डीएम ने जल संरक्षण एवं प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन कार्यों का किया स्थलीय निरीक्षण*_ _*तालाब, चेक डैम एवं खेतों में निर्मित बांधों का अवलोकन कर गुणवत्ता एवं दीर्घकालिक संरक्षण के दिए निर्देश*_
_*डीएम ने जल संरक्षण एवं प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन कार्यों का किया स्थलीय निरीक्षण*_
_*तालाब, चेक डैम एवं खेतों में निर्मित बांधों का अवलोकन कर गुणवत्ता एवं दीर्घकालिक संरक्षण के दिए निर्देश*_
रायबरेली जिलाधिकारी सरनीत कौर ब्रोका ने जनपद में जल संरक्षण एवं भू-जल संवर्धन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विकास खंड सरेनी के विभिन्न ग्राम पंचायतों में संचालित वाटरशेड विकास घटक प्रधान मंत्री कृषि सिंचाई योजना 2.0 के अंतर्गत कराये गये विभिन्न कार्यों का स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने वाटरशेड कोड रमईपुर कला के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत हसनापुर तथा वाटरशेड कोड खौंद में जल संरक्षण से संबंधित परियोजनाओं का जायजा लेते हुए अधिकारियों को कार्यों की गुणवत्ता एवं प्रभावी रखरखाव सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने ग्राम पंचायत हसनापुर के अंतर्गत जीर्णाेद्धार कराए गए तालाब का निरीक्षण किया। उन्होंने तालाब के पुनर्जीवन से जल संचयन, भू-जल स्तर में वृद्धि तथा ग्रामीणों एवं पशुओं को होने वाले लाभों की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि तालाब का नियमित रखरखाव सुनिश्चित किया जाए ताकि वर्षा जल का अधिकतम संचयन हो सके और इसका लाभ लंबे समय तक ग्रामीणों को मिलता रहे, इसके उपरांत जिलाधिकारी ने स्वयं सहायता समूह की उन महिलाओं से संवाद किया जिन्हें उक्त योजना के अंतर्गत लाभान्वित किया गया है। उन्होंने महिलाओं से योजना के माध्यम से प्राप्त लाभ, आजीविका संवर्धन, आर्थिक सशक्तिकरण एवं समूह गतिविधियों के संबंध में जानकारी ली। जिलाधिकारी ने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने की दिशा में निरंतर कार्य करने, सरकारी योजनाओं का अधिकाधिक लाभ उठाने तथा अन्य महिलाओं को भी समूह से जोड़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के साथ-साथ महिलाओं के सामाजिक एवं आर्थिक सशक्तिकरण का प्रभावी माध्यम बन रहे हैं। इसके साथ-साथ समूह की महिलाओं की समस्याओं को भी सुना गया तथा उसके त्वरित निस्तारण हेतु संबंधित अधिकारियो को निर्देशित किया गया।
तत्पश्चात जिलाधिकारी ने पहुरी कोड नाले पर निर्मित चेक डैम का निरीक्षण किया। उन्होंने चेक डैम की संरचना, जल संचयन क्षमता एवं उसके माध्यम से क्षेत्र में सिंचाई एवं भू-जल पुनर्भरण पर पड़ने वाले प्रभाव का अवलोकन किया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि ऐसे जल संरक्षण ढांचों का नियमित निरीक्षण एवं समय-समय पर अनुरक्षण सुनिश्चित किया जाए, जिससे वर्षा जल का अधिकतम उपयोग हो सके।
इसके बाद जिलाधिकारी ग्राम पंचायत खौंद पहुंचीं, जहां उन्होंने किसानों के खेतों में बनाए गए मार्जिनल एवं पेरिफेरल बंधों का निरीक्षण किया। उन्होंने इन संरचनाओं की उपयोगिता का अवलोकन करते हुए कहा कि खेतों में इस प्रकार के बांध वर्षा जल को रोकने, मिट्टी के कटाव को कम करने, नमी बनाए रखने तथा कृषि उत्पादन बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ऐसे कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप गुणवत्ता के साथ पूर्ण कराए जाएं तथा अधिकाधिक किसानों को इन योजनाओं से लाभान्वित किया जाए।
जिलाधिकारी ने कहा कि जल संरक्षण केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं बल्कि जनभागीदारी का अभियान है। वर्षा जल का संरक्षण, भू-जल संवर्धन तथा प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित उपयोग भविष्य की पीढ़ियों के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने संबंधित विभागों को निर्देशित किया कि जल संरक्षण से संबंधित सभी परियोजनाओं का समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण एवं प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में जल उपलब्धता बढ़े, कृषि को मजबूती मिले तथा पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य भी सफलतापूर्वक पूरे हो सकें।
इस अवसर पर उप जिलाधिकारी लालगंज राजेश श्रीवास्तव, उप निदेशक कृषि हिमांशु पाण्डेय, खण्ड विकास अधिकारी सरेनी प्रमोद यादव, भूमि संरक्षण अधिकारी जे०पी० यादव सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहें।
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