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मानदेय बढ़ाए जाने और कैशलेश ईलाज देने पर अनुदेशकों ने मुख्यमंत्री का जताया आभार, विधायक जय प्रताप सिंह का किया स्वागत

सिद्धार्थनगर। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा परिषदीय अनुदेशकों का मानदेय बढ़ाकर 17000 रुपए प्रति माह किए जाने और पाँच लाख रुपये तक की कैशलेस इलाज की सुविधा देने के फैसले से जनपद सिद्धार्थनगर के अनुदेशकों में खुशी का माहौल है। सरकार के इस निर्णय को अनुदेशकों ने राहत भरा कदम बताते हुए मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया। इसी क्रम में अनुदेशक संघ के पदाधिकारियों और सदस्यों ने बांसी विधायक जय प्रताप सिंह का स्वागत कर धन्यवाद ज्ञापित किया।

अनुदेशकों ने जताई खुशी, सरकार के फैसले को बताया ऐतिहासिक

अनुदेशकों का कहना है कि लंबे समय से मानदेय बढ़ाए जाने की मांग की जा रही थी। ऐसे में सरकार द्वारा मानदेय को बढ़ाकर 17000 रुपए करना अनुदेशकों के लिए बड़ी राहत है। इसके साथ ही पाँच लाख रुपये तक की कैशलेस इलाज की सुविधा मिलने से अब अनुदेशकों और उनके परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा भी मिल सकेगी।

अनुदेशकों ने कहा कि इस निर्णय से प्रदेश के करीब 25 हजार अनुदेशकों को सीधा लाभ मिलेगा और उनके जीवन स्तर में सुधार आएगा। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में अनुदेशकों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है और सरकार का यह कदम उनके मनोबल को बढ़ाने वाला है।

विधायक जय प्रताप सिंह का किया गया स्वागत

सरकार के इस फैसले पर खुशी जाहिर करते हुए अनुदेशक संघ के पदाधिकारियों ने बांसी विधायक जय प्रताप सिंह का स्वागत किया और उनके माध्यम से प्रदेश सरकार तथा मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया। अनुदेशकों ने कहा कि जनप्रतिनिधियों के प्रयासों और सरकार की सकारात्मक सोच के कारण ही यह फैसला संभव हो पाया है।

आर्थिक और सामाजिक लाभ होगा

इस अवसर पर परिषदीय अनुदेशक कल्याण एसोसिएशन, सिद्धार्थनगर के पदाधिकारियों ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अनुदेशकों की समस्याओं को समझते हुए यह सराहनीय निर्णय लिया है। इससे हजारों अनुदेशकों और उनके परिवारों को आर्थिक और स्वास्थ्य सुरक्षा मिलेगी।

उन्होंने कहा कि सरकार का यह कदम अनुदेशकों के लिए सम्मान और प्रोत्साहन का प्रतीक है। इससे शिक्षा व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी और अनुदेशक पहले से अधिक उत्साह के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन कर सकेंगे।

ये अनुदेशक रहे मौजूद

इस दौरान अनुदेशक सीमा निषाद, रामानंद उपाध्याय, लवकुश चौधरी, सत्य मृत्युंजयधर, सत्यपाल सिंह, दिलीप, कैलाश नाथ, देवेंद्र चौधरी, शरद सहित कई अन्य अनुदेशक उपस्थित रहे। सभी ने मुख्यमंत्री और प्रदेश सरकार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार के इस निर्णय से अनुदेशकों में नई ऊर्जा का संचार हुआ है।

MBBS छात्र हादसे की सुर्खियों में दब गया विपिन जायसवाल के परिवार का दर्द– होली के दिन धर्मशाला ओवरब्रिज पर तेज रफ्तार कार की टक्कर से गई थी जान

गोरखपुर : रंगों का पर्व होली आपसी भाईचारे और खुशियों का त्योहार माना जाता है, लेकिन कभी-कभी यही उत्सव लापरवाही और हुड़दंग की वजह से दर्दनाक हादसों में बदल जाता है। ऐसा ही एक हादसा 4 मार्च 2026 को गोरखपुर में हुआ, जिसमें एक परिवार की खुशियां हमेशा के लिए छिन गईं।

होली के दिन कार की टक्कर से हुए थे घायल

4 मार्च 1996 को जन्मे विपिन कुमार जायसवाल को शायद यह अंदाजा भी नहीं था कि 4 मार्च 2026 का दिन उनकी जिंदगी का आखिरी दिन बन जाएगा। होली के दिन दोपहर करीब 2:30 बजे वह अपने दोस्त सुमित श्रीवास्तव के साथ स्कूटी से धर्मशाला ओवरब्रिज से गुजर रहे थे। इसी दौरान तेज रफ्तार मारुति वेगनर कार ने उनकी स्कूटी को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि विपिन ओवरब्रिज से नीचे गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए, जबकि उनके साथी सुमित श्रीवास्तव भी बुरी तरह घायल हो गए।

