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अंतरराष्ट्रीय ताइक्वांडो में सिद्धार्थनगर का परचम, तीन खिलाड़ियों का सम्मान

सिद्धार्थनगर। अंतरराष्ट्रीय ताइक्वांडो प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन कर सिद्धार्थनगर का नाम रोशन करने वाले तीन खिलाड़ियों को लखनऊ में सम्मानित किया गया। खिलाड़ियों की उपलब्धि से जिले के खेल प्रेमियों और उनके परिवारों में उत्साह का माहौल है।

उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, थाईलैंड के पटाया में आयोजित हीरोज अंतरराष्ट्रीय ताइक्वांडो चैंपियनशिप-2026 में सिद्धार्थनगर के खिलाड़ियों ने भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए उल्लेखनीय प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता में समर वर्मा ने स्वर्ण पदक, जबकि देवम पासवान और दिलीप कुमार पासवान ने रजत पदक हासिल किया।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली इस उपलब्धि के बाद खिलाड़ियों को लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में सम्मानित किया गया। इस दौरान सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने खिलाड़ियों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।

शिखर पर सिद्धार्थनगर की खेल प्रतिभा

तीन खिलाड़ियों की यह उपलब्धि जिले के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में पदक हासिल करना खिलाड़ियों की मेहनत, प्रशिक्षण और निरंतर अभ्यास का परिणाम है। खासकर युवा खिलाड़ियों के प्रदर्शन ने जिले की नई खेल प्रतिभाओं के लिए उम्मीद और प्रेरणा का संदेश दिया है।

खेल क्षेत्र से जुड़े लोगों का मानना है कि यदि स्थानीय प्रतिभाओं को बेहतर प्रशिक्षण, आधुनिक सुविधाएं और निरंतर प्रतियोगिताओं में भाग लेने के अवसर मिलें तो सिद्धार्थनगर से भविष्य में और भी खिलाड़ी राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना सकते हैं।


पदकों पर एक नजर

🥇 समर वर्मा — स्वर्ण पदक

🥈 देवम पासवान — रजत पदक

🥈 दिलीप कुमार पासवान — रजत पदक

प्रतियोगिता: हीरोज अंतरराष्ट्रीय ताइक्वांडो चैंपियनशिप-2026

स्थान: पटाया, थाईलैंड

सारांश

अंतरराष्ट्रीय ताइक्वांडो प्रतियोगिता में सिद्धार्थनगर के तीन खिलाड़ियों ने एक स्वर्ण और दो रजत पदक हासिल कर जिले का गौरव बढ़ाया। लखनऊ में सम्मानित किए जाने के बाद इन खिलाड़ियों की उपलब्धि स्थानीय खेल जगत में चर्चा का विषय बनी हुई है।

टिप्पणी

प्रतिभा जब मेहनत से मिलती है तो मंच छोटा नहीं रहता। सिद्धार्थनगर के इन खिलाड़ियों की अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि जिले की युवा खेल प्रतिभाओं के लिए प्रेरणा है। जरूरत अब इस बात की है कि ऐसी प्रतिभाओं को बेहतर प्रशिक्षण और पर्याप्त खेल सुविधाएं लगातार मिलती रहें।

 

अंतरराष्ट्रीय ताइक्वांडो में सिद्धार्थनगर का परचम, तीन खिलाड़ियों का सम्मान

सिद्धार्थनगर। अंतरराष्ट्रीय ताइक्वांडो प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन कर सिद्धार्थनगर का नाम रोशन करने वाले तीन खिलाड़ियों को लखनऊ में सम्मानित किया गया। खिलाड़ियों की उपलब्धि से जिले के खेल प्रेमियों और उनके परिवारों में उत्साह का माहौल है।

उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, थाईलैंड के पटाया में आयोजित हीरोज अंतरराष्ट्रीय ताइक्वांडो चैंपियनशिप-2026 में सिद्धार्थनगर के खिलाड़ियों ने भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए उल्लेखनीय प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता में समर वर्मा ने स्वर्ण पदक, जबकि देवम पासवान और दिलीप कुमार पासवान ने रजत पदक हासिल किया।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली इस उपलब्धि के बाद खिलाड़ियों को लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में सम्मानित किया गया। इस दौरान सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने खिलाड़ियों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।

शिखर पर सिद्धार्थनगर की खेल प्रतिभा

तीन खिलाड़ियों की यह उपलब्धि जिले के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में पदक हासिल करना खिलाड़ियों की मेहनत, प्रशिक्षण और निरंतर अभ्यास का परिणाम है। खासकर युवा खिलाड़ियों के प्रदर्शन ने जिले की नई खेल प्रतिभाओं के लिए उम्मीद और प्रेरणा का संदेश दिया है।

खेल क्षेत्र से जुड़े लोगों का मानना है कि यदि स्थानीय प्रतिभाओं को बेहतर प्रशिक्षण, आधुनिक सुविधाएं और निरंतर प्रतियोगिताओं में भाग लेने के अवसर मिलें तो सिद्धार्थनगर से भविष्य में और भी खिलाड़ी राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना सकते हैं।


पदकों पर एक नजर

🥇 समर वर्मा — स्वर्ण पदक

🥈 देवम पासवान — रजत पदक

🥈 दिलीप कुमार पासवान — रजत पदक

प्रतियोगिता: हीरोज अंतरराष्ट्रीय ताइक्वांडो चैंपियनशिप-2026

स्थान: पटाया, थाईलैंड

सारांश

अंतरराष्ट्रीय ताइक्वांडो प्रतियोगिता में सिद्धार्थनगर के तीन खिलाड़ियों ने एक स्वर्ण और दो रजत पदक हासिल कर जिले का गौरव बढ़ाया। लखनऊ में सम्मानित किए जाने के बाद इन खिलाड़ियों की उपलब्धि स्थानीय खेल जगत में चर्चा का विषय बनी हुई है।

टिप्पणी

प्रतिभा जब मेहनत से मिलती है तो मंच छोटा नहीं रहता। सिद्धार्थनगर के इन खिलाड़ियों की अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि जिले की युवा खेल प्रतिभाओं के लिए प्रेरणा है। जरूरत अब इस बात की है कि ऐसी प्रतिभाओं को बेहतर प्रशिक्षण और पर्याप्त खेल सुविधाएं लगातार मिलती रहें।

 

दिव्यांगजनों की तिरंगा यात्रा ने दिया एकता और देशभक्ति का संदेश

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सिद्धार्थनगर में दिव्यांगजनों की तिरंगा यात्रा ने देशभक्ति, राष्ट्रीय एकता और सामाजिक समरसता का संदेश दिया। पेट्रोल पंप तिराहा से निकली यात्रा को भाजपा जिलाध्यक्ष दीपक मौर्य ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। हाथों में तिरंगा लेकर शामिल हुए दिव्यांगजनों के उत्साह से यात्रा का माहौल देशभक्तिमय नजर आया।

