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TET अनिवार्यता पर केंद्रीय मंत्री के बयान से भड़के शिक्षक, सिद्धार्थनगर में पुतला दहन और प्रदर्शन

सिद्धार्थनगर: संसद में केंद्रीय शिक्षा राज्यमंत्री जयंत चौधरी के लिखित जवाब के बाद वर्ष 2011 से पूर्व नियुक्त बेसिक शिक्षकों में असमंजस और असुरक्षा की भावना गहरा गई है। इस मुद्दे को लेकर जिले में शिक्षकों का आक्रोश खुलकर सामने आया और मामला अब आंदोलन का रूप लेता दिख रहा है।

बीएसए कार्यालय पर शिक्षकों का प्रदर्शन

बुधवार को उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के आह्वान पर बड़ी संख्या में शिक्षक बीएसए कार्यालय पहुंचे। शिक्षकों ने जोरदार नारेबाजी करते हुए विरोध दर्ज कराया। इस दौरान केंद्रीय मंत्री के बयान की प्रतियां जलाकर नाराजगी जताई गई और पुतला दहन भी किया गया।

पुरानी नियुक्तियों पर नई शर्तें स्वीकार नहीं

प्रांतीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं जिलाध्यक्ष राधेरमण त्रिपाठी ने कहा कि शिक्षकों की नियुक्ति उस समय की निर्धारित शैक्षणिक अर्हताओं के आधार पर हुई थी, जब टीईटी (TET) लागू नहीं था। ऐसे में वर्षों बाद नई अनिवार्यता लागू करना शिक्षकों के अधिकारों और सेवा सुरक्षा के खिलाफ है।

उन्होंने कहा कि यह केवल परीक्षा का मुद्दा नहीं, बल्कि लाखों शिक्षकों की नौकरी की स्थिरता और सम्मान से जुड़ा गंभीर विषय है।

सरकार से जल्द स्पष्टीकरण की मांग

जिला मंत्री योगेंद्र पांडेय ने सरकार से इस मामले में स्पष्ट आदेश जारी करने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि पूर्व नियुक्त शिक्षकों को राहत नहीं दी गई तो संगठन वृहद आंदोलन शुरू करेगा। शिक्षकों ने चेतावनी दी कि अनिश्चितता की स्थिति जारी रही तो प्रदेश स्तर पर बड़ा विरोध किया जाएगा।

एकजुटता के साथ संघर्ष का संकल्प

प्रदर्शन के अंत में शिक्षकों ने एकजुट रहकर अपने अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया। इस मौके पर लालजी यादव, इन्द्रसेन सिंह, शिवाकांत दूबे, सुधाकर मिश्र, करूणेश मौर्य, शैलेंद्र मिश्र, रामशंकर पांडेय, आनंद राय सहित बड़ी संख्या में शिक्षक एवं संगठन पदाधिकारी मौजूद रहे।

नोडल अधिकारी डॉ. जीवन लाल का गौशालाओं पर ताबड़तोड़ औचक निरीक्षण, व्यवस्थाओं की ली जानकारी

उत्तर प्रदेश शासन के निर्देश के क्रम में पशुपालन विभाग द्वारा संचालित गौशालाओं की वर्तमान स्थिति का आकलन करने के लिए शासन द्वारा नामित गौशाला नोडल अधिकारी एवं अपर निदेशक ग्रेड-2 बस्ती मंडल, बस्ती डॉ. जीवन लाल ने जनपद की विभिन्न गौशालाओं का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान व्यवस्थाओं की जमीनी हकीकत परखी गई और आवश्यक निर्देश भी दिए गए।

गौ आश्रय स्थलों का किया निरीक्षण

नोडल अधिकारी ने अस्थाई गौ आश्रय स्थल रामगढ़, दूल्हा दरम्यानी, पिपरसन, बर्डपुर नंबर-3 तथा महादेव लाला गौशाला का निरीक्षण किया। इस दौरान गौशालाओं से संबंधित कुल 14 महत्वपूर्ण बिंदुओं की विस्तार से समीक्षा की गई।