इलाज के दौरान चली गई विपिन की जान 

दोनों को तत्काल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान विपिन कुमार जायसवाल ने दम तोड़ दिया। उनकी मौत से परिवार में मातम छा गया, जबकि घायल सुमित श्रीवास्तव का अभी भी इलाज चल रहा है।

उसी रात एमबीबीएस छात्र आकाश पांडे की हुई थी मौत 

उसी दिन रात में चारफाटक मोहद्दीपुर इलाके में हुए एक अन्य सड़क हादसे में एमबीबीएस छात्र आकाश पांडे और उमेश शर्मा की मौत हो गई थी। आरोपी के एक राजनीतिक दल से जुड़े होने की वजह से यह मामला मीडिया में सुर्खियों में छाया रहा। लेकिन उसी दिन दोपहर धर्मशाला ओवरब्रिज पर हुए हादसे में जान गंवाने वाले विपिन जायसवाल के परिवार की पीड़ा कहीं दबकर रह गई।

MBBS छात्र हादसे में दब गई विपिन की मौत

परिजनों का कहना है कि चारफाटक हादसे में मृतकों के परिवारों के घर जनप्रतिनिधि और अधिकारी पहुंचे तथा सरकार की ओर से मुआवजे की घोषणा भी की गई, लेकिन विपिन जायसवाल के परिवार की सुध लेने वाला कोई नहीं पहुंचा। परिजनों के मुताबिक विपिन एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखते थे, शायद यही वजह रही कि उनकी मौत को लेकर न तो किसी अधिकारी ने संज्ञान लिया और न ही किसी जनप्रतिनिधि ने परिवार से मिलकर सांत्वना दी।

घटना की निष्पक्ष जांच की मांग 

घटना के अगले दिन मृतक के पिता राजेंद्र कुमार जायसवाल की तहरीर पर शाहपुर थाने में अज्ञात वाहन चालक के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। हालांकि परिवार का आरोप है कि हादसे के बाद कार चालक और उसके साथियों को मौके पर पकड़कर पुलिस के हवाले किया गया था, लेकिन बाद में उन्हें छोड़ दिया गया और अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया।

पीड़ित परिवार ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। साथ ही उन्होंने प्रशासन से न्याय दिलाने की गुहार लगाई है, ताकि विपिन की मौत के जिम्मेदार लोगों को सजा मिल सके।

हमसफर बनेंगे IPS केके विश्नोई और IPS अंशिका वर्मा, गोरखपुर से शुरू हुई थी लव स्टोरी

गोरखपुर : पुलिस के दो तेजतर्रार आईपीएस अधिकारियों की प्रेम कहानी अब विवाह के मुकाम तक पहुंच गई है। संभल के पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार विश्नोई और बरेली की पुलिस अधीक्षक अंशिका वर्मा जल्द ही शादी के बंधन में बंधने जा रहे हैं। दोनों की शादी 28 मार्च को राजस्थान के बारमेर जिले में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ होगी। इससे पहले 27 मार्च को बाड़मेर जिले के धोरीमना गांव में हल्दी और संगीत समारोह आयोजित होगा, जबकि 30 मार्च को जोधपुर के एक रिसोर्ट में भव्य रिसेप्शन रखा जाएगा।

गोरखपुर में शुरू हुई थी लव स्टोरी

दोनों आईपीएस अधिकारियों की प्रेम कहानी की शुरुआत वर्ष 2021 में हुई थी। उस समय गोरखपुर में पोस्टिंग के दौरान उनकी पहली मुलाकात हुई थी। उस समय कृष्ण कुमार बिश्नोई गोरखपुर में एसपी सिटी के पद पर तैनात थे, जबकि अंशिका वर्मा वहां प्रशिक्षण के दौरान अंडर ट्रेनिंग आईपीएस अधिकारी थीं। ड्यूटी के दौरान हुई मुलाकात धीरे-धीरे दोस्ती में बदली और फिर यही दोस्ती समय के साथ एक मजबूत रिश्ते में बदल गई। अब लगभग पांच साल बाद दोनों अपने रिश्ते को शादी के रूप में नई पहचान देने जा रहे हैं।