खबर

सिद्धार्थनगर। दिव्यांग सेवा संस्थान ट्रस्ट, सिद्धार्थनगर के तत्वावधान में पेट्रोल पंप तिराहा पर तिरंगा यात्रा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि भाजपा जिलाध्यक्ष दीपक मौर्य ने तिरंगा यात्रा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

इस दौरान दीपक मौर्य ने कहा कि तिरंगा देश की आन, बान और शान का प्रतीक है। उनके अनुसार तिरंगा यात्रा के माध्यम से राष्ट्रीय एकता, अखंडता, देशभक्ति और सामाजिक समरसता का संदेश लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया।

यात्रा में दिव्यांगजनों ने उत्साह के साथ भाग लिया और हाथों में तिरंगा लेकर देशभक्ति का संदेश दिया। यात्रा के दौरान ‘भारत माता की जय’ और ‘वंदे मातरम्’ के उद्घोष से वातावरण देशभक्तिमय बना रहा।

कार्यक्रम में जिला मीडिया प्रभारी रमेश मणि त्रिपाठी, जिला कार्यालय मंत्री पंकज जायसवाल, अनुराग श्रीवास्तव सहित दिव्यांग सेवा संस्थान ट्रस्ट के पदाधिकारी, कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में दिव्यांगजन मौजूद रहे।


| तिरंगे के साथ दिखा उत्साह

तिरंगा यात्रा में दिव्यांगजनों की सहभागिता कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रही। आयोजकों के अनुसार यात्रा का उद्देश्य देशभक्ति की भावना के साथ समाज में एकता, भाईचारे और सामाजिक समरसता का संदेश देना रहा।


कार्यक्रम की खास बातें

पेट्रोल पंप तिराहा से तिरंगा यात्रा रवाना

भाजपा जिलाध्यक्ष दीपक मौर्य ने दिखाई हरी झंडी

दिव्यांगजनों ने उत्साहपूर्वक किया प्रतिभाग

भारत माता की जय और वंदे मातरम् के उद्घोष

राष्ट्रीय एकता और सामाजिक समरसता का संदेश

सारांश

सिद्धार्थनगर में दिव्यांग सेवा संस्थान ट्रस्ट की ओर से आयोजित तिरंगा यात्रा में बड़ी संख्या में दिव्यांगजनों ने भाग लेकर देशभक्ति का संदेश दिया। भाजपा जिलाध्यक्ष दीपक मौर्य ने यात्रा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

हमारी बात

तिरंगा केवल राष्ट्रीय ध्वज नहीं, बल्कि देश की एकता और नागरिकों की साझा पहचान का प्रतीक है। दिव्यांगजनों की इस यात्रा में जिस उत्साह के साथ सहभागिता दिखाई दी, वह समाज में समान भागीदारी और सकारात्मक संदेश का उदाहरण है। ऐसे आयोजनों की सार्थकता तभी और बढ़ती है, जब देशभक्ति के साथ समाज के प्रत्येक वर्ग को सम्मान और बराबरी का अवसर मिले।

 

ककरहवा सीमा पर 27 बोरी यूरिया बरामद, संयुक्त नाका पार्टी की कार्रवाई

 

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सिद्धार्थनगर में भारत-नेपाल सीमा पर 43वीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल (SSB) और उत्तर प्रदेश पुलिस की संयुक्त नाका पार्टी ने कार्रवाई करते हुए 27 बोरी यूरिया खाद बरामद की। SSB के अनुसार खाद एक इलेक्ट्रिक ऑटो से अनधिकृत रास्ते के जरिए भारत से नेपाल की ओर ले जाई जा रही थी। वाहन में सवार दो व्यक्तियों को पूछताछ के बाद खाद और वाहन समेत आगे की वैधानिक कार्रवाई के लिए पुलिस को सौंपा गया।


सिद्धार्थनगर, 19 अगस्त 2026। भारत-नेपाल सीमा पर अवैध आवागमन और संदिग्ध तस्करी गतिविधियों पर निगरानी के दौरान 43वीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल की सीमा चौकी ककरहवा तथा उत्तर प्रदेश पुलिस की संयुक्त नाका पार्टी ने एक इलेक्ट्रिक ऑटो को रोककर जांच की। विभागीय जानकारी के मुताबिक ऑटो से 27 बोरी यूरिया खाद बरामद हुई।

सीमा से करीब 50 मीटर पहले रोका गया ऑटो

SSB की ओर से जारी जानकारी के अनुसार विशेष आसूचना के आधार पर संयुक्त नाका पार्टी सीमा स्तंभ संख्या 544/1 से करीब 400 मीटर तथा अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगभग 50 मीटर अंदर तैनात थी। इसी दौरान एक इलेक्ट्रिक ऑटो अनधिकृत रास्ते से भारत से नेपाल की ओर जाता दिखाई दिया।

नाका पार्टी ने वाहन को रोककर जांच की। जांच के दौरान वाहन में दो व्यक्ति सवार मिले और उसमें 27 बोरी यूरिया खाद बरामद होने की जानकारी दी गई।

दस्तावेज नहीं मिलने पर पुलिस को सौंपा

SSB के अनुसार खाद के संबंध में पूछताछ किए जाने पर मौके पर कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया। इसके बाद 27 बोरी यूरिया खाद और इलेक्ट्रिक ऑटो समेत दोनों व्यक्तियों को अग्रिम कार्रवाई के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस, थाना/पुलिस चौकी मोहाना को सुपुर्द कर दिया गया।

इनसेट | पकड़े गए व्यक्तियों के बारे में

SSB के अनुसार पूछताछ में एक व्यक्ति ने अपना नाम जितेंद्र गुप्ता, उम्र 38 वर्ष, निवासी फरसादीपुर, थाना मोहाना, सिद्धार्थनगर बताया। दूसरे व्यक्ति की उम्र 17 वर्ष बताई गई है और वह भी फरसादीपुर, थाना मोहाना क्षेत्र का निवासी बताया गया।

कानूनी सावधानी: 17 वर्षीय व्यक्ति को लेकर खबर में उसे आरोपी या दोषी के रूप में घोषित नहीं किया गया है। उसके संबंध में आगे की कार्रवाई संबंधित पुलिस एवं सक्षम प्राधिकारी द्वारा लागू कानून और प्रक्रिया के अनुसार की जानी है।


कार्रवाई में क्या मिला?