चारा, पानी और स्वास्थ्य सुविधाओं की जांच

निरीक्षण के दौरान उपलब्ध भूसा-दाना, हरा चारा, पशु आहार, पानी की व्यवस्था, पशुओं के स्वास्थ्य प्रबंधन, केयरटेकरों की संख्या, उनके मानदेय भुगतान, अधिकारियों द्वारा पूर्व निरीक्षण आख्या, पोर्टल पर ऑनलाइन फीडिंग तथा गौशाला भुगतान सहित अन्य व्यवस्थाओं की बारीकी से पड़ताल की गई।

50 से कम गौवंश वाली गौशालाओं को शिफ्ट करने के निर्देश

डॉ. जीवन लाल ने बताया कि शासन की मंशा के अनुसार 50 से कम गौवंश वाले अस्थाई गौ आश्रय स्थलों को बंद कर वहां के पशुओं को निकटतम बृहद गौ आश्रय स्थल पर स्थानांतरित किया जाएगा। इस क्रम में दूल्हा दरम्यानी, पिपरसन और बर्डपुर नंबर-3 में कम संख्या पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों को पत्राचार और आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए।

केयरटेकरों की समस्याएं सुनीं, त्वरित समाधान के निर्देश

निरीक्षण के दौरान नोडल अधिकारी ने केयरटेकरों से बातचीत कर उनकी समस्याएं भी जानीं। साथ ही संबंधित ग्राम सचिव से टेलीफोन पर वार्ता कर समस्याओं के शीघ्र समाधान के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

ये अधिकारी रहे मौजूद

नोडल अधिकारी के भ्रमण के दौरान उपमुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी नौगढ़ डॉ. राजबहादुर यादव, पशु चिकित्सा अधिकारी बर्डपुर डॉ. विनोद पांडे, पशुधन प्रसार अधिकारी अरुण कुमार प्रजापति तथा अमित यादव उपस्थित रहे।

Breaking News: यूपी में SIR की तारीख एक माह बढ़ी, अब 6 मार्च तक कर सकेंगे दावा-आपत्ति

उत्तर प्रदेश में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची में दावा और आपत्ति दर्ज कराने की समय-सीमा को एक माह के लिए बढ़ा दिया गया है। अब मतदाता 6 मार्च 2026 तक नाम जोड़ने, हटाने या संशोधन के लिए आवेदन कर सकेंगे।

प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) नवदीप रिणवा ने यह जानकारी देते हुए कहा कि बड़ी संख्या में फॉर्म-6 प्राप्त होने के कारण यह निर्णय लिया गया है।

अब 6 मार्च तक मिलेगा मतदाताओं को मौका

मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि

मतदाता सूची में नाम जुड़वाने, कटवाने और संशोधन के लिए अब 6 मार्च तक समय मिलेगा

नोटिसों का निराकरण 27 मार्च 2026 तक किया जाएगा

अंतिम मतदाता सूची 10 अप्रैल 2026 को प्रकाशित की जाएगी

हर बूथ पर रोज दो घंटे मौजूद रहेंगे बीएलओ

मतदाताओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए निर्वाचन आयोग ने निर्देश दिए हैं कि

बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) हर दिन

सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक

अपने-अपने पोलिंग स्टेशनों पर मौजूद रहेंगे

फॉर्म भरने में मतदाताओं की सहायता करेंगे और जरूरी प्रपत्र उपलब्ध कराएंगे

राज्यभर में 8,990 एईआरओ करेंगे सुनवाई

सीईओ नवदीप रिणवा ने बताया कि

पूरे प्रदेश में 8,990 सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (AERO)