राजस्थान में होंगे सभी शादी समारोह

दोनों परिवारों की सहमति के बाद शादी की सभी रस्में राजस्थान में आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। 27 मार्च को बाड़मेर जिले के धोरीमना गांव में हल्दी और संगीत समारोह होगा। इसके बाद 28 मार्च को विवाह संपन्न होगा। शादी के बाद 30 मार्च को जोधपुर के एक रिसोर्ट में भव्य रिसेप्शन आयोजित किया जाएगा, जिसमें प्रशासनिक सेवा और पुलिस विभाग से जुड़े कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हो सकते हैं।

होली में भी चर्चा में रहे दोनों अधिकारी

हाल ही में उत्तर प्रदेश पुलिस की होली के दौरान भी दोनों अधिकारी काफी चर्चा में रहे थे। बरेली में होली समारोह के दौरान एसपी अंशिका वर्मा ने काला चश्मा पहनकर लोकप्रिय गीत “लंदन ठुमकदा” पर डांस किया था, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ। इसके अगले दिन संभल में एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने भी अनोखे अंदाज में पुलिस लाइन में एंट्री की थी। उन्होंने शिकारी स्टाइल की टोपी पहनकर खुली जिप्सी से फिल्मी गाने पर पुलिसकर्मियों के बीच प्रवेश किया था। उनके इस अंदाज को भी लोगों ने खूब पसंद किया।

राजस्थान के किसान परिवार से आते हैं केके बिश्नोई

आईपीएस कृष्ण कुमार बिश्नोई उत्तर प्रदेश कैडर के 2018 बैच के अधिकारी हैं। उनका जन्म राजस्थान के बाड़मेर जिले के धोरीमना गांव में एक किसान परिवार में हुआ। छह भाई-बहनों में सबसे छोटे बिश्नोई ने बचपन से ही पढ़ाई में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। 12वीं के बाद वे दिल्ली चले गए और सेंट स्टीफेन्स कालेज से 2013 में बीए की डिग्री प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने विदेश में पढ़ाई का सपना देखा और फ्रांस सरकार की स्कॉलरशिप हासिल की। उन्हें करीब 40 लाख रुपये की स्कॉलरशिप मिली और उन्होंने पेरिस स्कूल ऑफ इंटरनेशनल अफेयर्स से अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा विषय में मास्टर डिग्री प्राप्त की।

विदेश में भी किया महत्वपूर्ण काम

विदेश में पढ़ाई के दौरान बिश्नोई ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अनुभव हासिल किया। उन्हें यूनाइटेड नेशन के ट्रेड सेंटर में कंसल्टेंट के रूप में काम करने का अवसर मिला, जहां उन्हें लगभग 30 लाख रुपये सालाना का पैकेज मिला। इसके बाद उन्होंने उच्च शिक्षा और शोध कार्य जारी रखा और बाद में सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू की। पहले प्रयास में सफलता नहीं मिली, लेकिन दूसरे प्रयास में उन्होंने यूपीएससी परीक्षा पास कर 2018 बैच के आईपीएस अधिकारी बन गए।

पुलिस सेवा में तेजतर्रार छवि

आईपीएस बनने के बाद 2019 में उनकी पहली पोस्टिंग मेरठ के परतापुर थाने में थाना प्रभारी के रूप में हुई। इसके बाद वे मुजफ्फरनगर में एएसपी और बाद में संभल में एसपी के पद पर तैनात हुए। संभल में रहते हुए उन्होंने 100 करोड़ रुपये से अधिक के बीमा धोखाधड़ी घोटाले का खुलासा किया, जिसमें 70 से अधिक आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इसके लिए उन्हें उत्कृष्ट सेवा पुलिस पदक और प्लैटिनम मेडल से सम्मानित किया गया।

अंशिका वर्मा की प्रेरणादायक कहानी

आईपीएस अंशिका वर्मा उत्तर प्रदेश के प्रयागराज की रहने वाली हैं। उनकी प्रारंभिक शिक्षा नोएडा में हुई। उन्होंने जेएसएस अकेडमी ऑफ टेक्निकल एडुकेशन नोएडा से इलेक्ट्रॉनिक्स और कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में बीटेक की डिग्री हासिल की। उन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के दूसरे प्रयास में शानदार सफलता हासिल की और 136 वीं रैंक प्राप्त कर आईपीएस अधिकारी बनीं। उनके पिता उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड से सेवानिवृत्त कर्मचारी हैं, जबकि उनकी मां गृहिणी हैं।

पुलिस सेवा में तेजतर्रार पहचान

अंशिका वर्मा की पहली पोस्टिंग आगरा जिले के फतेहपुर सीकरी थाने में ट्रेनी अधिकारी के रूप में हुई। इसके बाद उन्हें गोरखपुर में एएसपी के रूप में तैनाती मिली। वर्तमान में वे बरेली जिले में एसपी के पद पर कार्यरत हैं और अपनी कार्यशैली, अनुशासन और सक्रिय पुलिसिंग के लिए जानी जाती हैं।

