कपिलवस्तु को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर उभारने की दिशा में मंथन, इतिहास और विरासत को विकास से जोड़ने पर जोर
विश्व पर्यटन दिवस पर जनपदीय विचार संगोष्ठी में पर्यटन विशेषज्ञों, प्रशासन, होटल कारोबारियों और प्रबुद्धजनों ने साझा किए विचार | ‘सिद्धार्थनगर : इतिहास के पन्नों से वर्तमान तक’ पुस्तक का विमोचन

सिद्धार्थनगर। बुद्ध की धरती और ऐतिहासिक विरासत की पहचान रखने वाले सिद्धार्थनगर में अब सवाल केवल पर्यटन स्थलों की मौजूदगी का नहीं, बल्कि उस विरासत को बेहतर पर्यटन सुविधाओं, स्थानीय रोजगार और वैश्विक पहचान से जोड़ने का है। विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर रविवार, 27 सितंबर 2026 को आयोजित जनपदीय विचार संगोष्ठी में कपिलवस्तु समेत जिले की ऐतिहासिक, धार्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत को पर्यटन की नई संभावनाओं से जोड़ने पर गंभीर मंथन हुआ।

कार्यक्रम में ‘सिद्धार्थनगर : इतिहास के पन्नों से वर्तमान तक’ पुस्तक का विमोचन भी किया गया। पुस्तक को जनपद के इतिहास, विरासत और वर्तमान स्वरूप को एक साथ समझने की दिशा में किए गए प्रयास के रूप में प्रस्तुत किया गया।
विरासत से विकास तक की नई सोच
सिद्धार्थनगर की पहचान सिर्फ एक जिले के रूप में नहीं, बल्कि इतिहास, संस्कृति और बौद्ध विरासत से जुड़े महत्वपूर्ण भूभाग के रूप में भी सामने आती है। ऐसे में विश्व पर्यटन दिवस पर आयोजित संगोष्ठी ने एक अहम सवाल को केंद्र में रखा—क्या जिले की ऐतिहासिक विरासत को आधुनिक पर्यटन सुविधाओं और स्थानीय अर्थव्यवस्था के अवसरों से जोड़कर नई पहचान दी जा सकती है?

इसी सोच के साथ आयोजित कार्यक्रम में प्रशासन, पर्यटन क्षेत्र, होटल कारोबार, पत्रकारिता और प्रबुद्ध वर्ग से जुड़े लोगों ने अपने विचार साझा किए।
मंच पर इतिहास, स्क्रीन पर विरासत और चर्चा में भविष्य
कार्यक्रम का माहौल केवल औपचारिक संगोष्ठी तक सीमित नहीं रहा। मंच पर अतिथियों ने पर्यटन विकास की संभावनाओं पर विचार रखे, वहीं स्क्रीन पर ‘सिद्धार्थनगर : इतिहास के पन्नों से वर्तमान तक’ पुस्तक की झलकियां सामने आईं। पुस्तक के विमोचन के दौरान जनपद के इतिहास और विरासत को दस्तावेज के रूप में सामने लाने के प्रयास पर चर्चा हुई।

वक्ताओं का कहना रहा कि ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण के साथ यदि पर्यटकों के लिए सूचना, आवागमन, ठहरने, मार्गदर्शन और अन्य आवश्यक सुविधाओं का विस्तार किया जाए तो पर्यटन स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों और रोजगार के अवसरों को गति देने का माध्यम बन सकता है।
कपिलवस्तु से आगे पूरे जनपद की पर्यटन क्षमता पर नजर
संगोष्ठी में कपिलवस्तु समेत सिद्धार्थनगर के विभिन्न ऐतिहासिक, धार्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक स्थलों की पर्यटन संभावनाओं पर चर्चा हुई। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी क्षेत्र को पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने के लिए केवल ऐतिहासिक महत्व पर्याप्त नहीं होता, बल्कि उस विरासत तक पर्यटकों की आसान पहुंच और वहां आवश्यक सुविधाओं का होना भी महत्वपूर्ण है।
इसी संदर्भ में होटल और पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों की सहभागिता को भी महत्वपूर्ण माना गया। उन्हें पर्यटकों की अपेक्षाओं, स्थानीय पर्यटन स्थलों की जानकारी तथा पर्यटक सुविधाओं के विस्तार से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर जानकारी दी गई।

