फ्रेंड्स टाइम्स
Breaking News
इंजेक्शन के बाद मासूम की मौत, परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप

निजी अस्पताल में दो साल की बच्ची की मौत के बाद हंगामा, पुलिस ने संभाली स्थिति; मौत की वजह अभी स्पष्ट नहीं


सिद्धार्थनगर। जिला मुख्यालय स्थित साड़ी तिराहे के पास एक निजी अस्पताल में शनिवार को इलाज के दौरान दो साल की बच्ची की मौत हो गई। घटना के बाद बच्ची के परिजनों ने अस्पताल में हंगामा करते हुए उपचार को लेकर गंभीर सवाल उठाए। परिजनों ने आरोप लगाया कि इंजेक्शन लगाए जाने के बाद बच्ची की हालत अचानक बिगड़ी और कुछ ही देर में उसकी मौत हो गई। परिवार की ओर से कथित ओवरडोज और उपचार में लापरवाही का आरोप लगाया गया है। हालांकि, इन आरोपों की अभी किसी चिकित्सकीय जांच या आधिकारिक रिपोर्ट से पुष्टि नहीं हुई है।


इंजेक्शन के बाद बिगड़ी हालत का दावा, अस्पताल में हंगामा

मृत बच्ची की पहचान जया के रूप में हुई है। वह कठेला समयमाता थाना क्षेत्र के कटेला गर्बी गांव की रहने वाली बताई जा रही है। परिजनों के अनुसार, शुक्रवार को जया को बुखार की शिकायत पर अस्पताल लाया गया था। जांच के बाद उसे दवाएं दी गईं। परिवार का कहना है कि अगले दिन हालत में सुधार नहीं होने पर शनिवार सुबह उसे दोबारा अस्पताल लाया गया।

परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में बच्ची को इंजेक्शन लगाया गया, जिसके बाद उसकी हालत तेजी से बिगड़ गई और उसकी मौत हो गई।


हंगामे की सूचना पर पहुंची पुलिस

बच्ची की मौत के बाद परिजन अस्पताल परिसर में शव को गोद में लेकर बैठ गए और उपचार को लेकर सवाल उठाने लगे। सूचना मिलते ही स्थानीय कोतवाल नवीन सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। उनके साथ महिला कांस्टेबल समेत पुलिसकर्मी भी मौजूद रहे। पुलिस ने परिजनों से बातचीत कर स्थिति को संभाला और मौके पर शांति व्यवस्था बनाए रखी।


परिवार ने उठाए उपचार पर सवाल

बच्ची की मां की ओर से अस्पताल की पर्ची फाड़कर डस्टबिन में फेंकने का आरोप भी लगाया गया है। हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। इसी तरह इंजेक्शन की मात्रा अधिक होने अथवा इलाज में लापरवाही के आरोपों की भी फिलहाल कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।

डॉक्टर का पक्ष

पहले से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का दिया हवाला

परिजनों के आरोपों पर चिकित्सक डॉ. संजय चौधरी ने अपना पक्ष रखते हुए बताया कि बच्ची को पहले से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां थीं और उसका उपचार चल रहा था। डॉक्टर के अनुसार, बच्ची तेज बुखार की स्थिति में अस्पताल लाई गई थी और उसकी स्थिति को देखते हुए उपचार किया जा रहा था।

परिजनों के मुताबिक, बच्ची को जन्म से ही स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें थीं और उसे चलने-फिरने में भी परेशानी होती थी। इन पूर्व स्वास्थ्य परिस्थितियों और मौत के बीच क्या संबंध था, यह चिकित्सकीय जांच का विषय है।

सारांश

दो साल की बच्ची की इलाज के दौरान मौत के बाद परिजनों ने कथित ओवरडोज और उपचार में लापरवाही के आरोप लगाए हैं। दूसरी ओर चिकित्सक ने बच्ची की पहले से चली आ रही स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का हवाला दिया है। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति संभाली। फिलहाल मौत की वास्तविक वजह स्पष्ट नहीं है।

टिप्पणी

आरोप गंभीर, लेकिन निष्कर्ष जांच के बाद ही

बच्ची की मौत निश्चित तौर पर परिवार के लिए बेहद पीड़ादायक घटना है। परिजनों की ओर से लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच होना स्वाभाविक रूप से महत्वपूर्ण है, लेकिन जांच पूरी होने से पहले किसी चिकित्सक अथवा अस्पताल को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा।

मौत का वास्तविक कारण चिकित्सकीय अभिलेखों, उपचार की प्रक्रिया और आवश्यकता पड़ने पर पोस्टमार्टम जैसी प्रक्रिया से ही स्पष्ट हो सकता है। इसलिए इस मामले में आरोप और तथ्य के बीच अंतर बनाए रखना जरूरी है।


तहरीर और पोस्टमार्टम की स्थिति पर नजर

फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पीड़ित परिवार की ओर से थाने में तहरीर दिए जाने की जानकारी सामने नहीं आई है और बच्ची के शव के पोस्टमार्टम की प्रक्रिया की भी जानकारी नहीं है। आगे परिवार की ओर से शिकायत दर्ज कराई जाती है या कोई चिकित्सकीय/पुलिस जांच शुरू होती है तो मामले की तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।

FT NEWS DIGITAL इस मामले में किसी भी पक्ष को दोषी घोषित नहीं करता। परिजनों के आरोप, चिकित्सक का पक्ष और मौके पर पुलिस की भूमिका को उपलब्ध जानकारी के आधार पर सामने रखा जा रहा है। मौत की वास्तविक वजह और आरोपों की सत्यता जांच के बाद ही स्पष्ट मानी जाएगी।

परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

इस घटना का सबसे मार्मिक पहलू यह है कि परिजनों के मुताबिक, जया के पिता दुर्गेश कसौधन की करीब तीन महीने पहले सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। परिवार अभी इस सदमे से उबर भी नहीं पाया था कि अब दो साल की मासूम जया की मौत हो गई। एक ही परिवार पर कम समय के अंतराल में दो बड़े दुखों ने गहरा असर डाला है।


यह खबर उपलब्ध जानकारी और संबंधित पक्षों के कथनों पर आधारित है। किसी भी आरोप को अंतिम सत्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया गया है। मामले में आधिकारिक जांच अथवा चिकित्सकीय रिपोर्ट सामने आने पर तथ्य उसी के अनुसार अपडेट किए जाएंगे।

Views: 96

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: कोई भी कंटेंट कॉपी न करें, नहीं तो आप पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है।