सोशल मीडिया पर भी लोकप्रिय

आईपीएस अंशिका वर्मा सोशल मीडिया पर भी काफी लोकप्रिय हैं। इंस्टाग्राम पर उनके छह लाख से अधिक फॉलोअर्स हैं। उनके काम और व्यक्तित्व के कारण युवा वर्ग उन्हें काफी पसंद करता है।

नई शुरुआत की ओर कदम

अब दोनों आईपीएस अधिकारी अपने पेशेवर जीवन के साथ-साथ निजी जीवन में भी एक नई शुरुआत करने जा रहे हैं। पुलिस विभाग, प्रशासनिक सेवा और उनके परिचितों के बीच इस शादी को लेकर उत्साह का माहौल है। 28 मार्च को होने वाली यह शादी न केवल दो परिवारों के लिए बल्कि पुलिस विभाग के लिए भी एक खास अवसर बनने जा रही है। सभी लोग इस जोड़ी के सुखद और सफल वैवाहिक जीवन की कामना कर रहे हैं।

देश में राज्यपालों और उपराज्यपालों का बड़ा फेरबदल, कई राज्यों में नई नियुक्तियां

केंद्र सरकार ने देश के कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में राज्यपालों और लेफ्टिनेंट गवर्नरों (उपराज्यपालों) की नियुक्ति एवं स्थानांतरण को लेकर बड़ा फैसला लिया है। इस व्यापक प्रशासनिक फेरबदल के तहत कई वरिष्ठ नेताओं और पूर्व अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।

दिल्ली से लद्दाख भेजे गए विनय कुमार सक्सेना

विनय कुमार सक्सेना को दिल्ली के लेफ्टिनेंट गवर्नर पद से हटाकर लद्दाख का नया लेफ्टिनेंट गवर्नर नियुक्त किया गया है। इस बदलाव को रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

तरनजीत सिंह संधू बने दिल्ली के नए एलजी

पूर्व राजनयिक तरनजीत सिंह संधू को दिल्ली का नया लेफ्टिनेंट गवर्नर नियुक्त किया गया है। उनके प्रशासनिक और कूटनीतिक अनुभव को राजधानी के लिए अहम माना जा रहा है।

शिव प्रताप शुक्ला को तेलंगाना की जिम्मेदारी

शिव प्रताप शुक्ला को हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल पद से स्थानांतरित कर तेलंगाना का राज्यपाल बनाया गया है।

जिष्णु देव वर्मा अब महाराष्ट्र के राज्यपाल

जिष्णु देव वर्मा, जो पहले तेलंगाना के राज्यपाल थे, अब महाराष्ट्र के राज्यपाल के रूप में कार्यभार संभालेंगे।

नंद किशोर यादव को नागालैंड की कमान

वरिष्ठ नेता नंद किशोर यादव को नागालैंड का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है।

लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन बने बिहार के राज्यपाल

सेना के वरिष्ठ अधिकारी रह चुके सैयद अता हसनैन को बिहार का राज्यपाल बनाया गया है। उनके सैन्य अनुभव को प्रशासनिक मजबूती के रूप में देखा जा रहा है।

आर.एन. रवि अब पश्चिम बंगाल के राज्यपाल

आर.एन. रवि को तमिलनाडु से स्थानांतरित कर पश्चिम बंगाल का राज्यपाल नियुक्त किया गया है।

राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर संभालेंगे तमिलनाडु का कार्यभार

राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर, जो वर्तमान में केरल के राज्यपाल हैं, अब तमिलनाडु के राज्यपाल का अतिरिक्त कार्यभार संभालेंगे।

कविंदर गुप्ता को हिमाचल प्रदेश भेजा गया

कविंदर गुप्ता, जो लद्दाख के लेफ्टिनेंट गवर्नर थे, अब हिमाचल प्रदेश के नए राज्यपाल नियुक्त किए गए हैं।

राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से अहम फैसला

केंद्र सरकार द्वारा किया गया यह फेरबदल प्रशासनिक संतुलन और राजनीतिक रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आने वाले समय में इन नियुक्तियों का संबंधित राज्यों की प्रशासनिक कार्यशैली और नीतिगत फैसलों पर प्रभाव देखने को मिल सकता है।

देश में राज्यपालों और उपराज्यपालों का बड़ा फेरबदल, कई राज्यों में नई नियुक्तियां

केंद्र सरकार ने देश के कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में राज्यपालों और लेफ्टिनेंट गवर्नरों (उपराज्यपालों) की नियुक्ति एवं स्थानांतरण को लेकर बड़ा फैसला लिया है। इस व्यापक प्रशासनिक फेरबदल के तहत कई वरिष्ठ नेताओं और पूर्व अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।