27 बोरी यूरिया खाद

01 इलेक्ट्रिक ऑटो

02 व्यक्ति

कार्रवाई ककरहवा सीमा चौकी और यूपी पुलिस की संयुक्त नाका पार्टी ने की

बरामद सामग्री एवं वाहन पुलिस को आगे की कार्रवाई के लिए सौंपे गए

सीमा पर निगरानी जारी

43वीं वाहिनी SSB के अनुसार भारत-नेपाल सीमा पर अवैध तस्करी, मानव तस्करी, नशीली दवाओं, अवैध मुद्रा, वन्यजीव तथा अन्य अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए लगातार निगरानी और कार्रवाई की जा रही है।

सारांश

ककरहवा सीमा क्षेत्र में SSB और उत्तर प्रदेश पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में 27 बोरी यूरिया खाद और एक इलेक्ट्रिक ऑटो बरामद किया गया। विभागीय जानकारी के मुताबिक खाद के संबंध में वैध दस्तावेज नहीं मिले, जिसके बाद दो व्यक्तियों समेत बरामद सामग्री को मोहाना पुलिस के सुपुर्द किया गया।

टिप्पणी

भारत-नेपाल सीमा पर अनधिकृत रास्तों से होने वाली आवाजाही पर निगरानी सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस मामले में बरामदगी के बाद आगे की वास्तविक स्थिति पुलिस की जांच और वैधानिक प्रक्रिया से स्पष्ट होगी। इसलिए जांच पूरी होने से पहले किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा।

कानूनी रूप से सुरक्षित नोट

यह खबर 43वीं वाहिनी SSB द्वारा उपलब्ध कराई गई सूचना के आधार पर तैयार की गई है। बरामदगी और दस्तावेज उपलब्ध न होने संबंधी तथ्य विभागीय दावे पर आधारित हैं। संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध आरोप या दोष सिद्धि का अंतिम निर्धारण सक्षम प्राधिकारी/न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है।

 

भारत-नेपाल सीमा पर SSB की कार्रवाई, 56 बोरी यूरिया के साथ दो व्यक्ति और दो वाहन पकड़े गए

 

 

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सिद्धार्थनगर में भारत-नेपाल सीमा पर 43वीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल (SSB) की नाका पार्टी ने विशेष आसूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए 56 बोरी यूरिया खाद बरामद की है। SSB के अनुसार खाद को बिना वैध दस्तावेज के दो वाहनों के जरिए भारत से नेपाल ले जाया जा रहा था। मौके से दो व्यक्तियों को एक बोलेरो पिकअप और एक टेम्पो समेत पकड़ा गया, जिन्हें अग्रिम कार्रवाई के लिए शोहरतगढ़ पुलिस को सुपुर्द किया गया।

 

इंट्रो

 

सिद्धार्थनगर, 19 अगस्त 2026। भारत-नेपाल सीमा पर अवैध आवागमन और तस्करी के खिलाफ 43वीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल की कार्रवाई लगातार जारी है। इसी क्रम में सीमा चौकी बाणगंगा की विशेष नाका ड्यूटी के दौरान SSB टीम ने 56 बोरी यूरिया खाद के साथ दो वाहनों को रोककर जांच की। विभागीय जानकारी के मुताबिक दोनों वाहन अनधिकृत रास्ते से भारत से नेपाल की ओर जाते पाए गए।

सीमा पर नाका, दो वाहनों को रोका

SSB के अनुसार विशेष आसूचना के आधार पर सीमा स्तंभ संख्या 557 से करीब 900 मीटर तथा अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगभग 900 मीटर अंदर विशेष नाका पार्टी तैनात थी। इसी दौरान एक बोलेरो पिकअप और एक टेम्पो नेपाल की ओर जाते दिखाई दिए।

नाका पार्टी ने दोनों वाहनों को रोककर जांच की। जांच के दौरान वाहनों में एक-एक चालक सवार मिला और कुल 56 बोरी यूरिया खाद बरामद होने की बात सामने आई।

दस्तावेज नहीं मिलने पर पुलिस को सुपुर्द

SSB की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार खाद के संबंध में पूछताछ किए जाने पर संबंधित व्यक्ति मौके पर कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके। इसके बाद 56 बोरी यूरिया खाद, बोलेरो पिकअप, टेम्पो और दोनों व्यक्तियों को अग्रिम कानूनी कार्रवाई के लिए थाना शोहरतगढ़ पुलिस को सुपुर्द कर दिया गया।


पकड़े गए व्यक्तियों की पहचान

 

SSB के अनुसार पूछताछ में दोनों व्यक्तियों ने अपने नाम जंग बहादुर (25) और कैलाश (34) बताया। दोनों सिद्धार्थनगर जिले के शोहरतगढ़ थाना क्षेत्र के डोहरिया खुर्द गांव के निवासी बताए गए हैं।

नोट: दोनों व्यक्तियों के संबंध में आगे की वैधानिक कार्रवाई संबंधित पुलिस/प्राधिकरण द्वारा की जानी है। खबर में उन्हें किसी अपराध का दोषी घोषित नहीं किया जा रहा है।


 क्या-क्या बरामद हुआ?

– 56 बोरी यूरिया खाद

– 01 बोलेरो पिकअप

– 01 टेम्पो

– 02 व्यक्ति हिरासत/पुलिस सुपुर्द

– बरामद सामग्री एवं वाहन आगे की कार्रवाई के लिए पुलिस को सौंपे गए

सीमा पर निगरानी बढ़ाने का संकेत

43वीं वाहिनी SSB के अनुसार भारत-नेपाल सीमा पर अवैध तस्करी, मानव तस्करी, नशीली दवाओं, अवैध मुद्रा, वन्यजीव एवं अन्य प्रतिबंधित/अवैध सामग्री के आवागमन को रोकने के लिए लगातार निगरानी और कार्रवाई की जा रही है।

सारांश

बाणगंगा सीमा चौकी की नाका पार्टी ने विशेष सूचना के आधार पर दो वाहनों की जांच कर 56 बोरी यूरिया खाद बरामद की। SSB के मुताबिक खाद के संबंध में वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए, जिसके बाद दो व्यक्तियों, खाद और दोनों वाहनों को थाना शोहरतगढ़ पुलिस को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए सौंप दिया गया।

टिप्पणी

भारत-नेपाल सीमा पर खाद समेत विभिन्न वस्तुओं की अनधिकृत आवाजाही रोकना सुरक्षा और सीमा प्रबंधन की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। इस मामले में बरामदगी और वाहनों को पुलिस को सौंपे जाने के बाद आगे की वास्तविक स्थिति जांच एवं वैधानिक प्रक्रिया पूरी होने पर ही स्पष्ट होगी।

कानूनी रूप से सुरक्षित डिस्क्लेमर

यह खबर 43वीं वाहिनी SSB द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के आधार पर तैयार की गई है। संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध आरोपों की अंतिम पुष्टि सक्षम जांच एवं न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही मानी जाएगी।

 

 

संगठन सृजन अभियान से कांग्रेस को बूथ स्तर तक मजबूत करने की कवायद

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सिद्धार्थनगर में कांग्रेस ने संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने की रणनीति तेज कर दी है। संगठन सृजन अभियान के तहत जिले के लिए नियुक्त एआईसीसी ऑब्जर्वर अमित विज ने पत्रकार वार्ता में कहा कि अभियान के जरिए कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद, नए कार्यकर्ताओं को जोड़ने और संगठनात्मक ढांचे को जमीनी स्तर तक सक्रिय करने पर जोर दिया जाएगा।


