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सदर विधायक अदिति सिंह  ने 1करोड़ 30 लाख की लागत से 1.50 किमी इंटरलॉकिंग सड़क निर्माण कार्य का किया शिलान्यास

 

रायबरेली। सदर विधानसभा क्षेत्र के विकास को गति प्रदान करते हुए सदर विधायक श्रीमती अदिति सिंह  द्वारा विकास खंड राही के ग्राम सभा सनही में महत्वपूर्ण सड़क निर्माण कार्य का शिलान्यास किया गया।

इस अवसर पर ग्राम सनही में सेमनाथ पासी के घर से महारानी चबूतरा होते हुए सलोन रोड तक बनने वाली इंटरलॉकिंग सड़क के निर्माण कार्य का शुभारंभ विधि-विधान के साथ किया गया।

यह सड़क निर्माण कार्य त्वरित आर्थिक विकास योजना के अंतर्गत कराया जा रहा है, जिसकी अनुमानित लागत 130.33 लाख रुपये है। सड़क की कुल लंबाई 1.50 किलोमीटर है।

सदर विधायक अदिति सिंह जी ने कहा कि क्षेत्र के प्रत्येक गांव में बेहतर आवागमन व्यवस्था उपलब्ध कराना उनकी प्राथमिकता है। सड़क निर्माण से ग्रामीणों को आवागमन में सुविधा मिलेगी तथा क्षेत्र के विकास को नई गति प्राप्त होगी।

इस दौरान क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि, विभागीय अधिकारी एवं बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण उपस्थित रहे।

*सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने राजकीय सम्प्रेषण गृह का किया निरीक्षण*

 

रायबरेली उ०प्र० राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ तथा मा० जनपद न्यायाधीश/अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अमित पाल सिंह के निर्देशानुसार सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, रायबरेली अनिशा के राजकीय सम्प्रेक्षण गृह, रायबरेली का निरीक्षण किया गया।
सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के द्वारा आवासित बच्चों को उनके अधिकारों के सम्बन्ध में जागरुक किया गया। सचिव द्वारा निर्देशित किया गया कि आवासित बच्चों को समय से दवा, खाना उनके दैनिक उपयोग की वस्तुओं को समय से उपलब्ध कराया जाए। सचिव द्वारा इस अवसर पर बच्चों को बताया गया कि कैसे आप अपने अधिकारों के प्रति सचेत रहे।
इस अवसर पर बच्चों को उनके निःशुल्क अधिकारों के विषय पर जानकारी दी गई एवं बताया गया कि किसी भी प्रकार की निःशुल्क विधिक सहायता के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण रायबरेली के कार्यालय में किसी कार्य दिवस में उपस्थित होकर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
शिविर व निरीक्षण के दौरान प्रधान मजिस्ट्रेट किशोर न्याय बोर्ड श्रेया सोलंकी, जिला प्रोबेशन अधिकारी शक्ति त्रिपाठी, डिप्टी लीगल एड डिफेन्स काउंसिंल जय सिंह यादव व पराविधिक स्वयं सेवक पवन कुमार श्रीवास्तव उपस्थित रहे।

निर्जला एकादशी पर त्रिवेणी संगम में उमड़ा आस्था का महासैलाब

 

हजारों श्रद्धालुओं ने लगाई पुण्य की डुबकी, सुख-समृद्धि और विश्व शांति की कामना


प्रयागराज। निर्जला एकादशी के पावन अवसर पर गुरुवार को तीर्थराज प्रयागराज स्थित त्रिवेणी संगम में आस्था का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। सुबह से ही हजारों श्रद्धालु संगम तट पर पहुंचने लगे और गंगा, यमुना तथा अदृश्य सरस्वती के पावन संगम में स्नान कर धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया।

श्रद्धालुओं ने स्नान के बाद भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य, देश की उन्नति और विश्व शांति की मंगलकामना की। संगम क्षेत्र पूरे दिन श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण से सराबोर रहा। श्रद्धालुओं के जयघोष और भजन-कीर्तन से पूरा क्षेत्र भक्तिमय बना रहा।

निर्जला एकादशी को सनातन परंपरा में अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत, दान और स्नान का विशेष महत्व है। इसी कारण दूर-दराज़ के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु संगम पहुंचे।