दिल्ली से लद्दाख भेजे गए विनय कुमार सक्सेना

विनय कुमार सक्सेना को दिल्ली के लेफ्टिनेंट गवर्नर पद से हटाकर लद्दाख का नया लेफ्टिनेंट गवर्नर नियुक्त किया गया है। इस बदलाव को रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

तरनजीत सिंह संधू बने दिल्ली के नए एलजी

पूर्व राजनयिक तरनजीत सिंह संधू को दिल्ली का नया लेफ्टिनेंट गवर्नर नियुक्त किया गया है। उनके प्रशासनिक और कूटनीतिक अनुभव को राजधानी के लिए अहम माना जा रहा है।

शिव प्रताप शुक्ला को तेलंगाना की जिम्मेदारी

शिव प्रताप शुक्ला को हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल पद से स्थानांतरित कर तेलंगाना का राज्यपाल बनाया गया है।

जिष्णु देव वर्मा अब महाराष्ट्र के राज्यपाल

जिष्णु देव वर्मा, जो पहले तेलंगाना के राज्यपाल थे, अब महाराष्ट्र के राज्यपाल के रूप में कार्यभार संभालेंगे।

नंद किशोर यादव को नागालैंड की कमान

वरिष्ठ नेता नंद किशोर यादव को नागालैंड का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है।

लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन बने बिहार के राज्यपाल

सेना के वरिष्ठ अधिकारी रह चुके सैयद अता हसनैन को बिहार का राज्यपाल बनाया गया है। उनके सैन्य अनुभव को प्रशासनिक मजबूती के रूप में देखा जा रहा है।

आर.एन. रवि अब पश्चिम बंगाल के राज्यपाल

आर.एन. रवि को तमिलनाडु से स्थानांतरित कर पश्चिम बंगाल का राज्यपाल नियुक्त किया गया है।

राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर संभालेंगे तमिलनाडु का कार्यभार

राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर, जो वर्तमान में केरल के राज्यपाल हैं, अब तमिलनाडु के राज्यपाल का अतिरिक्त कार्यभार संभालेंगे।

कविंदर गुप्ता को हिमाचल प्रदेश भेजा गया

कविंदर गुप्ता, जो लद्दाख के लेफ्टिनेंट गवर्नर थे, अब हिमाचल प्रदेश के नए राज्यपाल नियुक्त किए गए हैं।

राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से अहम फैसला

केंद्र सरकार द्वारा किया गया यह फेरबदल प्रशासनिक संतुलन और राजनीतिक रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आने वाले समय में इन नियुक्तियों का संबंधित राज्यों की प्रशासनिक कार्यशैली और नीतिगत फैसलों पर प्रभाव देखने को मिल सकता है।

सिद्धार्थनगर में होली के अवसर पर 5 मार्च को स्थानीय अवकाश घोषित

सिद्धार्थनगर। होली पर्व को लेकर लंबे समय से चल रही मांग आखिरकार पूरी हो गई। प्राथमिक शिक्षक संघ के अनुरोध पर जिला प्रशासन ने 5 मार्च को होली के अवसर पर स्थानीय अवकाश घोषित कर दिया है। चूंकि 4 मार्च को होली है तो इस दिन शासन द्वारा आधिकारिक अवकाश घोषित है। लेकिन 5 मार्च को भी अवकाश घोषित किया गया है। जिलाधिकारी द्वारा की गई इस घोषणा के बाद खासकर सुदूर क्षेत्रों में तैनात शिक्षकों में खुशी की लहर दौड़ गई है।

शिक्षक संघ की मांग पर लिया गया निर्णय

प्राथमिक शिक्षक संघ ने होली पर्व को देखते हुए 5 मार्च को अवकाश घोषित करने की मांग प्रशासन से की थी। संघ का कहना था कि दूरदराज़ जिलों, ब्लॉकों और ग्रामीण क्षेत्रों में तैनात शिक्षक अपने परिवार के साथ त्योहार नहीं मना पाते हैं।

संघ की इस मांग को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने 5 मार्च को 1 से 8 तक के स्कूलों में अवकाश घोषित करने का निर्णय लिया।

जिलाधिकारी की आधिकारिक घोषणा

जिलाधिकारी द्वारा जारी आदेश के अनुसार जनपद के समस्त परिषदीय विद्यालयों में 5 मार्च को होली पर्व के उपलक्ष्य में अवकाश रहेगा। आदेश जारी होते ही शिक्षकों और कर्मचारियों में खुशी का माहौल देखने को मिला।

