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बस्ती में पुलिस अधिकारी की मौत की जांच ने खोली ‘हनी ट्रैप’ की कथित परतें

file 00000000fe2482088f14821800ab1531महिला समेत तीन गिरफ्तार, बोलेरो और तीन मोबाइल बरामद; ब्लैकमेलिंग के जरिए लाखों रुपये की कथित वसूली की जांच

बस्ती। वाल्टरगंज के तत्कालीन थानाध्यक्ष सूर्य प्रकाश सिंह की मौत की जांच अब कथित हनी ट्रैप और ब्लैकमेलिंग के मामले तक पहुंच गई है। पुलिस का दावा है कि जांच के दौरान ऐसे साक्ष्य सामने आए हैं, जिनसे एक महिला और उसके कथित सहयोगियों द्वारा लोगों को संपर्क में लेकर बाद में आपत्तिजनक सामग्री के नाम पर दबाव बनाने तथा रकम वसूलने की गतिविधियों की जानकारी मिली है।

पुलिस ने इस मामले में प्रियंका चौधरी, रामनयन चौधरी और विजय प्रकाश को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक आरोपियों के कब्जे से एक बोलेरो वाहन और तीन मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। मामले में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों और अन्य तथ्यों की जांच अभी जारी है।

पुलिस अधिकारी की मौत के बाद शुरू हुई पड़ताल

वाल्टरगंज के तत्कालीन थानाध्यक्ष सूर्य प्रकाश सिंह की 29 अगस्त को उनके सरकारी आवास में मौत हो गई थी। घटना के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। पड़ताल के दौरान अधिकारियों ने मोबाइल फोन, संपर्कों और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच की।

पुलिस के मुताबिक, इसी जांच में सूर्य प्रकाश सिंह और मामले में गिरफ्तार किए गए कुछ आरोपियों के बीच संपर्क की जानकारी सामने आई। पुलिस का दावा है कि घटना वाले दिन दोपहर करीब 1:41 बजे आखिरी फोन कॉल भी हुई थी।

जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इन संपर्कों और अधिकारी की मौत के बीच कथित ब्लैकमेलिंग की क्या भूमिका थी।

हनी ट्रैप के जरिए फंसाने का पुलिस का दावा

पुलिस की जांच के अनुसार, महिला पर आरोप है कि वह लोगों से संपर्क स्थापित करती थी। इसके बाद कथित तौर पर आपत्तिजनक वीडियो अथवा सामग्री के नाम पर उन्हें डराने और पैसे की मांग करने का सिलसिला चलता था।

पुलिस का दावा है कि इसी तरीके से कुछ अन्य लोगों से भी लाखों रुपये की रकम लिए जाने की जानकारी सामने आई है।

जांच में सामने आए कुछ नामों के संबंध में पुलिस ने अलग-अलग रकम की कथित वसूली का भी उल्लेख किया है। हालांकि, इन आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।

एक करोड़ रुपये के दबाव का भी दावा

मामले की जांच से जुड़े पुलिस दावे के मुताबिक, सूर्य प्रकाश सिंह पर भी कथित तौर पर बड़ी रकम देने का दबाव बनाया जा रहा था। पुलिस इस कथित ब्लैकमेलिंग को उनकी मौत से जोड़कर जांच कर रही है।

हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम में कौन-कौन से तथ्य निर्णायक हैं और कथित तौर पर किसने क्या भूमिका निभाई, इसका अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

तीन गिरफ्तार, नेटवर्क की कड़ियां खंगाल रही पुलिस

पुलिस ने मामले में प्रियंका चौधरी, उसके पिता रामनयन चौधरी और विजय प्रकाश को गिरफ्तार किया है। बरामद मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच की जा रही है।

पुलिस को आशंका है कि कथित गतिविधियों में और लोग भी जुड़े हो सकते हैं। इसी वजह से जांच का दायरा बढ़ाया गया है और आरोपियों के संपर्कों तथा लेन-देन से संबंधित तथ्यों को खंगाला जा रहा है।

कई पीड़ितों से रकम लेने का पुलिस का दावा

पुलिस के अनुसार जांच के दौरान कुछ लोगों से कथित तौर पर लाखों रुपये की वसूली की जानकारी सामने आई है। इनमें डॉक्टर उमेश से करीब चार लाख रुपये, अहमद रजा से करीब पांच लाख रुपये और आर्यन दीक्षित से करीब 15 लाख रुपये लिए जाने का पुलिस ने दावा किया है।

इन रकमों और संबंधित घटनाओं की भी पुलिस जांच कर रही है। इन दावों को अदालत में साबित होना अभी बाकी है।

आगे की जांच में खुलेंगे और राज

पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार आरोपियों के नेटवर्क, मोबाइल संपर्क, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और कथित आर्थिक लेन-देन की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इस मामले में कितने लोग जुड़े थे और कथित वसूली का पूरा नेटवर्क कितना बड़ा था।

फिलहाल एक पुलिस अधिकारी की मौत की जांच से शुरू हुआ मामला कथित हनी ट्रैप, ब्लैकमेलिंग और धन वसूली की गंभीर जांच में बदल चुका है। पुलिस की आगे की कार्रवाई और जांच के निष्कर्ष इस मामले की वास्तविक तस्वीर सामने लाएंगे।

FT News Digital की संपादकीय टिप्पणी

इस समाचार में किसी व्यक्ति को दोषी घोषित नहीं किया गया है। गिरफ्तारी और सभी आरोप पुलिस की ओर से बताए गए तथ्यों/दावों पर आधारित हैं। आरोपों की अंतिम पुष्टि सक्षम न्यायालय में साक्ष्यों के आधार पर होगी।

रिपोर्ट: FT News Digital | बस्ती

 

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