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शिक्षामित्रों को STET में मौका देने की मांग, मणेन्द्र मिश्रा बोले—26 साल की सेवा के बाद उपेक्षा उचित नहीं

समाजवादी शिक्षक सभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मणेन्द्र मिश्रा ने शिक्षामित्रों को विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा (STET) में शामिल किए जाने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि लंबे समय से परिषदीय विद्यालयों में शिक्षण कार्य कर रहे शिक्षामित्रों को परीक्षा के दायरे से बाहर रखना उचित नहीं है।


लखनऊ/उत्तर प्रदेश। शिक्षामित्रों को विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा (STET) में शामिल किए जाने की मांग को लेकर समाजवादी शिक्षक सभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मणेन्द्र मिश्रा ने शासन से हस्तक्षेप की मांग की है। 8 सितंबर 2026 को जारी प्रेस विज्ञप्ति में उन्होंने कहा कि परिषदीय विद्यालयों में वर्षों से शिक्षण कार्य कर रहे शिक्षामित्रों को भी पात्रता परीक्षा में अवसर मिलना चाहिए।
मुख्य खबर
मणेन्द्र मिश्रा के मुताबिक, 2 सितंबर को जारी शासनादेश में विशेष पात्रता परीक्षा के लिए विभिन्न श्रेणियों के शिक्षकों और संविदा/डेली वेजेज पर कार्यरत स्पेशल एजुकेटर्स का उल्लेख किया गया है, लेकिन शिक्षामित्रों को इसमें शामिल नहीं किया गया है।
उन्होंने दावा किया कि शिक्षामित्र पिछले करीब 26 वर्षों से परिषदीय विद्यालयों में शिक्षण कार्य कर रहे हैं। उनके अनुसार, शिक्षामित्रों को बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से NCTE के निर्देशन में दूरस्थ शिक्षा माध्यम से दो वर्षीय सेवारत BTC प्रशिक्षण भी कराया जा चुका है।
मिश्रा ने इसी आधार पर मांग की कि विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा में शिक्षामित्रों को भी अवसर दिया जाए। उनका कहना है कि इससे उनके अनुभव और शैक्षणिक क्षमता का उपयोग बच्चों की शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने में किया जा सकता है।
शासनादेश में संशोधन की मांग
मणेन्द्र मिश्रा ने शासन से अविलंब शासनादेश में संशोधन करने की मांग की है। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, उनकी मांग है कि जिस प्रकार विभिन्न श्रेणियों के शिक्षकों और संविदा/डेली वेजेज पर कार्यरत स्पेशल एजुकेटर्स को पात्रता परीक्षा में शामिल किए जाने की बात कही गई है, उसी तरह शिक्षामित्रों को भी परीक्षा में सम्मिलित होने का अवसर दिया जाए।
इनसेट | 26 साल की सेवा का हवाला
मिश्रा ने शिक्षामित्रों की लंबे समय से चली आ रही सेवाओं का हवाला देते हुए कहा कि इतने लंबे समय तक विद्यालयों में काम करने वाले शिक्षामित्रों के मामले पर शासन को गंभीरता से विचार करना चाहिए।


क्या है मांग?
मणेन्द्र मिश्रा की प्रमुख मांगें—
शिक्षामित्रों को STET में शामिल किया जाए।
2 सितंबर के शासनादेश की समीक्षा/संशोधन किया जाए।
शिक्षामित्रों के पूर्व प्रशिक्षण और अनुभव को ध्यान में रखा जाए।
पात्रता परीक्षा में उन्हें अवसर देने पर शासन स्तर पर निर्णय लिया जाए।
राजनीतिक बयान भी आया सामने
प्रेस विज्ञप्ति में मणेन्द्र मिश्रा ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के पूर्व में दिए गए सार्वजनिक बयानों का भी उल्लेख किया। मिश्रा के अनुसार, अखिलेश यादव ने विभिन्न अवसरों पर कहा है कि वर्ष 2027 में समाजवादी पार्टी की सरकार बनने पर शिक्षामित्रों की समस्याओं के स्थायी समाधान की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।
यह बयान मणेन्द्र मिश्रा द्वारा प्रेस विज्ञप्ति में किए गए उल्लेख के रूप में सामने आया है। इस संबंध में अंतिम निर्णय अथवा सरकारी नीति भविष्य में संबंधित शासन/सरकार के निर्णय पर निर्भर होगी।


अब नजर इस बात पर रहेगी कि शिक्षामित्रों को STET में शामिल किए जाने की मांग पर शासन की ओर से क्या रुख सामने आता है। फिलहाल मणेन्द्र मिश्रा ने शासन से नियमों में संशोधन कर शिक्षामित्रों को पात्रता परीक्षा में अवसर देने की मांग दोहराई है।

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