सुदूर क्षेत्रों के शिक्षकों में खास उत्साह

खासकर ग्रामीण और सुदूर इलाकों में कार्यरत शिक्षकों ने इस फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि इससे उन्हें परिवार के साथ होली मनाने का अवसर मिलेगा।

शिक्षक संघ के पदाधिकारियों ने जिला प्रशासन का आभार व्यक्त किया है।

त्योहारों पर संवेदनशील प्रशासन

इस निर्णय को प्रशासन की संवेदनशीलता और शिक्षकों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण के रूप में देखा जा रहा है। होली जैसे बड़े पर्व पर अवकाश मिलने से शिक्षकों और उनके परिवारों में उत्साह बढ़ा है।

Siddharthnagar district: साइबर फ्रॉड के 40 हजार रुपये पुलिस ने कराए वापस, जोगिया उदयपुर पुलिस की बड़ी सफलता

सिद्धार्थनगर। डॉ अभिषेक महाजन पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थनगर के आदेश के क्रम में साइबर अपराध एवं साइबर क्राइम रिकवरी/लीन के विरुद्ध चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत थाना जोगिया उदयपुर पुलिस को बड़ी सफलता मिली है।

अपर पुलिस अधीक्षक प्रशांत कुमार प्रसाद के कुशल निर्देशन एवं क्षेत्राधिकारी बांसी शुभेंदु सिंहके पर्यवेक्षण में यह कार्रवाई की गई।

एनसीआरपी पोर्टल पर दर्ज शिकायत के बाद हुई कार्रवाई

दिनांक 04.02.2026 को थाना जोगिया उदयपुर क्षेत्र के लखनापार निवासी मनोज कुमार द्वारा एनसीआरपी पोर्टल के माध्यम से शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत में बताया गया कि यूपीआई आईडी गलत अंकित हो जाने के कारण उनके खाते से 40,000 रुपये की गलत ट्रांजेक्शन हो गई थी।

मामले को गंभीरता से लेते हुए थाना जोगिया उदयपुर पुलिस ने तत्काल जांच शुरू की।

साइबर सेल की सक्रियता से पूरी धनराशि हुई रिकवर

थानाध्यक्ष अभय सिंह के नेतृत्व में उ0नि0 अवधेश यादव (प्रभारी साइबर सेल) एवं साइबर सेल टीम द्वारा तकनीकी जांच की गई। तत्पर प्रयासों के परिणामस्वरूप फ्रॉड की गई पूरी धनराशि 40,000 रुपये आवेदक के खाते में सफलतापूर्वक वापस करा दी गई।

इस कार्रवाई से पीड़ित को बड़ी राहत मिली है तथा आमजन में पुलिस के प्रति विश्वास और मजबूत हुआ है।

सराहनीय कार्य करने वाली टीम

श्री अभय सिंह – थानाध्यक्ष, थाना जोगिया उदयपुर

उ0नि0 अवधेश यादव – प्रभारी साइबर सेल

कम्प्यूटर ऑपरेटर ग्रेड-ए सेनजीत निषाद

का0 विकास कुमार गोंड

का0 मृत्युंजय गुप्ता

का0 अजीत यादव

साइबर फ्रॉड से बचाव के लिए पुलिस की अपील

पुलिस प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि किसी भी प्रकार के साइबर फ्रॉड की स्थिति में तुरंत एनसीआरपी पोर्टल या नजदीकी थाना पर शिकायत दर्ज कराएं, ताकि समय रहते कार्रवाई कर धनराशि को रिकवर कराया जा सके।

सिद्धार्थनगर के बांसी तहसील के सामने काका बेकर्स में चोरी, 17 हजार नगद और CCTV DVR ले उड़े चोर

बांसी, सिद्धार्थनगर। बांसी तहसील के ठीक सामने और बांसी कोतवाली से चंद कदमों की दूरी पर स्थित काका बेकर्स में बीती रात अज्ञात चोरों ने बड़ी वारदात को अंजाम दे दिया। संवेदनशील इलाके में स्थित दुकान का पीछे का शटर तोड़कर चोर अंदर घुसे और नगदी समेत सीसीटीवी का डीवीआर लेकर फरार हो गए।

पीछे का शटर तोड़कर दुकान में घुसे चोर

दुकान मालिक के अनुसार, “चोरों ने दुकान के पिछले हिस्से का शटर तोड़ा और देर रात अंदर प्रवेश किया। दुकान के भीतर रखे लगभग 17 हजार रुपये नगद और सीसीटीवी कैमरों का डीवीआर अपने साथ ले गए, ताकि उनकी पहचान न हो सके।”

सुबह जब दुकान मालिक मौके पर पहुंचे तो शटर टूटा देख उनके होश उड़ गए। घटना की सूचना तत्काल पुलिस को दी गई।