दावे और आपत्तियों की सुनवाई करेंगे

आंकड़ों में SIR की स्थिति

मतदाता सूची से 2.89 करोड़ नाम हटाए गए

12.55 करोड़ मतदाताओं की ड्राफ्ट सूची जारी

प्रतिदिन 2.5 से 3 लाख लोग फॉर्म-6 भर रहे हैं

कुल 3.26 करोड़ मतदाताओं को नोटिस जारी होनी है

अब तक 2.37 करोड़ नोटिस जारी

86.27 लाख को नोटिस मिल चुकी

30.30 लाख मतदाताओं की सुनवाई पूरी

महिला और युवा मतदाता अभी भी पीछे

चुनाव आयोग के अनुसार

6 जनवरी तक 16.18 लाख लोगों ने फॉर्म-6 भरा

6 जनवरी से 4 फरवरी के बीच 37.80 लाख आवेदन

5 फरवरी को एक ही दिन में 3.51 लाख फॉर्म-6 जमा

अभी भी बड़ी संख्या में महिला और युवा मतदाता सूची से बाहर हैं

उन्हें शामिल करने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं

नोटिस पाने वाले सिर्फ 13% मतदाताओं की हो सकी सुनवाई

वर्ष 2003 की मतदाता सूची से मिलान न हो पाने वाले और तार्किक विसंगति वाले मतदाताओं को नोटिस भेजी जा रही है।

कुल 3.26 करोड़ मतदाताओं को नोटिस दी जानी है

अब तक केवल 13 प्रतिशत की ही सुनवाई हो सकी

अभी 1.53 करोड़ नोटिस जारी होना बाकी

इसी वजह से दावा-आपत्ति और सुनवाई की समय-सीमा बढ़ाई गई है।

चुनाव आयोग की अपील

चुनाव आयोग ने सभी पात्र नागरिकों से अपील की है कि वे तय समय-सीमा के भीतर अपने नाम की जांच कर लें और किसी भी त्रुटि की स्थिति में दावा-आपत्ति जरूर दर्ज कराएं, ताकि कोई भी योग्य मतदाता अंतिम सूची से वंचित न रहे।

सुप्रीम कोर्ट के नियमित करने और 17 हजार के फैसले से सिद्धार्थनगर के अनुदेशकों में खुशी की लहर..बांटी मिठाईयां

सिद्धार्थनगर। सुप्रीम कोर्ट द्वारा अनुदेशक शिक्षकों का मानदेय ₹17,000 प्रतिमाह किए जाने के ऐतिहासिक और न्यायपूर्ण निर्णय के बाद जनपद सिद्धार्थनगर में खुशी का माहौल है। वर्षों से चल रहे संघर्ष, धरना-प्रदर्शन और कानूनी लड़ाई के बाद आए इस फैसले को शिक्षकों ने अपने सम्मान और अधिकार की बड़ी जीत बताया है।

वर्षों के संघर्ष का मिला परिणाम

अनुदेशक शिक्षक लंबे समय से मानदेय बढ़ोतरी और सेवा सुरक्षा की मांग को लेकर आंदोलनरत थे। यह फैसला उनके धैर्य, एकजुटता और निरंतर संघर्ष की जीत माना जा रहा है। शिक्षकों का कहना है कि इस निर्णय से न सिर्फ आर्थिक स्थिति सुधरेगी बल्कि सामाजिक सम्मान भी बढ़ेगा।

जिला अध्यक्ष अनिल पांडेय ने जताया आभार

परिषदीय अनुदेशक कल्याण एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष अनिल पांडेय ने कहा कि:

“यह फैसला अनुदेशक शिक्षकों की एकजुटता और संघर्ष का परिणाम है। माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने शिक्षा से जुड़े हजारों परिवारों को बड़ी राहत दी है।”

उन्होंने न्यायपालिका के प्रति आभार व्यक्त किया।

मानदेय वृद्धि सम्मान की जीत:मीडिया प्रभारी

जिला मीडिया प्रभारी सत्यपाल सिंह कौशिक ने कहाकि,

“यह सिर्फ मानदेय बढ़ोतरी नहीं बल्कि सम्मान और सामाजिक सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम है। यह फैसला अनुदेशक शिक्षकों के भविष्य को सुरक्षित करेगा और शिक्षा व्यवस्था को भी मजबूत करेगा।”

पदाधिकारियों ने जताई खुशी

महामंत्री रामानंद उपाध्याय और मधुकर मंजुल ने भी फैसले पर खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि यह निर्णय हजारों परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएगा।