‘सिद्धार्थनगर : इतिहास के पन्नों से वर्तमान तक’
कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण पुस्तक का विमोचन रहा।
‘सिद्धार्थनगर : इतिहास के पन्नों से वर्तमान तक’ नामक पुस्तक में जनपद के इतिहास, विरासत और वर्तमान स्वरूप से जुड़े विषयों को समेटने का प्रयास किया गया है।
पुस्तक के लेखक एवं अपर जिलाधिकारी डॉ. ज्ञान प्रकाश ने कहा कि प्रशासन के साथ प्रबुद्ध वर्ग के सहयोग से सिद्धार्थनगर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को सामने लाने का प्रयास किया गया है।
पुस्तक प्रकाशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली अलका पांडेय ने बताया कि पुस्तक को 12 अध्यायों में तैयार किया गया है, जिनके माध्यम से सिद्धार्थनगर से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण बिंदुओं को समाज के सामने लाने की कोशिश की गई है।
पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था का कनेक्शन
पर्यटन को केवल घूमने-फिरने तक सीमित गतिविधि नहीं माना जाता। किसी क्षेत्र में पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने के साथ होटल, परिवहन, स्थानीय हस्तशिल्प, खानपान, गाइड सेवा और अन्य स्थानीय व्यवसायों के लिए भी अवसर पैदा हो सकते हैं।
संगोष्ठी में इसी व्यापक दृष्टिकोण से पर्यटन विकास पर विचार रखे गए और स्थानीय स्तर पर पर्यटक सुविधाओं को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
विरासत को सिर्फ संरक्षित नहीं, समझाना भी जरूरी
कार्यक्रम में सामने आया एक महत्वपूर्ण विचार यह रहा कि ऐतिहासिक स्थलों की पहचान को नई पीढ़ी और बाहर से आने वाले पर्यटकों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने के लिए दस्तावेजीकरण, प्रचार-प्रसार और स्थानीय इतिहास की सरल प्रस्तुति जरूरी है।
इसी कड़ी में पुस्तक को जनपद के इतिहास और विरासत को एक साथ प्रस्तुत करने वाला प्रयास बताया गया।
मंच से उठी एक बड़ी संभावना
सिद्धार्थनगर के पर्यटन विकास की चर्चा में कपिलवस्तु स्वाभाविक रूप से एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में सामने आता है। ऐसे में स्थानीय विरासत को बेहतर सुविधाओं, व्यवस्थित प्रचार और पर्यटन से जुड़े स्थानीय कारोबार के साथ जोड़ने की दिशा में होने वाली चर्चाएं आने वाले समय में महत्वपूर्ण हो सकती हैं।
हालांकि पर्यटन विकास की वास्तविक तस्वीर सुविधाओं के विस्तार, संरक्षण, पहुंच और पर्यटक अनुभव में होने वाले ठोस सुधारों से ही तय होगी।
कार्यक्रम में ये रहे मौजूद
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में भाजपा जिलाध्यक्ष दीपक मौर्या मौजूद रहे। इसके अलावा सांसद प्रतिनिधि एसपी अग्रवाल, वरिष्ठ पत्रकार नजीर मलिक, मुख्य विकास अधिकारी बलराम सिंह, अपर पुलिस अधीक्षक प्रशांत कुमार, संतोष श्रीवास्तव, जितेंद्र पांडेय, शुभम श्रीवास्तव और सीमा मिश्रा सहित विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोग मौजूद रहे।
कार्यक्रम में अखंड प्रताप सिंह, दयाशंकर यादव, राम विलास यादव, सुरेंद्र श्रीवास्तव, गोविंद प्रसाद ओझा, राजेश मिश्रा, अभय श्रीवास्तव, प्रभात शुक्ला, राणा प्रताप सिंह, श्रीश श्रीवास्तव, पंकज पासवान, नियाज कपिलवस्तुवी, विजय कृष्ण नारायण सिंह, सलोनी उपाध्याय, अरुणेश विश्वकर्मा, सुधाकर मिश्रा, शिवदत्त अग्रहरी, नीरज श्रीवास्तव, पंकज वर्मा, किरनलता सिंह, धनेश वर्मा तथा पर्यटन विभाग से विश्वजीत सिंह समेत अन्य लोग उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन नितेश पांडेय ने किया।
सारांश
विश्व पर्यटन दिवस पर सिद्धार्थनगर में हुई संगोष्ठी ने जिले की ऐतिहासिक पहचान को पर्यटन विकास से जोड़ने की संभावनाओं को चर्चा के केंद्र में ला दिया। कपिलवस्तु समेत जिले की विरासत को बेहतर पर्यटक सुविधाओं, प्रचार-प्रसार और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने पर विचार हुआ। इसी अवसर पर ‘सिद्धार्थनगर : इतिहास के पन्नों से वर्तमान तक’ पुस्तक का विमोचन हुआ, जिसने जिले के अतीत को दस्तावेजी रूप में सामने रखने की कोशिश को भी रेखांकित किया।
एक नजर में
आयोजन: जनपदीय विचार संगोष्ठी
अवसर: विश्व पर्यटन दिवस
तारीख: रविवार, 27 सितंबर 2026
मुख्य विषय: सिद्धार्थनगर की पर्यटन संभावनाएं और ऐतिहासिक विरासत
विशेष आकर्षण: ‘सिद्धार्थनगर : इतिहास के पन्नों से वर्तमान तक’ पुस्तक का विमोचन
केंद्र में: कपिलवस्तु सहित जिले की ऐतिहासिक, धार्मिक, सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक विरासत
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