सिद्धार्थनगर, 18 अगस्त 2026। उत्तर प्रदेश में कांग्रेस संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के उद्देश्य से चलाए जा रहे संगठन सृजन अभियान के तहत सिद्धार्थनगर पहुंचे अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के ऑब्जर्वर और पंजाब के पठानकोट से पूर्व विधायक अमित विज ने जिला कांग्रेस कार्यालय पर पत्रकार वार्ता की। उन्होंने अभियान के उद्देश्य, संगठनात्मक गतिविधियों और आगे की कार्ययोजना को लेकर पार्टी की ओर से जानकारी साझा की।

बूथ तक संगठन मजबूत करने पर जोर

अमित विज ने कहा कि संगठन सृजन अभियान के तहत कांग्रेस को ब्लॉक, न्याय पंचायत, ग्राम और बूथ स्तर तक सक्रिय एवं मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है। उनके अनुसार अभियान के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में बैठकें आयोजित कर पार्टी कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों से संवाद किया जाएगा तथा संगठन को मजबूत करने से जुड़े सुझावों पर चर्चा की जाएगी।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस संगठन में कार्यकर्ताओं की भूमिका महत्वपूर्ण है। अभियान के दौरान जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में जाकर कार्यकर्ताओं, पदाधिकारियों और लोगों से संवाद स्थापित करने तथा उनके सुझाव सुनने पर जोर रहेगा।

नए कार्यकर्ताओं को जोड़ने की तैयारी

पत्रकार वार्ता में बताया गया कि अभियान के तहत नए और सक्रिय कार्यकर्ताओं को संगठन से जोड़ने, पार्टी की विचारधारा एवं नीतियों को जनता तक पहुंचाने और स्थानीय स्तर पर संगठनात्मक गतिविधियों को गति देने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

अमित विज के मुताबिक कांग्रेस का प्रयास केवल चुनाव के समय सक्रिय रहने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि पूरे वर्ष जनता के बीच रहकर स्थानीय मुद्दों और समस्याओं को समझने तथा उन्हें लोकतांत्रिक तरीके से उठाने की भूमिका भी कार्यकर्ताओं को निभानी चाहिए।

इनसेट | सिद्धार्थनगर में बनेगी संगठनात्मक कार्ययोजना

अभियान के दौरान जिले के वरिष्ठ नेताओं, पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ विचार-विमर्श कर संगठन को मजबूत करने से जुड़ी कार्ययोजना तैयार किए जाने की बात कही गई। पार्टी की ओर से अभियान को गंभीरता और पारदर्शिता के साथ आगे बढ़ाने का लक्ष्य बताया गया है।

इनबॉक्स | अभियान में किन बिंदुओं पर फोकस?

बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करना

ब्लॉक और न्याय पंचायत स्तर पर संवाद

ग्राम स्तर पर संगठनात्मक पहुंच बढ़ाना

नए एवं सक्रिय कार्यकर्ताओं को जोड़ना

कार्यकर्ताओं से सुझाव और फीडबैक लेना

पार्टी की नीतियों एवं विचारों को जनता तक पहुंचाना

स्थानीय मुद्दों को संगठन के माध्यम से उठाना

पत्रकार वार्ता में मौजूद रहे पदाधिकारी

पत्रकार वार्ता में उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर से नियुक्त ऑब्जर्वर देवेन्द्र श्रीवास्तव और अनुज कुमार सिंह, जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष काजी सुहेल अहमद सहित जिला कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारी, वरिष्ठ कांग्रेसजन और पार्टी कार्यकर्ता मौजूद रहे।

सारांश

सिद्धार्थनगर में कांग्रेस ने संगठन सृजन अभियान के जरिए बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने की कवायद शुरू की है। AICC ऑब्जर्वर अमित विज ने कार्यकर्ताओं से संवाद, नए कार्यकर्ताओं को जोड़ने और ब्लॉक से बूथ स्तर तक संगठनात्मक गतिविधियों को गति देने पर जोर दिया।

टिप्पणी

संगठन सृजन अभियान के जरिए कांग्रेस का फोकस अब संगठन की जमीनी सक्रियता बढ़ाने पर दिखाई दे रहा है। अभियान कितना प्रभावी साबित होता है, यह आने वाले दिनों में ब्लॉक, ग्राम और बूथ स्तर पर होने वाली बैठकों तथा कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी से स्पष्ट होगा।

कानूनी सावधानी

यह खबर उपलब्ध प्रेस नोट एवं पत्रकार वार्ता में बताए गए पक्ष पर आधारित है। इसमें किसी राजनीतिक दल या व्यक्ति के संबंध में स्वतंत्र रूप से सत्यापित उपलब्धि अथवा आरोप के रूप में कोई अतिरिक्त दावा नहीं जोड़ा गया है। अभियान से जुड़े दावे संबंधित कांग्रेस पक्ष द्वारा बताए गए हैं।

 

दूध-दुग्ध उत्पादों पर प्रशासन का शिकंजा, सिद्धार्थनगर में बड़े पैमाने पर नमूना जांच

दूध-दुग्ध उत्पादों पर प्रशासन का शिकंजा, सिद्धार्थनगर में बड़े पैमाने पर नमूना जांच


सिद्धार्थनगर में दूध और दुग्ध उत्पादों की गुणवत्ता को लेकर खाद्य सुरक्षा विभाग का विशेष अभियान तेज हो गया है। विभागीय सचल दल ने जिले के विभिन्न बाजारों और प्रमुख चौराहों पर कार्रवाई करते हुए दूध, पनीर, खोया, घी, आइसक्रीम समेत कई खाद्य पदार्थों के कुल नमूने संग्रहित किए। सभी नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए हैं। जांच रिपोर्ट के आधार पर खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।


सिद्धार्थनगर। आयुक्त, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन, उत्तर प्रदेश तथा जिलाधिकारी सिद्धार्थनगर के आदेश के क्रम में दूध एवं दुग्ध उत्पादों की गुणवत्ता की जांच के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत जिले में खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई जारी है। सहायक आयुक्त (खाद्य)-II के नेतृत्व में गठित सचल दल ने जनपद के विभिन्न क्षेत्रों में खाद्य पदार्थों के नमूने संग्रहित कर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे।

कार्रवाई का विस्तृत ब्यौरा

विभागीय अभियान के दौरान बांसी बाजार से 07 दूध, 02 खोया, 02 पनीर, 02 घी और 02 आइसक्रीम के नमूने लिए गए। वहीं डुमरियागंज बाजार से 01 दूध, 01 पनीर और 01 खोया का नमूना संग्रहित किया गया।

तुलसियापुर चौराहा, शोहरतगढ़ से 02 काजू, 01 अखरोट और 01 बादाम का नमूना लिया गया। इटवा से 04 दूध, 01 पनीर और 03 आइसकैंडी के नमूने संग्रहित किए गए।

