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गलत मोबाइल नंबर पर ट्रांसफर हुए ₹33 हजार, लोटन पुलिस की पहल से खाते में वापस मिली रकम

सिद्धार्थनगर | FT News Digital

साइबर सेल थाना लोटन की त्वरित कार्रवाई, PhonePe से गलत खाते में पहुंची धनराशि वापस कराने में मिली सफलता

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सिद्धार्थनगर। डिजिटल भुगतान के दौरान मोबाइल नंबर दर्ज करने में हुई एक छोटी-सी चूक के कारण ₹33 हजार की धनराशि दूसरे व्यक्ति के खाते में स्थानांतरित हो गई। परेशान आवेदक की शिकायत पर थाना कोतवाली लोटन की साइबर सेल टीम ने त्वरित पहल की। पुलिस की ओर से जारी प्रेस नोट के अनुसार, संबंधित व्यक्ति से संपर्क और समन्वय स्थापित कर पूरी धनराशि आवेदक के खाते में वापस कराई गई।


रिश्तेदार को पैसे भेजते समय हुई गलती


पुलिस के अनुसार, थाना लोटन क्षेत्र के ग्राम हरिगांव निवासी रमेश यादव, पुत्र प्रेमशंकर ने 16 अक्टूबर 2026 को साइबर सेल थाना लोटन में प्रार्थना पत्र दिया था। उन्होंने बताया कि 15 अक्टूबर को PhonePe के माध्यम से अपने रिश्तेदार को पैसे भेजते समय मोबाइल नंबर गलत दर्ज हो गया, जिसके चलते ₹33,000 किसी अन्य व्यक्ति के खाते में ट्रांसफर हो गए।

शिकायत मिलने के बाद साइबर सेल टीम ने मामले में तत्काल कार्रवाई की। पुलिस के मुताबिक, संबंधित मोबाइल नंबर पर संपर्क स्थापित किया गया और आपसी समन्वय के माध्यम से आवेदक की पूरी ₹33,000 की धनराशि वापस कराई गई।


पुलिस अधिकारियों के निर्देशन में हुई कार्रवाई


पुलिस प्रेस नोट के मुताबिक, यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक डॉ. अभिषेक महाजन के निर्देश पर साइबर अपराधों की रोकथाम और शिकायतों के त्वरित निस्तारण के लिए चलाए जा रहे अभियान के अंतर्गत की गई। अभियान में अपर पुलिस अधीक्षक प्रशांत कुमार प्रसाद का निर्देशन तथा क्षेत्राधिकारी सदर विश्वजीत सौरयान का पर्यवेक्षण रहा। कार्रवाई का नेतृत्व थानाध्यक्ष प्रदीप कुमार सिंह ने किया।


इन पुलिसकर्मियों की रही भूमिका


पुलिस द्वारा जारी विवरण के अनुसार, इस कार्रवाई में शामिल टीम के सदस्य हैं:

– उपनिरीक्षक रवीन्द्र यादव — साइबर सेल प्रभारी, थाना कोतवाली लोटन

– मुख्य आरक्षी अंकित सिंह — थाना कोतवाली लोटन

– आरक्षी अखिलेश कुमार — थाना कोतवाली लोटन

– महिला आरक्षी पूजा वर्मा — थाना कोतवाली लोटन


डिजिटल भुगतान करते समय बरतें सावधानी


यह मामला डिजिटल भुगतान के दौरान छोटी-सी गलती से होने वाली परेशानी की ओर ध्यान दिलाता है। PhonePe या किसी अन्य यूपीआई ऐप से पैसे भेजने से पहले प्राप्तकर्ता का नाम, मोबाइल नंबर और भुगतान की राशि ध्यानपूर्वक जांचें। यदि गलती से रकम किसी दूसरे खाते में चली जाए, तो संबंधित भुगतान ऐप और बैंक में तुरंत शिकायत दर्ज कराएं। जरूरत पड़ने पर साइबर हेल्पलाइन 1930 या आधिकारिक पोर्टल cybercrime.gov.in की मदद लें।


निष्कर्ष


लोटन पुलिस की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, शिकायत पर त्वरित पहल करते हुए आवेदक की ₹33 हजार की पूरी धनराशि वापस कराई गई। यह घटना डिजिटल लेनदेन में सतर्कता बरतने और समस्या आने पर समय रहते शिकायत करने की अहमियत को रेखांकित करती है।

 

 

लोटन सीएचसी में मरीजों की व्यवस्था पर उठे सवाल, जगह की कमी का हवाला; सीएमओ ने जांच का दिया आश्वासन

एक बेड पर दो मरीजों के इलाज की बात आई सामने, अस्पताल की सुविधाओं और रखरखाव की जांच जरूरी


सिद्धार्थनगर, उत्तर प्रदेश। जनपद के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) लोटन में मरीजों के उपचार की व्यवस्था को लेकर सवाल उठे हैं। उपलब्ध कराई गई तस्वीरों में अस्पताल के कमरे में मरीज उपचाराधीन दिखाई दे रहे हैं। एक ही स्टैंड पर ग्लूकोज की दो बोतलें टंगी नजर आ रही हैं, जबकि कमरे की दीवारों पर कुछ स्थानों पर प्लास्टर और पेंट उखड़ा हुआ दिखाई देता है। इन परिस्थितियों के मद्देनजर अस्पताल में उपलब्ध बिस्तरों, मरीजों के लिए जगह और भवन के रखरखाव की स्थिति की समीक्षा किए जाने की जरूरत है।

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जगह की कमी से मरीजों की व्यवस्था प्रभावित?


उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अस्पताल में जगह की कमी के कारण एक बेड पर दो मरीजों का उपचार किए जाने की बात सामने आई है। इस संबंध में अस्पताल के प्रभारी से बातचीत की गई। उनके द्वारा जगह की कमी को इसकी वजह बताया गया।

यदि मरीजों की संख्या के मुकाबले अस्पताल में बेड या जगह कम पड़ रही है, तो इस स्थिति का आकलन कर आवश्यक व्यवस्था करना महत्वपूर्ण है। मरीजों को उपचार के दौरान पर्याप्त जगह, स्वच्छ वातावरण और उनकी जरूरतों के अनुरूप सुविधाएं मिलनी चाहिए।

हालांकि, तस्वीरों के आधार पर अस्पताल की संपूर्ण व्यवस्था या किसी चिकित्सकीय लापरवाही का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। इसके लिए संबंधित विभाग का निरीक्षण और तथ्यों की जांच जरूरी है।

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सीएचसी प्रभारी ने बातचीत में क्या बताया?


मामले को लेकर लोटन सीएचसी के प्रभारी बताए जा रहे अमित चौधरी से मौखिक बातचीत की गई। बातचीत के दौरान उन्होंने अस्पताल में जगह की कमी के कारण एक बेड पर दो मरीजों का उपचार किए जाने की बात कही।

इस संबंध में अस्पताल में उपलब्ध बेड की संख्या, भर्ती मरीजों की संख्या और जगह की समस्या दूर करने के लिए संभावित व्यवस्थाओं की जानकारी सामने आना आवश्यक है, ताकि स्थिति का वास्तविक आकलन किया जा सके।


सीएमओ डॉ. संजय दोहरे ने जांच का दिया आश्वासन


मामले को जनपद के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संजय दोहरे के संज्ञान में भी लाया गया। उनसे हुई मौखिक बातचीत के अनुसार, उन्होंने मामले को दिखवाकर जांच कराने का आश्वासन दिया है।

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अब स्वास्थ्य विभाग के निरीक्षण और जांच पर निगाहें रहेंगी। जांच के दौरान अस्पताल में उपलब्ध सुविधाओं, मरीजों की संख्या, साफ-सफाई और भवन के रखरखाव की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है। यदि कोई कमी पाई जाती है, तो नियमानुसार आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाने चाहिए।

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जनहित का सवाल: मरीजों को बेहतर सुविधाएं कब मिलेंगी?


सरकारी अस्पताल आम नागरिकों के लिए उपचार का महत्वपूर्ण सहारा हैं। ऐसे में मरीजों की संख्या के अनुरूप बिस्तर, पर्याप्त जगह, स्वच्छ वातावरण और व्यवस्थित उपचार की उपलब्धता महत्वपूर्ण है।

लोटन सीएचसी की सामने आई तस्वीरों और जगह की कमी संबंधी जानकारी के बाद स्वास्थ्य विभाग से अपेक्षा है कि मामले का निष्पक्ष निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाए। यदि अतिरिक्त संसाधनों या रखरखाव में सुधार की जरूरत सामने आती है, तो मरीजों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए उचित कदम उठाए जाएं।


निष्कर्ष: फिलहाल इस मामले में जांच के परिणाम सामने आना बाकी है। किसी व्यक्ति या अधिकारी की जिम्मेदारी निर्धारित करने से पहले तथ्यों की पुष्टि आवश्यक है। सीएमओ द्वारा जांच का आश्वासन दिए जाने के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विभाग की ओर से क्या कार्रवाई की जाती है।


FT News Digital की ओर से: यह खबर मरीजों की सुविधाओं से जुड़े जनहित के सवालों को सामने लाने के उद्देश्य से प्रकाशित की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग की आधिकारिक प्रतिक्रिया, जांच के निष्कर्ष और सुधारात्मक कार्रवाई के संबंध में सत्यापित जानकारी मिलने पर खबर को अपडेट किया जाएगा।

सिद्धार्थनगर की मेधावी बेटी श्रद्धा पांडेय बनीं एक दिन की सांकेतिक जिलाधिकारी, प्रदेश में छठा स्थान पाकर बढ़ाया जिले का मान

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96.83 प्रतिशत अंक हासिल कर हाईस्कूल बोर्ड परीक्षा में किया शानदार प्रदर्शन, भारतीय प्रशासनिक सेवा में जाने का है सपना

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सिद्धार्थनगर, 16 अक्टूबर 2026। प्रतिभा, परिश्रम और दृढ़ संकल्प की मिसाल पेश करने वाली सिद्धार्थनगर की मेधावी छात्रा श्रद्धा पांडेय को एक दिन के लिए सांकेतिक जिलाधिकारी बनने का अवसर मिला। हाईस्कूल बोर्ड परीक्षा 2026 में 600 में से 581 अंक हासिल कर 96.83 प्रतिशत परिणाम के साथ प्रदेश की मेरिट सूची में छठा स्थान प्राप्त करने वाली श्रद्धा की इस उपलब्धि को जिला प्रशासन ने प्रोत्साहन के रूप में सम्मानित किया।

