हॉस्टल खाली कराने के विरोध में मेडिकल इंटर्नों का प्रदर्शन, दोनों गेटों पर लगाया ताला

सिद्धार्थनगर मेडिकल कॉलेज में शाम से शुरू हुआ विरोध, प्रशासनिक अधिकारियों की बातचीत के बाद शांत हुआ मामला

सिद्धार्थनगर। माधव प्रसाद त्रिपाठी राजकीय मेडिकल कॉलेज में हॉस्टल खाली कराने के मुद्दे को लेकर इंटर्न छात्र-छात्राओं का विरोध प्रदर्शन सामने आया। सोमवार शाम करीब 4:30 बजे शुरू हुआ प्रदर्शन देर शाम तक जारी रहा। विरोध के दौरान छात्रों ने कॉलेज के दोनों प्रवेश द्वारों पर अंदर से ताला लगा दिया, जिससे कुछ समय के लिए परिसर में आवागमन प्रभावित हुआ।
मामले की जानकारी मिलने के बाद प्रशासन और पुलिस के अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने प्रदर्शन कर रहे छात्र-छात्राओं से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं और मामले को शांत कराने का प्रयास किया। बातचीत के बाद छात्रों ने अपना प्रदर्शन समाप्त कर दिया।
हॉस्टल को लेकर नाराजगी
प्रदर्शन कर रहे इंटर्न छात्र-छात्राओं का कहना था कि उन्हें पहले से हॉस्टल में कमरे आवंटित किए गए हैं और वे काफी समय से वहीं रह रहे हैं। अब हॉस्टल खाली कराकर बाहर किराये के कमरों में रहने की बात कहे जाने से छात्रों में नाराजगी है।
छात्रों का कहना था कि यदि उन्हें हॉस्टल से बाहर रहने के लिए कहा जाता है तो उनके ऊपर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। इसी मुद्दे को लेकर छात्रों ने कॉलेज प्रशासन के सामने अपनी आपत्ति दर्ज कराई।
छोटे कमरे में रहने का प्रस्ताव
एक कमरे में चार छात्रों के रहने पर भी सवाल
छात्रों ने आरोप लगाया कि हॉस्टल व्यवस्था को लेकर उन्हें सीमित जगह वाले कमरे में कई छात्रों को रखने का प्रस्ताव दिया जा रहा है। छात्रों के मुताबिक करीब 6×9 फीट के कमरे में चार छात्रों को रखने की बात सामने आई है। उन्होंने इस व्यवस्था को लेकर भी अपनी परेशानी अधिकारियों के सामने रखी।
कमरे छोड़ने को लेकर विवाद
हॉस्टल खाली करें या किराये पर रहें?
छात्रों के मुताबिक पहले से आवंटित कमरों में रहने के बावजूद उन्हें हॉस्टल खाली करने के लिए कहा जा रहा है। छात्रों का कहना था कि बाहर किराये पर रहने से पढ़ाई के साथ आर्थिक दबाव भी बढ़ेगा। इसी बात को लेकर इंटर्न छात्र-छात्राओं ने सामूहिक रूप से विरोध दर्ज कराया।
सुरक्षा और कार्रवाई की चिंता
छात्रों ने अधिकारियों के सामने रखी अपनी बात
प्रदर्शन के दौरान कुछ छात्रों ने यह भी चिंता जताई कि यदि वे अपनी बात रखने के लिए मीडिया अथवा अन्य माध्यमों के सामने आते हैं तो कॉलेज प्रशासन की ओर से उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। छात्रों ने अधिकारियों से उनकी समस्याओं का समाधान कराने की मांग की।
सारांश
सिद्धार्थनगर मेडिकल कॉलेज में हॉस्टल खाली कराने के मुद्दे पर इंटर्न छात्र-छात्राओं ने प्रदर्शन किया। शाम करीब 4:30 बजे शुरू हुए विरोध के दौरान दोनों गेटों पर ताला लगाए जाने की बात सामने आई। सूचना पर प्रशासन और पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे तथा छात्रों से बातचीत की। अधिकारियों के समझाने के बाद प्रदर्शन समाप्त हुआ और छात्र वापस लौट गए।
सिद्धार्थनगर में मेडिकल कॉलेज का हॉस्टल सोमवार शाम अचानक विरोध का केंद्र बन गया। हॉस्टल खाली कराने की बात से नाराज इंटर्न छात्र-छात्राओं ने कॉलेज प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन शुरू कर दिया। मामला इतना बढ़ा कि छात्रों ने दोनों गेटों पर ताला लगा दिया। सूचना मिलते ही प्रशासन और पुलिस के अधिकारी मौके पर पहुंचे और काफी देर तक छात्रों से बातचीत की। आखिरकार समझाइश के बाद मामला शांत हुआ।
प्रदर्शन की सूचना के बाद एसडीएम नौगढ़ और सीओ सदर समेत पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने छात्र-छात्राओं से बातचीत कर उनकी समस्याएं जानीं। इसके साथ ही कॉलेज प्रशासन की ओर से भी छात्रों के साथ संवाद स्थापित करने का प्रयास किया गया।
बाद में अधिकारियों की बातचीत के बाद छात्रों ने प्रदर्शन समाप्त कर दिया और अपने स्तर से वापस लौट गए। प्रशासन की ओर से मामले को सुलझा लिए जाने की बात सामने आई है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि हॉस्टल में कमरों के आवंटन और छात्रों को वहां रहने की व्यवस्था को लेकर कॉलेज प्रशासन आगे क्या निर्णय लेता है, ताकि पढ़ाई कर रहे इंटर्न छात्र-छात्राओं की परेशानी का स्थायी समाधान हो सके।
टिप्पणी | छात्रों की समस्या पर
बातचीत से समाधान ही सबसे बेहतर रास्ता
मेडिकल कॉलेज में प्रशिक्षण ले रहे इंटर्न छात्र-छात्राओं के लिए आवास की व्यवस्था सीधे तौर पर उनकी पढ़ाई और दैनिक जीवन से जुड़ा विषय है। ऐसे मामलों में छात्रों की वास्तविक परेशानी सुनकर प्रशासन और कॉलेज प्रबंधन के बीच संवाद के जरिए समाधान निकालना बेहतर रास्ता हो सकता है। वहीं छात्रों से भी अपेक्षा है कि अपनी मांगों को शांतिपूर्ण और निर्धारित प्रक्रिया के तहत सामने रखें।
FT News Digital की ओर से इस खबर में किसी छात्र, अधिकारी या कॉलेज प्रशासन पर कोई व्यक्तिगत आरोप नहीं लगाया जा रहा है। खबर में सामने आए दावों को संबंधित पक्षों के कथन/उपलब्ध जानकारी के आधार पर प्रस्तुत किया गया है। किसी भी आरोप की स्वतंत्र पुष्टि होने तक उसे तथ्य के रूप में नहीं माना जाना चाहिए।
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