साड़ी चौराहा, नौगढ़ से 01 घी, 01 मिल्क क्रीम, 01 बटर और 01 चॉकलेट सिरप का नमूना लिया गया। तेतरी बाजार से 01 घी और 01 शरबत का नमूना संग्रहित किया गया।

इसके अलावा हैडिल तिराहा से 02 दूध, उसका रोड से 01 दूध व 01 घी, पकड़ी नौगढ़ से 01 दूध व 01 घी तथा भीमापार नौगढ़ से 01 दूध, 01 पनीर, 01 चॉकलेट सिरप और 01 बटर का नमूना लिया गया।

जोगिया उदयपुर से 03 आइसकैंडी तथा लुंबिनी रोड, तेतरी बाजार से 02 दूध, 01 पनीर और 01 आइसक्रीम का नमूना संग्रहित किया गया। विभाग के अनुसार सभी नमूनों को जांच के लिए प्रयोगशाला भेज दिया गया है।


जांच रिपोर्ट के बाद तय होगी कार्रवाई

खाद्य सुरक्षा विभाग के अनुसार अभी लिए गए नमूनों की प्रयोगशाला जांच रिपोर्ट प्राप्त होना बाकी है। रिपोर्ट में जो तथ्य सामने आएंगे, उसी के आधार पर खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के प्रावधानों के तहत नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इसलिए जांच रिपोर्ट आने से पहले किसी कारोबारी या खाद्य पदार्थ को मानकविहीन घोषित नहीं किया गया है।


अभियान का उद्देश्य

दूध एवं दुग्ध उत्पादों की गुणवत्ता की जांच

खाद्य पदार्थों के निर्धारित मानकों की निगरानी

उपभोक्ताओं को सुरक्षित खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने की दिशा में कार्रवाई

खाद्य कारोबारकर्ताओं को खाद्य सुरक्षा नियमों के प्रति जागरूक करना

प्रयोगशाला जांच के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करना

जागरूक भी किए गए खाद्य कारोबारी

नमूना संग्रह की कार्रवाई के साथ खाद्य कारोबारकर्ताओं को खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के प्रावधानों के संबंध में जागरूक भी किया गया। विभाग का जोर खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता बनाए रखने और निर्धारित खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुपालन पर है।

सचल दल में ये अधिकारी रहे शामिल

अभियान के दौरान सहायक आयुक्त (खाद्य)-II आर.एल. यादव के साथ खाद्य सुरक्षा अधिकारी हीरा लाल, नीरज कुमार चौधरी और रंजन कुमार श्रीवास्तव शामिल रहे।

सारांश

सिद्धार्थनगर में खाद्य सुरक्षा विभाग ने विशेष अभियान के तहत जिले के अलग-अलग बाजारों से दूध, पनीर, खोया, घी, आइसक्रीम, आइसकैंडी सहित कई खाद्य पदार्थों के नमूने संग्रहित किए हैं। नमूने प्रयोगशाला भेजे गए हैं और रिपोर्ट आने के बाद ही नियमानुसार कार्रवाई की दिशा तय होगी।

टिप्पणी

दूध और दुग्ध उत्पाद सीधे लोगों के खान-पान से जुड़े हैं। ऐसे में नियमित नमूना जांच और खाद्य कारोबारियों को नियमों के प्रति जागरूक करना उपभोक्ता हित में महत्वपूर्ण कदम है। अब निगाहें प्रयोगशाला रिपोर्ट पर रहेंगी, जिसके आधार पर विभाग आगे की वैधानिक कार्रवाई करेगा।

आपके पोर्टल के लिए इसे इस अंदाज में प्रस्तुत किया जा सकता है:

 

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कलम ऐसी चली कि सदियां बदल गईं, लेकिन शब्द आज भी जीवित हैं

तुलसीदास जयंती विशेष: रामचरितमानस के रचयिता ने भक्ति, लोकभाषा और साहित्य को दी ऐसी विरासत, जो आज भी करोड़ों लोगों के जीवन का हिस्सा है


सदियां गुजर गईं, राज-पाट बदल गए, भाषाएं बदलीं, लेकिन एक कवि की लेखनी आज भी घर-घर में सुनाई देती है।

वह नाम है—गोस्वामी तुलसीदास।

आज, 19 अगस्त 2026, श्रावण शुक्ल सप्तमी के अवसर पर तुलसीदास जयंती मनाई जा रही है। परंपरा के अनुसार इसी तिथि को गोस्वामी तुलसीदास का जन्म माना जाता है।

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तुलसीदास केवल एक कवि नहीं थे। उनकी सबसे बड़ी ताकत यह थी कि उन्होंने रामकथा को ऐसी लोकभाषा में लिखा, जिसे आम आदमी समझ सके, गा सके और अपने जीवन से जोड़ सके।

उनकी रामचरितमानस ने भक्ति साहित्य के साथ-साथ भारतीय लोकजीवन, रामलीला, संगीत और सांस्कृतिक परंपराओं पर गहरा प्रभाव डाला।


आज क्यों याद किए जा रहे हैं तुलसीदास?

19 अगस्त — तुलसीदास जयंती

श्रावण शुक्ल सप्तमी को परंपरागत रूप से तुलसीदास जयंती मनाई जाती है।

प्रमुख रचनाएं:

रामचरितमानस, हनुमान चालीसा, विनय पत्रिका, कवितावली, गीतावली, दोहावली सहित अनेक कृतियां।

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जन्म को लेकर इतिहास में अलग-अलग मत

तुलसीदास के जन्म-वर्ष और जन्मस्थान को लेकर इतिहास और परंपराओं में मतभेद मिलते हैं। विभिन्न स्रोत अलग-अलग विवरण देते हैं। इसलिए उनके जन्म को लेकर किसी एक ईसवी वर्ष को निर्विवाद तथ्य के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं है।

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इतिहास संबंधी स्रोतों में 16वीं शताब्दी का समय प्रमुख रूप से सामने आता है और उनकी जन्म-जयंती श्रावण शुक्ल सप्तमी को मनाने की परंपरा है।

यही कारण है कि तुलसीदास जयंती का महत्व केवल एक जन्मदिन मनाने तक सीमित नहीं है। यह उस साहित्यिक विरासत को याद करने का अवसर है, जिसने भारतीय समाज की धार्मिक और सांस्कृतिक चेतना पर गहरा प्रभाव छोड़ा।

वह रचना जिसने रामकथा को जन-जन की भाषा बना दिया

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तुलसीदास की सबसे प्रसिद्ध कृति है—रामचरितमानस।

यह अवधी भाषा में रचित महाकाव्यात्मक ग्रंथ है, जिसमें भगवान राम के जीवन और आदर्शों को केंद्र में रखा गया है। तुलसीदास ने संस्कृत की विद्वत परंपरा से बाहर निकलकर लोकभाषा में रामकथा को व्यापक जनसमुदाय तक पहुंचाया।