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जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन ने श्रद्धा पांडेय का पुष्प भेंट कर स्वागत किया। इस अवसर पर छात्रा को प्रशासनिक कार्यप्रणाली को करीब से समझने और जनसमस्याओं के प्रति प्रशासनिक जिम्मेदारियों का अनुभव प्राप्त करने का अवसर मिला।


सांकेतिक जिलाधिकारी के रूप में सुनी शिकायत


एक दिन की सांकेतिक जिलाधिकारी की भूमिका निभाते हुए श्रद्धा पांडेय ने एक शिकायत सुनी। शिकायतकर्ता की समस्या के संबंध में उन्होंने उपजिलाधिकारी बांसी को आवश्यक कार्रवाई के लिए निर्देशित किया। यह अनुभव उनके लिए प्रशासनिक व्यवस्था, जनसुनवाई और जनहित से जुड़े दायित्वों को समझने का अवसर बना।


तेतरी बाजार के विद्यालय की छात्रा हैं श्रद्धा


श्रद्धा पांडेय रघुवर प्रसाद जायसवाल सरस्वती शिशु मंदिर इंटर कॉलेज, तेतरी बाजार की छात्रा हैं और ग्राम पचहरी की निवासी हैं। हाईस्कूल परीक्षा में प्रदेश स्तर पर छठा स्थान प्राप्त करना उनकी मेहनत और लगन को दर्शाता है। उनकी सफलता से विद्यालय और क्षेत्र में हर्ष का माहौल है।


भारतीय प्रशासनिक सेवा में जाने का लक्ष्य


श्रद्धा पांडेय आगे की पढ़ाई पूरी करके भारतीय प्रशासनिक सेवा में जाना चाहती हैं। उनका लक्ष्य प्रशासनिक सेवा के माध्यम से देश और समाज के लिए काम करना है। सांकेतिक जिलाधिकारी बनने का यह अवसर उनके सपने को लेकर उत्साह बढ़ाने वाला अनुभव साबित हो सकता है।


मेधावी विद्यार्थियों के प्रोत्साहन की पहल


प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को प्रशासनिक जिम्मेदारियों से परिचित कराने जैसी पहल शिक्षा के साथ नेतृत्व क्षमता, निर्णय लेने की समझ और जनसेवा की भावना विकसित करने में सहायक हो सकती है। श्रद्धा पांडेय की उपलब्धि अन्य विद्यार्थियों, विशेषकर छात्राओं, के लिए भी प्रेरणा का संदेश देती है कि निरंतर मेहनत और लक्ष्य के प्रति समर्पण से नई ऊंचाइयों तक पहुंचा जा सकता है।


इस अवसर पर जिला प्रोबेशन अधिकारी विनय सिंह सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।


डिजिटल डेस्क | FT NEWS DIGITAL

सच और… कुछ नहीं।

सिद्धार्थनगर: ट्रैक्टर-ट्रॉली की चपेट में आया ई-रिक्शा, 22 वर्षीय चालक की मौत; साथी घायल

उसका-नौगढ़ मार्ग पर महिंद्रा एजेंसी के समीप हादसा, परिवार में मचा कोहराम; पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा


सिद्धार्थनगर। जनपद के उसका थाना क्षेत्र में महिंद्रा एजेंसी के समीप ट्रैक्टर-ट्रॉली और ई-रिक्शा के बीच हुई दुर्घटना में 22 वर्षीय ई-रिक्शा चालक की मौत हो गई, जबकि उसके साथ मौजूद दिलीप कुमार घायल हो गए। घायल का उपचार चल रहा है। घटना की सूचना मिलने के बाद परिवार में मातम छा गया।


मंदिर से सवारी छोड़कर घर लौट रहा था चालक


प्राप्त जानकारी के अनुसार, सदर थाना क्षेत्र के रामनगर निवासी नन्हे का 22 वर्षीय पुत्र राजा ई-रिक्शा चलाकर परिवार का भरण-पोषण करता था। बताया गया कि वह एक सवारी को महाराजगंज जनपद स्थित लहरा मंदिर छोड़ने गया था। वहां से वापस घर लौटते समय उसका थाना क्षेत्र के नौगढ़-उसका मार्ग पर महिंद्रा एजेंसी के समीप उसका ई-रिक्शा एक ट्रैक्टर-ट्रॉली की चपेट में आ गया।


हादसे में चालक की मौत, साथी घायल


बताई गई जानकारी के मुताबिक, दुर्घटना में ई-रिक्शा चालक राजा की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उसके साथी दिलीप कुमार को चोटें आईं। घायल को उपचार के लिए भेजा गया। हादसे की खबर मिलते ही मृतक के परिजनों में चीख-पुकार मच गई और परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।


पुलिस की कार्रवाई जारी


घटना के बाद पुलिस ने शव का पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस की ओर से मामले में आवश्यक अग्रिम कार्रवाई किए जाने की जानकारी दी गई है। दुर्घटना किन परिस्थितियों में हुई, इसकी विस्तृत पुष्टि संबंधित पुलिस अभिलेखों और आधिकारिक बयान से की जानी शेष है।


सड़क सुरक्षा फिर चर्चा में


इस घटना ने एक बार फिर सड़क पर सावधानी और यातायात नियमों के पालन की आवश्यकता को सामने रखा है। दुर्घटना के वास्तविक कारणों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

 

FT News Digital | सिद्धार्थनगर

 

