप्त संख्या में गौवंश संरक्षित हैं और उनके लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं उपलब्ध हैं।

निरीक्षण के दौरान जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों ने गौवंश को गुड़ और चारा खिलाकर संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता भी जताई।

टीएफआई की बैठक संपन्न, 4 अप्रैल आंदोलन को लेकर बनी रणनीति

सिद्धार्थनगर। टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (TFI) के तत्वावधान में टीईटी से मुक्ति की मांग को लेकर प्रस्तावित 4 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाले विशाल धरना-प्रदर्शन की तैयारियों के क्रम में बुधवार को जनपद स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। यह बैठक जिला मुख्यालय स्थित एक होटल में संपन्न हुई, जिसमें विभिन्न ब्लॉकों से आए पदाधिकारी और शिक्षक शामिल हुए।

धरना-प्रदर्शन को सफल बनाने पर जोर

बैठक के दौरान आगामी धरना-प्रदर्शन को सफल बनाने के लिए विस्तृत रणनीति तैयार की गई। पदाधिकारियों ने अधिक से अधिक संख्या में शिक्षकों की भागीदारी सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया। सभी को 4 अप्रैल को दिल्ली पहुंचकर अपनी एकजुटता दिखाने का आह्वान किया गया।

एकजुटता ही समाधान का रास्ता: आनंद त्रिपाठी

पर्यवेक्षक एवं मंडलीय मंत्री आनंद कुमार त्रिपाठी (देवी पाटन मंडल) ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षकों की समस्याओं के समाधान के लिए एकजुटता और सक्रिय भागीदारी बेहद जरूरी है। उन्होंने सभी शिक्षकों से आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की।

टीईटी मुद्दे पर गरमाई चर्चा

टीएफआई के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राधेरमण त्रिपाठी ने टीईटी से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि शिक्षकों ने अपनी नियुक्ति के समय निर्धारित योग्यता पूरी की थी, ऐसे में बाद में नई योग्यता लागू करना उचित नहीं है। उन्होंने केंद्र सरकार से शिक्षकों के हित में ठोस कदम उठाने की मांग की।

ज्यादा से ज्यादा शिक्षक दिल्ली पहुंचे: योगेंद्र पांडेय

जिला मंत्री योगेंद्र पांडेय ने कहा कि आंदोलन को सफल बनाने के लिए सभी शिक्षकों को एकजुट होकर कार्य करना होगा और बड़ी संख्या में दिल्ली पहुंचना होगा।

संगठन को मजबूत करने पर दिया गया जोर

जूनियर शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष रमेश चंद्र मिश्र और महामंत्री कलीमुल्लाह ने भी शिक्षकों से एकजुट होकर आंदोलन को सफल बनाने की अपील की।

कार्यक्रम में संगठन विस्तार के तहत राघवेंद्र तिवारी को उस्का बाजार इकाई का संगठन मंत्री तथा दुर्गेश पांडेय को मीडिया प्रभारी मनोनीत किया गया।

डीजीपी ने कहा, दहेज उत्पीड़न समेत 31 मामलों में एफआईआर न करें दर्ज

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में अब पुलिस 31 मामलों में थानों में एफआईआर दर्ज नहीं करेगी। इसमें दहेज और घरेलू हिंसा से जुड़े मामले भी शामिल हैं। इस प्रकार के मामलों के सामने आने के बाद थाने केवल परिवाद यानी शिकायत लेंगे। इसके बाद इन्हें कोर्ट के भेजा जाएगा। कोर्ट के आदेश पर ही इन मामलों में केस दर्ज किया जाएगा। यूपी डीजीपी राजीव कृष्ण ने पुलिस अधिकारियों को इस संबंध में निर्देश जारी किया है। डीजीपी ने साफ तौर पर कहा है कि जिन मामलों में कानून के तहत केवल परिवाद का प्रावधान है, उनमें एफआईआर दर्ज करना पूरी तरह गलत है। इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ की ओर इस संबंध में आपत्ति के बाद डीजीपी की ओर से आदेश जारी किया गया है।

हाई कोर्ट ने क्या कहा ?

हाई कोर्ट लखनऊ पीठ ने 25 फरवरी को अनिरुद्ध तिवारी बनाम यूप सरकार एवं अन्य मामले की सुनवाई करते हुए कड़ी टिप्पणी की थी। कोर्ट ने बीएनएस की धारा 82 में एफआईआर दर्ज किए जाने पर आपत्ति जताते हुए कहा था कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 219 यह प्रावधान करती है कि कोई भी कोर्ट भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 81 से 84 के तहत दंडनीय किसी अपराध का संज्ञान तब तक नहीं लेगा, जब तक कि उस अपराध से पीड़ित किसी व्यक्ति की ओर से शिकायत न की गई हो।

हाई कोर्ट ने कहा कि वर्तमान मामले में केस क्राइम संख्या 0014/2025 में एफआईआर दर्ज करते समय भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 82 का प्रयोग किया गया है। यह एफआईआर भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 115(2), 352, 351(3), 85 एवं 82(1) और दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धारा 3/4 के तहत श्रावस्ती महिला थाना में दर्ज की गई है।

हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई के क्रम में टिप्पणी में कहा कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 220, 221 और 222 आगे यह प्रावधान करती हैं कि बीएनएस के तहत कुछ अन्य अपराधों की परिकल्पना है। इस प्रकार के मामलों में कोर्ट तब तक संज्ञान नहीं लेगा, जब तक मामले के आधार पर पीड़ित व्यक्ति, राज्य, या किसी लोक सेवक की ओर से शिकायत दर्ज न की गई हो। इसलिए, यहां एक विशिष्ट रोक है कि कोर्ट उन अपराधों का संज्ञान नहीं लेगा, जिनका उल्लेख भारतीय न्याय संहिता, 2023 में किया गया है।

यूपी डीजीपी का सभी पुलिस अधिकारियों को जारी आदेश

कोर्ट की टिप्पणी पर आदेश जारी

हाई कोर्ट की टिप्पणी और इस प्रकार के मामलों में आपत्ति जताए जाने के बाद डीजीपी की ओर से निर्देश जारी किए गए हैं। डीजीपी ने इसमें स्पष्ट किया है कि कई बार पुलिस नियमों के विपरीत एफआईआर दर्ज कर लेती है। इससे आरोपित को कोर्ट में लाभ मिल जाता है। साथ ही, पूरी जांच प्रक्रिया भी प्रभावित होती है।

हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद इसे गंभीर त्रुटि मानते हुए डीजीपी ने सभी पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया है कि किसी भी मामले में एफआईआर दर्ज करने से पहले अनिवार्य रूप से इस संबंध में जांच कर लें। मामलों में देखा जाए कि इसमें एफआईआर दर्ज करने का कानूनी प्रविधान है या नहीं।

31 मामलों में कोर्ट में परिवाद का प्रावधान

डीजीपी राजीव कृष्ण ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में मानहानि, घरेलू हिंसा, निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट (चेक बाउंस), माइंस एंड मिनरल एक्ट, कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट और पशुओं के साथ क्रूरता जैसे मामले शामिल हैं। साथ ही, दहेज के साथ-साथ 31 अलग-अलग कानूनों में केवल अदालत में परिवाद दाखिल करने का ही प्रविधान है। उन्होंने सभी थाना प्रभारियों और विवेचकों को निर्देशित किया कि वे कानून के प्रविधानों का गंभीरता से अध्ययन करें। इसी के आधार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

इन मामलों में कोर्ट में परिवाद का प्रावधान:

घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005

नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट, 1881

खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957

गर्भधारण पूर्व और प्रसव पूर्व निदान तकनीक (PCPNDT) अधिनियम, 1994

उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019

पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1950

बाल श्रम (प्रतिषेध और विनियमन) अधिनियम, 1986

वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1981

वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972

पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986

आयात और निर्यात (नियंत्रण) अधिनियम, 1947

खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम, 1954

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013

ट्रेड मार्क्स अधिनियम, 1999

मानव अंग और ऊतक प्रत्यारोपण अधिनियम, 1994

कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध और प्रतितोष) अधिनियम, 2013

जल (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1974

केबल टेलीविजन नेटवर्क (विनियमन) अधिनियम, 1995

विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम, 1999

कीटनाशक अधिनियम, 1968

नोटरी अधिनियम, 1952

बीमा अधिनियम, 1938

पुरावशेष और आर्ट ट्रेजर अधिनियम, 1972

औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947

खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006

आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005

राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग अधिनियम, 2019

उत्तर प्रदेश गन्ना (आपूर्ति और खरीद का विनियमन) अधिनियम, 1953

अग्नि निवारण और अग्नि सुरक्षा अधिनियम, 2005

दहेज प्रतिषेध अधिनियम, 1961 (धारा: 07-1(b)(i) पीड़ित व्यक्ति द्वारा शिकायत) अपराध से प्रभावित व्यक्ति, या ऐसे व्यक्ति के माता-पिता या अन्य रिश्तेदार, अथवा किसी मान्यता प्राप्त कल्याण संस्था या संगठन की ओर से)

बाट और माप मानक अधिनियम, 1976

यूपी में रामनवमी पर दो दिन का सार्वजनिक अवकाश घोषित, अब 26 व 27 दो दिन रहेगी छुट्टी

उत्तर प्रदेश। रामनवमी पर योगी सरकार ने बड़ा निर्णय लिया है। पहले से घोषित 26 मार्च के सार्वजनिक अवकाश के साथ अब 27 मार्च को भी छुट्टी घोषित कर दी गई है। मंदिरों में रामनवमी के दौरान श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है।

हर साल इस पर्व पर बड़ी संख्या में लोग पूजा-अर्चना और दर्शन के लिए मंदिरों में पहुंचते हैं, जिससे व्यवस्था बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। ऐसे में अतिरिक्त अवकाश से लोगों को सुविधा मिलेगी और भीड़ प्रबंधन में भी मदद मिलेगी।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस निर्णय के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया है कि सरकार आस्था और परंपराओं के सम्मान के लिए प्रतिबद्ध है। प्रशासन को भी निर्देश दिए गए हैं कि सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम सुनिश्चित किए जाएं। लगातार दो दिन की छुट्टी से श्रद्धालुओं को न केवल धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेने का अवसर मिलेगा, बल्कि यात्रा और दर्शन भी अधिक सहज हो सकेंगे।

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