दुकान मालिक ने जताई नाराजगी

दुकान मालिक राहुल सिंह ने घटना पर नाराजगी जताते हुए कहाकि—

यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है कि हमारी दुकान इतने संवेदनशील स्थान पर है। सामने तहसील है और थोड़ी दूरी पर कोतवाली, इसके बावजूद चोरी हो गई। चोर 17 हजार रुपये कैश और सीसीटीवी का डीवीआर उठा ले गए। हमने कोतवाली में तहरीर दे दी है। कोतवाल साहब मौके पर आए थे और घटनास्थल का मुआयना किया है।”

 सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

तहसील और कोतवाली के बेहद करीब स्थित दुकान में हुई इस चोरी की घटना ने स्थानीय सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आम लोगों में भी इस घटना को लेकर चिंता का माहौल है।

पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण कर जांच शुरू कर दी है। आसपास लगे अन्य सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है। अब देखना होगा कि पुलिस कब तक आरोपियों को पकड़ने में सफल होती है।

क्षेत्र में दहशत का माहौल

इस घटना के बाद क्षेत्र के व्यापारियों में भी डर का माहौल है। व्यापारियों का कहना है कि यदि तहसील और कोतवाली के सामने स्थित दुकान सुरक्षित नहीं है तो बाकी दुकानों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी।

नेपाल तराई में बदलती सियासी हवा: क्या परंपरागत दलों का गढ़ ढह रहा है?

नेपाल के तराई क्षेत्र में इस बार चुनावी माहौल कुछ अलग नजर आ रहा है। रवि लामिछाने की पार्टी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) और पार्टी के प्रधानमंत्री पद के दावेदार बालेन शाह के रोड शो में उमड़ी भीड़ ने परंपरागत राजनीतिक दलों की चिंता बढ़ा दी है।

भारत सीमा से सटे कपिलवस्तु जिला और रूपन्देही जिला में हुए इन रोड शो में भारी जनसमर्थन देखने को मिला। दोनों नेताओं के कार्यक्रम अलग-अलग समय पर हुए, लेकिन भीड़ का उत्साह लगभग समान रहा। इससे संकेत मिल रहे हैं कि तराई क्षेत्र की राजनीति किसी नए मोड़ की ओर बढ़ रही है।

तराई: परंपरागत दलों का गढ़, अब नई चुनौती

नेपाल के तराई क्षेत्र में लगभग 23 जिले आते हैं और यहां की आबादी करीब 90 लाख मानी जाती है। यह इलाका लंबे समय से नेपाली कांग्रेस, नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एमाले) और विभिन्न मधेशी दलों का मजबूत आधार रहा है।

हिंदू बहुल इस क्षेत्र में सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से भारत से गहरा जुड़ाव महसूस किया जाता है। ऐसे में मतदाताओं का परंपरागत दलों से हटकर नई पार्टी की ओर झुकाव राजनीतिक विश्लेषकों को चौंका रहा है।

लोकप्रियता और विवाद: रवि लामिछाने फैक्टर

पूर्व गृहमंत्री रह चुके रवि लामिछाने अपनी टीवी एंकरिंग और जनसरोकारों से जुड़े कार्यक्रमों के कारण व्यापक लोकप्रियता रखते हैं। हालांकि वे अमेरिकी नागरिकता विवाद और धोखाधड़ी के एक मामले में जेल जाने को लेकर सुर्खियों में भी रहे।

अपने संबोधनों में वे धर्म आधारित राजनीति से दूरी बनाने की अपील करते नजर आते हैं। इससे शहरी और युवा मतदाताओं के बीच उनकी छवि एक वैकल्पिक नेतृत्व के रूप में उभर रही है।

बालेन शाह की शैली और प्रतीकात्मक संदेश

काठमांडू के पूर्व मेयर बालेन शाह अपने रोड शो के दौरान स्थानीय मंदिरों में दर्शन करते दिखाई दिए। रूपन्देही और कपिलवस्तु में उन्होंने प्रसिद्ध मरचाई माता मंदिर से अपना कार्यक्रम शुरू किया।

उनका आत्मविश्वास और समर्थकों का उत्साह ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो चुनावी परिणाम उनके पक्ष में तय हों। हालांकि राजनीतिक जानकारों का मानना है कि रैलियों की भीड़ हमेशा चुनावी जीत की गारंटी नहीं होती।

क्या बदलेगा चुनावी गणित?