श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा, यातायात, स्वच्छता तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित कीं। संगम क्षेत्र में तैनात सुरक्षा कर्मी लगातार व्यवस्था बनाए रखने में जुटे रहे, जिससे श्रद्धालुओं को सुचारु रूप से स्नान और दर्शन करने में सुविधा मिल सके।

इनसेट


एकादशी का महत्व धार्मिक मान्यताओं के अनुसार निर्जला एकादशी वर्ष की प्रमुख एकादशियों में मानी जाती है। इस दिन व्रत, स्नान, दान और भगवान विष्णु की आराधना का विशेष महत्व बताया गया है।


निर्जला एकादशी पर प्रयागराज के त्रिवेणी संगम में हजारों श्रद्धालुओं ने पवित्र स्नान कर पूजा-अर्चना की और सुख-समृद्धि व विश्व शांति की प्रार्थना की।

सारांश

निर्जला एकादशी पर संगम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़।

गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम में किया पवित्र स्नान।

पूजा-अर्चना कर परिवार की खुशहाली और विश्व शांति की कामना।

प्रशासन ने सुरक्षा एवं अन्य व्यवस्थाएं सुनिश्चित कीं।

 

*पीएम आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत निर्मित आवासीय भवनों का जिलाधिकारी ने किया निरीक्षण* *अवशेष कार्य शीघ्र पूर्ण कराने के निर्देश*

 

 

 

रायबरेली  जिलाधिकारी सरनीत कौर ब्रोका द्वारा आज रायबरेली विकास प्राधिकरण (RDA) के माध्यम से बरखापुर में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत निर्मित बहुमंजिला आवासीय भवनों का स्थलीय निरीक्षण किया गया।

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने परिसर व बिल्डिंग का अवलोकन करते हुवे निर्माण गुणवत्ता एवं मूलभूत सुविधाओं का गहनता से जायजा लिया। उन्होंने भवनों के बाहरी एवं आंतरिक हिस्सों का निरीक्षण करते हुए पाया कि कुछ कार्य अभी भी अवशेष हैं।

जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि बाहरी एवं आंतरिक जो भी कार्य शेष हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर यथाशीघ्र पूर्ण कराया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता के साथ किसी भी प्रकार का समझौता न किया जाए तथा सभी कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप ही संपन्न हों।

उन्होंने परियोजना से जुड़े विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के निर्देश देते हुए कहा कि समयबद्ध ढंग से कार्य पूर्ण कराकर योजना के उद्देश्यों को सफल बनाया जाए। साथ ही, उन्होंने आवासीय परिसर में साफ-सफाई, पेयजल, विद्युत एवं अन्य आधारभूत सुविधाओं को भी सुनिश्चित करने पर बल दिया।

निरीक्षण के दौरान सचिव, रायबरेली विकास प्राधिकरण/अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) विशाल यादव, अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) सिद्धार्थ सहित लोक निर्माण विभाग, विद्युत विभाग, जल निगम (शहरी) एवं नगर पालिका के संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

रायबरेली द्वारा संत बाबा करतार सिंह मेमोरियल चैरिटेबल होमो हॉस्पिटल का संचालन .लगभग 28 वर्षों से किया जा रहा है जिसमें डॉ राजीव सिंह व प्रभात श्रीवास्तव प्रतिदिन निशुल्क परामर्श देते हैं यह होम्यो हॉस्पिटल गुरुद्वारा गुरु नानक नगरमें चलाया जा रहा है दिनांक 23 जून मंगलवार को एक निशुल्क होम्योपैथिक व एलोपैथिक स्वास्थ्य शिविर का आयोजन गुरुद्वारा गुरु सिंह सभा द्वारा किया गया

गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा गुरु नानक नगर रायबरेली द्वारा संत बाबा करतार सिंह मेमोरियल चैरिटेबल होमो हॉस्पिटल का संचालन .लगभग 28 वर्षों से किया जा रहा है जिसमें डॉ राजीव सिंह व प्रभात श्रीवास्तव प्रतिदिन निशुल्क परामर्श देते हैं यह होम्यो हॉस्पिटल गुरुद्वारा गुरु नानक नगरमें चलाया जा रहा है दिनांक 23 जून मंगलवार को एक निशुल्क होम्योपैथिक व एलोपैथिक स्वास्थ्य शिविर का आयोजन गुरुद्वारा गुरु सिंह सभा द्वारा किया गया Read More रायबरेली द्वारा संत बाबा करतार सिंह मेमोरियल चैरिटेबल होमो हॉस्पिटल का संचालन .लगभग 28 वर्षों से किया जा रहा है जिसमें डॉ राजीव सिंह व प्रभात श्रीवास्तव प्रतिदिन निशुल्क परामर्श देते हैं यह होम्यो हॉस्पिटल गुरुद्वारा गुरु नानक नगरमें चलाया जा रहा है दिनांक 23 जून मंगलवार को एक निशुल्क होम्योपैथिक व एलोपैथिक स्वास्थ्य शिविर का आयोजन गुरुद्वारा गुरु सिंह सभा द्वारा किया गया

“गिरई मछली पर बड़ा खुलासा! 400 मछलियों की जांच में मिले परजीवी, वैज्ञानिकों ने बताया कितना है खतरा?”

🔹 गोरखपुर विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने देवरिया और सुल्तानपुर के जलाशयों से प्राप्त लगभग 400 गिरई मछलियों पर शोध किया।

🔹 अध्ययन में मछलियों के शरीर में विभिन्न प्रकार के परजीवी जीवों की मौजूदगी दर्ज की गई।

🔹 शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि ये परजीवी प्राकृतिक जलीय पारिस्थितिकी तंत्र का सामान्य हिस्सा हैं।

🔹 विशेषज्ञों ने मछली को अच्छी तरह साफ कर पूर्ण रूप से पकाकर खाने की सलाह दी है।

🔹 शोध के निष्कर्ष प्रतिष्ठित वैज्ञानिक जर्नल में प्रकाशित किए गए हैं।


गिरई मछली पर गोरखपुर विश्वविद्यालय की अहम रिसर्च: जांच में मिले परजीवी, वैज्ञानिकों ने बताया क्या है असली सच

गोरखपुर/देवरिया/सुल्तानपुर।

पूर्वांचल के नदी-तालाबों में मिलने वाली लोकप्रिय गिरई मछली को लेकर एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक अध्ययन सामने आया है। गोरखपुर विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए विस्तृत अध्ययन में देवरिया और सुल्तानपुर जनपद के विभिन्न प्राकृतिक जल स्रोतों से प्राप्त लगभग 400 गिरई मछलियों की जांच की गई। शोध के दौरान मछलियों में पाए जाने वाले विभिन्न प्रकार के परजीवी जीवों (पैरासाइट्स) का वैज्ञानिक विश्लेषण किया गया।

शोध में यह तथ्य सामने आया कि मछलियों में पाए गए परजीवी जीव प्राकृतिक जलीय पर्यावरण का सामान्य हिस्सा हैं और इनकी मौजूदगी किसी असामान्य या अचानक उत्पन्न हुई स्थिति का संकेत नहीं मानी जा सकती। अध्ययन में दोनों जिलों के जल स्रोतों में परजीवियों की स्थिति लगभग समान पाई गई, जिससे क्षेत्रीय जलीय पारिस्थितिकी तंत्र के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई।

 क्या कहती है रिसर्च?

वैज्ञानिकों के अनुसार परजीवी जीव जल स्रोतों के प्राकृतिक जीवन चक्र का हिस्सा होते हैं। इनकी मौजूदगी से सीधे तौर पर किसी बड़े स्वास्थ्य संकट की पुष्टि नहीं होती। शोध का उद्देश्य मछलियों में परजीवी समुदायों की संरचना, उनकी विविधता तथा जलीय पारिस्थितिकी तंत्र पर उनके प्रभाव को समझना था।

अध्ययन में यह भी देखा गया कि प्राकृतिक जल स्रोतों में रहने वाली मछलियों में ऐसे परजीवी समय-समय पर पाए जाते हैं और यह जलीय जैव विविधता का एक सामान्य पहलू है।

लोगों के लिए क्या है सलाह?