मिठाई बांटकर मनाई खुशी

इस अवसर पर अनुपम कुंवर, सौम्य सोनकर, रविकांत, बुद्धिराम, विष्णु, दिलीप साहनी, संतोष सिंह, पप्पू सिंह, सत्य मृत्युंजयधर द्विवेदी, अजीजुररहमान सहित कई अनुदेशक शिक्षकों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशी साझा की।

शिक्षा व्यवस्था को मिलेगा मजबूती

विशेषज्ञों का मानना है कि मानदेय वृद्धि से शिक्षकों का मनोबल बढ़ेगा, जिससे प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा और ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था को स्थिरता मिलेगी।

मैनपुरी: महिला के ‘पत्थर बनने’ की अफवाह से मचा हड़कंप, प्रशासन ने दी जानकारी 

मैनपुरी, उत्तर प्रदेश।जनपद मैनपुरी के कुरावली थाना क्षेत्र में शनिवार 01 फरवरी 2026 को एक अजीब और चौंकाने वाली अफवाह ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी। गिहार कॉलोनी के पीछे स्थित मोहल्ला फर्दखाना में खेतों के बीच बने एक मकान में महिला के पत्थर में तब्दील हो जाने की सूचना फैलते ही बड़ी संख्या में लोग मौके पर जमा हो गए।

सूचना मिलते ही क्षेत्र में भारी भीड़ उमड़ पड़ी और स्थिति तनावपूर्ण हो गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और राजस्व विभाग की टीम मौके पर पहुंची और भीड़ को नियंत्रित किया।

क्या है पूरा मामला

स्थानीय व्यक्ति द्वारा दावा किया गया कि उसकी पत्नी अचानक पत्थर की तरह हो गई है। इस दावे के आधार पर आसपास के गांवों से भी लोग मौके पर पहुंच गए। हालांकि, प्रशासनिक जांच में महिला के पत्थर बनने जैसी किसी भी बात की पुष्टि नहीं हुई।

प्रशासन और पुलिस का पक्ष

मौके पर पहुंचे अधिकारियों ने जांच के बाद स्पष्ट किया कि यह मामला पूरी तरह अफवाह और भ्रम पर आधारित है।

पुलिस के अनुसार,

महिला के पत्थर बनने का कोई वैज्ञानिक या वास्तविक प्रमाण नहीं मिला

मकान में मौजूद कुछ मूर्तियों और वस्तुओं को देखकर गलतफहमी फैलाई गई

महिला जीवित है और किसी अलौकिक घटना की पुष्टि नहीं हुई

प्रशासन ने लोगों से अंधविश्वास और भ्रामक सूचनाओं से दूर रहने की अपील की है।

स्थिति सामान्य

अधिकारियों की समझाइश के बाद भीड़ धीरे-धीरे हट गई और स्थिति सामान्य हो गई। पुलिस द्वारा मामले पर नजर रखी जा रही है ताकि भविष्य में किसी तरह की अफवाह फैलाकर माहौल खराब न किया जा सके।

 

सुप्रीम कोर्ट में अनुदेशकों की जीत पर खुशी की लहर..प्रदेश अध्यक्ष विक्रम सिंह ने कहा कि…

सुप्रीम कोर्ट द्वारा अनुदेशक शिक्षकों का मानदेय ₹17,000 प्रतिमाह किए जाने के न्यायपूर्ण और ऐतिहासिक निर्णय के बाद प्रदेश भर के अनुदेशक शिक्षकों में खुशी की लहर दौड़ गई। वर्षों से चल रहे संघर्ष, धरना-प्रदर्शन और कानूनी लड़ाई के बाद आए इस फैसले को शिक्षकों ने अपने सम्मान और अधिकार की जीत बताया है।

वर्षों के संघर्ष का मिला परिणाम: विक्रम सिंह 

परिषदीय अनुदेशक कल्याण एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष विक्रम सिंह ने कहा कि, “यह फैसला अनुदेशक शिक्षकों के धैर्य, एकजुटता और निरंतर संघर्ष का परिणाम है। उन्होंने माननीय सर्वोच्च न्यायालय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि न्यायपालिका ने शिक्षा से जुड़े हजारों परिवारों को राहत दी है।”

सामाजिक सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम

विक्रम सिंह ने कहा कि, “यह सिर्फ मानदेय वृद्धि नहीं बल्कि सम्मान और सामाजिक सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम है।” 