यही उनकी लेखनी की सबसे बड़ी ताकत बनी।

भाषा सरल हुई, कथा जन-जन तक पहुंची और साहित्य लोकजीवन का हिस्सा बन गया।

लेखनी में भक्ति थी, लेकिन प्रभाव साहित्य से कहीं आगे गया

तुलसीदास की रचनाओं का प्रभाव केवल धार्मिक पाठ तक सीमित नहीं रहा।

रामचरितमानस और उनकी अन्य रचनाओं का प्रभाव लोकनाट्य, रामलीला, संगीत, लोकभाषा और भारतीय सांस्कृतिक जीवन में दिखाई देता है। तुलसीदास को रामभक्ति की परंपरा के प्रमुख कवियों में गिना जाता है।

उनकी लेखनी ने भगवान राम के चरित्र के माध्यम से मर्यादा, करुणा, कर्तव्य, त्याग और आदर्श जीवन जैसे मूल्यों को साहित्यिक अभिव्यक्ति दी।

हनुमान चालीसा से घर-घर तक पहुंचा नाम

तुलसीदास की पहचान केवल रामचरितमानस तक सीमित नहीं है।

हनुमान चालीसा भी उनकी सबसे लोकप्रिय रचनाओं में मानी जाती है। आज भी देश के अलग-अलग हिस्सों में इसका पाठ व्यापक रूप से किया जाता है।

यही वजह है कि तुलसीदास का नाम केवल साहित्य के इतिहास में दर्ज नहीं है, बल्कि आज भी लोगों की दैनिक धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं में सुनाई देता है।

कहा जाता है, एक घटना ने बदल दी जीवन की दिशा

तुलसीदास के जीवन से जुड़ी सबसे प्रसिद्ध कथाओं में उनकी पत्नी रत्नावली से जुड़ा प्रसंग आता है।

लोकप्रिय परंपरा के अनुसार, पत्नी के प्रति अत्यधिक आसक्ति को लेकर रत्नावली ने उन्हें भगवान राम की भक्ति की ओर प्रेरित करने वाली बात कही। इसके बाद तुलसीदास के जीवन की दिशा बदलने की कथा प्रचलित है।

हालांकि यह प्रसंग जीवनी-परंपरा और लोककथाओं में मिलता है, इसलिए इसे निर्विवाद ऐतिहासिक घटना की तरह नहीं बल्कि प्रचलित कथा के रूप में प्रस्तुत करना उचित है।

तुलसीदास की सबसे बड़ी ताकत—लोकभाषा

जिस समय धार्मिक और साहित्यिक ज्ञान का बड़ा हिस्सा संस्कृत जैसी शास्त्रीय भाषाओं में उपलब्ध था, उस दौर में तुलसीदास ने अवधी और ब्रज जैसी लोकभाषाओं में रचनाएं कीं।

यही वजह है कि उनकी कविता सिर्फ विद्वानों तक सीमित नहीं रही।

वह गांव तक पहुंची, शहर तक पहुंची, घर तक पहुंची और पीढ़ियों तक पहुंचती चली गई।

यही किसी रचनाकार की सबसे बड़ी सफलता होती है—कि उसका लिखा हुआ समय के साथ पुराना न हो, बल्कि हर पीढ़ी उसे अपने तरीके से पढ़े।


तुलसीदास को पढ़ना क्यों जरूरी है?

तुलसीदास को केवल धार्मिक दृष्टि से पढ़ना उनके साहित्यिक महत्व को छोटा कर देना होगा।

उनकी भाषा, कथ्य, चरित्र-निर्माण और लोकभाषा के प्रयोग ने हिंदी साहित्य और उत्तर भारतीय सांस्कृतिक परंपरा को गहराई से प्रभावित किया।

उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि यही कही जा सकती है कि उन्होंने एक विशाल कथा को ऐसी भाषा और शैली में प्रस्तुत किया, जो सदियों बाद भी लोगों के बीच जीवित है।

सारांश

आज तुलसीदास जयंती है।

एक ऐसे कवि को याद करने का दिन, जिसकी कलम ने रामकथा को जनभाषा में नई पहचान दी।

एक ऐसे रचनाकार को याद करने का दिन, जिसकी रामचरितमानस आज भी भारतीय सांस्कृतिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

एक ऐसे साहित्यकार को याद करने का दिन, जिसकी हनुमान चालीसा आज भी घर-घर में सुनाई देती है।

और सबसे बढ़कर—

एक ऐसे कवि को याद करने का दिन, जिसने यह साबित किया कि जब शब्द लोक की भाषा में उतरते हैं, तो वे केवल पुस्तक में नहीं रहते—वे पीढ़ियों की स्मृति बन जाते हैं।

टिप्पणी

तुलसीदास का जीवन और साहित्य आज भी इसलिए प्रासंगिक है क्योंकि उनके शब्दों ने समय की सीमाओं को पार किया।

उनकी लेखनी ने केवल कथा नहीं कही, बल्कि समाज के सामने आदर्शों और जीवन-मूल्यों की एक साहित्यिक दुनिया रखी।

आज तुलसीदास जयंती पर उन्हें याद करने का सबसे सार्थक तरीका यही है कि हम उनकी रचनाओं को केवल श्रद्धा से न देखें, बल्कि साहित्य, भाषा और भारतीय सांस्कृतिक इतिहास में उनके योगदान को भी समझें।

सदियां बीत गईं, लेकिन तुलसी की लेखनी आज भी बोल रही है।

और शायद यही किसी रचनाकार की अमरता है।

FT News Digital — विशेष प्रस्तुति

9 साल से झोपड़ी में परिवार, आवास सूची से नाम हटने का दावा

 

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बर्डपुर नंबर-14 के खैरहवा टोले का मामला, दंपती ने वीडियो वायरल कर मांगा न्याय; पंचायत स्तर पर लगाए गंभीर आरोप

सिद्धार्थनगर। विकास खंड नौगढ़ की ग्राम पंचायत बर्डपुर नंबर-14 के टोला खैरहवा से प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर एक मामला सामने आया है। जयप्रकाश पुत्र गजाधर का परिवार करीब नौ वर्षों से छप्परनुमा मकान में रहने का दावा कर रहा है। परिवार की ओर से जारी तस्वीरों और वीडियो में घास-फूस से बने मकान में परिवार के रहने की स्थिति दिखाई गई है।

जयप्रकाश का कहना है कि वह अपनी पत्नी आशा और दो बच्चों के साथ इसी मकान में रह रहे हैं। परिवार के मुताबिक बारिश के दौरान छप्पर से पानी टपकने की समस्या रहती है और ऐसे मौसम में परिवार को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

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आवास योजना की सूची से नाम हटाने का दावा

जयप्रकाश की पत्नी आशा का दावा है कि उनका नाम प्रधानमंत्री आवास योजना की सूची में शामिल था, लेकिन बाद में सूची से उनका नाम हटा दिया गया। महिला का आरोप है कि इसके बाद परिवार को आवास योजना के लाभ से वंचित रहना पड़ा।

आशा के अनुसार, कुछ समय पहले अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर परिवार की स्थिति का निरीक्षण भी किया था। महिला का कहना है कि निरीक्षण के दौरान उन्हें योजना के लिए पात्र बताए जाने की बात कही गई थी। हालांकि इन दावों की पुष्टि सरकारी अभिलेखों से होना बाकी है।

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यही वजह है कि पूरे मामले में अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि यदि परिवार का नाम वास्तव में सूची में था तो उसे किस आधार पर हटाया गया और यदि परिवार अपात्र था तो अपात्रता का आधिकारिक कारण क्या है?

