“सिंचाई की नहर में गंदगी का अंबार! योजना और जिम्मेदारी पर भी सवाल”
सिद्धार्थनगर में सिंचाई की नहर पर बड़ा सवाल
नहर में सिंचाई का पानी नहीं, आबादी का गंदा पानी और कचरा जरूर! ग्रामीणों ने सफाई, जलनिकासी और पैमाइश की उठाई मांग

सिद्धार्थनगर। नौगढ़ क्षेत्र के बर्डपुर नं. 14, अमारी समेत आसपास के गांवों में एक नहर की मौजूदा स्थिति को लेकर ग्रामीणों में परेशानी की बात सामने आई है। ग्रामीणों का कहना है कि यह नहर सिंचाई के उद्देश्य से बनाई गई थी, लेकिन लंबे समय से इसमें सिंचाई का पानी नहीं आता। दूसरी ओर आबादी के आसपास नहर में गंदा पानी, कूड़ा-कचरा और झाड़ियां जमा होने की शिकायत है।
FT NEWS DIGITAL को उपलब्ध कराई गई तस्वीरों में कई स्थानों पर नहरनुमा मार्ग में ठहरा हुआ गंदा पानी, प्लास्टिक एवं अन्य कचरा तथा आसपास उगी झाड़ियां दिखाई दे रही हैं। कुछ स्थानों पर यह स्थिति मकानों और आबादी के बिल्कुल नजदीक नजर आती है।
ग्रामीणों की परेशानी: सिंचाई की नहर बनी जलभराव का कारण?
ग्रामीणों के अनुसार, जिस नहर का इस्तेमाल सिंचाई के लिए होना चाहिए, उसमें पानी नहीं आने से उसका उपयोग अपेक्षित रूप में नहीं हो पा रहा है। वहीं आबादी से निकलने वाला पानी कई स्थानों पर नहर में जमा होने की बात ग्रामीणों ने कही है।
ग्रामीणों का कहना है कि पानी जमा रहने और कचरा पड़े रहने से दुर्गंध तथा मच्छरों की समस्या बनी रहती है और लोगों को परेशानी होती है।
महत्वपूर्ण: उपलब्ध तस्वीरों से किसी संक्रामक बीमारी के फैलने की पुष्टि नहीं होती। बीमारी अथवा स्वास्थ्य जोखिम संबंधी वास्तविक स्थिति की पुष्टि संबंधित स्वास्थ्य विभाग की जांच से ही हो सकती है।
सबसे बड़ा सवाल—आखिर यह नहर किस योजना की है?
इस मामले में विभागीय स्तर पर जानकारी लेने पर भी फिलहाल नहर की योजना और श्रेणी की अंतिम पुष्टि नहीं हो पाई है।
संबंधित सिंचाई विभाग की ओर से बताया गया कि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि उक्त नहर किस योजना के अंतर्गत आती है, जमींदारी नहर है अथवा किसी अन्य योजना/श्रेणी से संबंधित है।
यही वजह है कि अब ग्रामीणों की मांग है कि विभागीय अभिलेखों के आधार पर इस नहर की वास्तविक पहचान और जिम्मेदार इकाई स्पष्ट की जाए।
यानी सवाल सिर्फ सफाई का नहीं—पहले नहर की पहचान और जिम्मेदारी भी स्पष्ट होनी चाहिए।
ग्रामीणों की शिकायतों की मुख्य सूची
नहर में लंबे समय से सिंचाई का पानी नहीं आने की बात।
आबादी का गंदा पानी नहर में जमा होने की शिकायत।
नहर के आसपास कूड़ा-कचरा और झाड़ियों की स्थिति।
नियमित सफाई नहीं होने की ग्रामीणों की शिकायत।
मच्छरों एवं दुर्गंध से परेशानी की बात।
नहर की भूमि पर अतिक्रमण और पक्के निर्माण की शिकायत।
नहर की पैमाइश एवं सीमांकन कराने की मांग।
संबंधित विभाग/खंड की स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक करने की मांग।
जलनिकासी की स्थायी व्यवस्था कराने की मांग।
अतिक्रमण की शिकायत भी जांच के घेरे में
ग्रामीणों का आरोप है कि नहर की जमीन के कुछ हिस्सों पर लोगों ने कब्जा कर रखा है और कहीं-कहीं पक्के निर्माण भी किए गए हैं।
हालांकि किसी व्यक्ति को अतिक्रमणकारी कहना तभी उचित होगा, जब राजस्व अभिलेख, विभागीय नक्शे और मौके की पैमाइश से इसकी पुष्टि हो।
इसलिए प्रशासन से मांग है कि नहर की जमीन का अभिलेखीय सत्यापन और मौके पर सीमांकन कराया जाए। यदि जांच में सरकारी/नहर भूमि पर अतिक्रमण पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
प्रशासन और सिंचाई विभाग से 7 सीधे सवाल
1. यह नहर किस योजना के अंतर्गत निर्मित हुई थी?
2. क्या यह वर्तमान में सिंचाई विभाग के अभिलेखों में दर्ज है?
3. यह नहर जमींदारी नहर है या किसी अन्य योजना की संरचना?
4. इसका संबंधित खंड और रखरखाव की जिम्मेदारी किसकी है?
5. यदि यह सिंचाई की नहर है तो इसमें वर्तमान में पानी क्यों नहीं पहुंच रहा?
6. नहर की भूमि की पैमाइश और सीमांकन कब हुआ था?
7. यदि आबादी का पानी इसमें जमा हो रहा है तो उसके लिए स्थायी जलनिकासी व्यवस्था क्या है?
जनहित में क्या होना चाहिए?
ग्रामीणों की समस्या को देखते हुए संबंधित विभाग द्वारा मौके का स्थलीय निरीक्षण कराया जाना चाहिए।
इसके साथ—
नहर की वास्तविक पहचान → विभागीय रिकॉर्ड की जांच → मौके की पैमाइश → सफाई → जलनिकासी की व्यवस्था → अतिक्रमण की जांच
इन सभी बिंदुओं पर क्रमवार कार्रवाई की जरूरत है।
यदि नहर सिंचाई के लिए बनी है तो उसकी सिंचाई क्षमता और वर्तमान जलप्रवाह की स्थिति भी स्पष्ट की जानी चाहिए। यदि वर्तमान में इसका स्वरूप जलनिकासी से जुड़ा है तो जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान तलाशना जरूरी है।