“यह निर्णय अनुदेशक शिक्षकों के भविष्य को सुरक्षित करने वाला है और इससे शिक्षा व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।”

बेसिक शिक्षा विभाग में भी खुशी का माहौल

प्रदेश के कई जनपदों के बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों और अनुदेशक शिक्षकों ने भी मिठाई बांटकर खुशी जाहिर की। विद्यालयों में इस फैसले को लेकर उत्साह का माहौल देखने को मिला।

108 एंबुलेंस सेवा ने बचाई फिर से एक व्यक्ति की जान

सिद्धार्थनगर। जिले के ब्लॉक लोटन के विलोहा क्षेत्र में 108 एंबुलेंस सेवा की तत्परता से एक व्यक्ति तीर्थराम उम्र 77 वर्ष की जान बचाई गई। जानकारी के अनुसार, क्षेत्र के एक व्यक्ति तीर्थराम को अचानक सांस लेने में अत्यधिक दिक्कत होने लगी, जिससे उसकी हालत गंभीर हो गई।

108 पर मांगी सहायता

मरीज की बिगड़ती स्थिति को देखते हुए परिजनों ने तुरंत 108 एंबुलेंस सेवा पर कॉल कर सहायता मांगी। सूचना मिलते ही 108 एंबुलेंस समय पर मौके पर पहुंची और मरीज को एंबुलेंस में शिफ्ट किया गया।

अस्पताल पहुंचाया

एंबुलेंस में मौजूद मेडिकल टेक्नीशियन (एमटी) प्रदीप कुमार और पायलट दुर्गेश ने मरीज की स्थिति को देखते हुए तुरंत ऑक्सीजन की सुविधा उपलब्ध कराई और लगातार देखरेख करते हुए उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) लोटन अस्पताल पहुंचाया।

लोगों ने की सराहना

समय पर मिली चिकित्सा सहायता के कारण मरीज की हालत में सुधार हुआ और फिलहाल वह स्वस्थ बताया जा रहा है। स्थानीय लोगों ने 108 एंबुलेंस सेवा की त्वरित कार्रवाई और कर्मचारियों की सराहना की है।

सिद्धार्थनगर में यूजीसी को लेकर सवर्ण समाज व क्षत्रिय महासभा का व्यापक प्रदर्शन

सिद्धार्थनगर। जनपद में यूजीसी (UGC) से जुड़े मुद्दों को लेकर सवर्ण समाज, क्षत्रिय महासभा, विश्व हिंदू महासंघ, अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा व न्याय एक संकल्प संस्थान के बैनर तले व्यापक प्रदर्शन देखने को मिला। बड़ी संख्या में लोगों ने एकजुट होकर बीएसए ग्राउंड से रैली निकालते हुए शहर के प्रमुख मार्गों से मार्च किया और कलेक्ट्रेट पहुंचकर अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा।

यूजीसी एक्ट वापस लो के लगे नारे

इस दौरान “यूजीसी एक्ट वापस लो”, “समान शिक्षा-सामान अधिकार” और सवर्ण समाज का उत्पीड़न बंद करो” जैसे नारे लगते रहे। भारी भीड़ जुटी रही और अपनी आवाज बुलंद करती रही।

रास्ते भर प्रदर्शनकारी संगठनों के पदाधिकारी और सदस्य हाथों में तख्तियां व बैनर लिए नजर आए। रैली के दौरान शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात प्रशासन तक पहुंचाने पर जोर दिया गया।

राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री के नाम सौंपा गया ज्ञापन

कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन प्रशासन को सौंपा। जिलाधिकारी की ओर से उपजिलाधिकारी शशांक शेखर राय ने ज्ञापन प्राप्त किया।

प्रदर्शनकारियों ने कहां की, “यूजीसी (UGC) एक्ट-2026 में प्रतावित नियम से सवर्ण समाज का उत्पीड़न होगा और सवर्ण समाज के बच्चों का भविष्य अंधकारमय हो जाएगा। उन्होंने कहा कि, यह एक्ट संविधान में निहित समानता के अधिकार का हनन करता है। इस एक्ट द्वारा समाज में वैमनस्यता बढ़ेगा।”