नोट: यह समाचार उपलब्ध कराए गए विवरण के आधार पर स्वतंत्र रूप से तैयार किया गया है। किसी व्यक्ति की जिम्मेदारी या लापरवाही को जांच से पहले अंतिम रूप से स्थापित नहीं माना गया है।

18 अक्टूबर को बांसी में आएंगे प्रदेश अध्यक्ष विक्रम सिंह, अनुदेशक करेंगे स्वागत

बांसी (सिद्धार्थनगर)। परिषदीय अनुदेशक कल्याण एसोसिएशन, उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष विक्रम सिंह 18 अक्टूबर, रविवार को सिद्धार्थनगर जिले के बांसी पहुंचेंगे। उनके आगमन पर रानी लक्ष्मी विवाह वाटिका में भव्य स्वागत एवं सम्मान समारोह आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम को यादगार बनाने के लिए जिला कार्यकारिणी और ब्लॉक स्तर के पदाधिकारी तैयारियों में जुटे हैं।

जिला अध्यक्ष माहेश्वरी पाठक ने जनपद के समस्त अनुदेशक भाई-बहनों से प्रदेश अध्यक्ष के स्वागत समारोह में बड़ी संख्या में पहुंचने की अपील की है। उन्होंने कहा कि प्रदेश अध्यक्ष विक्रम सिंह का स्वागत पूरे अनुदेशक परिवार के लिए गर्व और सम्मान का विषय है। सभी साथी एकजुट होकर कार्यक्रम में सहभागिता करें और संगठन की ताकत का परिचय दें।

माहेश्वरी पाठक ने कहा कि अनुदेशकों की एकता ही संगठन की सबसे बड़ी पूंजी है। जब सभी साथी एक मंच पर एकजुट होकर खड़े होते हैं, तो संगठन की आवाज और मजबूत होती है। उन्होंने जिला कार्यकारिणी, सभी ब्लॉक अध्यक्षों और अनुदेशकों से आह्वान किया कि वे अपनी उपस्थिति से समारोह को भव्य और ऐतिहासिक बनाएं।

उन्होंने कहा कि प्रदेश अध्यक्ष के स्वागत में जिलेभर के अनुदेशकों की भागीदारी संगठन के प्रति उनके विश्वास, सम्मान और एकजुटता का संदेश देगी। सभी साथी समय से पहुंचकर कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाएं।

स्वागत एवं सम्मान समारोह 18 अक्टूबर 2026, रविवार को सुबह 11 बजे रानी लक्ष्मी विवाह वाटिका, बांसी, सिद्धार्थनगर में सेंट्रल बैंक के निकट आयोजित होगा। कार्यक्रम के आयोजक माहेश्वरी पाठक, समस्त जिला कार्यकारिणी, ब्लॉक अध्यक्ष एवं जनपद के अनुदेशकगण हैं।

नवरात्रि पर्व पर डीएम व एसपी ने किया फ़्लैग मार्च

जिलाधिकारी सिद्धार्थनगर व वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थनगर द्वारा पर्याप्त पुलिस बल के साथ शारदीय नवरात्रि दुर्गा पूजा व विसर्जन के दृष्टिगत सतर्कता एवं सुरक्षा को सुदृढ़ बनाए रखने हेतु थाना डुमरियागंज के कस्बा डुमरियागंज में फ्लैग मार्च/पैदल गश्त किया गया ।

शारदीय नवरात्रि दुर्गा पूजा व मूर्ति विसर्जन के दृष्टिगत शांति, सौहार्द एवं सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखने हेतु श्री शिवशरणप्पा जीएन. जिलाधिकारी सिद्धार्थनगर व डॉ0 अभिषेक महाजन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थनगर द्वारा पर्याप्त पुलिस बल व पीएसी के साथ थाना डुमरियागंज के कस्बा डुमरियागंज क्षेत्र में फ्लैग मार्च/पैदल गश्त किया गया।फ्लैग मार्च के दौरान मुख्य मार्गों, भीड़-भाड़ वाले स्थानों, दुर्गा पंडालों का भ्रमण कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया गया। आम जनमानस में सुरक्षा का एहसास कराते हुए आपसी सौहार्द बनाए रखने हेतु अपील की गई तथा अराजक तत्वों पर सतर्क दृष्टि रखने हेतु संबंधित को आवश्यक दिशा-निर्देश दिये गये। फ्लैग मार्च के दौरान प्रशांत कुमार प्रसाद अपर पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थनगर, बृजेश कुमार वर्मा क्षेत्राधिकारी डुमरियागंज, थाना प्रभारी डुमरियागंज, थाना प्रभारी त्रिलोकपुर, पथरा बाजार सहित अन्य अधिकारी/कर्मचारीगण मौजूद रहे।

गोरखपुर: नई बाजार में तीन घंटे बंद रहीं दुकानें, विधायक के आश्वासन पर शुरू हुआ कारोबार

दुर्गा पूजा पंडाल के ऊपर से गुजर रहे बिजली के तारों की सुरक्षा का मुद्दा उठा; केबलिंग कराने की मांग को लेकर व्यापारियों ने जताई चिंता

