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*भगवा वेश में प्रदर्शन पर बवाल,पप्पू यादव के खिलाफ हिंदू महासभा का तीखा विरोध* *सनातन परंपरा और संत समाज का हुआ अपमान – शैलेन्द्र अग्निहोत्री* *पप्पू यादव पर हिंदू महासभा का तीखा हमला* *प्रदेश अध्यक्ष बोले – संसद परिसर में साधु वेश धारण कर किया गया प्रदर्शन करोड़ों सनातनियों की आस्था पर चोट* *प्रदेश अध्यक्ष ने संसद से की कड़ी कार्रवाई की मांग*

 

 

रायबरेली।संसद भवन परिसर में बिहार की पूर्णिया लोकसभा सीट से निर्दलीय सांसद राजेश रंजन ‘पप्पू यादव’ द्वारा साधु वेश धारण कर भगवा वस्त्र पहनकर किए गए राजनीतिक प्रदर्शन को लेकर अखिल भारतीय हिंदू महासभा ने कड़ी आपत्ति जताई है।संगठन के प्रदेश अध्यक्ष शैलेंद्र अग्निहोत्री ने इसे सनातन परंपरा,संत समाज और भगवा की गरिमा के विरुद्ध बताया तथा संसद से इस मामले में कड़ी कार्रवाई की मांग की है।दरअसल,संसद के मानसून सत्र के 12वें दिन विपक्षी सांसदों ने अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की राशि के कथित प्रबंधन संबंधी मुद्दे को लेकर संसद परिसर में प्रदर्शन किया था।प्रदर्शन के दौरान पप्पू यादव भगवा वस्त्र पहनकर पुजारी के वेश में जमीन पर बैठ गए और उनके सामने प्रतीकात्मक रूप से दानपेटी रखी गई।विपक्ष के अन्य सांसदों ने उसमें सांकेतिक रूप से चंदा भी डाला।इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए शैलेंद्र अग्निहोत्री ने कहा कि भगवा वस्त्र त्याग,तपस्या,राष्ट्रसेवा और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक है।ऐसे पवित्र प्रतीक का राजनीतिक प्रदर्शन के लिए उपयोग भारतीय संस्कृति और लोकतांत्रिक मर्यादाओं के अनुरूप नहीं है।उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रकार का प्रदर्शन सनातन धर्म और संत समाज की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला है।उन्होंने कहा कि इस घटना से करोड़ों सनातन धर्मावलंबियों और संत समाज की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।जनप्रतिनिधियों को अपने संवैधानिक दायित्वों के साथ देश की सांस्कृतिक विरासत का भी सम्मान करना चाहिए।राजनीतिक विरोध के लिए धार्मिक प्रतीकों और संत वेश का इस्तेमाल किसी भी दृष्टि से उचित नहीं माना जा सकता।सनातन आस्था को राजनीतिक प्रयोगशाला बनाने की कोशिश स्वीकार नहीं की जाएगी।प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि अखिल भारतीय हिंदू महासभा इस पूरे घटनाक्रम का तीव्र विरोध करती है और संसद से मांग करती है कि मामले का संज्ञान लेकर आवश्यक कार्रवाई की जाए।उन्होंने चेतावनी दी कि सनातन आस्था और धार्मिक प्रतीकों का राजनीतिक उपयोग किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध और प्रदर्शन का अधिकार सभी को है,लेकिन धार्मिक प्रतीकों और संत वेश की मर्यादा का उल्लंघन किसी भी परिस्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता।साथ ही संगठन ने घोषणा की कि इस मुद्दे को लेकर प्रदेशभर में जनजागरण अभियान चलाया जाएगा,ताकि धार्मिक प्रतीकों की गरिमा बनाए रखने के प्रति लोगों को जागरूक किया जा सके।

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