सवर्ण समाज को शिक्षा से वंचित रखने की साजिश

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि, “सर्वण समाज ने आजादी से लेकर राष्ट्र निर्माण तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। लेकिन अब इसी समाज को शिक्षा से वंचित करने की साजिश की जा रही है। सवर्ण समाज यह कत्तई बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने सरकार से आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग की।”

एक्ट वापस नहीं तो होगा उग्र आंदोलन

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि, “यदि सरकार इस दमनकारी एक्ट को वापस नहीं लेती है तो सवर्ण समाज इससे भी बड़ा आंदोलन पूरे देश में करेगा।”

इस दौरान बार एसोसिएशन अध्यक्ष व क्षत्रिय महासभा व विश्व हिंदू महासंघ के प्रदेश उपाध्यक्ष अखंड प्रताप सिंह, कृष्णपाल सिंह, हरेंद्र सिंह, भूप नारायण सिंह, सुधीर पांडेय उर्फ फरसा बाबा, रामकृष्ण पांडेय व बड़ी संख्या में सवर्ण समाज से जुड़े लोग उपस्थित रहे।

लव ट्रायंगल बना मौत की वजह: मुंबई की प्रिया शेट्टी की गोरखपुर में बेरहमी से हत्या

GorakhpurNews: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले से एक खौफनाक और सनसनीखेज लव ट्रायंगल मर्डर केस सामने आया है, जिसने रिश्तों की सच्चाई और विश्वास पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

यह मामला न सिर्फ क्राइम की दुनिया को झकझोर देने वाला है, बल्कि यह दिखाता है कि जब लालच, डर और झूठ मिल जाते हैं, तो इंसान किस हद तक गिर सकता है।

30 जनवरी की सुबह गोरखपुर के पीपीगंज थाना क्षेत्र में एक अज्ञात महिला का शव मिलने से इलाके में हड़कंप मच गया था।

महिला की हालत इतनी भयावह थी कि पहचान करना लगभग नामुमकिन हो गया था।

पुलिस के लिए यह मामला पूरी तरह से ब्लाइंड केस बन चुका था।

शिनाख्त बनी सबसे बड़ी चुनौती

पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा और साथ ही महिला की पहचान के लिए जांच शुरू की।

घटनास्थल और आसपास के इलाकों में लगे सैकड़ों सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई।

लगातार तकनीकी और मैनुअल जांच के बाद पुलिस इस नतीजे पर पहुंची कि हत्या सुनियोजित तरीके से की गई है।

जांच में खुलासा हुआ कि मृतका की पहचान मुंबई निवासी 35 वर्षीय प्रिया शेट्टी के रूप में हुई।

लिव-इन रिलेशन से शुरू हुई कहानी, हत्या पर खत्म

पुलिस जांच के अनुसार, प्रिया शेट्टी की मुलाकात मुंबई में एक प्राइवेट कंपनी में काम करने वाले विजय कुमार साहनी से हुई थी।

दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और वे लिव-इन रिलेशनशिप में रहने लगे।

इसी दौरान दोनों का एक बेटा भी हुआ, जिसकी उम्र लगभग 13–14 साल बताई जा रही है।

हालांकि समय के साथ विजय और प्रिया के रिश्ते में तनाव बढ़ने लगा।

इसी बीच विजय ने गोरखपुर में परिवार की मर्जी से दूसरी शादी कर ली।

शादी का दबाव और साज़िश की शुरुआत

पुलिस के मुताबिक, प्रिया शेट्टी विजय पर शादी का दबाव बना रही थी।

यह दबाव धीरे-धीरे विजय के लिए परेशानी का सबब बन गया।

इसी से छुटकारा पाने के लिए आरोपी ने अपनी पत्नी संध्या और ससुर रामविलास साहनी के साथ मिलकर एक खतरनाक साज़िश रची।