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चौरीचौरा, गोरखपुर। झंगहा थाना क्षेत्र के नई बाजार में बिजली के तारों की सुरक्षा को लेकर व्यापारियों ने गुरुवार को अपनी दुकानें करीब तीन घंटे तक बंद रखीं। दुर्गा पूजा पंडाल के ऊपर से गुजर रहे बिजली के नंगे तारों को सुरक्षित कराने की मांग को लेकर व्यापारियों ने अपनी समस्या सामने रखी। दुकानें बंद होने की सूचना मिलने पर स्थानीय विधायक इंजीनियर सरवन निषाद मौके पर पहुंचे और व्यापारियों से बातचीत कर समस्या के समाधान का आश्वासन दिया। इसके बाद व्यापारियों ने अपनी दुकानें खोल दीं।


पंडाल के ऊपर से गुजर रहे तारों को लेकर चिंता


प्राप्त जानकारी के अनुसार, नई बाजार में दुर्गा पूजा पंडाल के ऊपर से गुजर रहे बिजली के तारों को लेकर व्यापारियों ने सुरक्षा संबंधी चिंता जताई थी। व्यापारियों की मांग थी कि तारों पर सुरक्षित केबलिंग कराई जाए, जिससे किसी संभावित दुर्घटना की आशंका को कम किया जा सके।

इसी मांग को लेकर व्यापारियों ने दुकानों को बंद रखा। मामले की सूचना मिलने पर विधायक इंजीनियर सरवन निषाद मौके पर पहुंचे और व्यापारियों की बात सुनी।


विधायक ने बिजली विभाग के अधिकारियों से की बातचीत


व्यापारियों की मांग पर विधायक ने बिजली विभाग के अधिकारियों से बातचीत की। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, उन्होंने पंडाल के ऊपर से गुजर रहे बिजली के तारों की सुरक्षा के लिए केबलिंग कराने तथा आवश्यक कार्रवाई करने को कहा।

विधायक की ओर से आश्वासन मिलने के बाद व्यापारियों ने अपनी-अपनी दुकानें खोल दीं। हालांकि, केबलिंग का कार्य वास्तव में कब शुरू होगा और कब तक पूरा किया जाएगा, इसकी पुष्टि अभी उपलब्ध जानकारी से नहीं होती है।


मौके पर मौजूद रहे प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी


इस दौरान चौरीचौरा के तहसीलदार संजय सिंह, बिजली विभाग के एसडीओ पंकज गुप्ता, पूर्व जेई परमेश्वर लाल, झंगहा थाना प्रभारी अश्वनी चौबे, अवधेश तिवारी, नई बाजार चौकी प्रभारी अशोक कुमार सिंह तथा बोहाबार चौकी प्रभारी अशोक सरोज सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

वहीं, विधायक प्रतिनिधि अमित जायसवाल, रामसेवक निषाद, वीरेंद्र निषाद, रमेश निषाद और सुमित निषाद समेत नई बाजार के व्यापारी गोविंद वर्मा, संतोष उर्फ पकौड़ी गुप्ता, मंटू यादव, संजय, गोलू, सुरेंद्र, जयप्रकाश गुप्ता, राकेश वर्मा, राजेश वर्मा और दुर्गेश गुप्ता सहित अन्य लोग भी उपस्थित रहे।


सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है मामला


बिजली के तारों की सुरक्षा सार्वजनिक स्थलों पर विशेष महत्व रखती है। दुर्गा पूजा पंडाल के ऊपर से बिजली के तार गुजरने की स्थिति में संबंधित विभाग द्वारा स्थल का निरीक्षण और आवश्यक सुरक्षा उपाय सुनिश्चित किया जाना महत्वपूर्ण है।

नई बाजार में व्यापारियों की मांग के बाद अब निगाहें बिजली विभाग की अगली कार्रवाई पर रहेंगी। तारों की सुरक्षित केबलिंग कब तक होगी, यह संबंधित विभाग की ओर से स्पष्ट किया जाना बाकी है।


चौरीचौरा, गोरखपुर से विनोद पासवान की खास रिपोर्ट।


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बलरामपुर में रेलवे ट्रैक पर रुकी ट्रेन का वीडियो सामने आया, गाय फंसने की सूचना

बढ़नी की ओर जाने वाली ट्रेन से जुड़ा बताया जा रहा मामला, घटना के कारण और वर्तमान स्थिति की आधिकारिक पुष्टि का इंतजार

बलरामपुर। जिले में रेलवे ट्रैक पर ट्रेन के रुकने से जुड़ा एक वीडियो सामने आया है। प्राप्त जानकारी में दावा किया जा रहा है कि ट्रैक पर गाय फंसने के कारण बढ़नी की ओर जाने वाली डेमू ट्रेन रुकी थी। हालांकि, घटना के सटीक स्थान, ट्रेन के ठहराव की वजह और गाय की स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है।


वीडियो को लेकर सामने आई जानकारी


उपलब्ध वीडियो में रेलवे ट्रैक पर ट्रेन रुकी हुई दिखाई देती है। इस दृश्य को लेकर जानकारी दी जा रही है कि घटना के दौरान ट्रैक पर एक गाय फंस गई थी। लेकिन केवल वीडियो के आधार पर घटना की पूरी परिस्थितियों, उसके कारणों या रेलवे परिचालन पर पड़े असर की पुष्टि नहीं की जा सकती।


रेलवे की आधिकारिक जानकारी महत्वपूर्ण


घटना के संबंध में ट्रेन का सही विवरण, ठहराव की अवधि और परिचालन सामान्य होने की स्थिति जानने के लिए रेलवे के अधिकृत अधिकारियों की पुष्टि जरूरी है। गाय को सुरक्षित निकाला गया या नहीं, इसकी जानकारी भी आधिकारिक पुष्टि के बाद ही दी जा सकती है।


