चेक बाउंस के 1.04 करोड़ रुपये के मामले में बड़ा फैसला, जिला जज ने आरोपी को नहीं दी राहत
संपादकीय टिप्पणी
संतकबीरनगर के चर्चित चेक बाउंस मामले में जिला न्यायालय का फैसला आर्थिक लेन-देन में पारदर्शिता और कानूनी जवाबदेही के महत्व को रेखांकित करता है। बैंकिंग व्यवस्था में चेक एक महत्वपूर्ण वित्तीय दस्तावेज है और उसके सम्मान का संबंध व्यावसायिक विश्वास से जुड़ा होता है। ऐसे मामलों में न्यायालय के निर्णय यह संदेश देते हैं कि वित्तीय लेन-देन कानून के दायरे में होने चाहिए तथा प्रत्येक पक्ष को अपने अधिकारों और दायित्वों का पालन करना चाहिए। साथ ही, न्यायिक निर्णयों का सम्मान और वैधानिक प्रक्रिया का पालन ही विधि के शासन की मूल भावना है।
स्थान : संतकबीरनगर
मामला : चर्चित चेक बाउंस प्रकरण
फैसला : जिला जज ने आरोपी की अपील खारिज की
रिपोर्ट : अर्जुन सिंह, जिला संवाददाता
इनबॉक्स
• एक वर्ष की सजा बरकरार
• 1.26 करोड़ रुपये का जुर्माना यथावत
• अपील खारिज होने के बाद आरोपी जेल भेजा गया
• फैसला चेक बाउंस मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा
संतकबीरनगर के चर्चित 1.04 करोड़ रुपये के चेक बाउंस प्रकरण में जिला एवं सत्र न्यायालय ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए आरोपी संतोष कुमार चतुर्वेदी की अपील खारिज कर दी। न्यायालय ने अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसीजेएम) न्यायालय द्वारा सुनाई गई एक वर्ष की सजा तथा 1.26 करोड़ रुपये के जुर्माने के आदेश को बरकरार रखा। आदेश के बाद विधिक प्रक्रिया पूरी करते हुए आरोपी को जेल भेज दिया गया।
मुख्य समाचार
संतकबीरनगर जनपद में वर्ष 2021 से चर्चित चेक बाउंस प्रकरण में शनिवार को जिला एवं सत्र न्यायालय ने अपना निर्णय सुनाया। अदालत ने आरोपी संतोष कुमार चतुर्वेदी द्वारा दायर अपील को निरस्त करते हुए निचली अदालत के फैसले को सही ठहराया।
अभियोजन पक्ष के अनुसार मामला विभिन्न आर्थिक लेन-देन और जारी किए गए चेकों के अनादृत (बाउंस) होने से संबंधित है। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि उन्हें भुगतान के लिए दिए गए चेक बैंक में प्रस्तुत किए जाने पर अनादृत हो गए, जिसके बाद उन्होंने न्यायालय की शरण ली।
अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद आरोपी को दोषी ठहराते हुए एक वर्ष के कारावास तथा 1.26 करोड़ रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई थी। इसी निर्णय को चुनौती देते हुए जिला एवं सत्र न्यायालय में अपील दायर की गई थी।
जिला जज ने सुनवाई के दौरान उपलब्ध अभिलेखों और पक्षकारों की दलीलों का परीक्षण करने के बाद अपील खारिज कर दी तथा निचली अदालत के आदेश को यथावत बनाए रखा। न्यायालय के आदेश के अनुसार विभिन्न मामलों में दी गई कारावास की सजा साथ-साथ चलेगी। जुर्माने की राशि का वितरण न्यायालय के आदेशानुसार किया जाएगा तथा जुर्माना अदा न करने की स्थिति में कानून के अनुसार अतिरिक्त कारावास का प्रावधान लागू होगा।
फैसले के बाद पुलिस ने आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए आरोपी को हिरासत में लेकर जेल भेज दिया। जिले में इस निर्णय को चेक बाउंस मामलों में न्यायिक प्रक्रिया के एक महत्वपूर्ण फैसले के रूप में देखा जा रहा है।
सारांश
संतकबीरनगर के चर्चित चेक बाउंस मामले में जिला एवं सत्र न्यायालय ने आरोपी की अपील खारिज करते हुए निचली अदालत की एक वर्ष की सजा और 1.26 करोड़ रुपये के जुर्माने के आदेश को बरकरार रखा। फैसले के बाद आरोपी को जेल भेज दिया गया।
यह समाचार न्यायालय के निर्णय के आधार पर तैयार किया गया है। इसमें न्यायालय के आदेश का तथ्यात्मक विवरण प्रस्तुत किया गया है। किसी भी व्यक्ति के संबंध में न्यायालय के अभिलेख और आगे उपलब्ध कानूनी उपाय प्रभावी रहेंगे।
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