शोधकर्ताओं और विशेषज्ञों ने आम लोगों को सलाह दी है कि किसी भी मछली को खाने से पहले उसे अच्छी तरह साफ किया जाए तथा पर्याप्त तापमान पर पूरी तरह पकाकर ही सेवन किया जाए। खाद्य सुरक्षा के सामान्य मानकों का पालन करने से संभावित स्वास्थ्य जोखिमों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

वैज्ञानिक दृष्टि से क्यों महत्वपूर्ण है यह अध्ययन?

विशेषज्ञों का मानना है कि यह शोध पूर्वांचल के नदी और तालाब आधारित जलीय संसाधनों की स्थिति समझने में उपयोगी साबित होगा। साथ ही यह अध्ययन मछलियों के स्वास्थ्य, जल गुणवत्ता और जैव विविधता से जुड़े भविष्य के शोध कार्यों के लिए भी आधार प्रदान करेगा।

शोध के निष्कर्षों का प्रतिष्ठित वैज्ञानिक जर्नल में प्रकाशित होना इसकी वैज्ञानिक विश्वसनीयता को और मजबूत बनाता है।

🖋️ संपादकीय टिप्पणी

यह समाचार उपलब्ध वैज्ञानिक अध्ययन और शोध निष्कर्षों पर आधारित है। रिपोर्ट में कहीं भी किसी स्वास्थ्य आपदा या जनस्वास्थ्य संकट की घोषणा नहीं की गई है। विशेषज्ञों द्वारा केवल सामान्य खाद्य सुरक्षा संबंधी सावधानियां बरतने की सलाह दी गई है। इसलिए इस अध्ययन को जागरूकता और वैज्ञानिक जानकारी के रूप में देखा जाना चाहिए, न कि भय या भ्रम फैलाने वाली खबर के रूप में।

 

_*लखनऊ की घटना के बाद जनपद में कोचिंग संस्थानों का सघन निरीक्षण*_ _*अपर जिलाधिकारी (प्रशासन), अपर पुलिस अधीक्षक एवं सचिव रायबरेली विकास प्राधिकरण ने सुरक्षा व्यवस्थाओं का लिया जायजा*_

 

 

 

रायबरेली  जनपद लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में एक कोचिंग संस्थान में आग लगने की दर्दनाक घटना का संज्ञान लेते हुए जनपद रायबरेली में सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से व्यापक स्तर पर निरीक्षण अभियान चलाया गया।

जिलाधिकारी सरनीत कौर ब्रोका के निर्देश पर अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) सिद्धार्थ एवं अपर पुलिस अधीक्षक आलोक सिंह, अपर जिलाधिकारी न्यायिक/सचिव रायबरेली विकास प्राधिकरण विशाल कुमार यादव द्वारा संयुक्त रूप से जनपद के विभिन्न कोचिंग संस्थानों का औचक निरीक्षण कर वहां उपलब्ध सुरक्षा व्यवस्थाओं का गहन परीक्षण किया गया।

निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने संस्थानों में अग्निशमन यंत्रों (फायर एक्सटिंग्विशर) की उपलब्धता एवं उनकी कार्यशीलता, आपातकालीन निकास द्वार (इमरजेंसी एग्जिट), विद्युत वायरिंग की स्थिति, भवन की संरचनात्मक सुरक्षा तथा विद्यार्थियों की संख्या के अनुरूप व्यवस्थाओं का बारीकी से अवलोकन किया।

अधिकारियों ने पाया कि कई संस्थानों में सुरक्षा मानकों का पूर्ण रूप से अनुपालन नहीं किया जा रहा है। इस पर उन्होंने संबंधित संचालकों को तत्काल आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए तथा स्पष्ट चेतावनी दी कि लापरवाही पाए जाने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी, इसके साथ ही रायबरेली विकास प्राधिकरण द्वारा 12 कोचिंग संस्थान/लाइब्रेरी भी सील किए गए।

जिलाधिकारी ने कहा कि विद्यार्थियों की सुरक्षा सर्वाेच्च प्राथमिकता है और किसी भी प्रकार की उदासीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने सभी कोचिंग संचालकों को निर्देशित किया कि वे अग्नि सुरक्षा से जुड़े सभी मानकों का अनिवार्य रूप से पालन सुनिश्चित करें तथा समय-समय पर मॉक ड्रिल का आयोजन भी कराएं।