यात्रियों की सुरक्षा सर्वोपरि


रेलवे ट्रैक पर किसी पशु के फंसने की स्थिति में यात्रियों और रेल परिचालन की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण होती है। आम लोगों को ट्रैक पर उतरने या ट्रेन के नीचे जाकर पशु को निकालने का प्रयास नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में रेलवे कर्मचारियों और अधिकृत अधिकारियों को ही आवश्यक कार्रवाई करनी चाहिए।


निष्कर्ष: फिलहाल बलरामपुर में ट्रेन के रुकने और गाय फंसने से संबंधित जानकारी की पुष्टि की आवश्यकता है। रेलवे से आधिकारिक जानकारी मिलने के बाद घटना की स्थिति और परिचालन पर पड़े असर का स्पष्ट विवरण सामने आ सकेगा।


FT News Digital — सत्यापित तथ्यों के साथ जिम्मेदार पत्रकारिता।

बढ़नी और शोहरतगढ़ में बनेंगे बस स्टेशन, कैबिनेट की मंजूरी से जगी उम्मीद

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सिद्धार्थनगर। जिले के बढ़नी और शोहरतगढ़ क्षेत्र में रोडवेज बस स्टेशन निर्माण की उम्मीदों को नई ताकत मिली है। उत्तर प्रदेश सरकार की कैबिनेट से भूमि हस्तांतरण के प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद अब लोगों की निगाहें परियोजना के धरातल पर उतरने पर टिकी हैं। यह पहल आगे बढ़ती है तो स्थानीय यात्रियों, व्यापारियों और सीमावर्ती क्षेत्र में आवागमन करने वाले लोगों को बेहतर परिवहन सुविधाएं मिलने की संभावना है।

 

कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब निर्माण की बारी

 

बढ़नी और शोहरतगढ़ में बस स्टेशन निर्माण को लेकर सामने आए घटनाक्रम ने जिले की परिवहन व्यवस्था को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सितंबर 2026 में हुई उत्तर प्रदेश कैबिनेट की बैठक में सिद्धार्थनगर के बढ़नी और शोहरतगढ़ तथा हरदोई जिले के सवायजपुर में बस स्टेशन निर्माण के लिए राजस्व विभाग की भूमि परिवहन विभाग को निःशुल्क हस्तांतरित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई थी।

 

इस निर्णय से परियोजना को आगे बढ़ाने का रास्ता खुला है। हालांकि, भूमि हस्तांतरण की मंजूरी मिलने के बाद भी निर्माण के लिए जरूरी औपचारिकताएं, वित्तीय स्वीकृति और कार्य शुरू होने की स्थिति अलग-अलग चरण हैं। इसलिए अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल है कि दोनों स्थानों पर निर्माण कार्य कब शुरू होगा।


दस्तावेज में दर्ज है 3.75 करोड़ रुपये का कुल आंकड़ा


उपलब्ध दस्तावेज के अंश में बढ़नी बस स्टेशन के नवनिर्माण के सामने 250 लाख रुपये तथा शोहरतगढ़ बस स्टेशन के सामने 125 लाख रुपये की राशि दर्ज दिखाई देती है।


इन दोनों राशियों को जोड़ने पर कुल आंकड़ा 375 लाख रुपये यानी 3.75 करोड़ रुपये होता है।


हालांकि, दस्तावेज के उपलब्ध हिस्से से यह स्पष्ट नहीं होता कि ये राशियां अंतिम स्वीकृत परियोजना लागत हैं, बजट प्रावधान हैं या किसी अन्य वित्तीय मद से संबंधित हैं। ऐसे में इन्हें अंतिम निर्माण लागत बताने से पहले संबंधित शासनादेश और वित्तीय स्वीकृति की पुष्टि आवश्यक है।


बढ़नी के लिए क्यों महत्वपूर्ण है बस स्टेशन?


नेपाल सीमा से सटे बढ़नी में स्थानीय आवागमन और सीमावर्ती क्षेत्र से जुड़ी गतिविधियों के कारण सार्वजनिक परिवहन का विशेष महत्व है। व्यवस्थित बस स्टेशन बनने से यात्रियों को बसों के इंतजार के लिए बेहतर स्थान और परिवहन संचालन को व्यवस्थित करने में मदद मिल सकती है।

इसके अलावा, बस स्टेशन की बेहतर व्यवस्था से स्थानीय बाजारों और आसपास के क्षेत्रों में आने-जाने वाले यात्रियों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है। हालांकि, इन सुविधाओं का वास्तविक स्वरूप निर्माण की स्वीकृत योजना और संचालन व्यवस्था पर निर्भर करेगा।


शोहरतगढ़ में भी यात्रियों को राहत की उम्मीद


शोहरतगढ़ क्षेत्र के लोगों के लिए भी बस स्टेशन निर्माण की योजना महत्वपूर्ण मानी जा रही है। व्यवस्थित बस स्टेशन बनने से यात्रियों को सुविधाजनक स्थान उपलब्ध कराने और बसों के संचालन को बेहतर ढंग से व्यवस्थित करने में सहायता मिल सकती है।

कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब स्थानीय लोगों की अपेक्षा है कि संबंधित विभाग आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी कर परियोजना को आगे बढ़ाएं। निर्माण की समयसीमा और प्रस्तावित सुविधाओं को लेकर आधिकारिक जानकारी सामने आने पर तस्वीर और स्पष्ट होगी।


अब आगे क्या?