राजनीतिक समीक्षकों का कहना है कि इस बार तराई में समीकरण बदल सकते हैं। राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी को कम आंकना वास्तविकता से आंखें मूंदने जैसा होगा।

हालांकि अंतिम फैसला मतपेटियों में बंद है। अक्सर मतदान के दिन मतदाताओं का रुझान बदल जाता है और नतीजे चौंकाने वाले आते हैं। फिर भी इस बार तराई में दिख रही हलचल पारंपरिक दलों के लिए चेतावनी संकेत जरूर है।

नेपाल के तराई क्षेत्र में उभरता जनसमर्थन यह संकेत दे रहा है कि मतदाता विकल्प तलाश रहे हैं। क्या यह बदलाव सत्ता परिवर्तन का कारण बनेगा या पारंपरिक दल वापसी करेंगे—यह आने वाला चुनाव तय करेगा। फिलहाल इतना तय है कि तराई की राजनीति नए दौर में प्रवेश करती दिख रही है।

रामपुर अधिवक्ता हत्याकांड में सिविल बार एसोसिएशन की आपात बैठक, प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने की मांग

सिद्धार्थनगर, उत्तर प्रदेश। सिविल बार एसोसिएशन सिद्धार्थनगर की एक अति आवश्यक बैठक आयोजित की गई, जिसमें अधिवक्ताओं ने एकमत होकर रामपुर कांड में अधिवक्ता फारूक अहमद की नृशंस हत्या की कड़े शब्दों में निंदा की। बैठक में घटना को न्याय व्यवस्था पर सीधा हमला बताते हुए दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की गई।

अधिवक्ता सुरक्षा को लेकर प्रमुख मांगें

बैठक के उपरांत महामहिम राज्यपाल महोदय को संबोधित ज्ञापन, जिलाधिकारी सिद्धार्थनगर के माध्यम से सौंपा गया। ज्ञापन में निम्नलिखित प्रमुख मांगें की गईं:

*अधिवक्ता प्रोटेक्शन एक्ट को उत्तर प्रदेश में तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए।

* मृतक अधिवक्ता के मुकदमे की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट द्वारा दिन-प्रतिदिन कर त्वरित निस्तारण किया जाए तथा अपराधियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए।

* मृतक अधिवक्ता के परिवार को उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा एक करोड़ रुपये का मुआवजा तत्काल प्रदान किया जाए।

बैठक की अध्यक्षता और प्रमुख उपस्थिति

बैठक की अध्यक्षता अखंड प्रताप सिंह (अध्यक्ष) ने की।

इस अवसर पर इंदु कुमार सिंह (पूर्व अध्यक्ष), वीरेंद्र श्रीवास्तव (पूर्व अध्यक्ष), विमल मिश्रा (पूर्व अध्यक्ष), मनोज कुमार मिश्रा (सदस्य कार्यकारिणी), विकास मिश्रा, सतीश कुमार चौरसिया, सच्चिदानंद झा, श्री कृष्णा मिश्रा, ब्रह्मदेव मिश्रा, असगर अली, बृजेश कुमार पांडे, प्रमोद सिंह, दिव्य प्रकाश शुक्ला (प्रशासनिक मंत्री), विजेंद्र पांडे (पूर्व महामंत्री), अजय कुमार पांडे, प्रदीप सिंह, नागेंद्र नाथ पांडे (पूर्व कोषाध्यक्ष), राजेश मिश्रा (सदस्य कार्यकारिणी), दिनेश तिवारी (पूर्व कोषाध्यक्ष), देवेंद्र मणि त्रिपाठी, मिथिलेश मिश्रा, सुधाकर मिश्रा, अच्युतानंद मिश्र, नारद मुनि पांडे, मनोज मिश्रा, बृजेश पाठक, विवेक पांडे, अखिलेश कुमार, रवि कुमार पांडे, मराकर पांडे, राम शंकर पांडे, अश्वनी श्रीवास्तव, उमाशंकर पांडे, अशोक त्रिपाठी, ओम शंकर पांडे सहित अनेक अधिवक्ता गण उपस्थित रहे।

जोरदार नारेबाजी और ज्ञापन सौंपा

बैठक के बाद अधिवक्ताओं ने जोरदार नारेबाजी करते हुए कहा—

“अधिवक्ता के हत्यारे को फांसी दो, फांसी दो!”

“अधिवक्ता प्रोटेक्शन एक्ट लागू करो, लागू करो!”

इसके पश्चात सभी अधिवक्ता जिलाधिकारी सिद्धार्थनगर को ज्ञापन सौंपने पहुंचे।

जिलाधिकारी का आश्वासन

जिलाधिकारी सिद्धार्थनगर ने ज्ञापन को महामहिम राज्यपाल तक पहुंचाने का आश्वासन दिया। साथ ही उन्होंने अधिवक्ता समुदाय को आश्वस्त किया कि वे जिलाधिकारी रामपुर से वार्ता कर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित कराएंगे।

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