अपर पुलिस अधीक्षक ने कहा कि सुरक्षा के दृष्टिगत भीड़-भाड़ वाले संस्थानों में विशेष सतर्कता बरतना आवश्यक है। उन्होंने कोचिंग संचालकों को सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था सुदृढ़ करने तथा आपात स्थिति में त्वरित सूचना प्रणाली विकसित करने के निर्देश दिए।

अधिकारियों ने यह भी निर्देशित किया कि सभी संस्थान अपने यहां अग्निशमन विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (छव्ब्) प्राप्त करें एवं भवन मानकों के अनुरूप व्यवस्थाएं सुनिश्चित करें।

जनपद प्रशासन द्वारा यह स्पष्ट किया गया कि इस प्रकार के निरीक्षण आगे भी निरंतर जारी रहेंगे, जिससे विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और भविष्य में किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

इस अवसर पर उप जिलाधिकारी सदर गौतम सिंह, डिप्टी कलेक्टर सचिन यादव, फायर सेफ्टी ऑफिसर, अधिशासी अधिकारी नगर पालिका सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहें।

गोरखपुर ट्रिपल मर्डर से सनसनी: भाई, भाभी और मासूम भतीजे की हत्या, छोटे भाई पर आरोप

गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जनपद के बांसगांव थाना क्षेत्र में सोमवार तड़के सामने आए एक दर्दनाक तिहरे हत्याकांड ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया। एक ही परिवार के तीन सदस्यों के शव मिलने से क्षेत्र में हड़कंप मच गया। पुलिस ने मामले में मृतक के छोटे भाई को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।


बांसगांव थाना क्षेत्र में तिहरे हत्याकांड से सनसनी

भाई, भाभी और तीन वर्षीय मासूम की मौत

छोटे भाई पर हत्या का आरोप

पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लिया

हत्या में प्रयुक्त हथियार बरामद होने का दावा

पारिवारिक विवाद और प्रताड़ना की जांच जारी

सारांश

गोरखपुर के बांसगांव क्षेत्र में एक परिवार के तीन लोगों की हत्या का मामला सामने आया है। मृतकों में पति-पत्नी और उनका तीन वर्षीय पुत्र शामिल हैं। पुलिस के अनुसार प्रारंभिक जांच में पारिवारिक विवाद और कथित प्रताड़ना का पहलू सामने आया है। हालांकि घटना के सभी कारणों की पुष्टि विस्तृत जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही हो सकेगी।


गोरखपुर जिले के बांसगांव थाना क्षेत्र में सोमवार सुबह उस समय सनसनी फैल गई, जब एक घर से एक ही परिवार के तीन सदस्यों के शव बरामद किए गए। सूचना मिलने के बाद पुलिस, फोरेंसिक टीम और वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। मृतकों की पहचान अमित गुप्ता, उनकी पत्नी रंजना गुप्ता और तीन वर्षीय पुत्र रेयांश गुप्ता के रूप में हुई है।

क्या है मामला?

पुलिस के अनुसार तड़के करीब तीन बजे आपातकालीन सेवा 112 पर सूचना प्राप्त हुई थी। मौके पर पहुंची टीम ने घर के भीतर से तीन शव बरामद किए। घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई और पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल फैल गया।

पुलिस की प्रारंभिक जांच में मृतक अमित गुप्ता के छोटे भाई की भूमिका सामने आने की बात कही जा रही है। अधिकारियों के अनुसार आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है तथा उसकी निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त कथित हथियार भी बरामद किया गया है।

जांच में सामने आए प्रारंभिक तथ्य

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक पूछताछ के दौरान आरोपी ने पारिवारिक विवाद और कथित प्रताड़ना से जुड़े कुछ आरोप लगाए हैं। आरोपी का कहना है कि वह लंबे समय से मानसिक तनाव में था। हालांकि पुलिस का स्पष्ट कहना है कि इन दावों की स्वतंत्र रूप से जांच की जा रही है और सभी तथ्यों का सत्यापन किया जाएगा।

जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि घटना किन परिस्थितियों में हुई और इसके पीछे वास्तविक कारण क्या रहे। पुलिस का कहना है कि मामले के प्रत्येक पहलू की गहन विवेचना की जा रही है।

पुलिस की कार्रवाई

मृतक के पिता की तहरीर पर संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। फोरेंसिक साक्ष्य एकत्र किए गए हैं और घटनास्थल की बारीकी से जांच की गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि क्षेत्र में शांति व्यवस्था पूरी तरह सामान्य है तथा किसी भी अफवाह पर ध्यान न देने की अपील की गई है।

सामाजिक सवाल भी खड़े करती है घटना

यह दर्दनाक घटना केवल एक आपराधिक मामला नहीं बल्कि पारिवारिक संबंधों, मानसिक तनाव और संवादहीनता जैसे गंभीर सामाजिक मुद्दों की ओर भी संकेत करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि पारिवारिक विवादों का समय रहते समाधान और मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान कई त्रासदियों को रोक सकता है।

रिपोर्टर सुरक्षा नोट

यह समाचार पुलिस द्वारा साझा की गई प्रारंभिक जानकारी, स्थानीय सूत्रों और उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है। आरोपी के विरुद्ध लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायालय में प्रस्तुत साक्ष्यों और विवेचना रिपोर्ट के आधार पर होगी। समाचार का उद्देश्य केवल तथ्यात्मक जानकारी प्रस्तुत करना है।

रिपोर्ट: धनेश कुमार | FT News Digital संपादन: फ्रेंड टाइम्स न्यूज़ डेस्क

 

लखनऊ अग्निकांड: अवैध व्यावसायिक भवन में भीषण आग, कई लोगों की मौत; सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

लखनऊ। राजधानी लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में स्थित एक बहुमंजिला व्यावसायिक भवन में लगी भीषण आग ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया। हादसे में कई लोगों की मौत होने की सूचना है, जबकि अनेक लोग घायल हुए हैं। प्रशासनिक स्तर पर राहत एवं बचाव कार्य देर रात तक जारी रहा। घटना के बाद भवन की सुरक्षा व्यवस्था, अग्निशमन मानकों और अवैध निर्माण को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं।


अलीगंज क्षेत्र की बहुमंजिला व्यावसायिक इमारत में लगी भीषण आग

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार शॉर्ट सर्किट को माना जा रहा कारण

कई लोगों की मौत और अनेक घायल होने की सूचना

घायलों का उपचार ट्रॉमा सेंटर में जारी

प्रशासन ने जांच के आदेश दिए

भवन की वैधता और अग्नि सुरक्षा व्यवस्था जांच के दायरे में

सारांश

राजधानी लखनऊ के अलीगंज इलाके में सोमवार को एक बहुमंजिला भवन में लगी भीषण आग ने बड़ा हादसा खड़ा कर दिया। आग इतनी तेजी से फैली कि भवन में मौजूद कई लोग बाहर नहीं निकल सके। दमकल विभाग, पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीम ने घंटों तक राहत एवं बचाव अभियान चलाकर लोगों को बाहर निकाला। हादसे के बाद पूरे क्षेत्र में शोक और दहशत का माहौल है।


उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ सोमवार को एक दर्दनाक अग्निकांड की गवाह बनी। अलीगंज क्षेत्र स्थित एक व्यावसायिक भवन में अचानक आग लगने से अफरा-तफरी मच गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आग ने कुछ ही मिनटों में विकराल रूप धारण कर लिया, जिससे भवन के ऊपरी हिस्सों में मौजूद लोग फंस गए। बचाव कार्य के दौरान कई लोगों को बाहर निकाला गया, जबकि कुछ लोगों की जान नहीं बचाई जा सकी।

विस्तृत खबर

जानकारी के अनुसार अलीगंज क्षेत्र में स्थित बहुमंजिला भवन के निचले हिस्से में आग लगने के बाद धुआं तेजी से ऊपरी मंजिलों तक फैल गया। भवन में प्रशिक्षण केंद्र, कार्यालय और अन्य गतिविधियां संचालित होने की बात सामने आई है। अचानक धुआं भर जाने से लोगों को बाहर निकलने में भारी कठिनाई का सामना करना पड़ा।