इस परियोजना में तीन प्रमुख बिंदु महत्वपूर्ण हैं—भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया की स्थिति, निर्माण के लिए अंतिम वित्तीय स्वीकृति और काम शुरू होने की संभावित तारीख।

यदि इन प्रक्रियाओं को पूरा कर निर्माण शुरू किया जाता है, तो यह जिले की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।

निष्कर्ष: बढ़नी और शोहरतगढ़ में बस स्टेशन निर्माण के लिए भूमि हस्तांतरण संबंधी प्रस्ताव को कैबिनेट की मंजूरी मिलना महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। अब परियोजना की वास्तविक प्रगति और यात्रियों को मिलने वाली सुविधाओं का आकलन निर्माण संबंधी आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही किया जा सकेगा।

सिद्धार्थनगर में दो संदिग्ध मौतें, दोनों मामलों में जवाब का इंतजार! आखिर जांच कहां तक पहुंची?

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सोनवल में पोखरी के पास मिला एमआर राहुल कुमार का शव, गोनहा में हाईटेंशन टावर पर मिला राजन का शव; मौतों की वजह और घटनाक्रम पर उठ रहे सवाल

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सिद्धार्थनगर/जोगिया। जिले के जोगिया क्षेत्र में सामने आए दो अलग-अलग मौत के मामलों ने कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। एक मामले में सोनवल गांव के पास गड्ढे में मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव (एमआर) राहुल कुमार का शव मिला था, जबकि दूसरे मामले में गोनहा गांव के बाहर बिजली के हाईटेंशन टावर पर 18 वर्षीय राजन का शव लटका मिला। दोनों घटनाओं की परिस्थितियां अलग हैं, लेकिन दोनों मामलों में मौत की वास्तविक वजह और घटनाक्रम को लेकर स्पष्ट, सार्वजनिक रूप से पुष्ट निष्कर्ष सामने आना जरूरी है।

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राहुल कुमार के मामले में प्रकाशित समाचारों के अनुसार, पोस्टमार्टम से मौत का कारण स्पष्ट नहीं हुआ था और बिसरा सुरक्षित रखा गया था। वहीं, राजन के मामले में 14 अक्टूबर को प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट की प्रतीक्षा कर रही थी। ऐसे में सवाल यह है कि दोनों मामलों में जांच की वर्तमान स्थिति क्या है, किन साक्ष्यों की पड़ताल की गई है और परिजनों की आशंकाओं के समाधान के लिए आगे क्या कदम उठाए जा रहे हैं?


पहला मामला: सोनवल में मिला एमआर राहुल कुमार का शव, मौत की वजह पर स्पष्टता नहीं


जोगिया कोतवाली क्षेत्र के सोनवल गांव के पास बाग में स्थित गड्ढे में 11 सितंबर 2026 को राहुल कुमार (38) का शव मिलने की खबर सामने आई थी। राहुल के लापता होने के बाद परिवार उनकी तलाश कर रहा था। समाचार रिपोर्टों के अनुसार, घटनास्थल के आसपास उनकी बाइक मिलने की जानकारी भी सामने आई थी।

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12 सितंबर को प्रकाशित रिपोर्ट में बताया गया कि पोस्टमार्टम में मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो सका और चिकित्सकों ने बिसरा सुरक्षित किया। इसके बाद 27 सितंबर की रिपोर्ट में भी मौत की वजह स्पष्ट न होने की बात प्रकाशित हुई। रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस हत्या और हादसे समेत विभिन्न संभावनाओं को ध्यान में रखकर जांच कर रही थी।

यहां सबसे अहम सवाल है कि बिसरा जांच की रिपोर्ट प्राप्त हुई या नहीं? राहुल के लापता होने, उनकी बाइक और शव मिलने की परिस्थितियों के बीच क्या संबंध सामने आया? क्या घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्यों और अन्य उपलब्ध तथ्यों का परीक्षण पूरा हुआ?

इन सवालों के जवाब संबंधित जांच अभिलेखों और पुलिस के आधिकारिक पक्ष से ही स्पष्ट हो सकते हैं। उपलब्ध प्रकाशित जानकारी के आधार पर किसी अपराध या दुर्घटना को अंतिम निष्कर्ष मानना उचित नहीं होगा।


दूसरा मामला: दुर्गा पूजा पंडाल जाने की बात कहकर निकला राजन, सुबह टावर पर मिला शव


दूसरी घटना जोगिया कोतवाली क्षेत्र के गोनहा गांव की है। प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, 18 वर्षीय राजन सोमवार शाम घर से निकला था। परिजनों के मुताबिक, उसने गांव में दुर्गा पूजा पंडाल जाने की बात कही थी, लेकिन रात में वापस नहीं लौटा। मंगलवार सुबह गांव के बाहर बिजली के हाईटेंशन टावर पर उसका शव दुपट्टे के सहारे लटका मिला।

पुलिस ने शव को नीचे उतरवाकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा था। परिजनों ने हत्या की आशंका जताई थी, हालांकि प्रकाशित रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि उस समय तक पुलिस को कोई लिखित शिकायत नहीं दी गई थी।


इस मामले में भी कुछ प्रश्नों का उत्तर मिलना जरूरी है। राजन घर से निकलने के बाद कहां गया? रात के दौरान उसकी गतिविधियों के बारे में क्या जानकारी मिली? घटनास्थल से कौन-कौन से साक्ष्य जुटाए गए? पोस्टमार्टम रिपोर्ट में क्या निष्कर्ष सामने आए?