वायरल वीडियो में न्याय की गुहार

मामले को लेकर जयप्रकाश और उनकी पत्नी आशा ने वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल किया है। वीडियो में दंपती अपनी आवासीय स्थिति बताते हुए प्रशासन से न्याय की गुहार लगाते और आवास उपलब्ध कराने की मांग करते दिखाई दे रहे हैं।

वीडियो में महिला की ओर से पंचायत स्तर के जिम्मेदारों पर पैसे मांगने और मिलीभगत के आरोप भी लगाए गए हैं।

इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि FT News Digital द्वारा नहीं की गई है। इसलिए इन आरोपों को तथ्य के रूप में नहीं, बल्कि संबंधित महिला द्वारा लगाए गए आरोप के रूप में ही प्रस्तुत किया जा रहा है।

प्रधान-सचिव पर लगाए आरोप, जांच से साफ होगी तस्वीर

महिला की ओर से ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि आवास को लेकर पैसे की मांग की गई और बाद में उनका नाम सूची से हटा दिया गया।

हालांकि इन आरोपों पर संबंधित ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव का पक्ष इस रिपोर्ट के समय उपलब्ध नहीं है। इसलिए निष्पक्ष रिपोर्टिंग के लिए उनका पक्ष सामने आना भी आवश्यक है।

यदि संबंधित पक्ष अपना स्पष्टीकरण देता है तो उसे भी समाचार में उचित स्थान दिया जाएगा।

जातिगत भेदभाव के आरोप भी जांच का विषय

परिवार की ओर से सूची से नाम हटाए जाने के पीछे जातिगत भेदभाव की आशंका भी व्यक्त की गई है। लेकिन इस आरोप की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

ऐसे में किसी व्यक्ति या पंचायत प्रतिनिधि को जातिगत भेदभाव का दोषी घोषित करना उचित नहीं होगा। इस आरोप की सच्चाई भी संबंधित रिकॉर्ड, पात्रता सूची, जांच रिपोर्ट और प्रशासनिक सत्यापन से ही सामने आ सकती है।

पहले आवास मिलने के दावे पर भी रिकॉर्ड जरूरी

मामले में महिला के पूर्व पारिवारिक जीवन और किसी अन्य स्थान पर पहले आवास योजना का लाभ मिलने से संबंधित दावे भी सामने रखे गए हैं।

लेकिन इस संबंध में बिना सरकारी दस्तावेज देखे कोई निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। यदि पूर्व में किसी स्थान पर आवास योजना का लाभ मिला था, तो वर्तमान मामले में उसकी प्रासंगिकता क्या है, यह संबंधित सरकारी रिकॉर्ड और योजना के नियमों के आधार पर ही तय किया जा सकता है।

इसलिए इस बिंदु की भी प्रशासनिक जांच आवश्यक है।

अब प्रशासन के सामने ये सवाल

1. क्या जयप्रकाश के परिवार का नाम प्रधानमंत्री आवास योजना की सूची में था?

2. यदि नाम था तो उसे कब और किस आधार पर हटाया गया?

3. क्या परिवार का आधिकारिक स्थलीय सत्यापन हुआ था?

4. परिवार की वर्तमान पात्रता क्या है?

5. क्या परिवार के किसी सदस्य को पहले आवास योजना का लाभ मिला है?

6. प्रधान और सचिव पर लगाए गए पैसे मांगने के आरोपों की कोई आधिकारिक शिकायत हुई है या नहीं?

7. यदि परिवार पात्र है तो उसे योजना का लाभ क्यों नहीं मिला?

इन सभी सवालों का जवाब सरकारी रिकॉर्ड और निष्पक्ष जांच से ही सामने आ सकता है।

ग्रामीणों ने भी बताई परिवार की स्थिति

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि जयप्रकाश का परिवार लंबे समय से इसी झोपड़ीनुमा मकान में रह रहा है और उनके पास रहने के लिए दूसरा पक्का मकान नहीं है।

ग्रामीणों के इस दावे की भी प्रशासनिक स्तर पर पुष्टि की जा सकती है। यदि प्रशासन मौके पर पहुंचकर स्थलीय सत्यापन करता है तो परिवार की वास्तविक आवासीय स्थिति और योजना की पात्रता दोनों स्पष्ट हो सकती हैं।


मामला आखिर जांच तक क्यों पहुंचे?

एक परिवार का दावा है कि वह करीब नौ वर्षों से झोपड़ी में रह रहा है। आवास योजना की सूची से नाम हटाए जाने का आरोप है। दंपती ने वीडियो वायरल कर प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है। पंचायत स्तर पर पैसे मांगने और मिलीभगत के आरोप भी लगाए गए हैं। अब पूरा मामला सरकारी रिकॉर्ड और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है।

सारांश

नौ साल से झोपड़ी में रहने का दावा।

आवास सूची से नाम हटने का आरोप।

दंपती का वायरल वीडियो।

प्रधान-सचिव पर गंभीर आरोप।

ग्रामीणों ने भी उठाए सवाल।

अब प्रशासनिक जांच का इंतजार।

टिप्पणी

सरकारी आवास योजना जरूरतमंद परिवारों को सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित की जाती है। इसलिए किसी परिवार की पात्रता को लेकर शिकायत सामने आए तो उसका निष्पक्ष सत्यापन होना जरूरी है।

इस मामले में परिवार ने सार्वजनिक रूप से अपनी स्थिति रखी है और प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है। दूसरी तरफ पंचायत स्तर के जिम्मेदारों पर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

ऐसे में इस पूरे मामले का समाधान आरोप-प्रत्यारोप से नहीं, बल्कि रिकॉर्ड की जांच और मौके के सत्यापन से होना चाहिए।

यदि परिवार पात्र पाया जाता है तो नियमानुसार उसे योजना का लाभ मिलने का रास्ता साफ होना चाहिए। वहीं यदि वह किसी नियम के कारण पात्र नहीं है तो प्रशासन को कारण स्पष्ट करना चाहिए।

सवाल किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने का नहीं, बल्कि यह जानने का है कि सरकारी रिकॉर्ड में इस परिवार की वास्तविक स्थिति क्या है और योजना के नियमों के अनुसार इसका हक बनता है या नहीं।

FT News Digital की स्पष्टता

यह समाचार परिवार एवं ग्रामीणों द्वारा बताए गए तथ्यों, उपलब्ध फोटो/वीडियो और उनके द्वारा लगाए गए आरोपों के आधार पर तैयार किया गया है। ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव के विरुद्ध लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट के प्रकाशन तक नहीं हुई है। किसी व्यक्ति को दोषी या भ्रष्ट घोषित करना इस समाचार का उद्देश्य नहीं है।