सूचना मिलते ही पुलिस, अग्निशमन विभाग और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। आग पर काबू पाने के लिए कई दमकल वाहनों को लगाया गया। ऊंचाई पर फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए विशेष हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म और बचाव उपकरणों का उपयोग किया गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कुछ लोगों ने जान बचाने के लिए ऊपरी मंजिलों से बाहर निकलने का प्रयास किया। कई लोगों को गंभीर अवस्था में अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका उपचार जारी है।

हादसे के बाद प्रशासन ने भवन की निर्माण स्वीकृति, अग्नि सुरक्षा प्रमाणपत्र, निकासी मार्ग और अन्य सुरक्षा मानकों की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक स्तर पर आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट बताया जा रहा है, हालांकि अंतिम निष्कर्ष विस्तृत जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा।

प्रशासन और विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी व्यावसायिक भवन में पर्याप्त निकासी मार्ग, फायर अलार्म, अग्निशमन यंत्र और आपातकालीन सुरक्षा व्यवस्था अनिवार्य होती है। प्रारंभिक जानकारी में सामने आया है कि भवन की सुरक्षा व्यवस्था और निकासी व्यवस्था की भी जांच की जा रही है।

प्रशासनिक अधिकारियों ने कहा है कि हादसे के सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

शोक की लहर

हादसे में जान गंवाने वाले अधिकांश लोग छात्र, प्रशिक्षु अथवा कर्मचारी बताए जा रहे हैं। विभिन्न जिलों और राज्यों से आए परिवारों पर इस घटना ने दुखों का पहाड़ तोड़ दिया है। अस्पतालों के बाहर परिजनों की भीड़ और व्याकुलता देर रात तक देखने को मिली।

रिपोर्टर सुरक्षा नोट

यह समाचार उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों, प्रत्यक्षदर्शियों के दावों तथा प्रशासन द्वारा साझा की गई प्रारंभिक जानकारी पर आधारित है। आग लगने के कारण, मृतकों एवं घायलों की अंतिम संख्या तथा जिम्मेदारी संबंधी तथ्यों की आधिकारिक पुष्टि संबंधित जांच रिपोर्ट और प्रशासनिक बयान के आधार पर ही मानी जाएगी।

FT News Digital | Friend Times News Desk

AIIMS रायबरेली में दर्द चिकित्सा ओपीडी (Pain Medicine OPD) का शुभारंभ

 

 

 

 

रायबरेली अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), रायबरेली के एनेस्थीसियोलॉजी एवं क्रिटिकल केयर विभाग द्वारा आज समर्पित दर्द चिकित्सा ओपीडी (Pain Medicine OPD / Pain Clinic) का शुभारंभ किया गया। यह पहल तीव्र एवं दीर्घकालिक दर्द से पीड़ित रोगियों को विशेषज्ञ, समग्र एवं आधुनिक दर्द प्रबंधन सेवाएं प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

 

इस दर्द चिकित्सा ओपीडी का उद्घाटन प्रो. (डॉ.) अमिता जैन, कार्यकारी निदेशक महोदया के करकमलों द्वारा किया गया। इस अवसर पर डॉ. प्रगति गर्ग (डीन परीक्षा), डॉ. अर्चना वर्मा (डीन अनुसंधान), कर्नल अखिलेश सिंह (उप निदेशक प्रशासन), डॉ. कुमार धर्मेन्द्र सिंह, उप चिकित्सा अधीक्षक), डॉ. जमील अब्दुल अलीम (विभागाध्यक्ष, एनेस्थीसियोलॉजी एवं क्रिटिकल केयर), डॉ गिरीश कुमार सिंह, एसोसिएट प्रोफेसर, एनेस्थीसियोलॉजी सहित संस्थान के वरिष्ठ अधिकारी, संकाय सदस्य, रेजिडेंट डॉक्टर, नर्सिंग अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

 

