ग्राम पंचायतों की समस्याओं को लेकर प्रधान संगठन ने सौंपा ज्ञापन, पांच प्रमुख मांगों पर शासन से कार्रवाई की मांग
सिद्धार्थनगर। ग्राम पंचायतों के विकास कार्यों और ग्राम प्रधानों से जुड़ी विभिन्न समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर ग्राम प्रधान संगठन की ओर से 24 सितंबर 2026 को विकास भवन परिसर में ज्ञापन सौंपा गया। संगठन ने ज्ञापन के माध्यम से ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के संचालन, लंबित भुगतान, मनरेगा की धनराशि, ग्राम पंचायत स्तर पर विकास कार्यों की स्वीकृति तथा पंचायत राहत कोष से जुड़े मुद्दों को शासन के समक्ष रखा।

संगठन की ओर से यह ज्ञापन मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार के नाम मुख्य विकास अधिकारी, जनपद सिद्धार्थनगर के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। ज्ञापन में ग्राम प्रधानों की ओर से वर्तमान समय में सामने आ रही व्यावहारिक कठिनाइयों का उल्लेख करते हुए संबंधित समस्याओं के समाधान के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने का अनुरोध किया गया है।
पांच मांगों के जरिए उठाए पंचायत व्यवस्था से जुड़े मुद्दे
ज्ञापन में ग्राम पंचायतों को मिलने वाली केंद्रीय वित्त की लंबित धनराशि शीघ्र जारी कराने, मनरेगा के तहत कराए गए विकास कार्यों की लंबित धनराशि और सामग्री मद सहित अन्य बकाया भुगतान कराने की मांग प्रमुखता से रखी गई। साथ ही स्थानीय आवश्यकताओं और जनहित को ध्यान में रखते हुए विकास कार्यों की स्वीकृति ग्राम पंचायत स्तर से सुनिश्चित किए जाने की मांग की गई।
मानदेय और पंचायत राहत कोष का भी मुद्दा
संगठन ने मांग की कि जिस प्रकार ग्राम प्रधानों को उनके दायित्वों एवं कार्यों के लिए मानदेय दिया जाता है, उसी प्रकार ग्राम पंचायतों में नियुक्त प्रशासनिक कर्मियों को भी उनके कार्यकाल के दौरान उचित मानदेय प्रदान किया जाए।

ज्ञापन में पंचायत राहत कोष को पुनः शुरू/गठित किए जाने की मांग भी की गई है। संगठन का कहना है कि इससे किसी प्रशासक की मृत्यु होने की स्थिति में उनके वारिस को पूर्व की भांति राहत अनुदान उपलब्ध कराया जा सकेगा।
| ज्ञापन में रखी गई पांच प्रमुख मांगें
1. केंद्रीय वित्त की लंबित धनराशि:
ग्राम पंचायतों को प्राप्त होने वाली केंद्रीय वित्त की लंबित धनराशि शीघ्र जारी कराई जाए, जिससे ग्राम पंचायतों में आवश्यक विकास एवं जनहित के कार्य सुचारु रूप से कराए जा सकें।
2. मनरेगा का बकाया भुगतान:
ग्राम पंचायतों में मनरेगा के अंतर्गत कराए गए विकास कार्यों की लंबित धनराशि, सामग्री मद सहित अन्य बकाया भुगतान शीघ्र कराया जाए, ताकि विकास कार्य प्रभावित न हों।
3. ग्राम पंचायत स्तर पर स्वीकृति:
स्थानीय आवश्यकताओं एवं जनहित को ध्यान में रखते हुए विकास कार्यों की स्वीकृति की व्यवस्था ग्राम पंचायत स्तर से ही सुनिश्चित किए जाने की मांग की गई।
4. प्रशासनिक कर्मियों के मानदेय का मुद्दा:
ग्राम प्रधानों को उनके दायित्वों एवं कार्यों के लिए जिस प्रकार मानदेय प्रदान किया जाता है, उसी प्रकार ग्राम पंचायतों में नियुक्त प्रशासनिक कर्मियों को भी कार्यकाल के दौरान उचित मानदेय दिए जाने की मांग रखी गई।
5. पंचायत राहत कोष:
पंचायत राहत कोष को पुनः गठित किए जाने की मांग की गई, ताकि किसी प्रशासक की मृत्यु होने की स्थिति में उनके वारिस को पूर्व की भांति राहत अनुदान प्राप्त हो सके।
मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की अपील
ज्ञापन के अंत में मुख्यमंत्री से ग्राम प्रधानों एवं ग्राम पंचायतों की उपरोक्त समस्याओं की गंभीरता को देखते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान करने का अनुरोध किया गया है।
मौके पर मौजूद रहे पदाधिकारी व प्रतिनिधि
ज्ञापन सौंपे जाने के दौरान प्रदेश अध्यक्ष ललित शर्मा, जिला अध्यक्ष डॉ. पवन मिश्र, ताकिब रिजवी, गंगा मिश्र, नीरज सिंह, पारस यादव, प्रदीप चौरसिया और दिनेश धर सहित अन्य लोग उपस्थित रहे। विकास भवन परिसर में बड़ी संख्या में प्रधान संगठन से जुड़े लोगों की मौजूदगी रही।
सारांश
ग्राम प्रधान संगठन द्वारा दिए गए ज्ञापन में पंचायतों के सामने बताए गए वित्तीय और प्रशासनिक मुद्दों को पांच बिंदुओं में सामने रखा गया है। अब इन मांगों पर शासन एवं संबंधित विभागों की ओर से क्या कार्रवाई होती है, यह आगे देखने वाली बात होगी।
FT News Digital | सिद्धार्थनगर
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