इनका उत्तर जांच के वास्तविक निष्कर्षों से ही मिल सकता है। केवल शव मिलने की परिस्थितियों के आधार पर हत्या या आत्महत्या का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

 

दोनों मामलों में पुलिस से पूछे जाने चाहिए ये सीधे सवाल

 

दोनों घटनाओं की गंभीरता को देखते हुए संबंधित पुलिस अधिकारियों से निम्न बिंदुओं पर तथ्यात्मक जानकारी मांगी जानी चाहिए:

 

1. जांच की वर्तमान स्थिति क्या है?

राहुल कुमार और राजन के मामलों में अब तक कौन-कौन से जांच कदम पूरे किए गए हैं और कौन-से महत्वपूर्ण बिंदु अभी लंबित हैं?

 

2. चिकित्सकीय और फॉरेंसिक रिपोर्ट का क्या हुआ?

राहुल के मामले में सुरक्षित किए गए बिसरा की रिपोर्ट प्राप्त हुई या नहीं? राजन के मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट आई या नहीं? यदि रिपोर्ट लंबित है, तो वर्तमान स्थिति क्या है?

 

3. घटनास्थल और अंतिम गतिविधियों की पड़ताल कितनी आगे बढ़ी?

दोनों मामलों में उपलब्ध भौतिक साक्ष्य, संबंधित व्यक्तियों के बयान, घटनास्थल की परिस्थितियों और अन्य प्रासंगिक तथ्यों का परीक्षण किस स्तर तक पहुंचा है?

 

4. परिजनों को जांच की जानकारी कैसे दी जा रही है?

क्या परिजनों की आशंकाओं और उनके पास उपलब्ध जानकारी को जांच में शामिल किया गया है? क्या उन्हें मामले की प्रगति के बारे में उचित जानकारी मिल रही है?

 

5. आगे की कार्रवाई की समय-सीमा क्या है?

क्या जांच में किसी विशेषज्ञ या फॉरेंसिक सहायता की जरूरत है? लंबित रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए क्या प्रक्रिया अपनाई जाएगी?

 

इन सवालों का उद्देश्य किसी अधिकारी पर आरोप लगाना नहीं, बल्कि मामलों की स्थिति स्पष्ट करना और जनहित में जवाबदेही सुनिश्चित करना है।

 

प्रशासनिक जवाबदेही: सिर्फ जांच जारी होने की सूचना नहीं, प्रगति भी महत्वपूर्ण

 

किसी संदिग्ध मौत की जांच में समय लग सकता है। चिकित्सकीय रिपोर्ट, बिसरा परीक्षण, परिस्थितिजन्य साक्ष्य और गवाहों के बयान जैसे पहलू जांच की दिशा तय कर सकते हैं। इसलिए केवल देरी के आधार पर पुलिस की निष्क्रियता का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है।

 

लेकिन जनहित में यह जानना भी जरूरी है कि जांच किस दिशा में आगे बढ़ रही है, कौन-से तथ्य स्थापित हो चुके हैं और कौन-से प्रश्न अभी अनुत्तरित हैं। जहां रिपोर्ट लंबित हो, वहां उसकी स्थिति स्पष्ट की जा सकती है; जहां साक्ष्य मिलें, वहां कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जा सकती है।

 

राहुल कुमार के मामले में बिसरा रिपोर्ट की स्थिति और राजन के मामले में पोस्टमार्टम निष्कर्ष की पुष्टि इसीलिए महत्वपूर्ण है। दोनों मामलों के बीच कोई संबंध है, ऐसा मानने का फिलहाल कोई पुष्ट आधार उपलब्ध नहीं है। इनकी जांच अलग-अलग तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर ही होनी चाहिए।

 

संपादकीय टिप्पणी: हर संदिग्ध मौत में सच सामने आना जरूरी

 

दो परिवारों का दुख और उनकी चिंताएं किसी भी समाज के लिए गंभीर विषय हैं। पत्रकारिता का दायित्व केवल घटनाओं की सूचना देना नहीं, बल्कि उन सवालों को भी सामने लाना है जिनका उत्तर जनता जानना चाहती है।

 

सोनवल में राहुल कुमार की मौत और गोनहा में राजन की मौत के मामलों में प्राथमिकता यही होनी चाहिए कि उपलब्ध साक्ष्यों की निष्पक्ष जांच हो, चिकित्सकीय निष्कर्षों की स्थिति स्पष्ट की जाए और यदि किसी अपराध के पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं, तो कानून के अनुसार कार्रवाई हो।

 

सवाल किसी को पहले से दोषी ठहराने का नहीं, सवाल है—दोनों मामलों में जांच की वास्तविक स्थिति क्या है और मौतों की वजह स्पष्ट करने के लिए अब तक क्या-क्या किया गया है?

 

जनपद पुलिस और संबंधित अधिकारियों से अपेक्षा है कि वे तथ्यों के आधार पर दोनों मामलों की वर्तमान स्थिति स्पष्ट करें, ताकि परिजनों की चिंताओं का समाधान हो और जनता तक सत्यापित जानकारी पहुंचे।

 

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