दर्द विश्वभर में विकलांगता एवं जीवन की गुणवत्ता में कमी का एक प्रमुख कारण है। कमर दर्द, गर्दन दर्द, कैंसर जनित दर्द, नसों का दर्द (Neuropathic Pain), जोड़ों एवं मांसपेशियों का दर्द तथा ऑपरेशन के बाद लंबे समय तक बने रहने वाले दर्द जैसी समस्याओं से अनेक रोगी प्रभावित होते हैं।

 

इस ओपीडी में निम्नलिखित सेवाएं उपलब्ध होंगी—

 

• दीर्घकालिक कमर एवं गर्दन दर्द का मूल्यांकन एवं उपचार

• कैंसर जनित दर्द प्रबंधन

• न्यूरोपैथिक दर्द का उपचार

• जोड़ों एवं मांसपेशियों के दर्द का प्रबंधन

• पेलिएटिव केयर में दर्द नियंत्रण

• पोस्ट-सर्जिकल एवं पोस्ट-ट्रॉमेटिक दर्द का उपचार

• जटिल एवं दीर्घकालिक दर्द रोगियों का समग्र मूल्यांकन

 

इसके अतिरिक्त निम्न उन्नत दर्द निवारक तकनीकें एवं प्रक्रियाएं उपलब्ध कराई जाएंगी—

 

• अल्ट्रासाउंड एवं C-Arm निर्देशित दर्द निवारक प्रक्रियाएं

• रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन (RFA)

• मिनिमली इनवेसिव पेन एंड स्पाइन इंटरवेंशन्स (MIPSI)

• पुनर्योजी चिकित्सा (Regenerative Therapy) जैसे PRP, GFC एवं BMAC

• बहुआयामी औषधीय एवं पुनर्वास आधारित दर्द प्रबंधन

 

इस अवसर पर कार्यकारी निदेशक प्रो. (डॉ.) अमिता जैन ने कहा कि समर्पित दर्द चिकित्सा सेवाओं की स्थापना से रोगियों को बेहतर, सुलभ एवं गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध होगा तथा उनके जीवन की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार आएगा। उन्होंने इस पहल को संस्थान में रोगी-केंद्रित एवं सुपरस्पेशियलिटी सेवाओं के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

 

एनेस्थीसियोलॉजी विभाग से एसोसिएट प्रोफेसर, डॉ. गिरीश कुमार सिंह, एमडी डीएम (दर्द चिकित्सा) ने बताया कि दीर्घकालिक दर्द को आज एक स्वतंत्र रोग के रूप में मान्यता प्राप्त है तथा इसके लिए विशेष मूल्यांकन एवं उपचार की आवश्यकता होती है। यह नई ओपीडी रोगियों को वैज्ञानिक, साक्ष्य-आधारित एवं करुणामय दर्द प्रबंधन सेवाएं प्रदान करेगी।

 

दर्द चिकित्सा ओपीडी में नियमित रोगी सेवाएं 23 जून 2026 से प्रारंभ होंगी। यह ओपीडी सप्ताह में तीन दिन संचालित की जाएगी।

 

ओपीडी दिवस

 

मंगलवार एवं शुक्रवार

 

– डॉ. गिरीश कुमार सिंह

– डॉ. अनिल कुमार

 

बुधवार

 

– डॉ. जमील अब्दुल अलीम

– डॉ. अदाबला विजय बाबू

 

यह विशेष ओपीडी रायबरेली एवं आसपास के जनपदों के रोगियों को आधुनिक, सुरक्षित एवं प्रभावी दर्द प्रबंधन सेवाएं उपलब्ध कराएगी। इससे दीर्घकालिक दर्द से पीड़ित रोगियों को विशेषज्ञ परामर्श, उन्नत इंटरवेंशनल प्रक्रियाएं तथा समग्र उपचार एक ही स्थान पर उपलब्ध हो सकेगा, जिससे उनके जीवन की गुणवत्ता में सुधार होगा।

 

एम्स रायबरेली में दर्द चिकित्सा ओपीडी का शुभारंभ संस्थान की रोगी-केंद्रित, बहुविषयक एवं सुपरस्पेशियलिटी स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है तथा यह पूर्वांचल क्षेत्र में दर्द चिकित्सा सेवाओं के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगा।

 

“दर्द से राहत, जीवन में फिर से मुस्कान”

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