26 जनवरी को आरोपी विजय, उसकी पत्नी और प्रिया शेट्टी गोरखपुर पहुंचे।

इसके बाद 29 जनवरी की रात यह साज़िश अपने खौफनाक अंजाम तक पहुंच गई।

हत्या के बाद पहचान छिपाने की कोशिश

जांच में सामने आया कि हत्या के बाद

शव की पहचान छिपाने के लिए

जानबूझकर चेहरा क्षत-विक्षत किया गया और

शरीर से कपड़े हटाकर शव को सुनसान जगह पर फेंक दिया गया।

लेकिन अपराधी चाहे कितनी भी चालाकी कर लें,

कानून की नजर से बच नहीं सकते।

तीन दिन में खुलासा, तीनों आरोपी गिरफ्तार

गोरखपुर पुलिस ने तकनीकी साक्ष्य, सीसीटीवी फुटेज और ऑटो चालक की अहम जानकारी के आधार पर

पूरे मामले का खुलासा किया।

मुख्य आरोपी

✔️ विजय कुमार साहनी

✔️ उसकी पत्नी संध्या साहनी

✔️ ससुर रामविलास साहनी

तीनों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है।

पुलिस का बयान

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि यह मामला शुरू में पूरी तरह से ब्लाइंड था,

लेकिन टीमवर्क, तकनीकी जांच और स्थानीय इनपुट की मदद से

सच्चाई सामने लाई गई।

यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि

गलत रिश्ते, झूठे वादे और स्वार्थ

किसी की जिंदगी को कितनी बेरहमी से खत्म कर सकते हैं।

 

भारत के बाहर जन्मे नागरिकों के लिए मतदाता पंजीकरण में नई व्यवस्था लागू..भारत-नेपाल में खुशी की लहर

भारत के बाहर जन्मे नागरिकों को वोटर लिस्ट में नाम दर्ज कराने संबंधी पुरानी समस्या का समाधान किया गया है, जिससे भारत और नेपाल दोनों में खुशी का माहौल है।

समस्या का समाधान: अब बाहर जन्मे भारतीय भी कर सकते हैं नामांकन 

पिछले समय में भारत के बाहर जन्मे भारतीय नागरिक फॉर्म-6 या फॉर्म-6A के माध्यम से मतदाता के रूप में आवेदन नहीं कर पा रहे थे। इसका कारण यह था कि सिस्टम में ‘भारत के बाहर’ जन्म स्थान दर्ज करने का कोई विकल्प उपलब्ध नहीं था।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तर प्रदेश के निर्देशों के अनुसार, अब यह समस्या पूरी तरह से हल कर दी गई है।

 नई तकनीकी व्यवस्था: ‘Outside India’ विकल्प उपलब्ध

निर्वाचन आयोग ने तकनीकी कठिनाई को दूर करते हुए एक ऑफलाइन व्यवस्था लागू की है। अब:

ईआरओ-नेट और बीएलओ ऐप के डेटा एंट्री मॉड्यूल में

जन्म स्थान के रूप में ‘Outside India’ चुनने का विकल्प है।

साथ में देश का नाम दर्ज करने के लिए Text Box भी उपलब्ध है।

इससे अब भारत के बाहर जन्मे भारतीय पात्र नागरिक अपने वोटर रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन कर सकते हैं।

आवेदन कैसे करें: फॉर्म-6 / फॉर्म-6A भरें और जमा करें 

नई व्यवस्था के तहत:

आवेदनकर्ता फॉर्म-6 या फॉर्म-6A को भौतिक रूप में भरें।

उसे अपने निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी / बूथ लेवल अधिकारी के पास जमा कराएँ।

इससे अब विदेश में जन्मे पात्र नागरिक भी अपने मताधिकार का पूरा लाभ उठा सकेंगे।

भारत-नेपाल में खुशी का माहौल

इस नई व्यवस्था की घोषणा से भारत में तो लोग ख़ुश हैं ही, साथ ही नेपाल में बहुएं और वधू पक्ष के लोग भी इसे स्वागत योग्य बता रहे हैं।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी के निर्देश 

मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तर प्रदेश ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे:

इस व्यवस्था का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करें।

व्यापक प्रचार-प्रसार भी करें, ताकि अधिक से अधिक पात्र नागरिक इसका लाभ उठाएँ।

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