संबंधित ग्राम प्रधान, पंचायत सचिव अथवा किसी अन्य पक्ष का जवाब या स्पष्टीकरण प्राप्त होने पर उसे भी निष्पक्ष रूप से प्रकाशित किया जाएगा।


FT News Digital — सच और कुछ नहीं


एक जरूरी संपादकीय सावधानी: आपकी दी हुई तस्वीरों में परिवार और बच्चों के चेहरे स्पष्ट हैं। बच्चों की पहचान/चेहरा प्रकाशित करने से पहले विशेष सावधानी रखें। और अगर वीडियो में किसी व्यक्ति पर पैसे मांगने का आरोप है, तो “प्रधान ने पैसे मांगे” न लिखें; “महिला ने वीडियो में प्रधान पर पैसे मांगने का आरोप लगाया” लिखना कहीं अधिक सुरक्षित है। प्रेस काउंसिल भी बिना पर्याप्त आधार के किसी व्यक्ति को बदनाम करने वाली सामग्री और संदर्भ से बाहर/अनावश्यक आरोपों से बचने पर जोर देता है। �

 

छह दिन से लापता कक्षा 10 के छात्र का पोखरे में मिला शव

चिल्हिया थाना क्षेत्र के राम-जानकी मंदिर कुटिया के पास मिला शव, पुलिस ने पोस्टमार्टम के लिए भेजा

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सिद्धार्थनगर। जनपद सिद्धार्थनगर के चिल्हिया थाना क्षेत्र के ग्राम गोहनिया निवासी 15 वर्षीय शनि गुप्ता, पुत्र लौटन गुप्ता, का शव मंगलवार सुबह रेलवे क्रॉसिंग से सटे राम-जानकी मंदिर कुटिया के पास स्थित पोखरे में उतराता हुआ मिला। शनि कक्षा 10 का छात्र बताया गया है और वह बीते 13 अगस्त से घर से लापता था। शव मिलने की सूचना के बाद इलाके में लोगों की भीड़ जुट गई।


13 अगस्त से लापता था छात्र

परिजनों के अनुसार शनि गुप्ता 13 अगस्त को घर से चला गया था। देर रात तक वापस नहीं लौटने पर परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की। काफी प्रयास के बाद भी जानकारी नहीं मिलने पर मामले की सूचना चिल्हिया पुलिस को दी गई।


पुलिस ने दर्ज किया था मुकदमा

पुलिस के अनुसार छात्र की तलाश के लिए आवश्यक कार्रवाई की जा रही थी। इसी बीच 18 अगस्त की सुबह पोखरे में एक शव मिलने की सूचना मिली। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव की पहचान शनि गुप्ता के रूप में कराई।


सिद्धार्थनगर के चिल्हिया थाना क्षेत्र में छह दिन से लापता कक्षा 10 के छात्र का शव मंगलवार सुबह पोखरे में मिलने से क्षेत्र में सनसनी फैल गई। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पंचनामा की कार्रवाई की और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस मामले की जांच और अन्य विधिक कार्रवाई में जुटी है।

पूरी खबर

सिद्धार्थनगर। चिल्हिया थाना क्षेत्र के ग्राम गोहनिया निवासी 15 वर्षीय शनि गुप्ता, पुत्र लौटन गुप्ता, कक्षा 10 का छात्र था। परिजनों के मुताबिक शनि 13 अगस्त को घर से लापता हो गया था। रात तक उसके घर नहीं लौटने पर परिवार के लोगों ने उसकी तलाश शुरू की, लेकिन उसका पता नहीं चल सका।

परिजनों द्वारा मामले की जानकारी चिल्हिया थाने को दी गई। पुलिस ने मामले में आवश्यक कार्रवाई करते हुए छात्र की तलाश शुरू की। परिजन भी अपने स्तर से शनि की तलाश में जुटे रहे।

इसी बीच 18 अगस्त की सुबह करीब 9 बजे रेलवे क्रॉसिंग से सटे राम-जानकी मंदिर कुटिया के पास स्थित पोखरे में एक शव उतराता हुआ दिखाई दिया। शव मिलने की जानकारी क्षेत्र में फैलते ही मौके पर लोगों की भीड़ जुटने लगी।

सूचना मिलने पर चिल्हिया थाना प्रभारी राजेश गुप्ता पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने शव को बाहर निकलवाकर उसकी पहचान कराई। पुलिस के अनुसार शव की पहचान शनि गुप्ता पुत्र लौटन गुप्ता, निवासी गोहनिया, थाना चिल्हिया, सिद्धार्थनगर के रूप में हुई।

पुलिस ने शव का पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच के बाद ही मृत्यु के कारणों के संबंध में स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल पुलिस मामले में विधिक कार्रवाई कर रही है।

परिजनों ने बताई यह बात

परिजनों के अनुसार शनि कक्षा 10 का छात्र था और उसकी बोर्ड परीक्षा नजदीक थी। परिवार के लोगों के मुताबिक पढ़ाई पर ध्यान देने को लेकर घर में उसे मोबाइल फोन से दूर रहने के लिए कहा गया था और मोबाइल उसके पिता को दे दिया गया था। परिजनों का कहना है कि इसी बात से वह नाराज होकर घर से चला गया था।

हालांकि, शनि की मृत्यु किन परिस्थितियों में हुई, वह पोखरे तक कैसे पहुंचा और पानी में डूबने की वास्तविक वजह क्या रही—इन सभी बिंदुओं की पुष्टि पुलिस जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही हो सकेगी।

पुलिस जांच के अहम बिंदु

पुलिस द्वारा छात्र के घर से निकलने के समय, उसके बाद की गतिविधियों, घटनास्थल और अन्य परिस्थितियों की जानकारी जुटाई जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

सारांश

चिल्हिया थाना क्षेत्र में 13 अगस्त से लापता 15 वर्षीय कक्षा 10 के छात्र शनि गुप्ता का शव 18 अगस्त की सुबह राम-जानकी मंदिर कुटिया के पास स्थित पोखरे में मिला। पुलिस ने शव की पहचान कराकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। मृत्यु के वास्तविक कारणों का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के बाद ही चल सकेगा।

टिप्पणी

छह दिन से लापता छात्र का शव मिलना निश्चित रूप से परिवार और क्षेत्र के लिए बेहद दुखद घटना है। ऐसे मामलों में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने या किसी व्यक्ति पर आरोप लगाने के बजाय पुलिस जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार करना आवश्यक है। FT News Digital की ओर से घटना से जुड़े तथ्यों को पुलिस और परिजनों के बताए अनुसार ही प्रस्तुत किया जा रहा है। मृत्यु के कारण अथवा किसी आपराधिक घटना की पुष्टि के संबंध में कोई निष्कर्ष जांच पूरी होने से पहले नहीं निकाला जा रहा है।

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