हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर सजा साहित्य का मंच, काव्यगोष्ठी में गूंजी हिंदी की मिठास
प्रमोद चोखानी और प्रो. विमलेश कुमार मिश्र को मिला ‘हिंदी गौरव सम्मान 2026’

गोरखपुर। हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर गोरखपुर में साहित्य, कविता और हिंदी भाषा के प्रति सम्मान का अनूठा संगम देखने को मिला। गोरखपुर लिटरेरी सोसायटी एवं धरोहर मंजरी के संयुक्त तत्वावधान में काव्यगोष्ठी एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में साहित्यकारों और कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से हिंदी की समृद्ध परंपरा, सामाजिक सरोकार और मानवीय संवेदनाओं को स्वर दिया।
समारोह के दौरान वरिष्ठ कवि एवं लेखक प्रमोद चोखानी तथा गोरखपुर विश्वविद्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. विमलेश कुमार मिश्र को ‘हिंदी गौरव सम्मान 2026’ से सम्मानित किया गया। सामाजिक क्षेत्र में योगदान देने वाले कई अन्य लोगों को भी सम्मानित किया गया।

साहित्य के रंग में रंगा समारोह
हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित इस साहित्यिक आयोजन में कविता और विचारों की ऐसी महफिल सजी, जहां हिंदी केवल बोलचाल की भाषा नहीं बल्कि संस्कृति, संस्कार और संवेदना की पहचान के रूप में सामने आई। कवियों की रचनाओं ने श्रोताओं को कभी प्रेम और संवेदना से जोड़ा तो कभी समाज के विभिन्न पहलुओं पर सोचने को मजबूर किया।
हिंदी को लेकर दिखी साहित्यिक प्रतिबद्धता
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए सौहार्द शिरोमणि डॉ. सौरभ पांडेय ने कहा कि हिंदी केवल भाषा नहीं, बल्कि संस्कृति, संस्कार, संवेदना और अभिव्यक्ति की पहचान है।
मुख्य अतिथि हसन जमाल बबुआ भाई ने कविता और साहित्य को समाज का आईना बताते हुए कहा कि एक सच्चा कवि अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज की पीड़ा, प्रेम, संघर्ष, संवेदना और उम्मीद को आवाज देता है।

विशिष्ट अतिथि नवल किशोर नथानी ने हिंदी की सरलता के साथ उसकी समृद्धि और व्यापकता पर विचार रखे।
आरटीआई कार्यकर्ता संजय मिश्रा ने आयोजन को हिंदी साहित्यिक चेतना को आगे बढ़ाने की दिशा में एक सार्थक प्रयास बताया।
सारांश | दो साहित्यकारों को मिला हिंदी गौरव सम्मान
कार्यक्रम के आयोजक मिन्नत गोरखपुरी ने बताया कि समारोह में वरिष्ठ कवि एवं लेखक प्रमोद चोखानी और गोरखपुर विश्वविद्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. विमलेश कुमार मिश्र को ‘हिंदी गौरव सम्मान 2026’ प्रदान किया गया।
सम्मान समारोह के साथ काव्य पाठ का भी आयोजन हुआ। शालिनी सोनी ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत कर कार्यक्रम की शुरुआत की।
इसके बाद ममता ओझा ने अपनी रचना प्रस्तुत की—
“ऐसे उलझा दिया एक पल ने हमें,
हम कठिन हो गए सादगी के लिए।”
गौतम गोरखपुरी ने प्रेम भाव से जुड़ी रचना प्रस्तुत की, जबकि मिन्नत गोरखपुरी ने हिंदी के गौरव को स्वर देते हुए पढ़ा—
“दुनिया की हर जुबां का अपना मुकाम सही,
मगर हिंदी मेरी हिंदुस्तान की शान रखती है।”
इसके अलावा प्रमोद चोखानी, उत्कर्ष श्रीवास्तव, शालिनी सोनी, परी श्रीवास्तव, किशन पाठक और करन पांडेय सहित अन्य कवियों ने भी काव्य पाठ किया।
टिप्पणी | कविता बनी समाज की आवाज
आयोजन में वक्ताओं के विचारों से यह संदेश उभरा कि साहित्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज की संवेदनाओं और सरोकारों को सामने रखने का सशक्त माध्यम भी है।
कवियों की प्रस्तुतियों ने प्रेम, संघर्ष, संवेदना और हिंदी के प्रति सम्मान को शब्द दिए। यही वजह रही कि साहित्यिक आयोजन में मौजूद लोगों के बीच हिंदी के प्रति गौरव और आत्मीयता का माहौल बना रहा।
सम्मान से बढ़ा आयोजन का महत्व
समारोह में साहित्यिक क्षेत्र के साथ सामाजिक कार्यों में योगदान देने वाले लोगों को भी सम्मानित किया गया। अर्पित श्रीवास्तव, इंजीनियर बृजमोहन, स्वेच्छा श्रीवास्तव, संजय श्रीवास्तव, अंबुज मिश्रा, शालिनी, विवेक कुमार गहलोत, आलोक कुमार, रोजी खान, पन्नेलाल पासवान और मिन्हाज सिद्दीकी को सामाजिक कार्यों के लिए सम्मान प्रदान किया गया।
इस दौरान कमर कुरैशी, राज शेख, मंजर सिंह, अमन सिंह, अविनाश पांडेय, चंद्ररामनी पासवान, जय सिंह, नेहा गुप्ता, सुशील कुमार सिंह, पं. कृष्ण मोहन पाठक, हरिनाथ और गुरु बाबा सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
फॉलो | हिंदी के सम्मान का सिलसिला रहे जारी
कार्यक्रम के अंत में संयोजक गौतम गोरखपुरी ने सभी अतिथियों, साहित्यकारों, कवियों और उपस्थित लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया।
हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित यह आयोजन साहित्य और समाज के बीच संवाद का मंच बना। सम्मान, कविता और विचारों के माध्यम से हिंदी भाषा के प्रति सम्मान और साहित्यिक चेतना को आगे बढ़ाने का संदेश दिया गया।
खबर की खास लाइन
“कविता ने संवेदनाओं को आवाज दी, सम्मान ने साहित्य का मान बढ़ाया और हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर गोरखपुर में सजा शब्दों का खूबसूरत संसार।”
FT NEWS DIGITAL | गोरखपुर
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