संपादकीय टिप्पणी | FT NEWS DIGITAL
सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज किसी जलस्रोत या नहर की पहचान और जिम्मेदारी स्पष्ट होना ग्रामीणों का जायज सवाल है।
यह खबर किसी व्यक्ति, अधिकारी अथवा विभाग को दोषी ठहराने के लिए नहीं है। ग्रामीणों की शिकायत, मौके की तस्वीरों और विभागीय स्तर पर अभी स्पष्ट पुष्टि नहीं होने की स्थिति को सामने रखते हुए संबंधित अधिकारियों से तथ्यात्मक जांच की मांग की जा रही है।
यदि ग्रामीणों की शिकायतें जांच में सही पाई जाती हैं, तो सफाई, जलनिकासी, सिंचाई व्यवस्था तथा अतिक्रमण संबंधी मामलों में नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।

नहर किसकी है—इसका जवाब अनुमान से नहीं, सरकारी रिकॉर्ड से मिलना चाहिए।
जिम्मेदारी किसकी है—यह भी अभिलेख से स्पष्ट होना चाहिए।
“सिद्धार्थनगर के नौगढ़ क्षेत्र में नहर की तस्वीरों ने कई सवाल खड़े किए हैं। ग्रामीण सिंचाई का पानी नहीं आने, गंदे पानी के जमाव और सफाई की समस्या बता रहे हैं। वहीं नहर की योजना और श्रेणी को लेकर विभागीय स्तर पर अभी अंतिम पुष्टि नहीं हो पाई है। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग रिकॉर्ड खंगालकर इस नहर की वास्तविक पहचान और जिम्मेदारी कब स्पष्ट करता है और मौके पर सफाई एवं जलनिकासी के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं। FT NEWS DIGITAL इस मामले में विभागीय जवाब और कार्रवाई को प्रमुखता से सामने रखेगा।”
स्थान: नौगढ़ क्षेत्र, सिद्धार्थनगर
क्षेत्र: बर्डपुर नं. 14, अमारी एवं आसपास
मुद्दा: नहर में गंदा पानी, कचरा, जलजमाव और सफाई की शिकायत
ग्रामीणों की मांग: सफाई, जलनिकासी, पैमाइश और अतिक्रमण की जांच
विभागीय स्थिति: नहर किस योजना/श्रेणी में है, इसकी अभी अंतिम पुष्टि नहीं
FT NEWS DIGITAL का रुख: रिकॉर्ड आधारित जांच और जनहित में समाधान की मांग

